Poonamchand Bhutoria Lecture Series

व्याख्यानमाला आयोजित

अपराध के कारणों को समझकर ही बदलाव संभव - कुमावत

लाडनूं 11 मार्चजैन विश्वभारती संस्थान के तत्वावधान में महादेवलाल सरावगी अनेकांत शोध पीठ के द्वारा स्व पूनमचन्द भूतोडिया की स्मृति में अपराध व दण्ड मानवीय आधार दृष्टिकोण विषयक व्याख्यानमाला का आयोजन शुक्रवार को संस्थान के सेमीनार हॉल में समारोह पूर्वक आयोजित हुआ। व्याख्यान माला के मुख्य वक्ता सरदारपटेल पुलिस, सुरक्षा व सामाजिक न्याय विश्वविद्यालय जोधपुर के कुलपति प्रो एमएल कुमावत ने कहा कि आज समाज में विविध अपराधों की संख्या में बढोतरी हुई है जो चिंतनीय पहलू है। अपराधों के कारणों का विशेषण करते हुए कुमावत ने कहा कि अपराधों पर अंकुश के लिए बुराईयों के नियमन के चिंतन के साथ अपराध के कारण को भी समझना पडेगा, तभी बदलाव की प्रक्रिया संभव है।

प्रो कुमावत ने कहा कि अपराधी मनोवृति के पीछे व्यक्ति के बहुत से कारण होते है जिनसे लालच, बदले की भावना व देशभक्ति प्रमुख है। उन्होनें कहा कि अपराधी मनोवृति में बदलाव के लिए प्रेम जरूरी है, प्रेम से ही बदलाव संभव है। भारतीय सुरक्षा की मींमासा करते हुए कहा कि प्रतिवर्ष करीब 4 से 6 लाख करोड रूपये का बजट सुरक्षा व्यवस्था में व्यय होता है जबकि शिक्षा व्यवस्था में इससे बहुत कम बजट स्वीकृत होता है।

भारतीय एवं विदेशी कानून की चर्चा करते हुए प्रो कुमावत ने बताया कि दुनियां के भारत सहित 196 देशों में फांसी की सजा का प्रावधान है जिससे से करीब सौ देशों ने फांसी पर रोक लगा रखी है। उन्होनें कहा कि मानवीय दृष्टिकोण के माध्यम से अपराधों पर काबू किया जा सकता है। उन्होनें कहा कि भारतीय जेलें आज सुधार गृह के रूप में काम कर रही है जिसमें अपराधी को योगा, मेडीटेशन एवं हृद्य परिवर्तन के माध्यम से सुधार हो रहा है। भारतीय जेलों में बंद करीब 25 लाख अपराधी अमेरिका की तुलना में बहुत कम है।

अध्यक्षता करते हुए कुलपति समणी चारित्रप्रज्ञा ने कहा कि आज युवा गलत दिशा में जा रहे है उन्हें मूल्यों से प्रेरित शिक्षा देकर अपराधों से विमुख किया जा सकता है। उन्होनें कहा कि शिक्षा चरित्र निर्माण एवं विचारों में सामन्जस्य स्थापित करने का सशक्त माध्यम है। समणी ने अपराधी के हृद्य परिवर्तन को ही अपराध पर अंकुश का माध्यम बताया।

शोधपीठ के उपनिदेशक प्रो अनिलधर ने कुमावत का परिचय प्रस्तुत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। प्रो धर ने समाज में व्याप्त अपराधों पर चिंता व्यक्त करते हुए अपराध निरोध पर बात की। कार्यक्रम का संयोजन डॉ सत्यनारायण भारद्वाज ने एवं आभार ज्ञापन डॉ जुगलकिशोर दाधीच ने व्यक्त किया। कार्यक्रम मेें मंगलसंंगान समणी मृदुप्रज्ञा ने किया। इस अवसर पर प्रो आनन्दप्रकाश त्रिपाठी ने अतिथियों को शॉल, मोमेन्टों एवं साहित्य भेंट कर स्वागत किया। कार्यक्रम में शिक्षक, विद्यार्थी एवं नागरिक उपस्थित थे।

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