जैन विश्वभारती संस्थान के अहिंसा एवं शांति विभाग के तत्वावधान में एक दिवसीय अहिंसा प्रशिक्षण शिविर का आयोजन

एकाग्रता, सकारात्मक सोच व संकल्पशक्ति के विकास के लिये अहिंसा प्रशिक्षण सहायक

लाडनूँ, 15 फरवरी 2020। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के अहिंसा एवं शांति विभाग के तत्वावधान में एक दिवसीय अहिंसा प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष प्रो. अनिल धर ने अध्यक्षता करते हुये कहा कि शांति की संस्कृति व मानवाधिकारों की रक्षा की दिया में अहिंसा प्रशिक्षण महत्वपूर्ण महत्व रखता है। हम अपनी छोटी-छोटी आदतों को बदल कर सकारात्मक सोच के माध्यम से हम अपने व्यवहार को एवं समूचे जीवन को परिवर्तित कर सकने में समर्थ हो पाते हैं। प्रशिक्षण का अपने-आप में बहुत महत्व होता है। सह आचार्य समणी रोहिणी प्रज्ञा ने कहा कि अपने भाव, विचार और संकल्प को मजबूती दिये जाने से व्यक्ति बदल सकता है, इसमें अहिंसा प्रशिक्षण से बहुत सहायता प्राप्त होती है। शिविर में प्रो. समणी सत्यप्रज्ञा ने सम्भागियों को अहिंसा प्रशिक्षण के व्यावहारिक प्रयोगों का अभ्यास करवाया। उन्होंने मन की शांति, एकाग्रता व मानसिक संतुलन में सहायक अनुलोम-विलोम प्राणायाम तथा ध्यान के प्रयोग करवाये। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से कहा कि संस्कारों के बीज मन में बोने का प्रयास करें। महाप्राण ध्वनि और अनुलोम-विलोम के प्रयोग द्वारा संकल्पशक्ति का विकास होगा और सकारात्मक सोच विकसित होगी। प्रो. समणी सत्यप्रज्ञा ने गुस्सा नहीं करने, स्मरणशक्ति के विकास और शांति प्राप्ति के लिये मस्तिष्क की शक्ति बढाने के प्रयोग करवाये और उनका महत्व बताया। उन्होंने बताया कि इनसे एकाग्रता के साथ मन को मजबूती मिलती है। शिविर में यहां के दयानन्द सरस्वती सी. सै. स्कूल के विद्यार्थियों ने भाग लेकर प्रशिक्षण प्राप्त किया। शिविर में अहिंसा एवं शांति विभाग के शोधार्थियों व विद्यार्थियों कमल किशोर, उषा, हरफूल, हीरालाल, रजनी, राजकुमारी, रेणु, सोनिया आदि का सहयोग रहा। कार्यक्रम के अंत में सहायक आचार्य डाॅ. रविन्द्र सिंह राठौड़ ने आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. विकास शर्मा ने किया।

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