लाडनूँ, 31 अगस्त 2026। जैन विश्वभारती संस्थान के कुलपति प्रो. बच्छराज दुगङ के दिशानिर्देश पर आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के समस्त संकाय सदस्यों ने महाविद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थियों के साथ प्राचार्य डॉ. रविन्द्रसिंह राठौड़ की अगुवाई में आचार्य महाश्रमण के दर्शनार्थ उनके प्रवास स्थल पहुँचकर आचार्यश्री का आशीर्वाद एवं सान्निध्य प्राप्त किया। महिला शिक्षा के उन्नयन हेतु आचार्यश्री महाश्रमण ने आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय को धर्मसंघ के अष्टम आचार्य कालूगणी के मनोनुकूल आचार्य तुलसी द्वारा स्त्री शिक्षा के रूप में देखे गए अजय स्वप्न की अनुकृति के रूप में स्वीकार किया। महाविद्यालय की छात्राओं को दिए गए अपने प्रेरणादायी व्याख्यान में गुरुदेव ने कहा कि केवल पुस्तकों का ज्ञान अर्जित करना ही सच्ची शिक्षा नहीं है, अपितु चरित्र निर्माण, विचारों की पवित्रता और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का बोध होना भी शिक्षा का मूल ध्येय होना चाहिए। आचार्यश्री ने ज्ञान को परिभाषित करते हुए बताया कि ज्ञान महज सूचनाओं का संग्रह मात्र ही नहीं होता है बल्कि सच्चा ज्ञान वही है जो व्यक्ति के भीतर नम्रता, विवेक और सही-गलत का भेद करने की क्षमता उत्पन्न कर सके। इस अवसर पर गुरुदेव ने कहा कि विद्यार्थियों को केवल अंकों की होड़ में शामिल होने के बजाय व्यावहारिक और जीवनोपयोगी ज्ञान प्राप्त करने पर ध्यान देना चाहिए और इसके संबंध में उन्होंने देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के प्रेरक उदाहरण के साथ अनेक पौराणिक एवं ऐतिहासिक उद्धरण भी छात्राओं के हितार्थ प्रस्तुत किए। व्याख्यान के उपरान्त गुरुदेव द्वारा विद्यार्थियों के मनोभावों से उद्धृत समस्या प्रश्नों का सहजभाव से उत्तर देकर उनकी जिज्ञासाओं का समाधान भी दिया। व्याख्यान के उपरान्त कुलपति प्रो. दूगड़ ने संस्थान की ओर से गुरुदेव द्वारा प्रदत्त आशीर्वचनों के प्रति हार्दिक कृतज्ञता ज्ञापित की। इस विशिष्ट उपक्रम में विद्यार्थियों सहित समस्त महाविद्यालय परिवार ने श्रद्धा एवं उत्साह के साथ भाग लिया।



