गणेश चतुर्थी एवं शिक्षक दिवस का आयोजन

भारतीय संस्कृति में शिक्षक का सर्वोच्च स्थान: प्रो. जैन

लाडनूंँ, 5 सितम्बर, 2016। भारतीय संस्कृति में शिक्षक को सर्वोच्च सम्मान दिया गया है। अतः हम सभी को भावी जीवन में एक मूल्य सम्पन्न, उदात्त चरित्र एवं चरित्र निर्माणकर्ता के रूप में कार्य करना चाहिए। ये उदगार शिक्षा विभाग, जैन विश्वभारती संस्थान के अन्तर्गत आयोजित गणेश चतुर्थी एवं शिक्षक दिवस कार्यक्रम के अन्तर्गत विभागध्यक्ष प्रो. बी.एल. जैन विचार व्यक्त कर रहे थे।

कार्यक्रम का शुभारम्भ बी.एड. छात्राध्यापिकाओं द्वारा मंगलाचरण एवं अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती को माल्यार्पण के साथ हुआ। प्रो. जैन ने समस्त छात्राध्यापिकाओं को कुशलता-सम्पन्न शिक्षक बनने की प्रेरणा देते हुए कहा कि सभी छात्राध्यापिकाएँ भविष्य में ऐसी शिक्षिकाएँ बनें कि उनके कर्तृत्व से हम सभी शिक्षकों का समाज में गौरव बढ़ सके।

डाॅ. बी. प्रधान ने त्रिगुणी शक्ति सम्पन्न बनने हेतु प्रेरणा देते हुए कहा कि एक शिक्षक में गणेश, सरस्वती एवं लक्ष्मी जैसे गुण होने चाहिए। डाॅ. मनीष भटनागर ने सर्वपल्ली डाॅ. राधाकृष्णन के व्यक्तित्व एवं कर्तृत्व से सदैव प्रेरणा लेने हेतु कहा। डाॅ. अमिता जैन ने शिक्षक को एक नेतृत्वकर्ता, प्रेरक एवं राष्ट्र-निर्माता बताया। डाॅ. गिरिराज भोजक ने सभी छात्राध्यापिकाओं को वर्तमान शैक्षिक परिदृश्य में व्याप्त विसंगतियों के समाधान हेतु समर्पित भाव से कार्य करने हेतु प्रेरित किया। डाॅ. आभासिंह ने छात्राध्यापिकाओं को सदैव श्रमशील एवं सृजनशील बनने हेतु प्रेरित किया।

कार्यक्रम के अन्तर्गत एम.एड. एवं बी.एड. छात्राओं द्वारा प्रेरक प्रसंग, गीत नृत्य एवं कविता की प्रस्तुतियाँ दी गईं, जिनमें विमला ठोलिया, गीतांजली, खुशबू योगी, गुंजन चैधरी, अंकिता, अदिति कंवर, प्रभा पिलानिया, धर्मेशिखा, पुष्पा घोटिया आदि प्रमुख रहे। कार्यक्रम का संचालन सुमन महला ने किया। इस अवसर पर अहिंसा एवं शांति विभाग द्वारा शिक्षक दिवस का आयोजन विश्वविद्यालय के सेमीनार हाॅल में समारोह पूर्वक किया गया। कार्यक्रम में प्रो. अनिल धर, डाॅ रविन्द्र सिंह, डाॅ. विकास शर्मा सहित अनेक लोगों ने अपने विचार रखे।

Read 1232 times

Latest from