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21 दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारम्भ

21 दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारम्भ

पाण्डुलिपि संरक्षण से धरोहर, संस्कृति एवं इतिहास सुरक्षित - प्रो. दूगड़

लाडनूँ, 25 नवम्बर, 2017। जैन विश्वभारती संस्थान के जैनविद्या एवं तुलनात्मक धर्म तथा दर्शन विभाग व प्राच्य विद्या एवं भाषा विभाग के तत्त्वावधान में 21 दिवसीय पाण्डुलिपि विज्ञान एवं लिपिविज्ञान विषयक कार्यशाला का शुभारम्भ संस्थान के आचार्य तुलसी-महाप्रज्ञ आॅडिटोरियम में समारोह पूर्वक हुआ। समारोह की अध्यक्षता करते हुए जैन विश्वभारती संस्थान के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने कहा कि पाण्डुलिपि संरक्षण धरोहर, संस्कृति व इतिहास को सुरक्षित रखने का विशिष्ट कार्य है। इससे ज्ञान के नये-नये क्षितिज उद्भव कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत विश्व का अग्रणी देश है, जहाँ प्राचीन ज्ञान का संरक्षण पाण्डुलिपि एवं लिपियों के माध्यम से किया गया है। प्रो. दूगड़ ने बताया कि भारत में 3 मिलियन पाण्डुलिपियों को संरक्षित किया गया है, जो विश्व के अन्य किसी देश में नहीं है। ज्ञान के विस्तार की मीमांसा करते हुए उन्होंने सिद्धान्त, शास्त्र एवं व्यवहार को लिपि विकास का प्रमुख आधार बताया। इस अवसर पर प्रो. दूगड़ ने पाण्डुलिपि, लिपि संरक्षण एवं ज्ञान के विकास के विविध माध्यमों पर प्रकाश डाला।

समारोह में प्रो. दूगड़ ने कहा कि संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार नई दिल्ली के नेशनल मिशन फाॅर मैनुस्क्रीप्ट्स द्वारा पाण्डुलिपि संरक्षण एवं प्रशिक्षण की दिशा में महत्त्वपूर्ण कार्य किया जा रहा है। उन्होंने पाण्डुलिपि संरक्षण के प्रति जागरूकता की आवश्यकता बताते हुए कहा कि विश्वभर की करीब पांच हजार भाषाओं में से लगभग ढ़ाई हजार भाषाएँ ही सुरक्षित रह पायी हैं, यह चिंतनीय पहलू है।

मुख्य अतिथि वर्द्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय कोटा के पूर्व कुलपति प्रो. नरेश दाधीच ने कहा कि इतिहास-लेखन में पाण्डुलिपि का बहुत बड़ा योगदान होता है। मूल पाण्डुलिपि सामने आती है तो ही यथार्थ को समझा जा सकता है। गीता के मूल ग्रंथ की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि मूल गीता में 1400 श्लोक बताये गये हैं लेकिन अब करीब 700 श्लोक ही उपलब्ध हैं। प्रो. दाधीच ने लुप्त हो रही लिपियों एवं बोलियों को संकलित किये जाने की आवश्यकता का आह्वान करते हुए राजस्थानी भाषा के विभिन्न स्वरूपों के साथ भाषा व लिपि के परिष्कार की आवश्यकता जतायी।

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि नेशनल मिशन फाॅर मैनुस्क्रीप्ट्स के कार्यक्रम अधिकारी डाॅ. श्रीधर बारीक ने भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा पाण्डुलिपि संरक्षण के लिए किये जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। प्रो. दामोदर शास्त्री ने पाण्डुलिपि संरक्षण के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए जैन परम्परा में पाण्डुलिपि व लिपि संरक्षण के योगदान को रेखांकित किया।

