3rd Indian Social Work Congress 2015

किसान, मजदूर एवं दलित वर्ग का उत्थान समाज कार्य का मुख्य अंग - अरुणा राॅय

जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के समाज कार्य विभाग एवं राष्ट्रीय व्यावसायिक समाज कार्यकत्र्ता संघ नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में त्रिदिवसीय थर्ड इण्डियन सोशियल वर्क कांग्रेस का उद्घाटन शुक्रवार को विश्वविद्यालय के एसडी घोड़ावत आॅडिटोरियम में समारोह पूर्वक हुआ। समारोह की मुख्य अतिथि देश की प्रख्यात समाजसेविका रमन मैग्सेसे अवार्ड विजेता अरुणा राॅय ने देश-विदेश से समागत समाज कार्य विभाग के विद्वानों को संबोधित करते हुए कहा कि आज देश की शिक्षा में अमूल चूल परिवर्तन की अपेक्षा है। उन्होंने कहा कि सद्भावपूर्ण शिक्षा से ही देश एवं समाज का भला हो सकता है। मूल्यों से प्रेरित शिक्षा को समाज का आधार बताते हुए उन्होंने सामाजिक क्रांति के लिए सूचना के अधिकार को अधिक से अधिक विस्तार देने का आह्नान किया। इस अवसर पर उन्होंने मजदूर किसान शक्ति संगठन का परिचय देते हुए किसान, मजदूर एवं दलित वर्ग के उत्थान को समाजकार्य का मुख्य अंग बताया। इस अवसर पर उन्होंने भारतीय राजनीति पर कटाक्ष करते हुए कहा कि देश की संपदा जनता की है। जरूरत है कि जनता जागरूक होकर अपने अधिकारों के प्रति सजग बने। उन्होंने देश में बढ़ रही महंगाई पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि देश के लोगों में केवल वोट डालने की प्रवृत्ति नहीं होनी चाहिए, देश की समस्याओं के प्रति गंभीर होकर समाधान खोजने की आवश्यकता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय की कुलपति समणी चारित्रप्रज्ञा ने कहा कि वर्तमान में भौतिक वातावरण में रहते हुए भी व्यक्ति मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं है तो शिक्षा को परिष्कृत करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज की समस्याओं के लिए हमें देश में ही समाधान खोजने पड़ेंगे। उन्होंने समाज सेवा को जीवन का विशिष्ट उपक्रम बताते हुए शिक्षा के साथ मानवीय मूल्यों को जोड़ने का आह्नान किया। कुलपति ने करुणा, दया व क्षमा को भारतीय शिक्षा का मूल बताते हुए विश्व में व्याप्त सभी समस्याओं का समाधान बताया।

समारोह के मुख्य वक्ता दिल्ली के डाॅ. राजेश टण्डन ने समाज कार्य विभाग के विविध कार्यों की मीमांसा करते हुए कहा कि शिक्षा के साथ अध्यात्म आज को जरूरत है। उन्होंने कहा कि आज शिक्षा समाज में नैतिक वातावरण को बनाने में असक्षम नजर आ रही है, ऐसे में नैतिक एवं अध्यात्म से प्रेरित शिक्षा ही देश के विकास में उपयोगी हो सकती है। राष्ट्रीय व्यावसायिक समाज कार्यकत्र्ता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष संयज भट्ट ने कांग्रेस के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए संघ द्वारा किये जा रहे कार्यों को रेखांकित किया। इस अवसर पर मंच पर जैन विश्वभारती के अध्यक्ष डाॅ. धर्मचन्द लूंकड़ भी उपस्थित थे।

इससे पूर्व समाज कार्य विभाग के अध्यक्ष एवं कांग्रेस के संयोजक प्रो. आ.बी.एस. वर्मा ने स्वागत भाषण देते हुए आयोजकीय पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का शुभारम्भ समणीवृन्द द्वारा प्रस्तुत मंगलसंगान से हुआ। इस अवसर पर जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के संस्थान गीत का संगान किया गया। कार्यक्रम का संयोजन डाॅ. जितेन्द्र कुमार वर्मा ने किया एवं आभार ज्ञापन संघ के सचिव प्रो. सुरेश पठारे ने किया। अतिथियों का स्वागत धर्मचन्द लूंकड़, प्रमोद बैद, शांतिलाल गोलछा, रमेशचन्द्र बोहरा, प्रो. आनन्दप्रकाश त्रिपाठी आदि ने किया। इस कांग्रेस में 28 राज्यों के 400 से भी अधिक प्रतिभागी भाग ले रहे हैं।

स्मारिका का हुआ विमोचन-इस अवसर पर कांग्रेस द्वारा प्रकाशित स्मारिका का विमोचन मुख्य अतिथि अरुणा राॅय एवं कुलपति समणी चारित्रप्रज्ञा सहित उपस्थित अतिथियों द्वारा किया गया। स्मारिका में देश-विदेश के विद्वानों द्वारा त्रिदिवसीय सेमिनार में प्रस्तुत किये जाने वाले शोध-पत्रों को शामिल किया गया है।

