जैन विद्या का उत्कृष्ट संस्थान है जैविभा विश्वविद्यालय - मुनि प्रमाण सागर

लाडनूं 6 मई। दिगम्बर जैन आचार्य विद्यासागर के शिष्य मुनि प्रमाण सागर एवं मुनि विराट सागर ने शुक्रवार को जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय का अवलोकन किया। विश्वविद्यालय परिसर में शिक्षकों एवं कर्मचारियों को संबोधित करते हुए मुनि प्रमाण सागर ने कहा कि इस विश्वविद्यालय में जैन विद्या एवं प्राच्य विद्या का उत्कृष्ट कार्य हो रहा है। मुनि ने संस्थान द्वारा किये जा रहे कार्यो को मानव हितकारी बताया। उन्होनें संस्थान को जैन जगत का विशिष्ट संस्थान बताते हुए इसके ओर अधिक विकास की कामना की। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो बच्छराज दूगड ने मुनि श्री को विश्वविद्यालय द्वारा किये जा रहे विविध कार्यो की जानकारी दी। प्रो दूगड ने विश्वविद्यालय के अनुशास्ता आचार्य महाश्रमण के आध्यात्मिक नेतृत्व में संचालित इस विश्वविद्यालय द्वारा शिक्षा जगत में किये जा रहे कार्यो की जानकारी दी। कुलपति प्रो दूगड ने मुनिद्वय को संस्थान द्वारा प्रकाशित साहित्य भी भेंट किया। इस अवसर पर मुनिद्वय ने विश्वविद्यालय के कुलपति कार्यालय, कॉन्फ्रेंस हॉल एवं पुस्तकालय आदि स्थलों का अवलोकन किया।

मुनिद्वय के जैन विश्वभारती प्रांगण में पधारने पर ट्रस्टी भागचन्द बरडिया ने स्वागत किया एवं सचिवालय में जैन विश्वभारती द्वारा संचालित विविध गतिविधियों की जानकारी दी। इस अवसर पर मुनि प्रमाण सागर ने आचार्य तुलसी, आचार्य महाप्रज्ञ और आचार्य महाश्रमण द्वारा रचित साहित्य प्रदर्शनि का अवलोकन किया। बरडिया ने आचार्यो द्वारा रचित साहित्य मुनि को भेंट किया। मुनि श्री ने भिक्षु विहार में विराजित तेरापंथ धर्मसंध के मुनि विमल कुमार एवं अन्य संतो के साथ भेंट वार्ता की। मुनि श्री विमलकुमार ने आचार्य महाश्रमण के निर्देशन में संचालित विविध गतिविधियों व सेवाकेन्द्र के बारे विस्तार से जानकारी दी।

इस अवसर पर प्रो आनन्दप्रकाश त्रिपाठी, प्रो बीएल जैन, राजेन्द्र खटेड, नेपालचन्द गंग, दीपाराम खोजा, महेन्द्र पाटनी, डॉ योगेश जैन, अनिल बैद, राकेश कुमार जैन, भागचन्द काशलीवाल, विनोद पाटनी, सुश्री वीणा जैन, डॉ शांता जैन, डॉ जसवीर सिंह, डॉ वीरेन्द्र भाटी सहित अनेक लोग उपस्थित थे।

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