चिंतन, कल्पना और सोच का दायरा बढ़ाती हैं किताबें- प्रा. जैन

लाडनूँ, 25 जुलाई 2022। जैन विश्वभारती संस्थान के शिक्षा विभाग के अंतर्गत चल रहे जीवन कौशल पर तीन दिवसीय सेमिनार के अंतिम दिवस पर अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष प्रो. बीएल जैन ने कहा कि प्रभावशाली व्यक्तित्व बनाने के लिए विधार्थियों के लिए लक्ष्य बनाने की जरूरत है। फिर उस लक्ष्य को पाने के लिए कठिन मेहनत करनी चाहिए। कठिन मेहनत से 95 प्रतिशत सफलता प्राप्त की जा सकती है। दूरदृष्टिता की सोच रख कर कार्य करने के साथ जीतने का संकल्प भी मन में रखना चाहिए। समय का सदुपयोग और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढना चाहिए। उन्होंने कहा कि ईश्वर में आस्था रखने के साथ जीवन की दिशा, विचार और दृष्टिकोण तय करने के लिए किताबें पढनी चाहिए और अध्ययन में अधिकतम समय व्यतीत करना चाहिए। किताबें मार्गदर्शक होती हैं। किताबें चिंतन, कल्पना और सोच का दायरा बढ़ाती है और आत्मविश्वास तथा आत्मबल प्रदान करती है। प्रो. जैन ने सफलता के लिए पांच शब्द बताए- साध्य, साधन, साधना, साधक, सिद्धि। उन्होंने कहा कि इनके द्वारा व्यक्ति सब कुछ प्राप्त कर सकता है। कार्यक्रम में अभिलाषा स्वामी ने महिला सशक्तिकरण पर अपने विचार रखे और कहा कि महिला को अपने आप में सशक्त बने, क्योंकि जब महिला स्वयं सशक्त होगी, तभी वह औरों को सशक्त कर पायेगी। अनुशासन, अनुभव, संगति, नियोजन, आत्मनिर्भरता के अनेक उदाहरण देते हुए स्वामी ने कहा कि ये तत्त्व महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देते हैं। अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहना जरूरी है। कार्यक्रम का संयोजन तथा आभार ज्ञापन डॉ. अमिता जैन ने किया। कार्यक्रम में डॉ. मनीष भटनागर, डॉ. बी. प्रधान, डॉ. विष्णु कुमार, डॉ. सरोज राय, डॉ. आभा सिंह, डॉ. गिरिराज भोजक, डॉ. गिरधारी लाल, डॉ. अजीत पाठक, प्रमोद ओला, खुशाल जांगिड एवं सभी संकाय सदस्य व समस्त विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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