9th Convocation and Silver Jubilee Year Celebration at Nepal

अहिंसा एवं शांति के लिये जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय का विशिष्ट योगदान- वितमंत्री नेपाल

नेपाल। जैन विश्व भारती विश्वविद्यालय का 9वां दीक्षान्त समारोह रविवार को अनुशास्ता आचार्य महाश्रमण के सान्निध्य में नेपाल के विराटनगर में सम्पन्न हुआ। समारोह में दीक्षान्त भाषण देते हुए नेपाल सरकार के वित्त मंत्री रामसरण महत ने कहा कि विश्व में भौतिकवाद का वर्चस्व है लेकिन केवल भौतिकवाद से असन्तुष्टि ही पैदा होती है। भौतिकवाद अपने साथ अशान्ति और हिंसा लाता है। भौतिकता के साथ अध्यात्म भी आवश्यक है। जैन विश्वभारती संस्थान आज मानवीय मूल्यों की शिक्षा दे रहा है। यह संस्थान आज शान्ति एवं अहिंसा, प्राच्य विद्याओं की शिक्षा के लिए प्रयत्नशील है। आज पूरा विश्व हिंसा से ग्रस्त है। ऐसे में अहिंसा एवं शान्ति ही इसका समाधान है। मानवीय मूल्यों की शिक्षा हमारे आत्मविश्वास में वृद्धि करती है। इस विश्वविद्यालय में जो शिक्षा दी जा रही है वह जीवन में सफलता के लिए बहुत आवश्यक है।

समारोह में विद्याथियों को उद्बोधन देते हुए संस्थान के अनुशास्ता आचार्य महाश्रमण ने कहा कि ज्ञान प्रकाश देने वाला होता है। ज्ञान का सार आचार है। शिक्षा आजीविका का आधार तो है लेकिन इसके साथ-साथ आचरण एवं संस्कार भी मिले यह आवश्यक है ताकि हम शांति के साथ रह सकें। शिक्षा के द्वारा ज्ञान के साथ चरित्र का भी विकास आवश्यक है।

समारोह को संबोधित करते हुए संस्थान की कुलपति समणी चारित्रप्रज्ञा ने कहा कि आज विश्व में शस्त्रों के लिए 1 बिलियन डाॅलर खर्च किया जा रहा है। आज की शिक्षा विनाश के लिए नहीं निर्माण के लिए होनी चाहिए। जैन विश्वभारती संस्थान मूल्य परक शिक्षा, अहिंसा एवं शान्ति के लिए कार्य कर रहा है। जैन दर्शन में ऐसे बहुत सारे तत्व हैं जो आज की समस्याओं का समाधान दे सकते हैं। जिस व्यक्ति में प्रमाणिकता है, वह सफल हो सकता है। कार्यक्रम के प्रारम्भ में संयोजक राजकुमार गोलछा ने अतिथियों का स्वागत भाषण दिया। जैन विश्वभारती संस्थान के अध्यक्ष धर्मचन्द लुंकड़ ने मुख्य अतिथि का शाल्यार्पण कर एवं कुलाधिपति बंसतराज भण्डारी ने मोमेन्टो भेंट कर सम्मान किया। समारोह का प्रारम्भ संस्थान सदस्यों, संस्थान के विभिन्न मण्डलों एवं परिषदों के सदस्यों आदि की शोभायात्रा के साथ प्रारम्भ हुआ। कुलसचिव प्रो. अनिलधर ने सभी का स्वागत करते हुए कार्यक्रम को प्रारम्भ किया।

दीक्षान्त सामारोह में संस्थान के अहिंसा एवं शान्ति विभाग, योग एवं जीवन विज्ञान विभाग, प्राच्य विद्या एवं भाषा विभाग, जैन विद्या विभाग, समाज कार्य विभाग, अंग्रेजी विभाग, शिक्षा विभाग, आचार्य कालूकन्या महाविद्यालय, दूरस्थ शिक्षा की कुल पीएच.डी 12, एम.फिल 2, अधिस्नातक 859, स्नातक 1186 उपाधियां प्रदान की गईं। इस अवसर पर एन.सुगालचन्द जैन एवं न्यायाधीश दलवीर भण्डारी को मानद डीलिट की उपाधि प्रदान की गई। कुलाधिपति बंसन्तराज भण्डारी ने विभिन्न विभागों में सर्वोच्च स्थान प्राप्त विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल प्रदान किये। कुलाधिपति ने संस्थान के सदस्यों को संकल्प कराया एवं विद्यार्थियों को सिक्खापदम् का वाचन कराया गया।

इस अवसर पर जैन विश्व भारती संस्थान के रजत जयंती के 10वें चरण के कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। संस्थान के 25 वर्षों का इतिहास ‘अक्षर युग’ का अतिथियों द्वारा विमोचन किया गया। कार्यक्रम के अन्त में रजत जयंती समारोह विराट नगर के संयोजक राजकुमार गोलछा, जैन श्वेताम्बर तेरापंथ सभा विराट नगर के अध्यक्ष दिनेश गोलछा, आचार्य महाश्रमण चार्तुमास व्यवस्था समिति विराट नगर के अध्यक्ष मालचन्द सुराणा, जैन तेरापंथ न्यूज प्रचार प्रसार के संयोजक महावीर सेमलानी एवं संजय बैद मेहता का सम्मान किया गया।

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