कार्यशाला की निदेशिका प्रो. समणी ऋजुप्रज्ञा ने अतिथियों का परिचय देते हुए स्वागत वक्तव्य प्रस्तुत किया। प्रो. आनन्दप्रकाश त्रिपाठी ने संस्थान का परिचय दिया। इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारम्भ कुलगीत के साथ हुआ। मुमुक्षु बहिनों ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया। कार्यशाला के संयोजक डाॅ. योगेश कुमार जैन ने कुशल संयोजन किया। आभार ज्ञापन प्राच्य विद्या एवं भाषा विभाग की अध्यक्ष डाॅ. समणी संगीत प्रज्ञा ने व्यक्त किया। अतिथियों का स्वागत प्रो. बी.एल. जैन, प्रो. अनिल धर, डाॅ पुष्पा मिश्रा, डाॅ अमिता जैन आदि ने किया। ज्ञात रहे इस 21दिवसीय कार्यशाला में देश भर से करीब 40 विद्वान् भाग ले रहे हैं।

जैन विश्वभारती संस्थान में छः दिवसीय खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन

जैन विश्वभारती संस्थान में छः दिवसीय खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन

खेलों से होता है सर्वांगीण विकास - श्री विनोद कक्कड़

लाडनूँ, 20 नवम्बर, 2017। जैन विश्वभारती संस्थान में खेलकूद प्रतियोगिताओं का शुभारम्भ किया गया, जिसके अन्तर्गत संस्थान के कुलसचिव विनोद कुमार कक्कड़ ने गोला फेंककर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। क्रीड़ासचिव डाॅ. रविन्द्र सिंह राठौड़ ने बताया कि संस्थान में 20 से 25 नवम्बर तक खेलकूद प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी, जिनमें गोला फेंक, तस्तरी फेंक, 100मी. दौड़, 200मी. दौड़, बैडमिण्टन, ऊंची-कूद, लम्बी-कूद, कबड्डी, खो-खो आदि प्रतियागिताएँ आयोजित की जाएँगी। कुलसचिव विनोद कुमार कक्कड़ ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्द्धन करते हुए कहा कि यह स्वस्थ प्रतिस्पर्धात्मक प्रतियोगिता है, जिसमें विद्यार्थियों का शारीरिक व मानसिक विकास होता है, जो जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने विद्यार्थियों को कहा कि सभी को खेल भावना से खेलना चाहिए। हार या जीत मायने नहीं रखती। शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बी.एल जैन ने अपने उद्बोधन में कहा कि ऐसी प्रतियोगिताओं से मानसिक संतोष प्राप्त होता है, जिससे आत्मविश्वास की वृद्धि होती है। कार्यक्रम में खेलकूद समिति सदस्य डाॅ. सरोजराय, सुश्री रत्ना चैधरी, क्रीड़़ा प्रशिक्षक श्री भूपेन्द्र सिंह, उपकुलसचिव डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत, डाॅ. जुगल किशोर दाधीच, डाॅ. बी. प्रधान, डाॅ. गोविन्द सारस्वत, वित्ताधिकारी राकेश कुमार जैन, डाॅ. विकास शर्मा आदि संकाय सदस्य तथा विभागों के विद्यार्थी उपस्थित थे। अंत में क्रीड़ा-सचिव डाॅ. रविन्द्रसिंह राठौड़ ने सभी का आभार ज्ञापन किया।

लम्बीकूद (छात्रा वर्ग) में आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय की मोनिका प्रथम व रेणुका चैधरी द्वितीय स्थान एवं योगा विभाग की राजू जाट तृतीय स्थान पर रही। लम्बी कूद (छात्र वर्ग) में समाज कार्य विभाग के नरेन्द्र जलोया प्रथम, द्वितीय स्थान पर योग जीवन विज्ञान विभाग के साकेत एवं तृतीय स्थान पर समाज कार्य विभाग के विपिन शर्मा रहे। इसी प्रकार दौ सौ मीटर दौड (छात्र वर्ग) में प्रथम इन्द्राराम पुनियां, द्वितीय साकेत एवं तृतीय स्थान पर विश्वजीत पुनियां रहें। दौ सौ मीटर दौड़ (छात्रा वर्ग) में शिक्षा विभाग की दिव्या पारीक प्रथम, द्वितीय निरमा एवं तृतीय स्थान पर मंजू कलवानिया रही। इसी प्रकार कैरम (छात्र वर्ग) में प्रथम महेन्द्र सिंह, द्वितीय स्थान पर रणजीत जैसवाल एवं तृतीय राजदीप घोष रहे। प्रतिदिन विविध खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है।

