JVBI
JVBI Assistant
Online • Reply in 1 min
Enquiry Now
NAAC A Grade
ISO 9001:2015
34+ Years of Excellence
Apply Online
Call : 9461239683

Enquire Now

Our team will contact you shortly.

️ +91
2 + 5
News & Events
लाडनूँ में ‘नशा मुक्त परिवार महामैराथन 2026’ का आयोजन
06 Oct 2026
लाडनूँ में ‘नशा मुक्त परिवार महामैराथन 2026’ का आयोजन
जन-जन को किया नशामुक्ति के लिए जागरूक, लिया कभी नशा नहीं करने का संकल्प लाडनूँ, 6 अक्टूबर 2026। जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के अन्तर्गत संचालित राष्ट्रीय सेवा योजना की दोनों इकाईयों और अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में ‘राष्ट्रव्यापी नशामुक्त परिवार’ अभियान के अंतर्गत यहां बस स्टेंड स्थित सुखदेव आश्रम जैन मंदिर से शुरू होकर शहर के मुख्य मार्गों से होकर पहली पट्टी होते हुए जैन विश्व भारती स्थित महाश्रमण विहार तक विशाल मैराथन दौड़ का आयोजन किया गया। इस ‘नशामुक्त परिवार महामैराथन 2026’ में एनएसएस के स्वयंसेवकों, विद्यार्थियों एवं अन्य प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस मैराथन दौड़ के सभी प्रतिभागियों ने हाथों में नशामुक्ति से संबंधित जागरूकता संदेश, नारे एवं स्लोगन लेकर प्रदर्शन भी किया। पूरे मार्ग में इन सबने आमजन को नशे से होने वाले शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं आर्थिक दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में सभी प्रतिभागियों ने नशामुक्त जीवन अपनाने तथा परिवार एवं समाज को नशे से मुक्त बनाने का संकल्प भी लिया। इस कार्यक्रम के माध्यम से “नशा मुक्त परिवार-स्वस्थ परिवार, सशक्त समाज” का संदेश जन-जन तक पहुँचाया गया। युवाओं को स्वास्थ्य, अनुशासन, सकारात्मक जीवनशैली एवं सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति जागरूक किया गया। इस आयोजन ने विद्यार्थियों एवं युवाओं में नशामुक्ति के प्रति जागरूकता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत किया। कार्यक्रम ने स्वस्थ, संस्कारित एवं नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता को रेखांकित किया। इस ‘नशामुक्त परिवार महामैराथन 2026’ का आयोजन विद्यार्थियों, युवाओं एवं आमजन में नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने तथा नशामुक्त परिवार, स्वस्थ समाज और सशक्त राष्ट्र के निर्माण का संदेश देने के लिए किया गया और इस कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं को नशे से दूर रहने और समाज में नशामुक्ति के लिए सक्रिय भूमिका निभाने हेतु प्रेरित किया गया। कार्यक्रम में सभी संकाय सदस्य एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
Read more...
विश्वविद्यालय के ‘रियल हीरोज’ का किया गया सम्मान
03 Oct 2026
लाडनूँ, 3 अक्टूबर 2026। जैन विश्वभारती संस्थान मान्य विश्वविद्यालय के अहिंसा एवं शांति विभाग द्वारा गांधी जयंती के अवसर पर 3 अक्टूबर को समाज में सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने के लिए सामाजिक समरसता की विचारधारा को कार्यरूप प्रदान करते हुए कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालस के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों तथा सफाई कर्मचारियों को ‘रियल हीरोज’ के रूप में मानते हुए उनका सम्मान किया गया। उनके योगदान को संस्थान के विकास और उत्थान में सबसे महत्वपूर्ण बताया गया। किसी भी संस्थान अथवा निकाय की प्रगति में उसके प्रत्येक कर्मचारी का अपनी-अपनी जगह महत्वपूर्ण योगदान होता है। कार्यक्रम में दिलराज सिंह, जगदीश सिंह, नवीन बहादुर, नरेंद्र सिंह, तीर्था घाले, टिल कुमार लालाराम, किशन सेन, अर्जुनराम, मुन्नालाल आदि कर्मचारियों ने संस्थान से जुड़ने के पश्चात के अपने अनुभव साझा किये और संस्थान की कार्य प्रणाली एवं व्यवस्थाओं के प्रति काफी संतुष्टि व्यक्त की। इस अवसर पर राजस्थानी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. लक्ष्मीकांत व्यास ने इस प्रयास को सामाजिक समरसता का एक महत्वपूर्ण आयाम बताते हुए इन कर्मचारियों के सतत योगदान और निष्ठा की सराहना की। शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बी.