जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) का यूजीसी की एक्सपर्ट कमेटी ने किया अवलोकन

शिक्षा की कड़ी को पुनः जोड़ने का काम कर रहा है विश्वविद्यालय-प्रो. दूगड़

लाडनूँ, 9 अगस्त 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने कहा है कि दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से यह संस्थान इस क्षेत्र के ऐसे लोग जो किन्हीं घरेलु परिस्थितियों की वजह से पढाई से दूर हो चुके, उन्हें पुनः शिक्षा से जोड़ने का काम सफलता के साथ कर रहे हैं। इस क्षेत्र में अनुसूचित जाति-जनजाति, पिछड़े, अल्पसंख्यक आदि वर्ग के लोगों और कामकाजी व गृहिणी महिलाओं के साथ वृद्धों व वैरागी लोगों को भी इस दूरस्थ शिक्षा से अपनी पढाई पूरी करने का अवसर मिला है। यहां से जैनोलोजी व योग व जीवन विज्ञान से डिग्रियां कर रहे विद्यार्थियों ने विश्व रिकाॅर्ड बनाये हैं तथा विश्व के अनेक देशों में योग-प्रशिक्षक आदि के रूप में काम करके भारतीय ज्ञान व संस्कृति की शिक्षा का प्रसार कर रहे हैं। वे यहां विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओडीएल मोड के लिये गठित एक्सपर्ट कमेटी के समक्ष संस्थान के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के प्रस्तुतिकरण के समय सम्बोधित कर रहे थे। कुलपति सेमिनार हाॅल में आयोजित इस बैठक में दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के सम्बंध में सम्पूर्ण विवरण का प्रस्तुतिकरण पीपीटी के माध्यम से भी किया गया। निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने जानकारी दी कि निदेशालय से 500 से अधिक ऐसे उम्रदराज व्यक्तियों ने भी डिग्रियां हासिल की हैं, जिनकी उम्र 80 वर्ष तक पहुंच चुकी थी। दूरस्थ शिक्षा से डिग्री करनेवालों ने यूजीसी के नेट को भी क्लीयर किया है।

इस प्रस्तुतिकरण बैठक में कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ के अलावा एक्सपर्ट कमेटी के अध्यक्ष हेमचन्द्राचार्य नोर्थ गुजरात विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीए प्रजापति, कमेटी के समन्वयक यूजीसी के एजुकेशन आफिसर डाॅ. अमित कुमार वर्मा, सदस्य पंजाब विश्वविद्यालय की प्रो. कंचन जैन, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली के प्रो. गौरीशंकर वैंकटेश्वर प्रसाद, डीओयू गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्रो. हिमांशु चतुर्वेदी, पूणे विश्वविद्यालय के डाॅ. श्रीधर पी गेज्जी एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. चन्दन कुमार चौबे तथा प्रो. नलिन शास्त्री, दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के निदेशक प्रो. आनन्दप्रकाश त्रिपाठी, कुलसचिव विनोद कुमार कक्कड़, उप कुलसचिव डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत, प्रो. समणी ऋजुप्रज्ञा, प्रो. समणी संगीतप्रज्ञा, समणी अमल प्रज्ञा, समणी विनयप्रज्ञा, प्रो. अनिल धर, डाॅ. जुगलकिशोर दाधीच, आरके जैन, मुमुक्षु अजीता, मुमुक्षु प्रियंका आदि उपस्थित रहे।

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय की व्यवस्थायें देखी

यूजीसी की एक्सपर्ट टीम ने गुरूवार को यहां जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय का अवलोकन किया। टीम ने दूरस्थ शिक्षा के तहत संस्थान में संचालित किये जाने वाले समस्त पाठ्यक्रमों, विद्यार्थियों, केन्द्रों, व्यवस्थाओं आदि की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने स्वयं विजिट करके समस्त व्यवस्थाओं का आकलन किया। दूरस्थ शिक्षा की चल रही परीक्षाओं की व्यवस्थाओं को देखा। टीम ने संस्थान की प्रयोगशालाओं, संस्थान परिसर, केन्द्रीय पुस्तकालय, आर्ट गैलरी, आयुर्वेदिक रसायनशाला, मातृ-संस्था के सचिवालय आदि का अवलोकन किया। टीम ने सभी व्यवस्थाओं के अवलोकन के पश्चात संतोष व्यक्त किया तथा कहा कि यहां की सभी व्यवस्थायें अच्छी हैं तथा डिस्टेंस व ओपन एजुकेशन में संस्थान बेहतरीन कार्य कर रहा है।

