अनेकान्तवाद पर व्याख्यानमाला आयोजित

अनेकान्त में समस्त समस्याओं का हल - प्रो. शास्त्री

लाडनूँ, 17 दिसम्बर, 2016। राष्ट्रपति सम्मान हेतु चयनित प्रख्यात संस्कृत व वैदिक विद्वान प्रो. दामोदर शास्त्री ने कहा है कि जैनदर्शन का अनेकान्त सिद्धान्त अपने आप में अद्वितीय है तथा वर्तमान की समस्त समस्याओं व विवादों का निस्तारण करने में पूरी तरह सक्षम है। उन्होंने यहां जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के सेमिनार हाॅल में आयोजित व्याख्यानमाला में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए कहा कि अनेकान्तवाद में किसी भी विवाद को स्थान नहीं मिलता, क्योंकि यह समस्त विचारधाराओं के बीच समन्वय स्थापित करता है। किसी भी बात के अनेक पहलु और दृष्टिकोण हो सकते हैं। यह केवल सोचने के तरीके का अन्तर है और यह सच्चाई है कि हर पहलु अपने आप में कहीं न कहीं सही होता है। इसलिए किसी भी विचार को केवल इसलिए नकारा नहीं जाना चाहिए कि वह हमारे विचार से मेल नहीं खाता। व्याख्यानमाला का प्रारम्भ समणी प्रणवप्रज्ञा के मंगलाचरण से किया गया तथा अन्त मंे डाॅ. योगेश कुमार जैन ने आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. सत्यनारायण भारद्वाज ने किया। इस अवसर पर प्रो. आर.बी.एस वर्मा, प्रो. बी.एल. जैन, डाॅ प्रद्युम्नसिंह शेखावत, डाॅ जुगलकिशोर दाधीच, प्रो. समणी ऋजुप्रज्ञा, समणी शशि प्रज्ञा एवं विश्वविद्यालय के शैक्षणिक सदस्य व शोधार्थी उपस्थित थे।

Read 605 times

Latest from