एल. जैन ने अपने उद्बोधन में बताया कि किसी भी संस्थान में कोई कर्मचारी छोटा-बड़ा नहीं होता, हर कर्मचारी का अपनी जगह महत्वपूर्ण स्थान एवं योगदान होता है। अतः सभी की अपने-अपने स्थान पर गरिमा एवं महत्व होता है। संस्थान के कुलसचिव देबाशिश गोस्वामी ने इन कर्मचारियों के योगदान को उल्लेखित करते हुए कहा कि संस्थान की गतिविधियों के सुचारू रूप से संचालित होने में न केवल अधिकारियों का अपितु हर स्तर के कर्मचारियों का भी उतना ही योगदान बना रहता है। आप सभी अपने-अपने दायित्वों का निर्वाह करते हैं तभी संस्थान की सभी सफाई एवं स्वच्छता संबंधी व्यवस्थाएं बनी रह पाती। अहिंसा एवं शांति विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. वंदना कुंडलिया ने इस कार्यक्रम में सभी का स्वागत एवं अभिनन्दन किया और कार्यक्रम की रूपरेखा रखी। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. लिपि जैन ने किया।
Read more...
आत्मबल के बिना अहिंसा को नहीं अपनाया जा सकता- अजय असवाल (निदेशक, शांति एवं अहिंसा विभाग राजस्थान सरकार)
01 Oct 2026
आत्मबल के बिना अहिंसा को नहीं अपनाया जा सकता- अजय असवाल (निदेशक, शांति एवं अहिंसा विभाग राजस्थान सरकार)
लाडनूं के जैविभा विश्वविद्यालय में राजस्थान सरकार के संयुक्त तत्वावधान में मनाया अन्तर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस लाडनूँ, 1 अक्टूबर 2026। राजस्थान सरकार के शांति एवं अहिंसा विभाग एवं जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में अन्तर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस एवं गांधी जयंती के उपलक्ष में गुरूवार को यहां विश्वविद्यालय स्थित आॅडिटोरियम में ‘अहिंसाः नई सोच, नया समाज’ विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में राज्य सरकार के शांति एवं अहिंसा विभाग के निदेशक अजय असवाल ने कहा कि भारतीय परम्परा में शांति और अहिंसा को शुरू से ही पूरा महत्व दिया जाता रहा है। यहां महावीर एवं बुद्ध ने अहिंसा का संदेश दिया था। महाव्रतों के रूप में लागू की गई यह अंिहंसा बाद में सबके लिए लागू करने के लिए अणुव्रतों में भी परिवर्तित की गई। बौद्ध एवं हिंदू धर्मों में आत्मा का स्वाभाविक धर्म ही अहिंसा को माना गया है। महात्मा गांधी द्वारा प्रचलित अहिंसा को मार्टिन लूथर किंग और नेल्सन मंडेला आदि सभी ने अपनाया। अहिंसा को विश्व के अनेक देशों में फैलाया गया। दुनिया में भारत को आज भी महात्मा गांधी का देश कहा जाता है। उन्होंने इस अवसर पर प्रशासन द्वारा अपनाए जा सकने वाले अहिंसा के छोटे-छोटे प्रयोग भी समझाए। साथ ही उन्होंने कहा कि अहिंसा को अपनाने के लिए व्यक्ति में प्रचुर आत्मबल होना आवश्यक है। असवाल ने सोशल मीडिया पर भी अहिंसा का उपयोग करने एवं एआई केे नवाचारों में भी अहिंसा के महत्व को समझाया। शांति एवं अहिंसा होती है प्रगतिशीलता में सहायक राजस्थान प्रशासनिक सेवा की अधिकारी एवं शांति एवं अहिंसा निदेशालय की उपनिदेशक श्रीमती मधु रघुवंशी ने संगोष्ठी में अपने विचार रखते हुए कहा कि मनुष्य शांति एवं अहिंसा के विचारों से ही प्रगतिशील बन सकता है। उन्होंने शांति एवं अहिंसा निदेशालय की स्थापना, उद्देश्य, कार्यक्रमों आदि की जानकारी दी और कहा कि महात्मा गांधी के अहिंसा एवं शांति के विचारों की प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है। अहिंसा