Acharya Mahaprajna Spirituality & Science Lecture Series

आचार्य महाप्रज्ञ अध्यात्म व विज्ञान व्याख्यान माला

आध्यात्मिक वैज्ञानिक समन्वय से ही व्यक्तित्व निर्माण संभव- प्रो मिश्रा

लाडनूं 29 फरवरी जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के भगवान महावीर इंटरनेशनल रिसर्च सेन्टर के तत्वावधान में विश्वविद्यालय के एसडी घोडावत ऑडिटोरियम में सोमवार को साइंस एण्ड स्पीरीचुअलिटी विषय पर व्याख्यान व परस्पेक्टिव ऑन इंटेग्रेटिंग ऑफ साइंस एण्ड स्पीरीचुअलिटी इन द काॅन्टेक्स्टऑफ जैन फिलॉसोफी विषय पर वार्ता का आयोजन किया गया। व्याख्यान देते हुए नेहरू ग्राम भारती विश्वविद्यालय इलाहाबाद के पूर्व कुलपति देश के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो केपी मिश्रा कहा कि अध्यात्म और विज्ञान का गहरा जुडाव है। अध्यात्म के साथ विज्ञान और शिक्षा के साथ अध्यात्म ही व्यक्ति के मानस को स्वस्थ बना सकता है। उन्होने अध्यात्म को मूल्यों के साथ समन्वय करने की बात करते हुए कहा कि शिक्षा के साथ संस्कारपरक एवं चरित्र निर्माण की शिक्षा का होना जरूरी है। व्यवहारिक शिक्षा को अपनाने का आह्वान करते हुए प्रो मिश्रा ने कहा कि अध्यात्म और विज्ञान के सम्यक पालन से जीवन में व्याप्त द्वंद्वों से मुक्ति पायी जा सकती है। उन्होनें कहा कि विज्ञान व अध्यात्म के संतुलित प्रयास से ही सभी प्रकार की प्रगति संभव है। व्यक्तित्व निर्माण के लिए उन्होनें कहा कि आध्यात्मिक वैज्ञानिक समन्वय से ही व्यक्तित्व का निर्माण संभव है।

अनेकांतवाद दर्शन की चर्चा करते हुए प्रो मिश्रा ने आचार्य महाप्रज्ञ को अध्यात्म का शिखर पुरूष बताया। उन्होनेें आचार्य महाप्रज्ञ के वैज्ञानिक चिंतन का उल्लेख करते हुए कहा कि अध्यात्म एवं विज्ञान दोनों विरोधी शाखायें नहीं है दोनो पर गहराई से चिंतन करने पर अनेक समानताएं देखने को मिलती है आज विज्ञान के माध्यम से तकनीकी विकास हुआ है, सुविधाये बढी है पर जीवन का स्तर नही उठा है। उन्होनें विज्ञान के क्षेत्र में उठने वाले अनेक ज्वलन्त प्रश्रों के संदर्भ में चर्चा करते हुए जीवन क्या है, जीव का उद्भव कैसे होता है, सृष्टि क्या है आदि पर व्यापक चर्चा की। उन्होनें कहा कि अनछुए प्रश्रों के उतर अध्यात्म साधना के धरातल पर समाहित हो सकते है।

अध्यक्षता करते हुए कुलपति समणी चारित्रप्रज्ञा ने कहा कि आचार्य तुलसी व आचार्य महाप्रज्ञ ने वैज्ञानिक चिंतन के साथ अध्यात्म का प्रसारण किया। उन्होनें कहा कि प्रश्र उठाते हुए कहा कि क्या विज्ञान शांति प्रदान कर सकता है उन्होनें कहा कि अध्यात्म विज्ञान के प्रयोगों को आधार बनाकर विश्व में शांति स्थापित की जा सकती है।

भगवान महावीर इंटरनेशनल रिसर्च सेन्टर की निदेशक प्रो समणी चैतन्यप्रज्ञा ने स्वागत वक्तव्य देते हुए रिसर्च सेन्टर की गतिविधियों को प्रस्तुत किया। प्रो चैतन्यप्रज्ञा ने कहा कि आज के युग में अध्यात्म व वैज्ञानिक चिंतन के समन्वय से ही व्याप्त समस्याओं से निजात पायी जा सकती है। कार्यक्रम का शुभारम्भ समणी प्रणव प्रज्ञा द्वारा प्रस्तुत मंगल संगान से हुआ। कार्यक्रम का संयोजन डॉ समणी आगमप्रज्ञा एवं आभार डॉ जसबीर सिंह ने व्यक्त किया।

Read 1486 times

Latest from