जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय में नववर्ष समारोह का आयोजन

चुनौतियों का सामना करने से मिलता है सफलता का आनन्द - प्रो. दूगड़

लाडनूँ, 02 जनवरी, 2017। जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के महाप्रज्ञ सभागार में नववर्ष के उपलक्ष में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने कहा कि उल्लास चुनौतियों से होकर गुजरता है। जीवन में जितनी चुनौतियां ज्यादा होती हैं, उतनी ही आनन्द की अनुभूति अधिक होती है। हम चुनौतियों का सामना करते हैं तब सफलता मिलती है और प्रसन्नता का अनुभव होता है। उन्होंने कहा कि सफलता की गणना होती है लेकिन प्रसन्नता और आनन्द की गिनती नहीं होती है। कुलपति प्रो. दूगड़ ने किसी भी आदर्श का अनुकरण करने के बजाय स्वयं का आदर्श प्रस्तुत करने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि सफलता तभी मानी जाती है, जब व्यक्ति अपने आपको आदर्श के रूप में प्रस्तुत कर पाये। अगर किसी अन्य से उसकी तुलना होती है तो उसकी सफलता अधुरी है। अपना मार्ग खुद ही बनाये तो वह व्यक्ति सफल होता है। दूसरे के मार्ग पर चलकर सफलता तक पहुंचने में मिली खुशियां वो आनन्द नहीं दे पाती जो खुद के मार्ग से बनती हैं। उन्होंने कहा कि कभी भी चुनौतियों से परेशान नहीं होना चाहिए। चुनौतियों का मुकाबला करने से ही व्यक्ति में निखार आता है। समारोह में समणी नियोजिका ऋजुप्रज्ञा ने कहा कि हर व्यक्ति खुश रहना चाहता है लेकिन प्रतिकूलताओं में व्यक्ति अपने आपको दुःखी महसूस करता है। लेकिन जो अपनी सोच को सकारात्मक रखते हैं, वे कभी दुःखी नहीं हो सकते। नकारात्मक सोच दुःख का कारण बनती है और सकारात्मक सोच सुख का अनुभव कराती है। उन्होंने खुशी के लिए तीन चीजें आवश्यक बताईं, जिनमें एक्सेप्ट यानि परिस्थिति को स्वीकार करना, एडजस्ट यानि परिस्थिति के साथ समायोजन करना और एप्रीशियेसन क्वालिटी का विकास करना आवश्यक है। नये साल में संकल्प करें कि इन तीनों सूत्रों को अपनाकर अपने सपनों को सफलता का रूप देंगे।

विभिन्न मनोरंजन प्रतियोगिताओं का आयोजन

नववर्ष समारोह में बच्चों के लिये बैलून-दौड़ एवं चम्मच-चल दौड़ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। बैलून दौड़ में आलोक शास्त्री, अंकिता जैन व संयम जैन विजेता रहे तथा चम्म-चल दौड़ में नैना शेखावत प्रथम स्थान पर रही। शहरों के नाम अंकित करने की प्रतियोगिता में विजेता के रूप में विनोद कुमार कक्कड़ व मनीष भट्नागर रहे। बैलून फुलाने व फौड़ने की युगल प्रतियोगिता में प्रद्युम्नसिंह शेखावत दम्पति विजेता रहे। फैमिली गु्रप की याद्दाश्त परखने के लिए क्रमवारों चित्रों के नामांकन प्रतियोगिता में मनीष भट्नागर एवं उनका परिवार प्रथम रहा। म्युजिकल चैयर प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर नेपालचंद गंग व प्रो. बी.एल. जैन एवं महिलाओं में विजेता सोनिका जैन रही। प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में दीपक माथुर विजेता रहे। महिलाओं के लिए रसोईघर में काम आने वाली सफेद वस्तुओं के नाम लिखने की प्रतियोगिता में नौ सहभागी सम्मिलित हुईं, जिनमें से वर्षा शर्मा ने सर्वाधिक नाम लिखकर पुरस्कार प्राप्त किया।

गीत, नृत्य आदि कार्यक्रमों का आयोजन

कार्यक्रम का शुभारम्भ छात्रा सुमन द्वारा गणपति वन्दना से प्रारम्भ किया गया। सूरजपाल ने केशरिया बालम आओ नी पधारो म्हारे देश... का स्वागत गीत प्रस्तुत किया। छात्र सुमन सिमर ने म्हारी चुड़ियां खनक रे, खनक जासी गीत पर लोक नृत्य पेश किया एवं छात्र आनन्दपाल सिंह ने मनमोहक नृत्य का कार्यक्रम प्रस्तुत किया। डाॅ. गिरधारीलाल शर्मा ने संसार है इक नदिया है.... गीत एवं डाॅ. गिरिराज भोजक ने तेरे बिना जिन्दगी से कोई शिकवा नहीं... गीत प्रस्तुत किये। डाॅ. युवराजसिंह खंगारात, डाॅ. प्रद्युम्नसिंह शेखावत, नुपूर जैन, पूजा जैन आदि ने भी विभिन्न मनोरंजक कार्यक्रम प्रस्तुत किये। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. विवेक माहेश्वरी, डाॅ. योगेश जैन व डाॅ. आभा सिंह ने किया। कार्यक्रम में कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़, रजिस्ट्रार वी.के. कक्कड़ के अलावा उपकुलसचिव नेपालचंद गंग, प्रो. आर.बी.एस. वर्मा, प्रो. अनिल धर, प्रो. आनन्दप्रकाश त्रिपाठी, प्रो. बी.एल. जैन, डाॅ. रविन्द्र सिंह, वित्ताधिकारी आर.के. जैन, डाॅ. अमिता जैन, डाॅ. जुगलकिशोर दाधीच आदि उपस्थित थे।

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