जैन विश्वभारती संस्थान में पाँच दिवसीय सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं का आयोजन

जैन विश्वभारती संस्थान में पाँच दिवसीय सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं का आयोजन

सांस्कृतिक प्रतियोगिताएँ सर्वांगीण विकास का माध्यम - प्रो. त्रिपाठी

लाडनूँ, 13 नवम्बर, 2017। सांस्कृतिक कार्यक्रमों से विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास संभव है। ये प्रतियोगिताएं हमारे तनाव को दूर करने में सहायक हैं। ये विचार जैन विश्वभारती संस्थान में 13-17 नवम्बर तक आयोजित होने वाली पाँच दिवसीय सांस्कृतिक प्रतियोगिता के उद्घाटन समारोह में प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने अभिव्यक्त किये। उन्होंने कहा कि सभी विद्यार्थियों को इन प्रतियोगिताओं में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए। ये विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम में शामिल है। इस अवसर पर शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बी.एल. जैन ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि किताबी ज्ञान के साथ-साथ हमारे मानसिक विकास में ये सांस्कृतिक प्रतियोगिताएँ अत्यन्त जरूरी हैं। मंचस्थ सभी विभागाध्यक्षों में डाॅ. बी. प्रधान, डाॅ जुगलकिशोर दाधीच, डाॅ. प्रद्युम्नसिंह शेखावत एवं डाॅ. गोविन्द सारस्वत ने अपने-अपने विचार व्यक्त किये। सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के उद्घाटन सत्र का शुभारम्भ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं एम.एड. की छात्रा रागिनी शर्मा के नृत्य से हुआ। सभी अतिथियों का स्वागत एवं प्रतियोगिताओं के परिचय एवं उद्देश्य पर सांस्कृतिक कार्यक्रम की समन्वयक डाॅ. अमिता जैन ने प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इन पांच दिनों तक एकल नृत्य, सामुहिक नृत्य, एकल गायन, मेहन्दी, पोस्टर पेण्टिंग, माइम एवं नाटक प्रतियोगिताओं का आयोजन प्रतिदिन 2 बजे से किया जायेगा। कार्यक्रम के अन्त में डाॅ. आभा सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया तथा संयोजन डाॅ. सत्यनारायण भारद्वाज ने किया।

सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के प्रथम दिन एकल नृत्य प्रतियोगिता आयोजित हुई, जिसमें 27 प्रतिभागियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस प्रतियोगिता के निर्णायक के रूप में नुपूर जैन, सुश्री मुकुल सारस्वत एवं श्रीमती सोनिका जैन ने अपनी भूमिका निभाई। सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के दूसरे दिन समूह नृत्य एवं रंगोली प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। समूह नृत्य में सात समूहों ने प्रतिभगिता दर्ज की, जिनमें आनन्दपाल एवं समूह, मुस्कान एवं समूह, ज्योति भोजक एवं समूह, सुष्मिता एवं समूह, डिम्पल सोनी एवं समूह, पूजा चैधरी एवं समूह तथा सीमा शेखावत एवं समूह थे। सभी समूहों ने पूर्ण उत्साह से इस प्रतियोगिता में भाग लेते हुए मनमोहक प्रस्तुतियां दीं।

