Silver Jubilee Year Celebration at Odisha

जैन विश्वभारती संस्थान एक सुनहरी पौध: समणी मंजूप्रज्ञा

केसिंगा। जैन विश्वभारती संस्थान के रज जयन्ती वर्ष के उपलक्ष्य में ओड़िशा चरण केसिंगा में दो चरणों में भव्य रूप से मनाया गया। विश्वविद्यालय की कुलपति समणी चारित्रप्रज्ञा का बुधवार को केसिंगा आगमन हुआ। इस अवसर पर उनकी सहयोगी समणी आगमप्रज्ञाजी भी साथ थी। केसिंगा आगमन पर समणी निर्देशिका मंजूप्रज्ञा व स्वर्णप्रज्ञा की अगुवाई में केसिंगा स्टेशन पर ओड़िशा प्रांतीय सभा, महिला मण्डल व कन्या मण्डल के सदस्यों ने जुलूस के रूप में स्टेशन से तेरापंथ भवन तक स्वागत किया। पहला चरण केसिंगा महाविद्यालय में सुबह ग्यारह बजे से हुआ, जिसमें काफी संख्या में छात्र सम्मिलित हुए। पहले चरण की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्रिंसिपल प्रदीप कुमार रथ ने किया। इससे पहले कार्यक्रम का शुभारम्भ कन्या मण्डल के मंगलाचरण से शुरू हुआ। कार्यक्रम में जैन विश्वभारती संस्थान की कुलपति श्रमणी चारित्रप्रज्ञा ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि विश्वभारती संस्थान भारत में सत्तरहवें नम्बर पर है, जो कि हमारे लिए गौरव का विषय है। आने वाले दिनों में यह नम्बर एक पर होगा। उन्होंने कहा कि आज के समय में पढ़ाई और संकल्प के साथ विकास और नशा मुक्त जीवन जरूरी है। हिंसा और अहंकार से दूर रहकर अपने और राष्ट्र का विकास किया जा सकता है। गुरुदेव तुलसी जी ने कहा था ‘‘सुधरे व्यक्ति समाज व्यक्ति से राष्ट्र स्वयं सुधरेगा। उन्होंने कार्यक्रम में मेरिट से पास करने वाले विद्यर्थियों को जैन विश्वभारती में पढ़ाई के लिए बुलाया। इस अवसर पर श्रमणी आगमप्रज्ञा व समणी स्वर्णप्रज्ञा ने भी अपनी बात रखी। सारिका जैन ने कहा सफलता का एक ही मंत्र है। दृढ़ संकल्प और कठिन परिश्रम। कार्यक्रम का सफल संचालन अनिल जैन उपाध्यक्ष ओड़िशा सभा ने किया। कार्यक्रम में प्रबुद्ध लोगों के अलावा करीब आठ सौ विद्यार्थियों ने भाग लिया। उक्त अवसर पर सारिका जैन, डिप्टी कमिश्नर आयकर नागपुर, धर्मचंद लुंकड़, रमेश वोहरा, केवलचन्द जैन व तुलसी राम जैन उपस्थित थे।

दूसरा चरण केसिंगा तेरापंथ भवन के प्रांगण में संध्या पांच बजे से मनाया गया। शिक्षा में मानवीय मूल्यों का सामवेश विषय पर बोलते हुए समणी निर्देशिका मंजू प्रज्ञा ने कहा कि आचार्य तुलसी का जीवन विकास की कहानी का अभ्युदय है। उन्होंने भारतीय संस्कृति के अनुरूप मानवीय मूल्यों की प्रतिष्ठा हेतु विश्वविद्यालय की स्थापना का स्वप्न लिया, उनका यह स्वप्न जैन विश्वभारती यूनिवर्सिटी के रूप में साकार हुआ है। यह विश्वविद्यालय मूल्य परक तथ्यों को उजागर करता हुआ निष्पत्तियों का एक सफर पूरा कर अपने रजत वर्ष को सार्थकता प्रदान कर रहा है।

