जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के शिक्षा विभाग में संकाय संवर्द्धन कार्यक्रम के अन्तर्गत नैनोसाइंस व नैनोटैक्नोलोजी पर व्याख्यान का आयोजन

नैनो टेक्नोलोजी से संभव है किसी वस्तु को एक हजार गुणा तक मजबूत, हल्का और भरोसेमंद बनाना

लाडनूँ, 26 मार्च 2021। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के शिक्षा विभाग में संकाय संवर्द्धन कार्यक्रम के तहत शुक्रवार को ‘नैनो साइंस तथा नैनो टेक्नोलोजी’ विषय पर ललित कुमार गौड़ ने व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि प्रोद्योगिकी लोगों के जीवन में काफी महत्वपूर्ण है और आने वाले समय में इसकी भूमिका नैनो तकनीक क्षेत्र में अधिक बढने वाली है। नैनो, अति सूक्ष्म आकार वाले तत्वों, जो मीटर के एक अरबवें हिस्से से बने होते हैं, का विज्ञान है। नैनोटेक्नोलोजी व्यावहारिक जीवन में 1 से 100 नैनोमीटर स्केल में प्रयुक्त और अध्ययन की जाने वाली सभी तकनीकों और सम्बंधित विज्ञान का समूह है। उन्होंने बताया कि नैनोटेक्नोलोजी अणुओं व परमाणुओं की इंजीनियरिंग है, जो भौतिकी, रसायन, बायोइन्फराॅर्मेटिक्स व बायोटेक्नोलोजी जैसे विषयों को आपस में जोड़ती है। इस टेक्नोलोजी से बायोसाइंस, मेडिकल साइंस, इलेक्ट्रोनिक्स व रक्षा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाया जा सकता है, क्योंकि इससे किसी वस्तु को एक हजार गुणा तक मजबूत, हल्का और भरोसेमंद बनाया जा सकता है। छोटे आकार, बेहतर क्षमता और टिकाऊपन के कारण मेडिकल और बायोइंजीनियरिंग में नैनोटैक्नोलोजी तेजी से बढ रही है।

नैनो तकनीक से वस्तुएं बनती हैं बेहतर

गौड़ ने बताया कि नैनोसाइंस अति सूक्ष्म मशीनें बनाने का विज्ञान है। ऐसी मशीनें जो मानव शरीर में उतरकर उसकी धमनियों में चल-फिर कर वहीं रोग का आपरेशन कर सके। आज हर घरेलु वस्तु में नैनोतकनीक का समावेश है। उपभोक्ता वस्तुओं में इनके अनेक अनुप्रयोग हैं, जैसे धूप का चश्मा, ग्लास कोटिंग में नैनो तकनीक का उपयोग होता है, जिसके कारण वे और भी मजबूत और हानिकारक पराबैंगनी किरणों को पहले की तुलना में अधिक बेहतर तरीके से ब्लाॅक कर सकते हैं। सनस्क्रीन और अन्य काॅस्मेटिक्स में भी नैनोकण होते हैं, जो प्रकाश को आर-पार जाने देते है, परन्तु पराबैंगनी किरणों को रोक लेते हैं। पहनावे के लिए कपड़ों को भी ये अधिक टिकाऊ बनाते हैं, उन्हें वाटरप्रूफ और हवा प्रूफ बनाते हैं। पैकेजिंग जैसे कि दूध आदि के कार्टन में नैनोकण इस्तेमाल किए जाते हैं, ताकि दूध प्लास्टिक की थैली में अधिक समय तक तरोताजा रहे।

नैनोटेक्नोलोजी में है कॅरियर की असीम संभावनाएं

उन्होंने अपने व्याख्यान में जानकारी दी कि देश में नैनोतकनीक के क्षेत्र में अनुसंधान का काम तेजी से चल रहा है। भविष्य में इस क्षेत्र में विकास की काफी संभावनाएं हैं। नैनोटेक्नोलोजी के क्षेत्र में लगातार विकास होने की वजह से युवाओं के लिए इस क्षेत्र में असीम संभावनाएं उत्पन्न होंगी। यह इंटरडिसीप्लेनरी एरिया है, इसलिए इस क्षेत्र में आने वाले युवाओं को फिजिक्स, कैमिस्ट्री, बाॅयोलाॅजी और मैथ्स जैसे विषयों से अच्छा होना जरूरी है। लगातार अनुसंधान एवं विकास की वजह से यह कहा जा सकता है कि आने वाला समय नैनोटैक्नोलोजी का ही है।

कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष प्रो. बीएल जैन ने चिकित्सा तथा मेडिकल क्षेत्र में इस टेक्नोलोजी की आवश्यकता को महत्वपूर्ण बताया। इस व्याख्यान में डाॅ. सरोज राय, डाॅ. आभासिंह, डाॅ. मनीष भटनागर, डाॅ. भाबाग्रही प्रधान, डाॅ. गिरधारीलाल शर्मा, डाॅ. विष्णुकुमार, डाॅ. अमिता जैन, प्रमोद ओला आदि ने भागीदारी निभाई व व्याख्यान की जानकारी के लिए आभार ज्ञापित किया।

Read 73 times

Latest from