जैन विश्वभारती संस्थान के समाज कार्य विभाग की दो दिवसीय आमुखीकरण कार्यशाला का आयोजन

शिक्षा के साथ नैतिकता, जीवन मूल्यों और चरित्र निर्माण पर ध्यान आवश्यक- प्रो. त्रिपाठी

लाडनूँ, 28 अगस्त 2019। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के समाज कार्य विभाग के अन्तर्गत दो दिवसीय आमुखीकरण कार्यशाला का आयोजन बुधवार को किया गया। यहां कार्यशाला के मुख्य अतिथि दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्द प्राकश त्रिपाठी ने कार्यक्रम में अपने सम्बोधन में कहा कि आचार्य तुलसी, उनके शिष्य आचार्य महाप्रज्ञ व उनके शिष्य आचार्य महा्रश्रमण हमारे देश की गुरू-शिष्य परम्परा के श्रेष्ठ उदाहरण कहे जा सकते हैं। इन आचार्यों द्वारा संस्थापित और अनुशासित संस्थान के रूप में जैन विश्वभारती संस्थान है, जहां नैतिकता, जीवन मूल्यों और चरित्र निर्माण की शिक्षा दी जाती है। यहां आधुनिक शिक्षा के सभी विषयों के साथ विद्यार्थी के व्यक्तित्व विकास और उसके केरियर निर्माण पर भी पूरा ध्यान दिया जाता है। उन्होंने संस्थान के विभिन्न विभागों और उनमें संचालित किये जाने वाले पाठ्यक्रमों तथा संस्थान की व्यवस्थाओं व सुविधाओं के बारे में भी बताया तथा कहा कि आज प्रत्येक अभिभावक अपनी संतान को गुणवान और आदर्श बनाना चाहती है और इसके लिये उसे अच्छे शिक्षण संस्थान की जरूरत रहती है। लाडनूँ का यह संस्थान चूरू और नागौर जिलों में ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में श्रेष्ठ संस्थान के रूप में प्रख्यात है, जहां विदेशों से भी विद्यार्थी अध्ययन के लिये आते हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुये विभागाध्यक्ष डाॅ. बिजेन्द्र प्रधान ने समाज कार्य विभाग के पाठ्यक्रमों, नियमों, गणवेश, अनुशासन, प्रार्थना व ध्यान में उपस्थिति, फील्ड वर्क आदि के बारे में विस्तार से बताया तथा जानकारी दी कि समाज कार्य विभाग के विद्यार्थी पढते-पढते ही अच्छी नौकरी ज्वायन कर लेते हैं। यहां प्लसेमेंट सेवा पर पूरा ध्यान दिया जाता है। अंत में डाॅ. विकास शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। डाॅ. पुष्पा मिश्रा ने कार्यशाला के दो दिवसीय कार्यक्रमों की रूपरेखा प्रस्तुत की तथा कार्यक्रम का संचालन किया।

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