ऊपर उठना चाहते हो तो आस पास के लोगों को भी ऊपर उठाने में सहायक बनें- प्रो. दूगड़

नववर्ष पर नए संकल्प लेने और अपने स्वप्नों को जीने का आह्वान

लाडनूँ, 2 फरवरी 2023। जैन विश्वभारती संस्थान के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने कहा है कि स्वप्न लेने के बाद झपकी नहीं लें। उस स्वप्न को पूर्ण रूपेण जिएं और अपने पुरूषार्थ पूर्वक उस स्वप्न को पूरा करें। असंभव कुछ भी नहीं होता। ‘इम्पोसिबल’ में भी ‘आई एम पोसिबल’ छिपा है। पुरुषार्थ से सब संभव है। आगे बढना हमारी नियति होती है। स्वयं को ऊपर उठाना चाहते हो तो आस पास के दूसरे लोगों को भी ऊपर उठाने में सहायक बनें। उन्होंने नए वर्ष पर नए संकल्प के लिए आह्वान करते हुए कहा कि समय किसी के लिए रूकता नहीं। समय आपके पीछे रहना चाहिए। सूर्य की तरफ देखने से परछाई पीछे छूट जाती है। संकल्प लेकर ही आगे बढ सकते हैं। सफलता कभी भी अंतिम नहीं होती और असफलता कभी भी स्थाई नहीं होती है। अपनी पहचान और अपना भविष्य व्यक्ति स्वयं ही बनाता है। दूसरा पहचान नहीं देता। हर व्यक्ति अपने आपको सबसे बेहतर जानता है। आपकी छवि बनने पर कोई दूसरा उसे खराब नहीं सकता।

क्षमताओं का पूरा उपयोग करें

उन्होंने कहा कि सबमें क्षमताएं विद्यमान हैं, उनका पूरा उपयोग करना चाहिए। युवा टीम आगे आए और स्वैच्छा से काम हाथ में लें और काम हाथ में लेने के बाद उसे बेहतर करके दिखाएं। उन्होंने प्रेरित करते हुए कहा, सतत काम में लगे रहिए। काम नहीं करना भी एक सजा होता है। अपनी क्षमता का पूरा उपयोग करें। नये वर्ष में नया संकल्प लेकर काम करें। पुरजोर प्रयत्न करें। उन्होंने कहा, संस्थान में नए चेहरे आगे आएं। स्वच्छता पर ध्यान दें, विकास व सुधार की सोचें। केवल अपने तक सीमित रहने के बजाए संस्थान के लिए भी सोचें। अकेडमिक काम, नैक का काम, युनिवर्सिटी की रैंकिंग का काम है, डेटा मैनेजमेंट का काम, डिफरेंस रिपोर्ट तैयार करने आदि सब केवल कुछ ही लोगों तक सीमित नहीं रहे और अन्य लोग भी सीखें। नववर्ष के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में सबको बधाई व शुभकामनाएं देते हुए संस्थान के विभिन्न विभागाध्यक्षों डा. प्रद्युम्न सिंह शेखावत, प्रो. रेखा तिवाड़ी, प्रो. आनंद प्रकाश त्रिपाठी, प्रो. नलिन के. शास्त्री ने भी विचार व्यक्त किए और नए संकल्पों के साथ साल मे जुटने की जरूरत बताई। कार्यक्रम का संचालन संचालन डा. वीरेन्द्र भाटी मंगल ने किया।

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