JVBI
JVBI Assistant
Online • Reply in 1 min
Enquiry Now
NAAC A Grade
ISO 9001:2015
34+ Years of Excellence
Apply Online
Call : 9461239683

Enquire Now

Our team will contact you shortly.

️ +91
9 + 7
Back to News
General

शांति और अहिंसाः विश्व मानवता की सबसे बड़ी आवश्यकता- डॉ. विष्णुकुमार

लाडनूँ, 21 सितम्बर 2026। जैन विश्वभारती संस्थान के शिक्षा विभाग में 21 सितम्बर को अ ंतरराष्ट्रीय शांति दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष प्रो. बी. एल. जैन ने कहा कि वर्तमान में विश्व शांति केवल युद्ध एवं संघर्ष की अनुपस्थिति तक सीमित नही ंहै, बल्कि समाज में आपसी सम्मान, सहयोग, सह-अस्तित्व, न्याय, समानता और मानवीय संवेदनाओं को बढ़ावा देना भी शांति का महत्वपूर्ण आधार है। शिक्षा शांति निर्माण का सबसे प्रभावी माध्यम है। शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, संवेदनशीलता, सहिष्णुता और दूसरों के विचारो ंका सम्मान करने की भावना विकसित की जा सकती है। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान प्रदान करने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक मूल्यों और शांतिपूर्ण व्यवहार को विकसित करने वाला मार्गदर्शक भी होता है। कर्यक्रम में बताया गया कि विद्यार्थियों को शांति एवं अहिंसा के मूल्यों से जोड़ने के लिए विद्यालय एवं उच्च शिक्षा संस्थानो ंमें विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाना चाहिए। इनमें शांति व संवाद, निबंध लेखन, भाषण, पोस्टर निर्माण, समूह चर्चा, जागरूकता रैली तथा मूल्य-आधारित गतिविधियां प्रमुख हो सकती हैं। संकाय सदस्य डॉ. विष्णुकुमार ने कहा कि शांति मानव जीवन की मूल आवश्यकता है। परिवार, विद्यालय, समाज और राष्ट्र सभी स्तरों पर शांतिपूर्ण वातावरण के निर्माण के लिए संवाद, सहयोग और पारस्परिक सम्मान आवश्यक हैं। उन्होंने कहाकि विद्यार्थियों को अहिंसा, प्रेम, करुणा, सह-अस्तित्वऔर सामाजिक जिम्मेदारी जैसे मूल्यों से जोड़ना आज की शिक्षा व्यवस्था की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। उन्होंने अंतर राष्ट्रीय शांति दिवस को केवल एक दिवस के रूप में न मना कर उसके संदेश को दैनिक जीवन में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि “शांति की शुरुआत व्यक्ति के विचारों और व्यवहार से होती है। ”यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में क्रोध, हिंसा, भेदभाव और असहिष्णुता के स्थान पर संवाद, धैर्य और सहयोग को अपनाए, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।

कार्यक्रम में विभाग के संकाय सदस्य डॉ. मनीष भटनागर, डॉ. अमिता जैन, डॉ. गिरिराज भोजक, डॉ. आभासिंह, डॉ. गिरधारीलाल शर्मा, डॉ. देवीलाल ,तथा डॉ अनुजा उपस्थित रहे।

Share:
Latest News