नैतिक दर्शन विषय पर व्याख्यानमाला आयोजित

लाडनूंँ, 15 अक्टूबर 2016। जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय द्वारा नैतिक दर्शन विषय पर आयोजित व्याख्यानमाला की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने भारतीय दर्शन एवं काण्ट के दर्शन की तुलना करते हुए आत्मशुद्धि एवं कर्तव्य को प्रमुख बताया। प्रो. दूगड़ ने कहा कि भारतीय दर्शन श्रेयोन्मुख रहा है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के निदेशक प्रो. आनन्दप्रकाश त्रिपाठी ने नैतिक मूल्यों का वैशिष्ट्य प्रस्तुत करते हुए जर्मनी के दार्शनिक काण्ट के नैतिक दर्शन को प्रस्तुत किया। उन्होंने सद्इच्छा, कर्तव्य व नैतिकता के निरपेक्ष आदेश की मीमांसा करते हुए नैतिक मूल्यों के प्रति समर्पण को जरूरी बताया। प्रो. त्रिपाठी ने बताया कि काण्ट का जीवन कर्तव्य के प्रति पूरी तरह समर्पित था, इसलिये उन्होंने सम्पूर्ण मानव जाति के लिये कर्तव्य के लिये कर्तव्य का सिद्धान्त प्रतिपादित किया, जिसके अनुसार प्रत्येक व्यक्ति का लक्ष्य कर्तव्य की पूर्ति होना चाहिए, न कि फलासक्ति। व्याख्यानमाला के संयोजक डाॅ. मनीष भटनागर ने स्वागत एवं डाॅ. सत्यनारायण भारद्वाज ने आभार ज्ञापित किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के सभी विभागाध्यक्ष एवं शिक्षक उपस्थित थे।

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