लाइफ टाईम अचीवमेण्ट अवार्ड प्रदान-इस अवसर पर राष्ट्रीय व्यावसायिक समाज कार्यकर्ता संघ द्वारा प्रतिवर्ष देश विदेश के विद्वानों को दिये जाने वाले लाईफ टाईप अवार्ड प्रदान किये गये, जिसमें प्रो. एच.वाई. सिद्दीकी, प्रो. आर.आर. सिंह, प्रो. वेंकट पुला, प्रो. एलेक्स गोनसाॅलवेज व श्रीगणेशन को मुख्य अतिथि अरुणा राॅय द्वारा अवार्ड प्रदान किये गये। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्तर पर दिये जाने वाले मार्था फरेल फाउण्डेशन स्काॅलरशिव अवार्ड अखिला एवं भारतीय को दिये गये। इस त्रिदिवसीय आयोजन में समाज कार्य से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर व्यापक चर्चा होगी।

समाज सेवा के लिए प्रायोगिक कार्य जरूरी- अन्ना हजारे

एसडी घोडावत ऑडिटोरियम में प्रख्यात समाजसेवी अन्ना हजारे द्वारा दिये गये ४० मिनट के विडियों वक्तव्य का प्रसारण किया गया। अन्ना ने अपने संदेश में कहा कि आज समाज सेवा में हर व्यक्ति आने को आतुर है लेकिन प्रायोगिक रूप सें काम करने में कठिनाई अनुभव करता है जिसकों परिष्कृत करने की आवश्यकता है। अन्ना हजारे ने कहा कि समाज सेवा के के लिए स्वयं को बीज की भांति खपाना व तपाना पडता है, तभी वह बीज आगे जाकर वटवृक्ष का रूप धारण करता है। उन्होनें स्वयं की जीवन यात्रा का वर्णन करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानन्द के एक विचार से उन्होनें २६ वर्ष की आयु में समाज सेवा की राह पकड ली। इस अवसर पर अन्ना हजारे ने बीज नेतृत्व की चर्चा करते हुए कहा कि आज महात्मा ज्योतिबा फूले व सावित्रिबाई फूले के जीवन दर्शन से समाज सेवा सीखने की जरूरत है। अन्ना हजारे ने लोकपाल व सूचना के अधिकार के प्रति उनके द्वारा किये गये संघर्ष को मान्यता मिलने पर समाज सेवा की जीत बताया। ज्ञात रहे अन्ना हजारे जैन विश्वभारती में आयोजित इस कांग्रेस में मुख्य अतिथि के रूप में आने वाले थे लेकिन आवश्यक कार्यवश वो इस कांग्रेस में भाग नहीं ले सके।

काग्रेंस का समापन समारोह सोमवार को विश्वविद्यालय के एसडी घोडावत ऑडिटोरियम में हुआ। समारोह के मुख्य अतिथि राजस्थान लॉ कमिशन के पूर्व अध्यक्ष व राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधिश विनोदशंकर दवे ने कहा आज समाज से जुडे संगठनो के पास सूचना तो बहुत है लेकिन अनुभव की कमी महसूस हो रही है। आवश्यकता है कि समाज से जुडे संगठन जनता के बीच जाकर उन समस्याओं के प्रति जागरूकता पैदा करें जो जन जीवन को प्रभावित करती है। उन्होनें कहा कि सभी सामाजिक संगठन इस बडी जिम्मेदारी के निर्वहन के प्रति जागरूक बने। दवे ने कहा कि समाजसेवा के प्रति सर्मपण होने से ही देश की दिशा को बदला जा सकता है। दवे ने आचार्य तुलसी को याद करते हुए कहा कि उन्होनें समाज में सामाजिक विकास के लिए अणुव्रत जैसा महत्वपूर्ण आंदोलन दिया जो देश के नैतिक चरित्र के साथ समाज को नई दिशा दिखाने में सक्षम है।