युनिवर्सिटी की कुलपति समणी चारित्र प्रज्ञा ने अपने उद्बोधन में कहा कि शिक्षा प्राप्ति का मूल उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं होता अपितु ज्ञान का दीपक जलाना है। यह दीपक भौतिक तत्त्वों से नहीं बल्कि अभौतिक तत्त्वों का कालजयी रूप है। इस विश्वविद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थी का यूनिक निर्माण होता है। इसमें संस्कारों की पढ़ाई होती है। इसके अनुशास्ता कालजयी और देशातीत व्यक्तित्व के धनी संत परम्परा के यशस्वी गुरुदेव श्री तुलसी, फिर आचार्य महाप्रज्ञ और अब आचार्य महाश्रमण हैं। समणी स्वर्णप्रज्ञा ने अपने संयोजकीय वक्तव्य में कहा कि प्रभात का उगना सूर्य की अगवानी के लिए होता है। सूर्य के उगने का अर्थ अंधकार को प्रकाश में परिवर्तित करना है। जैन विश्वभारती संस्थान का ओड़िशा चरण अकस्मात् सृजनात्मक दिमाग की उपज थी। जिसने किसी की प्रेरणा और प्रोत्साहन का मोहताज न बनकर अपनी गति से मंजिल की दूरियां कम करने की ठानी है। परिणामतः यह आयोजन केसिंगा की सीमाओं से परे सम्पूर्ण ओड़िशा का बन गया। समणी आगमप्रज्ञा ने युनिवर्सिटी की विभिन्न निष्पत्तियों को उजागर करते हुए कहा कि शुभ भविष्य की आकांक्षा रखने वाले हर विद्यार्थी को इसमें प्रवेश लेना चाहिए। प्रान्तीय अध्यक्ष केवलचन्द ने सम्पूर्ण ओड़िशा एवं बाहर के करीब पैंतालीस गांवों से आये श्रावक समाज का स्वागत करते हुए कहा कि ओड़िशा भारतीय संस्कृति की आन, बान और शान है। यहां जो भी कार्यक्रम सम्पादित होते हैं, उनकी कामयाबियां युग की पहचान बन जाती हैं।

इस चरण के संयोजक तुलसीराम जैन ने बताया कि जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय का यह ओड़िशा चरण हमारी शक्ति को संरचनात्मक रूप देने वाला है। इस आयोजन के बहाने हम अपनी भावों को सौन्दर्य का बाना पहनाकर सत्यम्-शिवम् की आराधना करने के लएि उद्यत हैं। मुख्य अतिथि अरविन्द दास ने अपने विस्तृत विचारों में कहा कि भारत देश ऋष्ज्ञि-मुनियों का देश है, जहाँ अहिंसा, प्रेम, करुणा की बात होती है, खासकर अहिंसा का मूलमंत्र जैन सम्प्रदाय की विशेषता है। सरकार से लेकर समाज का हर वर्ग सकारात्मक सोच में शामिल हो जाये तो शिक्षा में विकास के नए आयाम बन जायेंगे। कार्यक्रम का प्रारम्भ जहां महिला मण्डल एवं कन्या महण्डल के मंगलाचरण से हुआ वहीं संस्थान के अध्यक्ष धरमचन्द लूंकड़ एवं ट्रस्टी श्री रमेश बोहरा ने ओड़िशा चरण की सामयोजन में उत्साह, उमंग को सर्वश्रेष्ठ बताया। कार्यक्रम का संचालन प्रान्तीय उपाध्यक्ष अनिल जैन ने करते हुए आगन्तुक अतिथियों को मंच पर आमंत्रित किया। 45 गांवों से एक हजार से ज्यादा श्रावक समाज ने कार्यक्रम में भाग लेकर एक नया इतिहास रचा। अंत में कार्यक्रम के सभी प्रायोजक, सह-संयोजक, अतिथि, पूर्व प्रान्तीय अध्यक्षों का मोमेण्टो देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम को सफल बनने में तेरापंथ महिला मण्डल, सभा, तेयुप व कन्या मण्डल का विशेष योगदान रहा।

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