अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी का 55वां जन्म दिवस आयोजित

मूल्यों के विकास के प्रति समर्पित हैं आचार्यश्री महाश्रमण - प्रो. दूगड़

लाडनूं, 14 मई। जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के कूलपति कॉन्फ्रेंस हॉल में शनिवार को विश्वविद्यालय के अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी का 55वां जन्म दिवस समारोह पूर्वक मनाया गया। समारोह की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने कहा कि आचार्यश्री महाश्रमणजी मूल्यों के विकास के प्रति समर्पित आचार्य हैं। विश्वविद्यालय आचार्यश्री के आध्यात्मिक नेतृत्व में मूल्यों से प्रेरित शिक्षा प्रदान करने का विशिष्ट कार्य कर रहा है। आचार्यश्री महाश्रमणजी के जीवन दर्शन को प्रस्तुत करते हुए प्रो. दूगड़ ने कहा कि आचार्यश्री महाश्रमणजी का जीवन व दर्शन दोनों शिक्षा देने वाले हैं। आचार्यश्री को मानवता का मसीहा संत बताते हुए उन्होंने आचार्यश्री के नेतृत्व में संचालित विविध गतिविधियों की चर्चा की। प्रो. दूगड़ ने कहा कि आचार्यश्री महाश्रमण अणुव्रत आंदोलन के माध्यम से गांव-गांव पहुंचकर लोगों को नशामुक्त जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं।

प्रो. दूगड़ ने आचार्यश्री महाश्रमण के व्यक्तित्व को रेखांकित करते हुए उनको महान् आचार्य बताया। प्रो. दूगड़ ने आचार्यश्री महाश्रमण की अहिंसा-यात्रा को प्रस्तुत करते हुए उनके द्वारा किये जा रहे मानव कल्याण के कार्यों को बताया। कार्यक्रम में प्रो. आनन्दप्रकाश त्रिपाठी ने आचार्यश्री महाश्रमण के बचपन से लेकर अब तक की आध्यात्मिक यात्रा को प्रस्तुत किया। इस अवसर पर नेपालचन्द गंग, राकेश कुमार जैन, विकास शर्मा, दीपक माथुर आदि ने अपने विचार रखे। इस अवसर पर दीपाराम खोजा, डॉ. जसवीरसिंह, मोहन सियोल सहित विश्वविद्यालय के सभी अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. वीरेन्द्र भाटी मंगल ने किया।

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