डाॅ. शेखावत द्वारा इजाद किए गए एआई पर्यावरण मोनिटरिंग उपकरण को अन्तर्राष्ट्रीय पेटेंट मिला

लाडनूँ, 7 मार्च 2024। जैन विश्वभारती संस्थान (मानित विश्वविद्यालय) के योग एवं जीवन विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डा. प्रद्युम्नसिंह शेखावत और टीम द्वारा पर्यावरण की शुद्धता की मोनिटरिंग के लिए बिना किसी तार के चलने वाली आर्टिफिशियल इंटेलीजेंसी युक्त एक मशीन घड़ी का निर्माण किया है, जिसका पेटेंट ब्रिटेन के बौद्धिक संपदा कार्यालय द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर किया गया है। लाडनूं क्षेत्र के लिए यह पहला वैज्ञानिक पेटेंट है, जिसमें जैविभा विश्वविद्यालय का योगदान शामिल है। डाॅ. प्रद्युम्नसिंह शेखावत के साथ इस पेटेंट की टीम में डॉ. प्रबोध कुमार खम्परिया, डॉ. स्वीटी जैन, डॉ. केशव मिश्रा, आशीष मिश्रा, डॉ. अजय दाधीच, डॉ. दीप्ति योगेश पाटिल एवं प्रो. प्रतीक्षा गौरव पाटिल भी शामिल हैं। बौद्धिक संपदा कार्यालय यूके के पेटेंट, डिजाइन और ट्रेड मार्क्स के नियंत्रक-महालेखाकार एडम विलियम्स ने इस पेटेंट के लिए उन्हें प्रमाण पत्र जारी किया है। उनके इस पेटेंट के लिए अंतर्राष्ट्रीय डिजाइन वर्गीकरण में घड़ियां और अन्य माप उपकरण, जांच और संकेत देने वाले उपकरण, सुरक्षा व परीक्षण उपकरण श्रेणी में शामिल किया गया है। कृत्रिम बुद्धि सम्पन्न इस उपकरण का उपयोग पर्यावरण में होने वाले परिवर्तनों का अंकन और संकेतन कर सकेंगे। इससे वातावरण की शुद्धि के लिए मानव की सजगता निरन्तर बनी रहेगी।

पर्यावरणीय मापदंडों का सटीक और वास्तविक समय मूल्यांकन संभव होगा

डाॅ. शेखावत ने बताया कि यह आविष्कार व्यापक पर्यावरण निगरानी के लिए डिजाइन किए गए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित वायरलेस सेंसर नेटवर्क (डब्ल्यूएसएन) नोड से संबंधित है। यह नवोन्मेषी उपकरण विभिन्न सेंसरों से डेटा को समझदारी से संसाधित करने और विश्लेषण करने के लिए उन्नत एआई एल्गोरिदम का लाभ उठाता है, जिससे तापमान, आर्द्रता, वायु गुणवत्ता और अन्य महत्वपूर्ण कारकों जैसे पर्यावरणीय मापदंडों का सटीक और वास्तविक समय मूल्यांकन सक्षम हो जाता है। उन्होंने बताया कि जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और संसाधन संरक्षण के बारे में बढ़ती चिंताओं के कारण पर्यावरण निगरानी तेजी से महत्वपूर्ण हो गई है। पारंपरिक निगरानी प्रणालियों को अक्सर मैन्युअल डेटा संग्रह और विश्लेषण की आवश्यकता होती है, जिसमें समय लग सकता है और त्रुटियों की संभावना हो सकती है। वायरलेस सेंसर नेटवर्क (डब्ल्यूएसएन) के आगमन ने स्वचालित और दूरस्थ निगरानी की अनुमति देकर इस क्षेत्र में क्रांति आएगी। डब्लूएसएन्स द्वारा उत्पन्न बड़ी मात्रा में डेटा को तुरंत सार्थक अंतर्दृष्टि निकालने के लिए बुद्धिमान प्रसंस्करण की आवश्यकता होती है, इसलिए इस उपकरण की उपयोगिता बहुत अधिक बढ गई है।

विश्व के पहले उपकरण के लिए बधाइयां

इस अपनी तरह के विश्व के पहले वायरलेस उपकरण के लिए पेटेंट करवाने और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अपना नाम दर्ज करवाने के लिए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने उन्हें बधाई देते हुए अपने काम को निरन्तर गति देते रहने और नए-नए आयाम स्थापित करने के लिए शुभकामनाएं दी है। इसी प्रकार जैविभा के समस्त संकाय सदस्यों व अन्य स्टाफ ने भी डा. शेखावत को इस उपलब्धि के लिए बधाई व शुभकामनाएं दी हैं।

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