रंगोली प्रतियोगिता में 42 समूहों ने प्रतिभागिता दर्ज की। सभी समूहों ने भारतीय संस्कृति तथा वर्तमन समय की ज्वलन्त समस्याओं को रेखांकित किया। इन प्रतियोगिताओं के निर्णायकों के रूप में डाॅ पुष्पा मिश्रा, सुश्री तृप्ति त्रिपाठी, सुश्री रतना चैधरी एवं डाॅ सुनिता इन्दोरिया ने अपनी भूमिका निभाई। सांस्कृतिक समिति की समन्वयक डाॅ अमिता जैन ने बताया कि कल माइम एवं पोस्टर पेंटिंग प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएँगी। प्रतियोगिताओं का संयोजन डाॅ सत्यनारायण भारद्वाज एवं डाॅ आभा सिंह ने किया। चतुर्थ दिवस नाटक एवं माईम प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। नाटक प्रतियोगिता में पांच समूहों ने प्रतिभागिता दी। जिनमें ऊषा सैनी एवं समूह, ताम्बी एवं समूह, मुमुक्षु चेतना एवं समुह, मुमुक्षी धरती एवं समूह, सुविधा जैन एवं समूह रहे। माईम प्रतियोगिता में रंजित एवं समूह, खुशबू एवं समूह, सरिता फिरोदा एवं समूह आदि रहे।

प्रतियोगिताओं में निर्णायक के रूप में डाॅ रविन्द्र सिंह राठौड़ एवं डाॅ विवेक माहेश्वरी रहे। नाटक एवं माईम दोनों ही प्रतियोगिताएं संदेशपरक थीं। कहीं राष्ट्रीय सद्भाव, कहीं राष्ट्रीय चेतना, तो कहीं बेटी बचाओ आदि समाज की अनेक ज्वलन्त समस्याओं पर आधारित थी। कार्यक्रम का संयोजन डाॅ आभा सिंह ने एवं धन्यवाद डाॅ अमिता जैन ने दिया।

सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के अंतिम दिवस एकल गायन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें 28 प्रतिभागियों ने मनमोहक प्रस्तुतियां दीं, जिसके अंतर्गत गजल, लोकगीत एवं भजन प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। निर्णायक डाॅ पुष्पा मिश्रा एवं डाॅ सरोज राय रहे। वहीं पांच दिवसीय सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं का समापन समारोह आयोजित किया गया, जिसमें पांच दिनों के अंतर्गत आयोजित की गई प्रतियोगिताओं का ब्यौरा दिया गया एवं विजेता प्रतिभागियों को प्रोत्साहित किया गया।

लोकनृत्य (एकल) में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय क्रमशः सिद्धि पारीक, ज्योति भोजक, आनन्दपाल सिंह एवं कीमती शर्मा; लोकनृत्य (सामूहिक) में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय क्रमशः सुषमिता नाहर एवं ग्रुप, ज्योति भोजक एवं ग्रुप एवं सीमा शेखावत एवं ग्रुप; रंगोली प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय क्रमशः साजिदा एवं ग्रुप, गरिमा काला एवं ग्रुप, निकिता शर्मा एवं ग्रुप, हेमलता शर्मा एवं ग्रुप; सामूहिक गायन में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय क्रमशः सुरक्षा जैन एवं ग्रुप, मुस्कान एवं ग्रुप, पूर्णिमा चैधरी एवं ग्रुप, रश्मि एवं ग्रुप; पोस्टर पेंटिंग में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय क्रमशः प्रगति भूतोड़िया, पारूल दाधीच, योगिता शर्मा; मेहंदी प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय क्रमशः नाजमीन बानो, सरोज एवं मानसी खटेड़, आयुषी सैनी; माईम प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय क्रमशः रंजित एवं समूह, खुशबू शर्मा एवं समूह, सरिता फिरोदा एवं समूह; नाटक प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय क्रमशः मुमुक्षु धरती एवं समूह, सरिता फिरोदा एवं समूह, ऊषा सैनी एवं समूह, एकल गायन में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय क्रमशः स्वामी अरूण, विकेश चैबे, मुमुक्षु करिश्मा रहे। कार्यक्रम का संयोजन डाॅ आभा सिंह ने किया एवं धन्यवाद एवं परिणाम डाॅ अमिता जैन ने उद्घोष किया।