न्यायविद दवे ने कहा कि समाज से पहले परिवार में हमें समन्वय स्थापित करना होगा, तभी समाजसेवा की राह को आसान बनाया जा सकता है। उन्होनें समाज सेवा के लिए उपस्थित विद्वानों से कहा कि समाज सेवा के लिए गांवो में जाकर ही सेवा के सच्चे तरीकों को सीखा जा सकता है। उन्होनें स्वामी विवेकानन्द के प्रसंग को प्रस्तुत करते हुए जीवन मेें निरन्तर गतिशील रहने का आह्वान किया।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए कुलपति समणी चारित्रप्रज्ञा ने कहा कि जिम्मेदारी के अहसास से ही सेवा की राह पर चला जा सकता है। जरूरत है कि प्रत्येक व्यक्ति अपनी जबाबदारी का निर्वहन सजगता के साथ करें। चारित्रप्रज्ञा ने डॉ एपीजे अब्दुल कलाम को याद करते हुए उनके सिद्वांतों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। बिहार की आईएएस अधिकारी डॉ रश्मिसिंह ने कहा कि व्यक्ति को पहचान के लिए कार्य नहीं कर, सेवा के लिए कार्य करना चाहिए, सही मायने में समाजसेवी का सबके साथ मिलकर काम करना ही समाज कार्य को उपयोगी बना सकता है। इस अवसर पर चैन्नइ्र्र के समाजसेवी डॉ सुगालचन्द जैन ने कांग्रेस की सफलता के लिए बधाई देते हुए समाज में ओर अधिक गति से कार्य करने का आह्वान किया। इस अवसर पर जैन विश्वभारती के अध्यक्ष धर्मचन्द लूंकड भी विशिष्ट अतिथि के रूप में मंच पर उपस्थित थे।

इससे पूर्व कांग्रेस के संयोजक प्रो आरबीएस वर्मा ने सभी का स्वागत करते हुए त्रिदिवसीय कांग्रेस का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होनें बताया कि इस राष्ट्रीय कांग्रेस में ४३८ विद्वानों ने भाग लिया जिसमें १३ विशिष्ट वक्ताओं ने वक्तव्य दिये वही १८ सेशन में आयोजित कांग्रेस में देश भर के ६१ संस्थानों के २४६ विद्वानों ने पत्रवाचन किये। इस अवसर पर समाज कार्य से जुडी चार पुस्तकों को विमोचन भी अतिथियों द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संयोजन डॉ जितेन्द्र कुमार वर्मा ने एवं आभार ज्ञापन संघ के अध्यक्ष प्रो संजय भट्ट ने किया।

इससे पूर्व एचआईवी के प्रति जागरूकता व सजगता, मानवाधिकार एवं समाजकार्य, सामाजिक न्याय व समाजकार्य आदि विषयों पर व्यापक चर्चा की गई। सत्र में प्रो शरद जोशी की अध्यक्षता में डॉ आमोद, डॉ समणी शशि प्रज्ञा, सुषमा बत्रा, शशिकांत श्रीवास्तव, डॉ कौशल किशोर, प्राणज्योति कलिता, सी वनलाल हरेती, कविता गौतम, प्रो वंदना सिन्हा आदि ने शोध पत्रों का वाचन करते हुए व्यापक चर्चा की।

सांस्कृतिक संध्या पर कलाकारों ने दी मनभावन प्रस्तुतियां

जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के समाज कार्य विभाग एवं राष्ट्रीय व्यवसायिक समाज कार्यकर्ता संघ नई दिल्ली के तत्वावधान में चल रही कांग्रेस के द्वितीय दिवस एसडीघोडावत ऑडिटोरियम में रविवार रात्रिकालिन सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ नेहा मिश्रा द्वारा प्रस्तुत गणेश वंदना के साथ हुआ। करूणा एवं समूह ने राजस्थानी लोकनृत्य केशरिया बालम प्रस्तुत कर राजस्थानी संस्कृति का परिचय दिया। साक्षी शर्मा एवं अंकिता ने युगल नृत्य प्रस्तुत किया। प्रिंस व साथियों ने लिलिपुट नृत्य प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। प्रभा जागीड ने एकल नृत्य अरे जा रे हट नटखट प्रस्तुत कर सभी को झूमने पर मजबूर कर दिया। योग विभाग द्वारा डॉ प्रद्युम्रसिंह शेखावत के नेतृत्व में योगा का प्रदर्शन किया गया। प्रेम सोंलकी व समूह ने मारवाडी लोकनृत्य, करूणा शर्मा ने हाजी अली, सुष्मिता नाहर एवं समूह व पुष्पा चौधरी ने पंजाबी, पूजा शर्मा ने मराठी लोकनृत्य लावणी, रिया एवं निकिता ने ओ री चिरिया पर शानदार प्रस्तुति दी। शीतल व मीनू रोडा ने गरबा की प्रस्तुति दी। गौरव व साथियों द्वारा नाटक की प्रस्तुति दी। छात्रा प्रेम सोलकीं ने एकल नृत्य की प्रस्तुति दी। इस अवसर पर प्रख्यात कवि गौरव दीक्षित मासूम ने कविता पाठ किया। कार्यक्रम में लखनउ विश्वविद्यालय की छात्राओं द्वारा पेरोडी प्रस्तुत की गई। विवेक माहेश्वरी ने देश भक्ति गीत प्रस्तुत कर वातावरण में देश भक्ति का माहौल बना दिया। कार्यक्रम का संयोजन नेहा मिश्रा, दिव्या जागीड ने किया। आभार ज्ञापन डॉ अमिता जैन ने किया।

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