योग व जीवन विज्ञान की प्रशिक्षण एवं सम्पर्क कक्षाओं का शुभारम्भ

इक्कीसवीं सदी में योग सबसे श्रेष्ठ माध्यम- प्रो. त्रिपाठी

लाडनूँ 1 मई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के एम.ए. एवं एम.एससी. के योग एवं जीवन विज्ञान विषय के विद्यार्थियों के लिये एक माह की प्रशिक्षण एवं सम्पर्क कक्षाओं के शुभारम्भ पर सम्बोधित करते हुये निदेश प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि 21वीं सदी योग की सदी है, इसलिए जो योग में जितना अधिक दक्ष होगा, वही आगे बढ पायेगा। आज केरियर बनाने के लिए योग सबसे अच्छा माध्यम है। योग में समस्त बीमारियों का इलाज होने से आज के समय में बढ रही अनिद्रा, बीपी, हृदयरोग, मधुमेह, जोड़ों के दर्द आदि के योग से दूर किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि योग एक ऐसी विद्या है, जो विमुक्ति व नियुक्ति दोनों के लिए मददगार है। उन्होंने योग के आसनों, प्राणायाम, ध्यान आदि का गहरा अभ्यास करने की आवश्यकता बताई और जीवन में प्रामाणिकता, नैतिकता व चरित्रशुद्धि को आवश्यक बतातेे हुए कहा कि इस पाठ्यक्रम में ये सब विषय समाहित हैं। उन्होंने एक महिने की प्रशिक्षण एवं सम्पर्क कक्षाओं के नियमित कार्यक्रम के अलावा बाहर से आये समस्त विद्यार्थियों के रहने, खाने आदि की व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि जगदीश यायावर ने अपने सम्बोधन में योग को सबसे बेहतरीन विषय बताया तथा कहा कि योग से अपने शारीरिक, मानसिक व भावात्मक स्वास्थ्य के सुधार के साथ अपने परिवार, समाज व अन्य लोगों को भी सही राह पर चलने व स्वस्थ बनाने में योग सक्षम है। उन्होंने अपने समय का अधिकतम सदुपयोग करते हुए योग में पूर्ण दक्षता हासिल करने की आवश्यकता बताई। समन्वयक जेपी सिंह ने अंत में आभार ज्ञापित करते हुये नियमित कक्षाओं व शिक्षकों आदि के बारे में जानकारी दी।

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