जैन विश्वभारती संस्थान का 28वां स्थापना दिवस समारोह आयोजित

मुस्कुराने से ऊर्जा का रूपान्तरण होता है और आनन्द का मार्ग प्रशस्त होता है - दाती महाराज

लाडनूँ, 20 मार्च 2018। प्रख्यात शनिधाम दिल्ली के महामण्डलेश्वर परमहंस दाती महाराज ने बेटी पढाओ, जल बचाओ, राष्ट्र बचाओ का आह्वान करते हुए कहा कि बेटियों को आगे आने दें। बेटी है तो सृष्टि है। वे स्वयं 800 बेटियों के पिता हैं। नारी का सम्मान करें और अपने राष्ट्र से प्रेम करें। उन्होंने कहा कि मेरा भगवान तो यह राष्ट्र ही है। राष्ट्र की प्रगति में संतों का सदैव योगदान रहा है। उन्होंने मोबाईल को पतन का कारण बताते हुए कहा कि मोबाईल से युवाओं की दिनचर्या अस्त-व्यस्त हो गई है। मोबाईल के कारण रिश्तों की कद्र कम हो गई है। रिश्तों का सम्मान करें और उन्हें संभालें तथा राष्ट्र की प्रगति में योगदान दें। दाती महाराज ने पानी के संकट को बयान करते हुए कहा कि जल बचाने के लिये सबको सजग व सक्रिय रहना जरूरी है। उन्होंने आह्वान किया कि घर का पानी घर में, खेत का पानी खेत में और तालाब का पानी तालाब में रहना चाहिये। उन्होंने बाईक चलाने के लिये हेलमेट को अनिवार्य बताया तथा कहा कि अपने जीवन को बचाने के लिये हेलमेट अवश्य पहनें। उन्होंने कहा कि अब कोई महादेव नहीं आयेगा जो कटे सिर को वापस लगा सकता है। दाती महाराज ने जीवन में आनन्द का रहस्य बताते हुए कहा कि हमेशा मुस्कुराते रहें। जिन्दगी अनमोल है और उसके लिये मुस्कुराने से ऊर्जा का रूपान्तरण होता है। मुस्कुराहट से जीवन में सहजता आती है और सहजता परम आनन्द का मार्ग है। उन्होंने आचार्य तुलसी, महाप्रज्ञ व महाश्रमण की तपश्चर्या की प्रशंसा करते हुए कहा कि तीनों की परमपराओं में उन्हें साथ रहने का अवसर मिला है। यहां की भूमि का प्रभाव ही है कि यहां आचार को महत्त्व दिया जाता है। उन्होंने कहा कि आचार, संस्कार व साधना - तीनों की धारा के बहने पर ही स्वच्छता व शुचिता बनी रहती है।

शीघ्र खोला जायेगा मेडिकल कॉलेज

संस्थान के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने समारोह की अध्यक्षता करते हुए कहा कि संस्थान में आगामी समय में योग व नेचुरोपैथी कॉलेज खोले जाने, जैन विद्याओं के विकास के लिये कोर्स शुरू करने, मूक कोर्सेज एवं ओपन सोर्स कोर्सेज शुरू करने आदि बड़े कामों की चुनौतियां हैं, जिन्हें वे अपने संस्थान सदस्यों के साथ मिलकर संभव बनायेंगे। उन्होंने कहा कि समणीवृंद की शक्ति इसमें सहायक सिद्ध होगी। जब तक विश्वविद्यालय से समणी जैसी शक्ति जुड़ी हुई है, वे हर चुनौती का सामना करने में सक्षम हैं। उन्होंने जैन विश्व भारती के पूर्व अध्यक्ष डाॅ. धर्मचंद लूंकड़ द्वारा वर्ष 2019 में संस्थान को अपना पूरा समय देने के लिये आभार जताते हुए कहा कि इससे यह संस्थान बहुत ऊंचाइयों को छू पायेगा। प्रो. दूगड़ ने जल संरक्षण के क्षेत्र में विश्वविद्यालय द्वारा वर्षा-जल के संग्रहण किये जाने के बारे में जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे कुछ अलग हटकर सोंचें और समस्या का हर हल निकालें। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि बारिश से बचने के लिये बचने का स्थान ढूंढने के बजाये बादलों के पार जाने की शक्ति व सोच रखें। समणी नियोजिका समणी चारित्रप्रज्ञा ने केवल ज्ञान के प्रति समर्पण के बजाये आचार, ध्यान व जीवन के आनन्द के प्रति आकर्षण को आवश्यक बताया तथा कहा कि यह संस्थान ज्ञान के साथ आचार, जीवन मूल्यों व जीवन के आनन्द के प्रति रूचि पैदा करता है। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि डाॅ. धर्मचंद लूंकड़ ने मंगलकामनाएँ दीं। कुलसचिव विनोद कुमार कक्कड़ ने वार्षिक-प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। डाॅ. युवराजसिंह खांगारोत ने संस्थान की विशेषओं के बारे में एवं विशाल पुस्तकालय, स्मार्ट क्लासेज, लैंग्वेज लैब, डिजीटल स्टुडियो, भगवान महावीर अन्तर्राष्ट्रीय शोध केन्द्र, महादेव लाल सरावगी अनेकांत शोधपीठ आदि के बारे में बताया। प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने स्वागत वक्तव्य प्रस्तुत किया एवं अतिथियों का परिचय दिया। जब्बरसिंह राजपुरोहित राणावास ने दाती महाराज एवं उनके धाम द्वारा संचालित गतिविधियों के बारे में बताया। समारोह में जैन विश्वभारती के अध्यक्ष श्री रमेशचंद बोहरा व ट्रस्टी श्री भागचंद बरडिया विशिष्ट अतिथि थे।

