National Seminar on Yoga and Naturopathy for Managing Psycho-Somatic Disorders

त्रिदिवसीय राष्ट्रीय सेमीनार

मनोकायिक रोगों के प्रबंधन में योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा का विशिष्ट योगदान - प्रो. जेपीएन मिश्रा

लाडनूं 20 फरवरी जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के योग एवं जीवन विज्ञान विभाग के तत्वावधान में एवं भारत सरकार के आयुष विभाग के सौजन्य से त्रिदिवसीय राष्ट्रीय सेमीनार का शुभारम्भ शनिवार को समारोह पूर्वक विश्वविद्यालय के एसडी घोडावत ऑडिटोरियम हुआ। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य वक्त्ता केन्द्रीय विश्वविद्यालय गुजरात के डीन प्रो जेपीएन मिश्रा ने कहा कि मनोकायिक रोगों के प्रबंधन में योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होनें कहा कि मनोकायिक रोगों के प्रबंधन में योग व प्राकृतिक चिकित्सा ही कारगर साबित होती है। विविध वैज्ञानिक शोधों का उदाहरण देते हुए प्रो मिश्रा ने कहा कि मन, व्यवहार व शरीर को स्वस्थ रखने के लिए प्रकृति वरदान है। प्राकृतिक चिकित्सा के साथ जीवन में भाव शुद्वि को भी मनोकायिक रोगों का उपचार बताया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज बटालियन एनसीसी के कमांडिग ऑफिसर कर्नल कुलसिह शेखावत सीकर ने कहा कि जीवन में संतुलन की साधना बहुत जरूरी है संतुलन के विकास से ही शरीर को तंदुरस्त रखा जा सकता है। उन्होनें कहा कि मन के रोगों के विकास के लिए योग जीवन के लिये महत्वपूर्ण है। योग के द्वारा ही जीवन का रूपान्तरण किया जा सकता है। कार्यक्रम केे विशिष्ट अतिथि दादू पंथ सम्प्रदाय के महामण्डलेश्वर स्वामी अर्जूनदास महाराज ने ज्ञान के बिना सब अधुरा है, ज्ञान वान व्यक्ति ही अपने जीवन का विकास करते हुए स्वस्थ रह सकता है। स्वामी ने भीतर की उर्जा को समझने का महत्व बताते हुए प्रकृति प्रदत जीवन को प्रकृति के साथ जीने का आह्वान किया। उन्होने कहा कि बढ रहे रोगों के पीछे मुख्य कारण जीवन में संयम का अभाव व परहेज से दुर हो जाना है। इस अवसर पर उन्होनें जीवन में धर्म, अध्यात्म एवं कर्म को समझाया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में जैन विश्वभारती के न्यायी रमेशचन्द्र बोहरा भी उपस्थित थे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो अनिलधर ने कहा कि जीवन में प्रेम महत्वपूर्ण है, प्रेम के द्वारा ही मनोकायिक रोगों से छुटकारा मिल सकता है। अंहकार को मनोकायिक रोगों का जनक बताते हुए प्रो धर ने कहा कि गीता सिद्वांत के अनुसार जो है उसे स्वीकार करने का भाव मनोकायिक रोगों को मिटाने का विशिष्ट सूत्र है।

इससे पूर्व सेमीनार के निदेशक डॉ प्रद्युम्रसिंह शेखावत ने स्वागत भाषण करते हुए अतिथियों का परिचय दिया। कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्जवन के साथ हुआ। छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। अतिथियों का स्वागत प्रो आनन्दप्रकाश त्रिपाठी, प्रो बीएल जैन, डॉ जुगलकिशोर दाधीच, डॉ योगेश जैन, डॉ जसवीर सिंह आदि ने किया। कार्यक्रम का संयोजन डॉ युवराजसिंह खंगारोत ने एवं आभार डॉ विवेक माहेश्वरी ने व्यक्त किया। इस अवसर पर देश भर से पहुचे विद्वानों सहित जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के सभी शिक्षक गण एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।

तीन दिनों तक हुई व्यापक चर्चा

20 फरवरी से 22 फरवरी तक आयोजित इस त्रिदिवसीय राष्ट्रीय सेमीनार मनोकायिक रोगों के प्रबंधन में योग व प्राकृतिक चिकित्सा पर व्यापक चर्चा होगी। देश भर से समागत विद्वानों द्वारा शोध पत्रों का वाचन किया जायेगा। भोपाल के बरकततुल्ला खां विश्वविद्यालय की प्रो साधना दोनेरिया, आईएएसई विश्वविद्यालय सरदारशहर के प्रो सुरेन्द्र पाठक, उज्जेन योगा लाइफ के निदेशक प्रो पं राधेश्याम मिश्रा, चित्रकूट विश्वविद्यालय के प्रो एसके दुबे सहित अनेक विद्वानों के मनोकायिक रोगों पर व्यापक चर्चा करेगें। सम्मेलन में देश भर से सौ से अधिक विद्वान भाग ले रहे है। द्वितीय दिवस देश भर से आये विद्वानों ने विविध विषयों पर पत्रवाचन किये।