स्थानकवासी जैन आचार्य शिवमुनि से इन्दौर में भेंट

स्थानकवासी जैन आचार्य शिवमुनि से इन्दौर में भेंट

संस्थान में भगवान महावीर के आत्मस्थ ध्यान पर हो शोध - आचार्य शिवमुनि

इन्दौर, 9 नवम्बर, 2017। जैन धर्म के विभिन्न सम्प्रदायों के आचार्यों के संवाद एवं सम्पर्क कार्यक्रम के अन्तर्गत 9 नवम्बर, 2017 को जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) को एक प्रतिनिधि-मण्डल ने कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ के नेतृत्व में जैन स्थानकवासी सम्प्रदाय के आचार्य शिवमुनिजी के दर्शन इन्दौर में किये। साथ में दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्दप्रकाश त्रिपाठी तथा अहिंसा एवं शांति विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. जुगलकिशोर दाधीच थे। संवाद कार्यक्रम के अन्तर्गत कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने आचार्यश्री को निवेदन किया कि जैन विश्वभारती संस्थान दुनिया का प्रथम जैन विश्वविद्यालय है। इस विश्वविद्यालय के संरक्षण, संवर्द्धन एवं संपोषण की जिम्मेदारी केवल तेरापंथ समाज की ही नहीं अपितु सम्पूर्ण जैन समाज की होनी चाहिए। इस संस्थान के प्रेरणास्रोत आचार्यश्री तुलसी एवं आचार्यश्री महाप्रज्ञ दृष्टिकोण बहुत व्यापक था। इसी व्यापक दृष्टिकोण के कारण सभी सम्प्रदाय के साधु-साध्वियों के लिए इस संस्थान द्वारा अध्ययन की निःशुल्क व्यवस्था की गई। मेरी यही कोशिश है कि गुरुदेव तुलसी के व्यापक दृष्टिकोण को चरितार्थ किया जाये और जैन समाज के सभी आचार्यों तक पहुंचा जाये। कुलपति ने आचार्यश्री को निवेदन किया कि विराट आपका व्यक्तित्व है। आपकी साधना उत्कृष्ट कोटि की है। आपके पास हमारा आगमन इसीलिए हुआ है कि आप आचार्यों के मार्गदर्शन से संस्थान को गति दी जाये।

आचार्यश्री शिवमुनि ने कुलपति से संस्थान विकास की बात सुनकर कहा कि संस्थान अच्छा कार्य कर रहा है। हमारे संघ के बहुत सारे साधु-साध्वियां बी.ए., एम.ए. एवं पी-एच्.डी. भी कर चुके हैं और कई कर भी रहे हैं। संस्थान की सेवाएँ सराहनीय हैं। सुझाव रूप में उन्होंने कहा कि संस्थान में ध्यान-योग पर शोध होना चाहिए। भगवान महावीर आत्मस्थ थे। उनके आत्मस्थ ध्यान पर शोध हो तो अच्छा होगा। कुलपति ने कहा कि आचार्यवर! संस्थान में शोध का क्रम निरन्तर चल रहा है। विशिष्ट शोध के लिए संस्थान में किसी व्यक्ति विशेष के नाम से चेयर स्थापित करने की व्यवस्था है। यदि इस दिशा में आपके श्रावक आगे आते हैं तो उस चेयर के अन्तर्गत इस प्रकार के ध्यान पर शोध और अन्य गतिविधियां संचालित हो सकती हैं। इस प्रकार कुलपति से आचार्यश्री की बहुत ही सार्थक एवं सकारात्मक चर्चा हुई, जिससे भविष्य की संभावनाएँ बनी हैं। इस अवसर पर प्रो. आनन्दप्रकाश त्रिपाठी ने संस्थान का परिचय दिया और कुलपति ने संस्थान का साहित्य, ब्रोशर, संस्थान की पत्रिकाएँ आचार्यश्री को भेंट कीं। युवाचार्य महेन्द्रऋषि के दर्शन कर संस्थान की गतिविधियों से परिचय कराकर उनका भी मार्गदर्शन प्राप्त किया गया। अंत में डाॅ. जुगलकिशोर दाधीच ने आभार व्यक्त किया।