विद्यानिधि सम्मान व अन्य सम्मान

कार्यक्रम में संस्थान की ओर से इस वर्ष का विद्यानिधि सम्मान शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. बी.एल. जैन को प्रदान किया गया। मंत्रालयिक कर्मचारी के सम्मान में श्री विजयकुमार शर्मा और श्री रमेश सोनी को सम्मानित किया गया। डी-श्रेणी कर्मचारियों के सम्मान में नगद पुरस्कार प्रदान किया गया तथा बेस्ट स्टुडेन्ट अवार्ड स्नातक वर्ग में ज्योति नागपुरिया को और स्नातकोत्तर वर्ग में निशा सोनी को दिया गया। इस मौके पर छत्राओं ने राजस्थानी घूमर पर नृत्य की प्रस्तुति देकर दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। कार्यक्रम का प्रारम्भ गणेश-वंदना से किया गया। अंत में आभार-ज्ञापन शोध-निदेशक प्रो. अनिल धर ने किया। कार्यक्रम में करफी संख्या में नगर के गणमान्यजन उपस्थित थे।

 

जैन विश्वभारती संस्थान में सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने समां बांधा

नैणां रा लोभी किंकर आवूं सा......

संस्थान के 28 वें स्थापना दिवस समारोह के द्वितीय चरण में आयेाजित सांस्कृतिक कार्यक्रम के अन्तर्गत सुधर्मा सभा में विद्यार्थियों ने देश प्रेम, सामाजिक जागरूकता, राजस्थानी-पंजाबी व गुजराती संस्कृति के विविध रंग बिखरती मनभावन प्रस्तुतियां देकर सबका मन मोहा। कार्यक्रम का शुभारम्भ सुरक्षा जैन के भक्ति गीत द्वारा किया गया। कार्यक्रम में एनसीसी की छात्राओं के विशेष नृत्य कदमों से मिलते हैं कदम, कदमों से कदम मिलते हैं- हम चलते हैं तो दुश्मनों के दिल हिलते हैं, प्रस्तुत करके दर्शकों में उत्साह का संचार किया। समाज कार्य विभाग के विद्यार्थियों ने देशभक्ति पूर्ण नाट्य प्रस्तुति देकर लोगों में राष्ट्र के प्रति जज्बा जगा दिया। प्रीति एवं समूह ने बेटी बचाओ थीम को साकार किया। सरिता एवं समूह ने पढेगा इंडिया तो बढेगा इंडिया पर एक नाटक प्रस्तुत किया। हेमलता एवं समूह ने राजस्थानी गीत म्हारी रूणक झुणक पायल बाजै सा, नैणां रा लोभी किंकर आवूं सा पर सामूहिक नृत्य प्रस्तुत करके सब को झूमने पर मजबूर कर दिया। जीवन विज्ञान एवं योग विभाग के विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुति में विभिन्न योगासनों एवं योग क्रियाओं का शानदार प्रदर्शन करके सबको अंचभित कर दिया। पूजा टाक एवं समूह ने कृष्ण के जीवन पर संगीतमय नृत्य प्रस्तुत किया। अमिता एवं समूह ने पंजाबी नृत्य, अम्बिका एवं समूह ने गरबा नृत्य, प्रियंका एवं समूह ने घूमर नृत्य, महिमा एवं समूह ने सामूहिक नृत्य, सानिया छींपा एवं समूह ने हिल उठै दिल्ली, घूम जावै आगरो... प्रस्तुत करके अपने नृत्य से सबको दाद देने पर मजबूर कर दिया। अंग्रेजी विभाग के विद्यार्थियों ने इंसान और टेक्नोलॉजी पर कार्यक्रम प्रस्तुत किया। विकास चौबे ने एक गीत और उषा एवं समूह ने नृत्य प्रस्तुत किये। कार्यक्रम में आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने एनसीसी की छात्राओं मानसी बुगालिया, जसोदा सींवर एवं रेणुका चौधरी को रेंक प्रदान की। कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय में हुये खेलकूद एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के विजेता रहे विद्यार्थियों को पुरस्कारों का वितरण कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संचालन छात्रा हेमलता शर्मा व दीप्ति दूगड़ ने किया।

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