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तत्काल प्रतिक्रिया के स्थान पर ठहराव एवं चिंतन से शांति संभव - नीतू ओस्तवाल

विश्व शांति स्थापना में व्यक्तिगत एवं सामूहिक प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका - नीलिमा सिंह

लाडनूँ, 21 सितम्बर 2026। जैन विश्वभारती संस्थान के अहिंसा एवं शांति विभाग द्वारा कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ के संरक्षण तथा मार्गदर्शन में अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस मनाया गया, जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में ओसवाल ग्रुप आफ इंडस्ट्रीज की चेयरपर्सन, समाजसेविका एवं मोटिवेशनल स्पीकर नीतू अस्तवाल एवं महाप्रज्ञ प्रोगेसिव स्कूल की प्राचार्य नीलिमा सिंह रही। इस अवसर पर श्रीमती नीतू अस्तवाल ने शांति स्थापना के कुछ व्यावहारिक पक्षों पर अपने विचार प्रस्तुत किये और उन्होंने वैश्विक शांति के लिए मानसिक व पारिवारिक शांति को पूर्व शर्त माना। उन्होंने अपने उद्बोधन में इस बात पर जोर दिया कि हमें किसी भी घटनाक्रम एवं परिस्थिति में तत्काल प्रतिक्रिया न कर पहले रुकना चाहिए और उसके पश्चात चिंतन करके ही अपना निर्णय एवं प्रतिक्रिया देनी चाहिए, यह प्रवृत्ति हमेशा तनाव और विवादों को रोकने तथा शांति स्थापना में काफी सहायक सिद्ध रहती है। उन्होंने विद्यार्थियों को कुछ व्यावहारिक प्रयोग के माध्यम से भी शांति स्थापना के बारे में रोचक जानकारियां प्रदान की।

महाप्रज्ञ प्रोगेसिव स्कूल की प्राचार्य नीलिमा सिंह ने विश्व शांति स्थापित करने के लिए युवा एवं विद्यार्थी वर्ग का क्या योगदान हो सकता है? इस बारे में अपना उद्बोधन दिया। उन्होंने युवाओं को इस बात के लिए प्रेरित किया कि, राष्ट्र और विश्व में शांति स्थापना में योगदान देना संपूर्ण मानव जगत का नैतिक दायित्व होता है। हमें इस दिशा में शांति स्थापित करने के लिए छोटे-छोटे प्रयास प्रतिदिन करने चाहिए। छोटे-छोटे एवं सतत प्रयासों से भी स्थायी शांति की स्थापना का मार्ग प्रशस्त होता है। विभागाध्यक्ष प्रो. वंदना कुंडलिया ने अतिथियों का परिचय प्रस्तुत किया और स्वागत वक्तव्य दिया। स्वागत वक्तव्य में इन्होंने अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस की स्थापना के लिए किए जाने वाले अपेक्षित प्रयासों के बारे में जानकारी प्रदान की। अपने वक्तव्य में यह भी बताया कि बाहृय शांति की स्थापना में आंतरिक शांति का भी विशेष योगदान होता है। अतः हमें आंतरिक एवं मानसिक शांति को बढ़ावा देने के लिए भी सकारात्मक प्रयास करने चाहिए। कार्यक्रम का संयोजन विभाग की सहायक आचार्य डॉ. लिपि जैन ने किया और अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस के मनाए जाने के उद्देश्यों एवं ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य पर प्रकाश डालते हुए इस दिवस की महत्ता को उजागर किया। अंत में सहायक आचार्य डॉ. बलबीर सिंह ने सभी के प्रति आभार ज्ञापित किया। इस अवसर पर संस्थान के ओएसडी प्रो. अशोक कुमार जैतावत, वरिष्ठ संकाय सदस्य प्रो. दामोदर शास्त्री, अंग्रेजी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. रेखा तिवारी, शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष, प्रो. बी.एल. जैन, योग एवं जीवन विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. युवराज सिंह खंगारोत सहित विभिन्न विभागों के संकाय सदस्य तथा करीब 100 विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के आयोजन में विभाग की सहायक आचार्य डॉ. रवीना टैगोर तथा विद्यार्थियों का भी सहयोग रहा।

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