कॅरियर परामर्श कार्यक्रम आयोजित

लाडनूँ, 29 नवम्बर, 2017। आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के तत्त्वावधान में जैन विश्वभारती संस्थान के आॅडिटोरियम में कॅरियर परामर्श कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस परामर्श कार्यक्रम में राजकीय भूतोड़िया गल्र्स स्कूल, केसर देवी गल्र्स स्कूल एवं मौलाना आजाद स्कूल की 11वीं एवं 12वीं की छात्राओं ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. आनन्दप्रकाश त्रिपाठी ने अपने वक्तव्य में कहा कि प्रायः विद्यार्थियों के समक्ष यह मुख्य प्रश्न रहता है कि वे आगे की शिक्षा कहाँ ग्रहण करें? विद्यार्थी सबसे पहले अपने क्षेत्र में देखता है कि अध्ययन की उत्तम व्यवस्था कहाँ है। यह विद्यार्थी का अधिकार है। प्रत्येक विद्यार्थी को चाहिए की उच्च शिक्षा हेतु प्रवेश के लिए फूंक-फूंक कर कदम उठाये। किसी से प्रभावित या प्रेरित होकर निर्णय न ले अपितु जाँच-परख कर निर्णय ले, क्योंकि इस निर्णय से उसका भविष्य प्रभावित होता है। प्रो. त्रिपाठी ने आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के बी.ए., बी.काॅम एवं बी.एस-सी. पाठ्यक्रम पर प्रकाश डाला तथा यह भी बताया कि इस महाविद्यालय में अध्ययन के साथ चरित्र-निर्माण पर विशेष बल दिया जाता है। यहाँ विद्यार्थी के सर्वांगीण व्यक्तित्व को निखारा जाता है। अध्ययन के साथ लिखने, बोलने का अभ्यास विवेकानन्द क्लब द्वारा कराया जाता है। नृत्य, चित्रकारी, भाषण आदि करवाने पर विशेष बल दिया जाता है। समय-समय पर अभिभावकों के साथ संगोष्ठी करके विद्यार्थियों की प्रगति का लेखा-जोखा लेकर भावी नीतियाँ निर्धारित होती है। प्रो. त्रिपाठी ने महाविद्यालय में ज्ञानकेन्द्र के माध्यम से विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की व्यवस्था पर भी प्रकाश डाला। आगे उन्होंने यह भी कहा कि यह एक विश्वविद्यालय है जहाँ प्रवेश लेकर बी.ए., एम.ए., पी-एच्.डी. आदि संपूर्ण शिक्षा ग्रहण की जा सकती है।

इस अवसर पर अहिंसा शांति विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. जुगल किशोर दाधीच ने कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से लाडनूं एवं परिपाश्र्व में स्थित विद्यालयों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए जागरूक किया जा रहा है। संस्थान के द्वारा विद्यार्थियों तक पहुँचने एवं उनको मार्गदर्शन देने का प्रयास हो रहा है। इस अवसर पर केसर देवी स्कूल की प्राध्यापिका आरती पटेल एवं संतोष, मौलाना आजाद स्कूल के इमरान एवं भूतोड़िया स्कूल के सुशीला एवं शिल्पा उपस्थित थे।

Read 895 times

Latest from