लाडनूँ, 5 सितंबर 2026। जैन विश्वभारती इंस्टीट्यूट में शिक्षक दिवस के अवसर पर विविध सांस्कृतिक एवं रचनात्मक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने सरस्वती वंदना, गुरु वंदना, काव्य-पाठ एवं प्रेरणादायी भाषणों के माध्यम से अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता व्यक्त की। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बी.आर. दूगड़ ने अपने संबोधन में शिक्षक के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षक केवल पुस्तकीय ज्ञान प्रदान करने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि विद्यार्थी के व्यक्तित्व, संस्कार एवं चरित्र का निर्माण करने वाला मार्गदर्शक होता है। उन्होंने कहा कि एक श्रेष्ठ शिक्षक वही है जो स्वयं मूल्यवान, संस्कारवान एवं चरित्रवान हो तथा अपने आचरण से दूसरों को प्रेरित करने की क्षमता रखता हो। उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन में संस्कारों को अपनाने, भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं से जुड़े रहने तथा नैतिक एवं मानवीय मूल्यों को अपने आचरण में उतारने के लिए प्रेरित किया। साथ ही, आचार्यश्री के विचारों एवं जीवन-दर्शन का अनुसरण करते हुए ज्ञान के साथ संस्कार और चरित्र को जीवन का आधार बनाने का संदेश दिया।
इस अवसर पर संस्थान परिवार के सभी सदस्यों ने आचार्य श्री महाश्रमण जी एवं युवाचार्य श्री महावीर मुनि जी के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान आचार्यश्री ने गुरु के स्वरूप एवं महत्व को स्पष्ट करते हुए बताया कि गुरु मुख्यतः दो प्रकार के होते हैंकृशैक्षिक गुरु और आध्यात्मिक गुरु। शैक्षिक गुरु वह होता है जो व्यक्ति को ज्ञान, शिक्षा, कौशल एवं जीवनोपयोगी विषयों का बोध कराता है और उसे अपने जीवन में आगे बढ़ने के लिए योग्य बनाता है। वहीं आध्यात्मिक गुरु व्यक्ति को आत्मबोध, संयम, सदाचार एवं आंतरिक विकास की दिशा प्रदान करता है तथा उसे स्वयं को जानने और जीवन के उच्च मूल्यों को समझने की प्रेरणा देता है। इस प्रकार शैक्षिक गुरु व्यक्ति के बौद्धिक विकास का मार्ग प्रशस्त करता है, जबकि आध्यात्मिक गुरु उसके आंतरिक एवं नैतिक विकास का मार्गदर्शक बनता है।
आचार्यश्री के इस मार्गदर्शन ने शिक्षक दिवस के अवसर को और अधिक सार्थक एवं आध्यात्मिक बना दिया। इससे विद्यार्थियों एवं संस्थान परिवार को यह संदेश मिला कि शिक्षा तभी पूर्ण मानी जाती है, जब ज्ञान के साथ संस्कार, चरित्र, अनुशासन और आत्मिक चेतना का विकास भी हो। समारोह में विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना, गुरु वंदना, कविता-पाठ एवं भाषणों ने कार्यक्रम को भावपूर्ण एवं प्रेरणादायी बना दिया। समारोह ने गुरु-शिष्य परंपरा की गरिमा, भारतीय संस्कृति के मूल्यों तथा शिक्षा के व्यापक उद्देश्य को सार्थक रूप से प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में संस्थान के सभी विद्यार्थी एवं शिक्षकगण उपस्थित रहे।



