रिसर्च मेथोडोलोजी पर व्याख्यान आयोजित

प्राच्य विद्याओं के संरक्षण के लिये आवश्यक है शोध- प्रो. यादव

लाडनूँ, 14 फरवरी 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के प्राकृत एवं संस्कृत विभाग तथा अहिंसा एवं शांति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को सेमिनार हाॅल में रिसर्च मेथोडोलोजी (शोध-क्रियाविधि) विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया। इस में मुख्य वक्ता कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय के गांधी अध्ययन केन्द्र के निदेशक प्रो. आरएस यादव ने कहा कि संस्कृत व प्राकृत भाषाओं एवं प्राच्य विद्याओं की धरोहर के विकास के लिये उन पर शोध कार्य किया जाना आवश्यक है। इससे उनका संरक्षण होता है और उन्हें समझने में भी नई पीढी को आसानी रहती है। रिसर्च हमारी शैक्षणिक प्रतिभा को उभरने का सुन्दर अवसर भी है। उन्होंने कहा कि आज वैश्विक परिदृश्य में भौतिक संसाधनों एवं प्रायोगिक विषयों पर अधिक बल दिया जा रहा है, लेकिन प्राच्य विधाओं का संरक्षण केवल  रिसर्च के बल पर ही संभव है। शोध से धरोहर का संरक्षण हो पाता है। यादव ने रिसर्च करने की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी तथा द प्राॅब्लम, रिव्यू आफ द सोर्सेज, फुटनोट्स आदि बिन्दुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस अवसर पर शोध-विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया व उन्हें उचित तरीके से शोध करने के लिये प्रेरित किया। प्रारम्भ में संस्कृत व प्राकृत भाषा विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. समणी संगीतप्रज्ञा ने स्वागत भाषण दिया तथा कार्यक्रम का परिचय देते हुये कहा कि मेथोडोलोजी आज प्रत्येक विद्यार्थी के लिये आवश्यक है। अंत में अहिंसा एवं शांति विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ जुगल किशोर दाधीच ने आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम में डाॅ. रविन्द्र सिंह राठौड़, डाॅ. सतयनारायण भारद्वाज, डाॅ. विकास शर्मा, समणीवृंद एवं मुमुक्षु बहिनों के अलावा शोध-छात्र उपस्थित थे।

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