कर्मफल सिद्दांत ही जीवन का आधार- प्रो. जैन
लाडनूँ, 3 अगस्त 2026। जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग में 3 अगस्त को भगवानश्री कृष्ण की जयंती जन्माष्टमी का पर्व मनाया गया। कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष प्रो. बीएल जैन ने अपने विचार रखते हुए प्रशिक्षुओं को देश के विभिन्न हिस्सों में मनाए जाने वाले जन्माष्टमी उत्सव की जानकारी दी। उन्होंेने बताया कि भारत सांस्कृतिक एवं सामाजिक विरासत वाला देश है, जहाँ अनेक पर्व, त्यौहार तथा मेले सांस्कृतिक विविधता के परिचायक के रूप में मनाए जाते हैं। भगवान कृष्ण को कर्म का देवता माना गया हैं। उनका सम्पूर्ण जीवन, बाल लीलाओं, युवा अवस्था के माध्यम से हमें चरित्र निर्माण एवं नैतिकता हेतु प्रेरित करता है। उनकी प्रेरणा ही है कि हमें सदैव शुभ एवं सात्विक कर्म करने चाहिए, क्योंकि हर कर्म का फल निश्चित ही मिलता है। कार्यक्रम का शुभारम्भ भगवान कृष्ण को माल्यार्पण एवं पूजन के साथ हुआ। कार्यक्रम में डॉ. आभा सिंह, डॉ.मनीष भटनागर, डॉ. विष्णु कुमार, डॉ. अमिता जैन, डॉ. गिरधारी लाल शर्मा, डॉ. देवीलाल कुमावत, डॉ. अनुजा, सुश्री स्नेहा शर्मा आदि सभी संकाय सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम के प्रभारी डॉ. गिरिराज भोजक ने शुभकामनाओं के साथ गीता दर्शन पर विचार रखते हुए आभार ज्ञापित किया।



