प्राच्य विद्या एवं भाषा विभाग द्वारा नवागन्तुक विद्यार्थियों का स्वागत समारोह आयोजित

लाडनूं 13 अगस्त। जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के प्राच्य विद्या एवं भाषा विभाग के तत्वावधान में नवागन्तुक विद्यार्थियों के स्वागत समारोह का आयोजन विभागाध्यक्ष डाॅ. समणी संगीतप्रज्ञा की अध्यक्षता में शनिवार को विश्वविद्यालय के सेमीनार हाॅल में रखा गया। समारोह में संबोधित करते हुए डाॅ. समणी संगीत प्रज्ञा ने कहा कि प्राच्य विद्या का ज्ञान होना प्रत्येक व्यक्ति के लिए जरूरी है। वर्तमान दौर में प्राच्य भाषा के अध्ययन से ही मूल्यों की शिक्षा को समझा जा सकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में व्याप्त समास्याओं पर काबू पाना है तो व्यक्ति को सुसंस्कारी बनाना आवश्यक है। संस्कारों के लिये शास्त्र स्वाध्याय बहुत जरूरी है। प्राच्य भाषा का ज्ञान और संवर्धन ही संस्कारपरक शिक्षा का जनक है। प्रो. दामोदर शास्त्री ने सभी को शुभकामनाएँ देते हुये कहा कि यह समारोह विद्यार्थियों के लिए हर्ष का विषय है। इस अवसर पर समणी भास्कर प्रज्ञा, मुमुक्षु नम्रता, मुमुक्षु शालू, रौनक आदि द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। कार्यक्रम का संचालन करते हुए शोध-छात्रा मनीषा द्वारा जैन विश्वविद्यालय एवं विभाग का परिचय दिया गया। इससे पूर्व छात्रा शोभा नाई ने संस्कृत काव्य में मंगलाचरण प्रस्तुत कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। कार्यक्रम में समणी सम्यक्त्व प्रज्ञा, डाॅ. सत्यनारायण भारद्वाज, डाॅ. वन्दना मेहता, डाॅ. सुनीता इन्दोरिया, मीनाक्षी मारू सहित अनेक विद्यार्थी एवं शिक्षक उपस्थित थे।

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