दूरस्थ शिक्षा निदेशालय द्वारा द्विदिवसीय क्षेत्रीय समन्वयक कार्यशाला का आयोजन

दूरस्थ शिक्षा में गुणवत्ता आवश्यक - प्रो. के.एन. व्यास

लाडनूं, 24 अक्टूबर, 2016। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) लाडनूं के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय द्वारा 24-25 अक्टूबर को क्षेत्रीय समन्वयक कार्यशाला का आयोजन संस्थान परिसर में किया गया। कार्यशाला के मुख्य अतिथि जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के निवर्तमान प्रोफेसर के.एन. व्यास ने कहा कि यह विश्वविद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में जो कार्य कर रहा है वह अद्वितीय है। शिक्षा अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाती है। महिला शिक्षा विकास की दृष्टि से यह संस्थान जो कार्य कर रहा है, वह प्रशंसनीय है। आचार्य तुलसी महिला शिक्षाा के विशेष हिमायती थे। उन्होंने शिक्षा में गुणवत्ता लाने के लिए अत्यधिक बल दिया था। आगे श्री व्यास ने दूरस्थ शिक्षा में गुणवत्ता पर विशेष बल दिया और कहा कि यह संस्थान इस प्रकार की शिक्षा के लिए याद किया जाता है।

कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रो. बच्छराज दूगड़ ने संस्थान के दूरस्थ शिक्षा पाठ्यक्रम में प्रामाणिकता पर बल दिया। उन्होंने समन्वयकों को प्रेरित करते हुए कहा कि सभी अपने-अपने क्षेत्रों में कार्य करें। महिला शिक्षा को केन्द्र में रखें। उन्होंने कहा कि दूरस्थ शिक्षा में आधुनिक तकनीकी का उपयोग जरूरी है। दूरस्थ शिक्षा के निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने कार्यक्रम की रूपरेखा एवं स्वरूप को प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम का शुभारम्भ समणी मृदुप्रज्ञा के मंगल संगान के साथ हुआ। कुलसचिव विनोद कक्कड़ ने स्वागत वक्तव्य दिया। इस अवसर पर अच्छे कार्य के लिए देवातु के समन्वयक दिव्या राठौड़, सीकर के समन्वयक दुर्गालाल पारीक, सांचैर के समन्वयक युधिष्ठिर श्रीमाली, गच्छीपुरा के समन्वयक हनुमानाराम तथा जोधपुर के समन्वयक कुशलराज समदड़िया को कुलपति एवं मुख्य अतिथि के करकमलों से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संयोजन नूपुर जैन एवं आभार ज्ञापन जे. पी. सिंह ने किया।

25 अक्टूबर 2016। दिनांक 25 अक्टूबर को समणी नियोजिका प्रो. समणी ऋजुप्रज्ञा के सान्निध्य में कार्यशाला का समापन सत्र आयोजित किया गया। दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि विविध क्षेत्रों में दूरस्थ शिक्षा के लिये कार्य कर रहे लगभग 82 क्षेत्रीय समन्वयकों ने कार्यशाला का लाभ उठाया। इस कार्यशाला में संस्थान की समस्त प्रवृत्तियों एवं गतिविधियों एवं दूरस्थ शिक्षा पाठ्यक्रम के अन्तर्गत प्रवेश कार्य, सत्रीय कार्य, सम्पर्क कक्षा एवं परीक्षा तथा मूल्यांकन के संदर्भ में जानकारी प्रदान की गई। दूरस्थ शिक्षा के क्षेत्र में अच्छे काम कर रहे समन्वयकों को सम्मानित भी किया गया।

कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रो. अनिल धर ने अपने वक्तव्य में कहा कि दूरस्थ शिक्षा उन सभी लोगों के लिए अत्यन्त उपयोगी है जो निजी कारणों से अपने अध्ययन को आगे नहीं बढ़ा पाते। संस्थान के लिए समन्वयकगण जो कार्य कर रहे हैं वह एक अनूठी सेवा है। प्रो. समणी ऋजुप्रज्ञा ने कहा कि सेवा सबसे बड़ा धर्म है। विभिन्न क्षेत्रीय समन्वयकों की जो निः स्वार्थ सेवा है वह प्रशंसनीय है। उन्होंने कहा कि शिक्षा से बढ़कर कुछ नहीं है। शिक्षा से समस्त समस्याओं का समाधान संभव है। समापन कार्यक्रम का शुभारम्भ समणी मृदुप्रज्ञा के मंगलसंगान के साथ हुआ। इस सत्र का संयोजन समणी डाॅ. शुभप्रज्ञा ने एवं आभार ज्ञापन प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने किया।

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