शिक्षा में मूल्यों का समावेश जरूरी - प्रो. त्रिपाठी

लाडनूं, 20 नवम्बर, 2017। शिक्षा मानव की सुषुप्त चेतना को जागृत करती है, शिक्षा अन्धकार से प्रकाश की ओर ले जाती है - आदि कथन शिक्षा की सार्थकता को सिद्ध करते हैं किन्तु मूल्यों के अभाव में शिक्षा की कोई सार्थकता नहीं है। मूल्यों के अभाव में शिक्षा विद्वान् तो बना सकती है किन्तु इन्सान नहीं बना सकती है। इन्सान बनाने के लिए शिक्षा में मूल्यों का समावेश जरूरी है। यह विचार उत्कर्ष-17 कार्यक्रम में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सिंघाना, लाडमनोहर बाल निकेतन उच्च माध्यमिक विद्यालय लाडनूं एवं संस्कार उच्च माध्यमिक विद्यालय लाडनूं के छात्रों को संबोधित करते हुए आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य एवं दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने व्यक्त किये। प्रो. त्रिपाठी ने आगे कहा कि जैन विश्वभारती संस्थान के बी.ए., बी.काॅम, बी.एस.सी. एवं एम.ए. आदि सभी पाठ्यक्रमों में चरित्र निर्माण के बिन्दुओं को समाहित किया गया है। यहाँ के सभी पाठ्यक्रमों में डिग्री शिक्षा एवं जीवन-निर्माण की शिक्षा समाहित है। लाडनूं में स्थित यह संस्थान विदेशियों के आकर्षण का केन्द्र है। विदेशी यहां समर स्कूल में अहिंसा, शान्ति, जीवन-विज्ञान, प्रेक्षाध्यान, जैनविद्या, प्राकृत आदि का अध्ययन करने समय-समय पर आते हैं। प्रो. त्रिपाठी ने संस्थान को महिला शिक्षा का केन्द्र बतलाया, जहाँ सर्वांगीण व्यक्तित्व के निर्माण पर बल दिया जाता है। इस अवसर पर मंचासीन लाड मनोहर की प्राचार्या कंचनलता शर्मा, संस्कार स्कूल की निदेशक डाॅ. सुमन गोदारा एवं सिंघाना के वरिष्ठ अध्यापक मुन्नाराम जाखड़ को प्रो. आनन्दप्रकाश त्रिपाठी एवं उपकुलसचिव डाॅ. प्रद्युम्न सिंह के द्वारा मोमेण्टो भेंटकर सम्मानित किया गया। आभार ज्ञापित करते हुए उपकुलसचिव डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत ने कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से लाडनूं और परिपाश्र्व में स्थित छात्राओं को उच्च शिक्षा के प्रति जागृत करने का एक प्रयास संस्थान द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने संस्थान में समागत तीनों संस्थाओं के प्राचार्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय की छात्रा ज्योति नागपुरिया ने महाविद्यालय की विशेषताओं पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम संयोजक डाॅ. जुगल दाधीच ने उत्कर्ष-17 कार्यक्रम की विस्तार से रूपरेखा प्रस्तुत की और बताया कि प्रथम चरण में लाडनूं उपखण्ड के स्कूलों को संस्थान में आमंत्रित कर उच्च शिक्षा के प्रति जागृत किया जायेगा और उसके बाद हमारे शिक्षक स्कूलों एवं बस्तियों में जाकर लोगों को उच्च शिक्षा के प्रति जागृत करेंगे।

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