विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं का आयोजन

विद्यार्थियों की क्षमताओं को उजागर करें - प्रो. दूगड़

लाडनूँ, 14 दिसम्बर, 2016। जैन विश्वभारती संस्थान मान्य विश्वविद्यालय के अन्तर्गत बुधवार को तीन दिवसीय सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं का शुभारम्भ एसडी घोड़ावत आॅडिटोरियम में किया गया। संस्थान के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता करते हुए कहा कि विद्यार्थियों में विभिन्न क्षमताएँ मौजूद रहती हैं, उन्हें पहचानने और बाहर निकालने का काम शिक्षकों को शिक्षण कार्य के साथ करना चाहिए। कलाओं का विकास करने के लिए शिक्षकों को अपने विद्यार्थियों की क्षमताओं को परखकर उनकी प्रवीणता में वृद्धि लाकर उन्हें जीवन में सफल बनाना चाहिए। कुलपति दूगड़ ने प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करते हुए घोषणा की कि राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम व द्वितीय आने वाले विद्यार्थियों को 5100 रुपये तथा ग्रुप को 7100 रुपये विश्वविद्यालय की ओर से दिये जायेंगे। इसके अलावा राज्य स्तर पर प्रथम व द्वितीय रहने वाले विद्यार्थी व ग्रुप को क्रमशः 2100 रुपये एवं 3100 रुपये का नकद पुरस्कार दिया जायेगा। उन्होंने छात्राओं से आह्वान किया कि वे इन प्रतियोगिताओं के जरिये अपनी रचनात्मकता को बाहर निकालें तथा विश्वविद्यालय को अद्वितीय बनाने में अपनी भूमिका निभाएँ। इस अवसर पर उन्होंने अगले सत्र से विश्वविद्यालय की परीक्षा-पद्धति को बदलने की घोषणा की तथा बताया कि अब केवल सेमेस्टर के अंत में वार्षिक परीक्षाएं ही नहीं बल्कि हर यूनिट के समाप्त होने पर इंटरनल परीक्षाएं भी होंगी तथा विद्यार्थियों के कम अंक होने पर उन्हें छोटे-छोटे कोर्स के माध्यम से जोड़ने का समुचित अवसर दिया जायेगा।

झिझक मिटायें विद्यार्थी

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलसचिव वी.के. कक्कड़ ने अपने संबोधन में कहा कि नैतिक शिक्षण के साथ हाॅबीज का शिक्षण भी आवश्यक है। आजकल हाॅबी आमदनी का जरिया भी बन चुकी है तथा शोहरत व स्टेटस का माध्यम भी है। शिक्षकों को अपने विद्यार्थियों को इसके लिए मोटिवेट करना चाहिए। साथ ही विद्यार्थियों को अपनी झिझक को समाप्त करना चाहिए। उन्होंने एकेडमिक कैलेण्डर की तर्ज पर स्पोर्ट्स एक्टीविटिज का कैलेण्डर भी तैयार करना जरूरी बताया, जिससे संस्थान में खेल व कला संबंधी गतिविधियां सुचारू हो सकेंगी।

झिझक मिटायें विद्यार्थी

समारोह का आरम्भ रागिनी शर्मा द्वारा नृत्य प्रस्तुति के साथ सरस्वती-वंदना द्वारा किया गया। सांस्कृतिक प्रभारी डाॅ. अमिता जैन ने सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं की जानकारी दी। प्रो. आर.बी.एस. वर्मा व प्रो. बी.एल. जैन ने अतिथियों का स्वागत किया। अन्त में धन्यवाद-ज्ञापन डाॅ. विवेक माहेश्वरी ने किया। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. अदिति गौतम ने किया। बुधवार को नाटक प्रतियोगिता, मेहंदी प्रतियोगिता एवं पोस्टर पेंटिग प्रतियोगिता आयोजित की गई। इन प्रतियोगिताओं में निर्णायक के रूप में प्रो. दामोदर शास्त्री, उपकुलसचिव नेपालचंद गंग, डाॅ. प्रद्युम्नसिंह शेखावत, डाॅ. प्रगति भटनागर, डाॅ. सरोज राय व डाॅ. ज्योति स्वामी मौजूद थे। तीन दिन चलने वाले इस प्रतियोगिता में गुरुवार को भाषण, एकल गायन, रंगोली, विचित्र वेशभूषा के साथ मूकाभिनय प्रतियोगिताएँ आयोजित की गईं।

