Silver Jubilee Year Celebration at Kolkata

मूल्य बोध व जीवन जीन की कला सिखाती है शिक्षा- साध्वीश्री त्रिशला

कोलकाता। शिक्षा का अर्थ केवल अध्ययन और ज्ञानार्जन नहीं है बल्कि शिक्षा जीवन के मूल्यों को बोध कराती है। यह जीवन जीने की कला सिखाती है, सर्वागिंण विकास करती है। रविवार को कोलकता में आयोजित जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के रजत जयंती समारोह को संबोधित करते हुए साध्वी श्री त्रिशला कुमारी ने ये उद्गार व्यक्त किये। साध्वीश्री ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल जानकारी इकट्ठा करना व आय करना नहीं होता है। वास्तविक शिक्षा व्यक्ति को चरित्रवान बनाती है, भावनात्मक विकास करती है, देश के विकास में योगदान का संदेश देती है। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता विश्वविद्यालय की कुलपति समणी चारित्रप्रज्ञा ने विश्वविद्यालय की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यहां मानव जीवन के मूल्यों को जीने की कला सिखायी जाती है। उन्होनें कहा क यह विश्वविद्यालय मूल्यों, नैतिकता, भौतिक जरूरतों और आंनदित जीवन जीने की कला सिखाने के अपने प्रयास पर काम कर रहा है। कुलपति ने बताया कि वर्तमान में शिक्षण संस्थानों में शैक्षणिक मूल्यों को हस हो रहा है ऐसे में जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय मूल्यों की प्रतिष्ठा के लिए कार्य कर रहा है।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि रामकृष्ण मिशन कोलकता के स्वामी शुद्विनानंद महाराज ने स्वामी विवेकानन्द की दी गई सीख शिक्षा मानव को परिपूर्णता की अभिव्यक्ति है कि वकालत की। उन्होनें कहा कि जैन शब्द की उत्पति जिना से हुई है जिसका अर्थ खुद पर विजय प्राप्त करना होता है जो शिक्षा का मूल होता है। स्वामी शुद्विनानंद के अनुसार ज्ञानार्जन जरूरी है लेकिन शिक्षा का मूल नहीं है। ज्ञानार्जन से बाहरी दुनिया पर विजय प्राप्त की जा सकती है लेकिन स्वयं पर विजय पाये बिना मानव के दुखों की इति नहीं हो सकती है। भारतीय संस्कृति हमे स्वयं को जानने की सीख देती है, स्वयं पर विजय का संदेश देती है।

समारोह के मुख्य अतिथि पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश आई ए अंसारी ने धर्म के नाम पर देश में हो रहे प्रपंचों पर कटाक्ष किया। उन्होनें कहा कि मस्जिद, मंदिर,चर्च तो बन रहे है लेकिन अच्छे इन्सान नहीं बन पा रहा रहे हैं। सांस्कृतिक व सैद्वांन्तिक शिक्षा के बिना संसार में शांति नहीं आ सकती है। जस्टिस अंसारी के अनुसार स्वस्थ समाज का निर्माण मानवीय मूल्यों पर आधारित शिक्षा से संभव है। समारोह को जैन विश्वभारती के अध्यक्ष व रजत जयंती समारोह के मुख्य संयोजक धर्मचन्द लूंकड, कोषाध्यक्ष प्रमोद बैद, अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मण्डल की राष्ट्रीय अध्यक्ष कल्पना बैद, भारतीय पुरातात्विक विभाग के निदेशक पाणिकांत मिश्र, विश्वविद्यालय के कुलाधिपति वंसतराज भण्डारी आदि ने संबोधित किया। कार्यक्रम में जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा के अध्यक्ष कमलकुमार दुगड, जय तुलसी फाउण्डेशन के प्रबंध न्यासी सुरेन्द्र कुमार दुगड, सुरेन्द्र कुमार चौरडिया, रंजित सिंह कोठारी, सलिल लोढा सहित अनेक लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम का संयोजन प्रकाश चिण्डालिया ने किया। समारोह में हारमोनी कलाकारों द्वारा देश भक्ति गीत एवं नृत्य प्रस्तुत किये गये।

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