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित

शिक्षा को सेवा व समर्पण भाव से जोड़ा जाना लाभदायक- प्रो. प्रजापति

10 अगस्त 2018। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओडीएल मोड के लिये गठित एक्सपर्ट कमेटी के चैयरमेन व हेमचन्द्राचार्य नोर्थ गुुजरात विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीए प्रजापति ने कहा है कि जैन विश्वभारती संस्थान विश्वविद्यालय अन्य विश्वविद्यालयों से बिलकुल अलग है। यहां सेवा व समर्पण भाव के साथ शिक्षण कार्य को जोड़ा गया है, जो लाभदायक है। शिक्षा व दूरस्थ शिक्षा के लिये यह संस्थान बहुत ही अच्छा कार्य कर रहा है। उन्होंने यहां महाप्रज्ञ-महाश्रमण आॅडिटोरियम में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुये ये उद्गार व्यक्त किये। उन्होंने छात्राओं द्वारा दी गई प्रस्तुतियों की भी सराहना की। जैन विश्वभारती संस्थान के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने टीम का स्वागत करते हुये संस्थान की विशेषताओं के बारे में बताया तथा कहा कि यहां का आध्यात्मिक वातावरण विद्यार्थियों को शांति व मर्यादा पालन सिखाता है।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

कार्यक्रम में सरिता शर्मा व समूह द्वारा प्रस्तुत मारवाड़ी नृत्य को सभी ने सराहा। ताम्बी दाधीच के शास्त्रीय संगीत पर आधारित शिव तांडव नृत्य, पूर्णिमा व प्रियंका केे मारवाड़ी पैरोडी गीत पर युगल नृत्य, सोनम कंवर व समूह के राजस्थानी हरयाली बन्ना गीत पर सामुहिक नृत्य, मानसी के भवई नृत्य व कृष्ण लीला के कार्यक्रम को भी खूब दाद मिली। कार्यक्रम में ललिता व समूह तथा अतिश्री एवं समूह के सामुहिक नृत्य, कीमती के रंगीलो म्हारो ढोलना गीत पर एकल नृत्य व आकांक्षा व प्रीति के युगल पंजाबी नृत्य भी प्रभावी प्रस्तुति रहे। मुमुक्षु बहिनों ने कार्यक्रम में नाट्य प्रस्तुति दी। योग एवं जीवन विज्ञान विभाग के विद्यार्थियों ने कार्यक्रम में डाॅ. अशोक भास्कर के निर्देशन में योग के विभिन्न आसनों की प्रस्तुतियां दी। कार्यक्रम का प्रारम्भ संध्या व समूह द्वारा गणेश वंदना करते हुये किया गया। समस्त अतिथियों का प्रारम्भ में स्वागत किया गया।

कार्यक्रम में जैन विश्वभारती संस्थान कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ के अलावा कमेटी के सदस्य हेमचन्द्राचार्य नोर्थ गुुजरात विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीए प्रजापति, कमेटी के समन्वयक यूजीसी के एजुकेशन आफिसर डाॅ. अमित कुमार वर्मा, सदस्य पंजाब विश्वविद्यालय की प्रो. कंचन जैन, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली के प्रो. गौरीशंकर वैंकटेश्वर प्रसाद, डीओयू गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्रो. हिमांशु चतुर्वेदी, पूणे विश्वविद्यालय के डाॅ. श्रीधर पी गेज्जी एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. चन्दन कुमार चौबे तथा प्रो. नलिन शास्त्री, जैन विश्वभारती के ट्रस्टी भागचंद बरड़िया व मंत्री जीवन मल मालू, दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी, कुलसचिव विनोद कुमार कक्कड़, उप कुलसचिव डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत, शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बीएल जैन, आदि उपस्थित रहे। अंत में डाॅ. अमिता जैन ने आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन नुपूर जैन ने किया।

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