समापन समारोह

जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के योग एवं जीवन विज्ञान विभाग विभाग के तत्वावधान एवं भारत सरकार के आयुष विभाग के सौजन्य से आयोजित त्रिदिवसीय राष्ट्रीय सेमीनार का समापन समारोह सोमवार को विश्वविद्यालय के एसडी घोडावत ऑडिटोरियम में हुआ। समापन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि जगदगुरू सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय जयपुर के कुलपति विख्यात ज्योर्तिविद प्रो विनोद शास्त्री ने कहा कि मनोकायिक रोगों की चिकित्सा में योग व प्रकृति का बहुत बडा योगदान है, उन्होनें कहा कि योग व प्रकृति से दूर होने से ही विकृति आती है। शास्त्री ने योग दर्शन की चर्चा करते हुए पार्थिव शरीर व आध्यात्मिक शरीर की मीमांसा की। उन्होनें शास्त्रों में निहित योग दर्शन के प्रायोगिक स्वरूप को समझाते हुए शरीर की साधना के प्रायोगिक स्वरूप की चर्चा की।

प्रो विनोद शास्त्री ने कहा कि दुनियां का पहला संस्थान जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय है जो आध्यात्मिक शिक्षा मूल्यों के साथ दे रहा है। प्रकृति के प्रति मानव मन की भौतिक लालसा को विकृति बताते हुए प्राकृतिक संसाधनों के प्रति सचेत रहने का आह्वान किया। मनोकायिक रोगों के उपचार के लिए शरीर व मन के द्वारा योग की अनुभूति ही कारगर साबित हो सकती है। उन्होनें कहा कि योग से व प्रकृति के करीब रहने से ही शांति संभव है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो अनिलधर ने कहा कि मनोकायिक रोगों के प्रति जागरूक सदैव रहने एवं योग एवं प्राकृतिक जीवन जीने का प्रयास करना ही उपचार है। प्रो धर ने कहा कि भारतीय संस्कृति में योग का बहुत बडा महत्व है उसे आज सम्पूर्ण विश्व द्वारा अनुशरण किया जाना हमारे लिए गौरव की बात है, उन्होने कहा कि यहा विद्वानों ने इस विषय पर व्यापक चर्चा कर एक विशिष्ट कार्य किया है। इससे पूर्व सेमीनार के निदेशक डॉ प्रद्युम्रसिंह शेखावत ने त्रिदिवसीय सेमीनार का प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्जवन के साथ हुआ। छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। अतिथियों का स्वागत प्रो आरबीएस वर्मा ने किया। कार्यक्रम का संयोजन डॉ विवेक माहेश्वरी ने एवं आभार डॉ युवराजसिंह खंगारोत ने व्यक्त किया।

सेमीनार में विद्वानों ने किये पत्रवाचन

त्रिदिवसीय राष्ट्रीय सेमीनार में देश भर से आये विद्वानों ने विविध विषयों पर पत्र वाचन किये। सेमीनार में मोनिका सेठिया ने कायोत्सर्ग व तनाव, डॉ सुनिता इदोरिया ने जैन दर्शन में आहार विवेक-स्वास्थ्य के संदर्भ में, प्रो साधना डोनेरिया ने योगा व मनोकायिक रोग, अजयसिंह शेखावत ने इफेक्ट ऑफ प्रेक्षा मेडिटेशन, प्रो आनन्दप्रकाश त्रिपाठी ने मनोकायिक रोगों का दार्शनिक निदान, डॉ जसबीर सिंह ने डिजायन एण्ड डवलपमेंट ऑफ डिजीटल लाइबे्ररी एण्ड योगा सांइस, डॉ युवराजसिंह ने प्रेक्षा मेडीटेशन, डॉ कुणाल मेहता ने क्लासीकल एपलीकेशन ऑफ नैचुरोपैथी ऑन स्ट्रेश लेबल, पूर्णिमा गुप्ता ने विपश्यना ध्यान विषयों पर पत्र वाचन किये गये। इस अवसर पर प्रगति भूतोडिया, पारूल दाधिच, उतम निकिता, खुशबू जैन, श्वेता शर्मा, स्वामी धर्मानन्द जैन, प्रो समणी चैतन्यप्रज्ञा,प्रो बीएल जैन, डॉ अशोक भास्कर, विनय जैन, डॉ लक्ष्मण माली, डॉ पुष्पा मिश्रा, डॉ वीरेन्द्र भाटी मंंगल, डॉ रविन्द्र सिंह, डॉ विकास शर्मा आदि ने भी मनोकायिक रोगों से जुडे पत्रवाचन किये।

सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं योग प्रदर्शन रहा सराहनीय

इस अवसर पर योग एवं जीवन विज्ञान विभाग के विद्यार्थियों द्वारा योग का सामूहिक प्रदर्शन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया गया। उपस्थित संभागियों ने कार्यक्रम की सराहना की।

रहा सराहनीय सहयोग

त्रिदिवसीय सेमीनार में डॉ हेमलता जोशी, डॉ जसवीर सिंह, डॉ युवराजसिंह, डॉ विवेक माहेश्वरी, डॉ रविन्द्र सिंह, डॉ विकास शर्मा, आलोक पाण्डेय, प्रिया जैन, निर्मला भास्कर, डॉ वीरेन्द्र भाटी मंगल, डॉ अशोक भास्कर का सराहनीय सहयोग रहा।

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