जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय ने तैयार की शोध-प्रोत्साहन परियोजना

उच्च स्तरीय शोध को बढ़ावा देने के लिये दस लाख तक आर्थिक सहायता

लाडनूँ, 27 दिसम्बर, 2016। जैन विश्वभारती संस्थान मान्य विश्वविद्यालय विभिन्न क्षेत्रों में उच्च स्तरीय शोधकार्य को प्रोत्साहन देने के लिये विशेष सहायता प्रदान करने का कार्य कर रहा है। इसके लिये शिक्षकों को उनके अभिनव शोध-कार्य के लिये वित्तीय सहायता प्रदान की जाने की व्यवस्था की गई है। कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने बताया कि शोध-प्रोजेक्ट के लिये कार्यरत ऐसे नवाचारी शिक्षक, सेवानिवृत्त प्रोफेसर्स, प्रसिद्ध स्काॅलर्स, युवा-शोधार्थी, विद्वान् अध्येता आदि इस विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित विज्ञप्ति के आधार पर प्रोजेक्ट हेतु आवेदन कर सकते हैं। प्रस्तावित प्रोजेक्ट के विषय, विषय-वस्तु एवं गुणवत्ता के संबंध में निर्णय संस्थान द्वारा गठित विशेषज्ञ-समिति करेगी तथा शोधकत्र्ता को आवश्यकतानुसार संशोधन हेतु निर्देशित भी किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि इस हेतु शोध-कार्य की तीन श्रेणियाँ निर्धारित की गई हैं-पायलट प्रोजेक्ट के लिये 50 हजार, माइनर रिसर्च प्रोजेक्ट के लिये 2 लाख और मेजर रिसर्च प्रोजेक्ट के लिये 10 लाख रुपये तक का वित्तीय सहयोग संस्थान द्वारा उपलब्ध करवाया जाएगा। इस राशि का उपयोग शोधकत्र्ता अपने शोध-कार्य के लिए उपकरण, पुस्तकें, जर्नल, स्टेशनरी, प्रिण्टिंग, विश्लेषण सेवाएँ प्राप्त करने तथा आवश्यक यात्रा, फील्ड वर्क, सेमिनार, वर्कशाॅप आदि के लिये कर सकेगा। पायलट रिसर्च प्रोजेक्ट पूर्ण करने की अवधि छह माह, माइनर प्रोजेक्ट हेतु एक वर्ष एवं मेजर रिसर्च प्रोजेक्ट हेतु दो वर्ष की अवधि निर्धारित की गई है। शोधकर्ता को अपने शोधकार्य का प्रगति-प्रतिवेदन पायलट व माइनर प्रोजेक्ट के लिये प्रत्येक तीन माह में और मेजर प्रोजेक्ट के लिये हर छह माह में संस्थान में प्रस्तुत करना होगा।

इस संबंध में कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ की अध्यक्षता में एक बैठक का आयोजन कर विस्तृत गाइड-लाईन तय की गई। इस बैठक में प्रो. महावीरराज गेलड़ा, प्रो. नरेश दाधीच, प्रो. के.एन. व्यास, प्रो. के.एस. सक्सेना, प्रो. आशुतोष प्रधान, प्रो. आरबीएस वर्मा, प्रो. आनन्दप्रकाश त्रिपाठी व प्रो. अनिल धर शामिल हुए। बैठक में तय किया गया कि विश्वविद्यालय की इस परियोजना के लिये इच्छुक शोधकत्र्ता अपना प्रोजेक्ट स्वयं अथवा किसी संस्थान, पंजीकृत संगठन, एजेन्सी के माध्यम से प्रस्तुत करके इस योजना में शामिल हो सकते हैं। किसी भी प्रोजेक्ट को स्वीकृत करने का अन्तिम निर्णय कुलपति के अधीन रहेगा। इस योजना का उद्देश्य संस्थान में अनवरत उच्च स्तरीय शोध को बढ़ावा देना है।

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