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शिक्षा विभाग एवं अहिंसा एवं शांति विभाग में गांधी जयंती व विश्व शांति दिवस पर अनेक कार्यक्रम आयोजित

समस्याओं से मुक्ति के लिए सत्य एवं अहिसा के मार्ग का अनुसरण जरूरी- प्रो. धर

लाडनूंँ, 1 अक्टूबर 2021।जैन विश्वभारती संस्थान के शिक्षा विभाग एवं अहिंसा एवं शांति विभाग में महात्मा गांधी जयंती एवं अन्तर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस पर कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। शिक्षा विभाग हुए कार्यक्रम में डॉ. मनीष भटनागर ने कहा कि हमें गांधी के द्रारा बताये गये सत्य एवं अहिसा के मार्ग का अनुसरण करना चाहिए। गांधीजी ने राजनीतिक एवं सामाजिक सन्तुलन बनाये रखने पर जोर दिया था। डॉ. विष्णु कुमार ने कहा कि प्रेम पर आधारित शांति सजा के डर से उत्पन्न शांति से हजार गुना अधिक और स्थायी होती है। गांधी की ताकत सत्य और अहिंसा थी। उनके सिद्धान्तों को अपनाकर समाज में महत्त्वपूर्ण बदलाव लाए जा सकते हैं। कार्यक्रम में मनीषा स्वामी, आरती, सगीता, पूनम, सजू, दीपिका स्वामी, किरण सारण, तनू, एवं सूरमा चौघरी छात्राध्यापिकाओं ने भी भाषण, कविता, एवम गाने के माघ्यम से अपने विचार रखे। इस अवसर पर गांधी के विचारांे पर एक लेखन प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया, जिसमें छात्राध्यापिकाओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में, डॉ. भावाग्राही प्रधान, डॉ. सरोज राय, डॉ. गिरीराज भोजक, डॉ. आभा सिंह, और डॉ. गिरघारी लाल षर्मा आदि उपस्थित रहें। कार्यक्रम का संचालन षिवानी पूनिया ने किया। अन्त में डॉ. विष्णु कुमार द्रारा आभार ज्ञापित किया गया।

मानव कल्याण के लिए भविष्य में भी आएंगे गांधी के सिद्धांत

अहिंसा एवं शांति विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अनिल धर ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए गांधी-विचारों की प्रासंगिकता वर्तमान में भी उतनी ही उपादेय बताई, जितनी पूर्व में रही। प्रो. धर ने बताया कि व्यक्ति अपने जीवन को संयमपूर्वक जिये और हमेशा सत्य और ईमानदारी के मार्ग पर चलें तो कभी भी दुविधाएं उसके सामने नहीं आयेगी, यही गांधी विचारधारा है। डॉ. रविन्द्र सिंह राठौड़ ने कहा कि सादगी, अनुशासन, संयम, सहिष्णुता, अपरिग्रह, सत्य, अहिंसा, स्वदेशी, सत्याग्रह, ट्रस्टीशिप, ब्रह्मचर्य, स्वराज आदि के सिद्धान्त वर्तमान के साथ भविष्य में भी मानव कल्याण के लिए उपयोगी होंगे। विश्व के अनेक देश सौ वर्ष बाद भी गांधी के सिद्धान्तों पर चलने के लिए अनेक कार्यक्रम चला रहे हैं। छात्रा मनीषा कवंर ने गांधी का प्रिय भजन ’रघुपति राघव राजा राम’ गाया, छात्रा रूखसाना बानो ने गांधी और दूसरे धर्मों के प्रति उनकी आस्था पर विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन करते हुए सहायक आचार्य डॉ. लिपि जैन ने कहा कि गांधी को जानने व समझने के लिए गांधी के विचारों को अपने जीवन में उतारना पडे़गा, तभी समाज व देश में आराजकता व हिंसा कम हो सकती है। गांधी साहित्य और जीवन पर अनेक शोध कार्य हो रहे हैं। ये शोधकार्य ही गांधी के सिद्धान्तों को आगे बढ़ाने में सहयोग करें। कार्यक्रम में विभाग की छात्राएं रूखसाना, मुस्कान बानो, रूबिना, रेणु कंवर, लक्ष्मी भी उपस्थित रहीं। अन्त में विभाग की छात्रा जयश्री जांगीड़ ने विभाग के सभी सदस्यों का आभार ज्ञापन किया।

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