प्रसार भाषण माला में व्याख्यान का आयोजन

राष्ट्र निर्माण में शिक्षक की अहम भूमिका: प्रो. वशिष्ठ

लाडनूँ, 30 अगस्त। जैन विश्व भारती विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग के तत्वावधान में आयोजित प्रसार भाषण माला के अन्तर्गत आयोजित व्याख्यान में लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत शिक्षा संस्थान, नई दिल्ली के पूर्व कुलपति प्रो. श्रीधर वशिष्ठ ने कहा कि शिक्षा किसी भी राष्ट्र की वह सम्पत्ति है, जिसके माध्यम से युवा पीढ़ी के समुचित विकास का महतीय कार्य संभव है। हर युग में शिक्षा एवं शिक्षक राष्ट्र निर्माण का महत्त्वपूर्ण दायित्त्व पूर्ण करते रहे हैं। प्रो. वशिष्ठ ने सामाजिक, शैक्षिक, राष्ट्रीय एवं सांस्कृतिक परिदृश्य से जुड़ी समस्याओं के विविध कारणों एवं समाधानों पर प्रकाश डाला। वर्तमान शिक्षा प्रणाली में व्याप्त दोषों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि आजकल शिक्षा को केवल रोजगार प्राप्ति का साधन माना जाता है। शिक्षा सेवा के स्थान पर व्यवसाय बनती जा रही है, जिससे अनेक समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं। शिक्षक राष्ट्र-निर्माण की महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करता है अतः उसका चरित्र आदर्श, प्रेरक एवं मार्गदर्शन प्रदान करने वाला होना चाहिये। समाज में व्याप्त विसंगतियों, जैसे जातिप्रथा, लैंगिक विषमता, दहेज प्रथा, महिला उत्पीड़न आदि का समाधान तभी संभव है जब एक शिक्षक, विद्यार्थी में सुनागरिकता, सद्भावना एवं परस्परता के मूल्यों का सींचन करे। भारतीय संस्कृति में निहित मूल्यों एवं उदात्त परम्पराओं को आत्मसात करने की प्रेरणा देते हुए उन्होंने कहा कि धैर्य, क्षमा, अहिंसा, सर्वधर्म समभाव, परोपकार आदि को अपनाकर वर्तमान समाज को आज भी नई दिशा प्रदान की जा सकती है। विभागाध्यक्ष प्रो. बी.एल. जैन ने आभार ज्ञापित करते हुए कहा कि हम सभी के लिए यह सौभाग्य है कि आप जैसे मूर्धन्य विद्वानों के ज्ञान से सभी मार्गदर्शन प्राप्त करते रहते हैं।

Read 771 times

Latest from