लाडनूँ, 15 दिसम्बर, 2016। दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने लोहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा भारत को एक बनाने से लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा भारत को श्रेष्ठ बनाने तक यात्रा का वर्णन करते हुए कहा कि महान् कार्य के लिए निर्णय लेने पड़ते हैं और मजबूत निर्णय से ही देश को श्रेष्ठता की ओर ले जाया जा सकता है। किसी भी कठोर निर्णय से नागरिकों को थोड़ी परेशानी तो अवश्य हो सकती है लेकिन राष्ट्र के उत्थान के लिए ऐसे निर्णय मददगार होते हैं। उन्होंने सरदार पटेल द्वारा 101 छोटी-बड़ी रियासतों को एक सूत्र में बांधने से लेकर स्वच्छ भारत अभियान, हर घर में शौचालय, उज्ज्वला योजना, कानूनों व नियमों को कम करने, नोटबंदी आदि कदमों को भारत को श्रेष्ठ बनाने के प्रयासों में मील का पत्थर बताया। वे विश्वविद्यालय के एस.डी. घोड़ावत आॅडिटोरियम में सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के अन्तर्गत आयोजित भाषण प्रतियोगिता में संबोधित कर रहे थे। शिक्षा-विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बी.एल. जैन ने शिक्षा, ज्ञान और जागरुकता को हर व्यक्ति और समूचे देश को अच्छा बनाने के लिए आवश्यक बताया। उन्होंने नदी, समुद्र, लेखक, कवि आदि को श्रेष्ठ-भारत की पहचान बताया।

भाषण प्रतियोगिता में ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ विषय पर सात प्रतिभागियों-कोमल चैधरी, प्रीति स्वामी, सुमन सोमड़वाल, शिवानी गहलोत, रागिनी शर्मा, सुनिता सारण, चंचल गौड़ व मुमुक्षु आरती ने अपने विचार व्यक्त किये। डाॅ. अंकिता जांगिड़ व डाॅ. बी. प्रधान ने निर्णायकों का स्वागत किया। प्रतियोगिता के निर्णाक प्रो. आनन्दप्रकाश त्रिपाठी, प्रो. बी.एल. जैन व डाॅ. गिरधारीलाल शर्मा थे। कार्यक्रम के अन्त में सांस्कृतिक समन्वयक डाॅ. अमिता जैन ने आभार ज्ञापित किया। प्रतियोगिता का संचालन डाॅ. गिरिराज भोजक ने किया।

रंगोली प्रतियोगिता में सजाई मनमोहक रंगोलियाँ

विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के अन्तर्गत गुरुवार को रंगोली प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। संस्थान के शिक्षा-विभाग परिसर में छात्राओं के 17 समूहों द्वारा विभिन्न आकर्षण रंगोलियाँ सजाई गईं। डाॅ. बी. प्रधान, डाॅ. सुनिता इन्दौरिया, अंकिता जांगिड़ व सोनिका जैन ने निर्णायक के तौर पर इन रंगोलियों का अवलोकन किया। रंगोली प्रतियोगिता में अंकिता मारू, सायर स्वामी, लक्ष्मी, चन्दा कुमारी, चंचल गौड़, कैलाश देवी, सपना, सरिता राहड़, नौरंगी, रश्मि, सुरक्षा जैन, पूजा वैष्णव, सुनिता गौड़, मोनिका, मैना सियाक, सुमन लटियाल व चम्पा प्रजापत के समूहों ने भाग लिया।

विचित्र वेशभूषा व एकल गायन प्रतियोगिताएँ आयोजित

विश्वविद्यालय के एसडी घोड़ावत आॅडिटोरियम में आयोजित विचित्र वेशभूषा एवं मूकाभिनय में राधा मूण्ड, अंकिता मारू, चंचल गौड़, पुष्पा घोटिया व सुमन लटियाल ने विभिन्न प्रकार की वेशभूषा धारण करके हास्यास्पद मौन अभिनय किया। इस प्रतियोगिता के निर्णायक अनूप तिवाड़ी, हेमलता, डाॅ. पुष्पा मिश्रा थी। एकल लोक-गायन में प्रियंका नागपुरिया, सुरक्षा जैन, राधा मूण्ड, रागिनी शर्मा, प्रीति स्वामी, आकांक्षा व मुमुक्षु शिक्षा ने राजस्थानी गीतों की मनभावन प्रस्तुति दी। एकल फिल्मी-गायन में छात्रा प्रियंका नागपुरिया, ज्योति चिण्डालिया, सुरक्षा जैन, प्रीति स्वामी, निलोफर बानो, सुमन नैण, ममता घांची, अंकिता मारू, चंचल गौड़, पुष्पा घोटिया, रागिनी शर्मा, सुनिता सहारण, सरिता शर्मा, चेतना व नम्रता ने प्रस्तुतियाँ दीं। पूजा वशिष्ठ व सुनिता सारण ने मंच का संचालन किया। इस अवसर पर विवेक माहेश्वरी, अंकिता जांगिड़, डाॅ गिरिराज भोजक, डाॅ अमिता जैन आदि उपस्थित थे।

