Silver Jubilee Year Celebration at Bangalore

संस्कारों से सिंचित शिक्षा जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय की विशेषता-राज्यपाल

बंगलोर।जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के रजत जयंती समारोह के बंगलोर चरण का आयोजन ज्ञान ज्योति सभागार बंगलौर में आयोजित किया गया। समारोह को संबोधित करते हुए कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला ने कहा कि देश में केवल अक्षर ज्ञान देने वाली शिक्षा संस्थाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन राजस्थान के लाडनूं स्थित जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय देश का ऐसा अनूठा विश्वविद्यालय है जहां पिछले 25 वर्षो से संस्कारों को सींचन के साथ साथ मूल्यपरक विद्या का ज्ञान दिया जाता है।

उन्होने कहा कि हमारे व्यक्तिव की परीक्षा केवल हमें परीक्षा में 95 प्रतिशत अंक लाने से नहीं हो सकती। जब तक यह शिक्षा हमें सद्विचार और चारित्र जैसे गुणों के साथ संस्कारवान नहीं बनाती तब तक ऐसे उच्च अंक कोई मायने नहीं रखते। विद्या के साथ विनय तथा विवेक भी होना जरूरी है। केवल विनयी आत्मा को ही विद्या शोभित करती है। शिक्षा प्राप्त करने से अगर हमारा अंहकार जागृत होता है तो ऐसी शिक्षा किसी काम की नहीं है। राज्यपाल ने साधु-साध्वी, वैरागी और संतो ने समाज को संस्कारवान बनाने के लिये समर्पण के साथ जो सेवा की है, वह बेमीसाल है। किसी परिवार को चारित्रवान, संस्कारवान बनाने में माताओं की भूमिका अह़म रही है। ऐसी मातृ शक्ति के प्रति हमें अहोभाव रखने होगें। इससे पहले बंगलोर चरण के प्रायोजक देवराज मूलचन्द नाहर ने सभी उपस्थित जनों का स्वागत किया।

इसी धरा पर देखा था सपना-जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय की कुलपति समणी चारित्रप्रज्ञा ने कहा कि जिस कर्नाटक की पवित्रधरा पर आचार्य तुलसी ने संस्कार युक्त शिक्षा प्रदान करने वाली संस्था का सपना देखा था, उसी कर्नाटक की धरा को आज ऐसी शिक्षा संस्थान का रजत महोत्सव कार्यक्रम मनाने का स्वर्ण अवसर मिला है। उन्होने कहा कि जब तक हमारा विजन और मिशन एक नहीं होगा तब तक कुछ भी हासिल करना संभव नहीं है। आचार्य तुलसी,आचार्य महाप्रज्ञ तथा अनुशास्ता आचार्य महाश्रमण जैसे दूरदृष्टाओं के कारण इस अनूठे शिक्षा संस्थान का सपना साकार हुआ है। इस संस्थान में दुर्गम देहातों के वंचित समाज के प्रत्येक वर्ग के विद्यार्थियेां को गुणात्मक शिक्षा दी जाती है। खासकर, छात्राओं की शिक्षा तथा महिलाओं के सबलीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाता है । मुनिश्री ज्ञानेन्द्र कुमार ने कहा कि हमें केवल उपदेश मिलते आ रहे हैं। लोग व्यसन के रूप में ऐसे उपदेश सुनते जा रहे है, लेकिन इन उपदेशों का आचरण कहीं दिखाई नहीं देता।

शिक्षा जगत का सितारा- राजस्थान के उच्च शिक्षा मंत्री कालीचरण सर्राफ ने कहा कि राजस्थान सरकार महिलाओं के सबलीकरण के लिए ऐसी शिक्षा संस्था को हरसंभव मदद देने को तैयार है। देशीय संस्कारों के नींव पर खडा यह शिक्षा संस्थान अब शिक्षा जगत का सितारा बन गया है। संस्था ने राजस्थान में सराहनीय कार्य किये हैं। साध्वी प्रज्ञा श्री ने कहा कि आचार्य तुलसी ने शिक्षा को संजीवनी बताते थे, लेकिन संस्कारहीन शिक्षा ने विद्यार्थियों को अलग राह पर पहुंचा दिया है। शिक्षा पद्वति गलत नहीं है बल्कि शिक्षा पद्वति अधूरी है। इस अधूरेपन को दूर करने का सराहनीय प्रयास जैन विश्वभारती संस्थान की ओर से किया जा रहा है। साध्वी कंचनप्रभा ने कहा कि जीवन विज्ञान आचार्य तुलसी की महान देन है। इस पाठ्यक्रम को पूरे विश्वस्तर पर सराहना मिली है।

ग्रंथ का विमोचन- इस अवसर पर जैन विश्वभारती संस्थान की 25 वर्ष की सफल यशोगाथा की अक्षरयुग नामक स्मृति ग्रंथ का विमोचन किया। विमल कटारिया ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर बैगलूरू जैन समाज की ओर से जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय को 76 लाख का चैक भेंट किया।

ये रहे उपस्थित- जैन विश्वभारती के अध्यक्ष एवं समारोह के मुख्य संयोजक धर्मचन्द लूंकड, जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा के पूर्व अध्यक्ष हीरालाल मालू, केन्द्रीय जीवन विज्ञान अकादमी के राष्ट्रीय प्रभारी सुरेश कोठारी, पूर्व कुलपति प्रकाशचन्द खींचा, कर्नाटक विधान परिषद के सदस्य लहरसिंह सिरोया, भाजपा कर्नाटक के महासचिव निर्मल कुमार सुराणा, तेजराज सुराणा, तेजराज गुलेच्छा, सलील लोढा, राजेश मुथा, अमृतलाल भंसाली, रायचन्द खटेड, प्रेमराज भंसाली एवं अमीचन्द खटेड उपस्थित थे।

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