जैन साधुवृन्द ने जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय का किया अवलोकन

अच्छे संस्कारों को जीवनभर बनाये रखना आवश्यक - मुनि विमल कुमार

लाडनूँ, 16 दिसम्बर, 2016। शासनश्री मुनिश्री विमल कुमार ने कहा है कि जैन विश्वभारती संस्थान अन्य सभी विश्वविद्यालयों से विलक्षण है। इस संस्थान की अपनी गरिमा है। संस्थान के विकास में गुरुदेव तुलसी, आचार्यश्री महाप्रज्ञ एवं आचार्यश्री महाश्रमण के साथ अब तक रहे कुलपतियों का भी महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है। इस संस्थान को आगे बढ़ाने में विद्यार्थियों की भूमिका भी सबसे महत्त्वपूर्ण होती है। आप जो संस्कार यहां से ग्रहण करते हैं, उन अच्छे संस्कारों को अपने जीवन में भी बनाये रखें। यहाँ के विद्यार्थी जहाँ भी जाएँ, उनके संस्कार बोलने चाहिए। संस्कारों को जीवनभर सुरक्षित बनाये रखना विद्यार्थियों की जिम्मेवारी है। मुनिश्री ने शुक्रवार को जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय का अवलोकन किया तथा उसके बाद एस.डी. घोड़ावत आॅडिटोरियम में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं को सराहा तथा कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ के कार्यकाल व अब तक सम्पन्न कार्यों की प्रशंसा की। इस अवसर पर कुलपति प्रो. दूगड़ ने अपने संबोधन में कहा कि ईंट और पत्थरों से हुआ विकास सब कुछ नहीं होता। यहाँ तपस्वी संतो के निरन्तर जुड़े रहने से यहाँ का परिसर गरिमामय बन गया है। मुनिश्री विमलकुमार का परिचय देते हुए बताया कि वे विभिन्न भाषाओं के जानकार व मर्मज्ञ हैं। प्राचीन भाषा व साहित्य पर उन्होंने बहुत कार्य किया है और अनेक वृहद् ग्रन्थ लिखे हैं।

ध्यान परिणामों के लिए प्रयुक्त मशीनों की सराहना

शासनश्री मुनिश्री विमलकुमार अपने सहयोगी साधुवृंद मुनि मधुर, मुनि अक्षय, मुनि धन्य, मुनि अजय प्रकाश व प्रेक्षाध्यान शिविर संचालक श्रेयांस बैगवानी के साथ जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के जैनविद्या विभाग, प्राच्यविद्या एवं भाषा विभाग, योग एवं जीवन विज्ञान विभाग, योग संबंधी प्रयोगशालाओं, अहिंसा एवं शांति विभाग, समाज कार्य विभाग, महाप्रज्ञ सभागार, प्राकृतिक चिकित्सा-कक्षों, प्रशासनिक खण्ड, दूरस्थ शिक्षा निदेशालय, कम्प्यूटर लैब, महिला सिलाई प्रशिक्षण केन्द्र, शिक्षा विभाग, आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय, केन्द्रीय शैक्षणिक भवन आदि का अवलोकन किया। उन्हें विभिन्न विभागाध्यक्षों आदि ने संबंधित विभागों की गतिविधियों व व्यवस्थाओं की जानकारी दी। मुनिश्री ने यहाँ की व्यवस्थाओं की सराहना की। वे ध्यान एवं योग के परिणामों की जाँच व विश्लेषण के लिए स्थापित की गई प्रयोगशालाओं को देखकर अभिभूत हुए। उन्होंने ब्रेन मेपिंग, लाईव डिटेक्टर, स्पाइरो मीटर, रक्त जांच, मल्टी पेरामोनिटर, एनसीवी आदि की कार्यप्रणाली को देखा व समझा तथा उन्हें उपयोगी बताया। उनके साथ अवलोकन के द्वौरान कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़, रजिस्ट्रार विनोद कुमार कक्कड़, दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी, उप कुलसचिव नेपालचंद गंग आदि मौजूद थे।

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