लाडनूँ, 16 दिसम्बर, 2016। सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के समापन-समारोह को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने कहा कि अपनी प्रस्तुति में संभागी जब तक पूरी तरह तल्लीन नहीं हो जाता और उसे स्वयं आनन्द नहीं आता तब तक वह प्रस्तुति श्रेष्ठ नहीं हो सकती। उन्होंने विद्यार्थियों को सांस्कृतिक कार्यक्रम में दी जाने वाली प्रस्तुति में खुद एन्जोय करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अनुशासन और शिक्षकों के सम्मान पर पूरा ध्यान जाना चाहिए तथा मर्यादाओं का पालन करना चाहिए। दूगड़ ने कहा कि हमारा जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय अन्य विश्वविद्यालयों से कुछ अलग होना आवश्यक है। इस तरफ विद्यार्थियों को पूरा ध्यान देना चाहिए। उन्होंने घोषणा की कि अगले सत्र में कुछ व्यवस्थाओं को ओर बढ़ायेंगे लेकिन उनका पूरा उपयोग होना आवश्यक है। इस अवसर पर रजिस्ट्रार विनोदकुमार कक्कड़ ने अपने संबोधन में कहा कि इन सांस्कृतिक कार्यक्रमों को देखने के बाद प्रतीत होता है कि विद्यार्थियों में भरपूर ऊर्जा है, लेकिन यह ऊर्जा निरन्तर बरकरार रहनी चाहिए तथा प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली प्रतियोगिताओं में इस जोश व ऊर्जा के कारण यह साबित हो सके कि यह विश्वविद्यालय किसी से कम नहीं है। समाजकार्य विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. आर.बी.एस. वर्मा ने इस अवसर पर कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी को हर क्षेत्र में शिक्षित व प्रशिक्षित किया जाये तभी उसकी शिक्षा पूर्ण होती है। उच्च शिक्षा में सर्वांगीण शिक्षा के सारे आयाम होने आवश्यक है। प्रारम्भ में अंकिता जांगिड़ ने सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। अन्त में सांस्कृतिक समन्वयक डाॅ. अमिता जैन ने आभार ज्ञापित किया। शुक्रवार को सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के तहत एकल लोक नृत्य, एकल फिल्मी नृत्य एवं सामूहिक नृत्य प्रतियोगिताओं का आयोजित किया गया। इस अवसर पर डाॅ. बी. प्रधान, डाॅ. सुनिता इन्दोरिया, डाॅ. अंकिता जांगिड़, सोनिका जैन, डाॅ. विवेक माहेश्वरी, डाॅ. अदिति गौतम, सुश्री नुपुर जैन, सुश्री पूजा जैन आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. गिरिराज भोजक ने किया।

प्रतियोगिता के परिणामों की घोषणा

जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार विनोद कुमार कक्कड़ ने सांस्कृतिक प्रतियोगिता के परिणामों की घोषणा करते हुए बताया कि नाटक प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर विजयश्री रांकावत व समूह रहा, द्वितीय स्थान पर पार्वती एवं समूह तथा तृतीय स्थान पर चंचल गौड़ व समूह रहे। मेहंदी प्रतियोगिता में तब्बसुम ने पहला स्थान प्राप्त किया, अलका चैधरी दूसरे और अंकिता मारू तीसरे स्थान पर रही। पोस्टर पेंटिंग प्रतियोगिता में पहले स्थान पर सुमन लटियाल, द्वितीय स्थान पर प्रीति स्वामी व तृतीय स्थान राधा मूण्ड रही। रंगोली प्रतियोगिता में अंकिता मारू एवं समूह प्रथम स्थान पर, कैलाश देवी व समूह द्वितीय स्थान पर और सरीता राहड़ व समूह तृतीय स्थान पर रहे। भाषण प्रतियोगिता में कोमल चैधरी व मुमुक्षु आरती प्रथम स्थान पर रही। द्वितीय स्थान पर रागिनी शर्मा व तृतीय स्थान पर सुनिता सहारण रही। विचित्र वेशभूषामय मूकाभिनय प्रतियोगिता में प्रथम अंकिता मारू, द्वितीय राधा मूण्ड और तृतीय चंचल गौड़ रही। एकल लोक-गायन में सुरक्षा जैन प्रथम, आकांक्षा द्वितीय व रागिनी तृतीय रही। फिल्मी एकल गायन में सुरक्षा जैन प्रथम, आकांक्षा द्वितीय व मुमुक्षु शिक्षा तृतीय रही। फिल्मी एकल नृत्य में पहले स्थान में आनन्दपाल सिंह जोधा, द्वितीय स्थान पर रागिनी शर्मा व विजयश्री रांकावत और तृतीय स्थान पर अंकिता मारू रही। एकल लोकनृत्य में सुमन सिम्मल प्रथम, आरती द्वितीय व साक्षी शर्मा तृतीय रही। सामूहिक लोकनृत्य में प्रथम स्थान पर अंकिता मारू व समूह, द्वितीय स्थान पर दिव्या सैनी व समूह तथा तृतीय स्थान पर चंचल गौड़ व समूह रहे।

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