‘जैन दर्शन एवं विज्ञान’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन सम्पन्न

लाडनूं 09 मई। जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के भगवान महावीर इण्टरनेशनल रिसर्च सेंटर, होलिस्टिक हेल्थ आॅन लाइन थेरेपी कैंपस मुबंई, तुलसी महाप्रज्ञ प्रज्ञाभारती ट्रस्ट एवं अहिंसा सेन्टर, मुंबई एवं भारत जैन महामण्डल मुम्बई के संयुक्त तत्वावधान में मुम्बई में आयोजित भगवती सूत्र के सन्दर्भ में ‘जैन दर्शन एवं विज्ञान’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन का समापन सोमवार को समारोह पूर्वक हुआ। समारोह के मुख्य अतिथि महाराष्ट्र के राज्यपाल सी. विद्यासागर राव ने अध्यात्म विज्ञान के समन्वय की बात कही। उन्होंने कहा कि भारत अध्यात्म के बल पर ही दुनिया का नेतृत्व कर सकता है। समारोह की अध्यक्षता करते हुए मुम्बई हाइकोर्ट के न्यायाधीश के.के. तातेड ने कहा कि जैन दर्शन मानवता को ‘जिओ ओर जीने दो’ का संदेश देता है। यही मूल सिद्धान्त है, जिस पर अमल कर हम शांति और सौहार्द्ध के साथ समाज एवं देश के विकास में योगदान दे सकते हैं।

जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मुनि महेन्द्र कुमार ने कहा कि भगवान महावीर का दर्शन आज के विज्ञान से भी आगे है। हमारे पास जो तत्त्व ज्ञान है, वह बेजोड़ है, जिसका मुकाबला दुनिया का कोई भी देश नहीं कर सकता। हमें इसका सही दिशा में इस्तेमाल करना चाहिए, जिसके लिए विज्ञान और जैन अध्यात्म के बीच सहयोग बढ़ना चाहिये। मुनिश्री ने तत्त्व-ज्ञान पर शोध की आवश्यकता बताई। मुनि अभिजीत कुमार ने बताया कि परमाणु के सूक्ष्म कणों में परिवर्तन की बात विज्ञान मानता है। जैन दर्शन में भी यही बात कही गई है, जिसे हम ‘परिवर्तन प्रकृति का नियम’ के रूप में मानते हैं।

सुप्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक डाॅ. प्रताप संचेती ने अध्यात्म अपने आपमें विज्ञान है। चिकित्सा विज्ञान में भी साबित हो गया है कि जैन अध्यात्म के उपवास स शरीर को लाभ होता है। उपवास के जरिये न सिर्फ रक्तचाप नियंत्रित किया जा सकता है बल्कि कई बीमारियों से भी बचा जा सकता है। प्रेक्षाध्यान के प्रशिक्षक अरूण भाई झवेरी ने कहा कि हम अपनी शक्ति का सही दिशा में किस तरह उपयोग करे इसकी राह भगवान महावीर ने दिखाई है।

वैज्ञानिक संत आचार्य विजयानंदीघोषसूरि ने फिजिक्स के क्वाण्टम सिद्धान्त और जैन अध्यात्म के बीच संबंधों पर विस्तृत प्रकाश डाला। आचार्यश्री ने बताया कि जैन धर्म में भी मैटेरियल इफेक्ट के बारे में बहुत-सी बातें कही गई हैं, जिसका लाभ आधुनिक विज्ञान को उठाना चाहिए। वरिष्ठ वैज्ञानिक डाॅ. नरेन्द्र भण्डारी ने कहा कि जैनिज्म सही अर्थों में एक वैज्ञानिक धर्म है। दुनिया के प्रख्यात वैज्ञानिकों में शुमार भारत में जे.सी. बोस ने 1926 में सिद्ध किया कि पेड़-पौधे भी जीव हैं लेकिन इससे काफी पहले यही बात जैन अध्यात्म में कही गई है। भगवती सूत्र की चर्चा करते हुए डाॅ. सुधीर जैन ने कहा कि इस ग्रंथ से विज्ञान लाभ उठा सकता है। इस अवसर पर कार्यक्रम में उपस्थित महाराष्ट्र के राज्यपाल सी. विद्यासागर राव ने प्रोफेसर मुनि महेन्द्र कुमार द्वारा संपादित ’भगवती सूत्र’ के पांचवे खण्ड का विमोचन किया। इस अवसर पर जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. एम.आर. गेलडा, भगवान महावीर सेण्टर की निदेशक प्रोफेसर समणी चैतन्यप्रज्ञा सहित अनेक लोग उपस्थित थे।

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