जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में गांधी जयंती के अवसर पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन

महात्मा गांधी केवल व्यक्ति नहीं विचार हैं

लाडनूँ, 1 अक्टूबर 2019। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में महात्मा गांधी जयंती के अवसर पर मंगलवार को विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इनमें हस्तशिल्प प्रेरणा एवं प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यहां सेमिनार हाॅल में आयोजित मुख्य समारोह में प्राकृत एवं संस्कृत विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. दामोदर शास्त्री ने महात्मा गांधी को अहिंसा के साथ सत्य व स्वच्छता के लिये भी याद करना बताया और कहा कि वे अहिंसा से अधिक सत्य के पुजारी थे। उन्होंने अपने जीवन में सत्य से प्रेम किया था। उन्होंने सत्य को लेकर विभिन्न प्रयोग भी किये और उनमें सफल हुये। सत्याग्रह की व्याख्या करते हुये उन्होंने सत्य के दार्शनिक पक्ष से अधिक प्रयोग को सफल बताया। उन्होंने महात्मा गांधी द्वारा सत्य के साथ सेवाभाव को जोड़े जाने को सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण बताया। अहिंसा एवं शांति विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अनिल धर ने कहा कि महात्मा गांधी केवल व्यक्ति नहीं बल्कि विचार थे। उनके जीवन में बहुत से उतार-चढाव आये, तब कहीं जाकर वे महात्मा बन पाये। उनके कुटीर उद्योग आदि आर्थिक विचारों को अगर देश अपना लेता तो आज विश्व की आर्थिक शक्ति बन कर उभरता। हमने महात्मा गांधी के केवल राजनीतिक विचारों को देखा है। उन्होंने राजनीति के साथ अर्थ नीति, समाज नीति, शिक्षा नीति, स्वास्थ्य नीति आदि सभी विषयों पर चिंतन किया था। उनके सभी चिंतन ग्रामीण व्यवस्थाओं पर आधारित थे। प्रो. समणी सत्यप्रज्ञा ने महात्मा गांधी को केवल भारत के नहीं बल्कि विश्व भर के लिये अनुकरणीय माना और कहा कि उन्होंने जीवन में सिर्फ दो पुस्तकें लिखी, जिनमें हिन्द स्वराज्य और मेरे सत्य के प्रयोग के रूप में आत्मकथा है। अन्य सभी विचार उनके भाषणों पर आधारित हैं। उनकी आत्मकथा को पढने पर बहुत सी नई जानकारी मिल पायेगी। उन्होंने महावीर, महात्मा गांधी, मार्टिन लूथर और महाप्रज्ञ की समानता के बारे में भी बताया। शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बीएल जैन ने महात्मा गांधी के आदर्शों व विचारों को अपनाते हुये जीवन में आलोचनाओं, प्रतिक्रियाओं, समय के दुरूपयोग आदि से बचने और अपना शरीरिक विकास, मानसिक विकास, आध्यात्मिकता व नैतिक मूल्यों को अपनाने के लिये प्रेरित किया। कार्यक्रम में प्रशांत जैन, पारस जैन, मुमुक्षु अंजलि, कमल किशोर, लक्ष्मी राठौड़, साक्षी प्रजापत, सरिता, स्नेहा पारीक, आईशा सिंह आदि ने भी अपने विचार प्रस्तुत किये। अंत में रविन्द्र सिंह राठौड़ ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन राखी प्रजापत ने किया।

हस्तशिल्प प्रेरणा व प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम

संस्थान के शिक्षा विभाग में गांधी जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष प्रो. बीएल जैन ने देश के सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनैतिक, आर्थिक, शैक्षिक आदि क्षेत्रों में महात्मा गांधी द्वारा दिये गये योगदान के बारे में बताया तथा उनके द्वारा बुनियादी शिक्षा, नई शिक्षा के नामों से प्रस्तुत किये गये राष्ट्रीय शिक्षा कार्यक्रम में व्यक्ति के मस्तिष्क, शरीर और आत्मा तीनों के समन्वित विकास की राह दिखाई। श्रम, निष्ठा, श्रेष्ठ नागरिक बनना, मानवीय गुणों का विकास आदि को शिक्षा में शामिल किया गया। उन्होंने बताया कि शिक्षा में स्वरोजगार के लिये दस्तकारी के कार्यों का समावेश किया गया। हस्तशिल्प में प्रत्येक विद्यार्थी के लिये लकड़ी का काम, मिट्टी का काम, कागज की वस्तुयें बनाने, घरेलु सामग्री का निर्माण, बागवानी कार्य करना, योगा व व्यायाम सम्बंधी कार्य, संगीत की शिक्षा आदि के लिये प्रेरित किया गया। इस अवसर पर छात्राओं को हस्तशिल्प निर्माण कला सिखाई गई और उनसे अनेक तरह के हस्तशिल्प बनवाये गये। कार्यक्रम में डाॅ. मनीषा जैन व डाॅ. गिरीराज भोजक के नेतृत्व में प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें मनीषा, माधुरी पारीक, हिमांशी, चन्द्रकांता, प्रियंका, भव्या,आमना, शकीला, दुर्गा आदि ने भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन निधि शर्मा ने किया।

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