एवं शांति के विचारों से ही राष्ट्र का निर्माण संभव है। विश्वविद्यालय के अहिंसा एवं शांति विभाग की विभागाध्यक्ष वंदना कुंडलिया ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय अहिंसा को जीवन में उतारने की प्रयोगशाला है। पिछले तीन दशकों से यहां शांति एवं अहिंसा को जीवन में उतारने के लिए अनवरत कार्य किया जा रहा है। अहिंसा प्रशिक्षण के माध्यम से समाज में इसके लिए नई संभावनाएं तलाशी जा रही है। उन्होंने अहिंसा के विचार को व्यवहार में बदलने और व्यवहार को संस्कार में बदलने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही उन्होंने प्रशासन, समाज ओर शिक्षा में तालमेल द्वारा अहिंसा की सोच को नये समाज की रचना में आवश्यक बताया। सविता राठी व दुर्गादल समिति का किया गया सम्मान इस अवसर पर जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय की ओर से शांति एवं अहिंसा तथा इनसे जुड़े हुए क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले दो व्यक्तियोें को सम्मानित करने की परम्परा को शुरू किया गया। इस वर्ष यह सम्मान पर्यावरण, पंचायत राज और महिला सशक्तिकरण क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य किए जाने के लिए सुजानगढ तहसील के गोपालपुरा ग्राम पंचायत की प्रशासक एवं पूर्व सरपंच सविता राठी को एवं लाडनूं में पर्यावरण एवं सामाजिक क्षेत्र में सेवाकार्यों के लिए दुर्गादल सेवा समिति को ‘प्रकृति मित्र सम्मान’ प्रदान किया गया। यह सम्मान समिति के अध्यक्ष मनीष शर्मा एडवोकेट एवं समिति के अन्य सदस्यों को प्रदान किया गया। संगोष्ठी में सविता राठी ने अपने सम्बोधन में सरपंच रहते हुए किए गए कार्यों के बारे में बताया तथा कहा कि महात्मा गांधी एक व्यक्ति नहीं विचार थे। आज 167 देशों में महात्मा गांधी को पढाया जा रहा है। दुर्गादल सेवा समिति के हर्षवध्रन चारण ने भी दुर्गादल द्वारा किए गए कार्यों की जानकारी दी। अहिंसा जीवन के हर पहलु के लिए उपयोगी शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बीएल जैन ने संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए अपने सम्बोधन में जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के अहिंसा एवं शांति क्षेत्र में एक पृथक व स्वतंत्र विभाग की स्थापना किए जाने, इस सम्बंध में पाठ्यक्रमों एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों के संचालन, पुस्तकों के प्रकाशन, विभिन्न पैटेंट प्राप्त किए जाने आदि की पूरी जानकारी दी। विश्वविद्यालय के कुलसचिव देबाशीष गोस्वामी ने स्वागत वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए कहा कि अहिंसा को केवल राजनीति के लिए प्रयोग समझना ठीक नहीं है। अहिंसा सम्पूर्ण जीवन के हर पहलु के लिए आवश्यक तत्व है। उन्होंने महात्मा गांधी की अहिंसा के साथ गौतम बुद्ध और भगवान महावीर की अहिंसा को भी समझाया। कार्यक्रम की संचालिका डाॅ. लिपि जैन ने संगोष्ठी में अपने विचार रखते हुए महात्मा गांधी के जीवन पर प्रकाश डाला तथा कहा कि अहिंसा केवल राजनीति का साधन ही नहीं, यह जीवन का आध्यार भी है। कार्यक्रम का प्रारम्भ मीनल द्वारा प्रस्तुत वंदे मातरम संगान के साथ किया गया। सभी अतिथियों का स्वागत कुलसचिव देबाशीष गोस्वामी, प्रो. बीएल जैन, वंदना कुंडलिया, प्रो. लक्ष्मीकांत व्यास, डाॅ रविन्द्र सिंह राठौड़, प्रो. युवराज सिंह खंगारोत, डाॅ. लिपि जैन, दीपाराम खोजा आदि ने पुष्पगुच्छ भेंट कर, शाॅल ओढा कर एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर किया। अंत में डाॅ. बलबीर सिंह चारण ने आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम में सभी विभागों के संकाय सदस्य एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
Read more...
Latest News