दो दिवसीय दूरस्थ शिक्षा सम्प्रसारक कार्यशाला का आयोजन

दो दिवसीय दूरस्थ शिक्षा सम्प्रसारक कार्यशाला का आयोजन

गुणवत्ता व प्रामाणिकता है विश्वविद्यालय की विशेषता - प्रो. दूगड़

लाडनूँ, 27 अक्टूबर। जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय द्वारा आयोजित दो दिवसीय दूरस्थ शिक्षा सम्प्रसारक कार्यशाला का उद्घाटन शुक्रवार को विश्वविद्यालय के सेमीनार हाॅल में कुलपति प्रो बच्छराज दूगड की अध्यक्षता में समारोहपूर्वक किया गया। प्रो दूगड ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि सम्प्रसारक इस विश्वविद्यालय के प्रतीक हैं, उनका आचरण एवं संवाद विश्वविद्यालय को प्रस्तुत करता है। उन्होंने आगे कहा कि इस विश्वविद्यालय की गुणवत्ता व प्रामाणिकता ही इसकी विशेषता है। उन्होंने कहा यह विश्वविद्यालय इसलिए भी यूनिक है क्योंकि विश्वविद्यालय आचार्यश्री तुलसी, आचार्यश्री महाप्रज्ञ एवं आचार्यश्री महाश्रमणजी के सपनों का संस्थान है। कुलपति ने कहा कि यह विश्वविद्यालय नियमों को सर्वोपरी मानता है, अर्थाजन हमारा उद्देश्य नहीं है। सम्प्रसारक नियमों की पालना का विशेष ध्यान रखें।

प्रो. दूगड़ ने विश्वविद्यालय के नये नियमों का उल्लेख करते हुए कहा कि अब से विश्वविद्यालय के दूरस्थ शिक्षा के परीक्षा-केन्द्र राजकीय महाविद्यालय, नवोदय विद्यालय, सैनिक स्कूलों अथवा समकक्ष संस्थानों में ही स्थापित किये जाएँगे। कुलपति ने सम्प्रसारकों के सहयोग से ही विद्यार्थी सपोर्ट सिस्टम को अधिक प्रभावशाली बनाने का आह्वान किया।

मुख्य-अतिथि के रूप में इन्दिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय जोधपुर की निदेशक डाॅ. ममता भाटिया ने देशभर से समागत विश्वविद्यालय के सम्प्रसारकों को संबोधित करते हुए कहा कि दूरस्थ शिक्षा का दायरा अब विस्तृत बनता जा रहा है। सम्प्रसारकों को और अधिक जिम्मेदारी के साथ इस विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रमों को जन-जन तक पहुंचाना चाहिए। उन्होंने समन्वयकों से कहा कि दूरस्थ-शिक्षा से जुड़कर विद्यार्थी के व्यक्तिगत-जीवन के साथ भी आपका जुड़ाव उपयोगी हो सकता है। उन्होंने कहा सही मायने में सम्प्रसारक ही विश्वविद्यालय का ‘फेस’ हैं।

कार्यक्रम के विशिष्ट-अतिथि इग्नु के सहायक निदेशक मुख्तार अली ने कहा कि आज की तनावपूर्ण जिन्दगी में जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम प्रत्येक व्यक्ति के लिए उपयोगी हैं। उन्होंने कहा कि नैतिक व चारित्रिक मूल्यों सेे प्रेरित यह पाठ्यक्रम शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थी का सर्वांगीण विकास भी करते हैं। उन्होंने कहा आज के दौर में दूरस्थ शिक्षा का महत्त्व बढ़ा है। दूरस्थ शिक्षा से जुडे़ विद्यार्थियों का उच्च पदों पर चयन होना इसकी महत्ता को प्रमाणित करता है। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रबन्ध-मण्डल के सदस्य व मगध विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. नलिन के. शास्त्री ने तकनीकी विस्तार के साथ दूरस्थ शिक्षा को हर व्यक्ति के लिए उपयोगी बताया।

कार्यक्रम की रूपरेखा एवं उद्देश्यों को बताते हुए दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्दप्रकाश त्रिपाठी ने सम्प्रसारकों द्वारा किये जा रहे प्रयासों की सराहना की एवं और अधिक गति के साथ कार्य करने हेतु प्रेरित किया। प्रो. त्रिपाठी ने कहा कि यह विश्वविद्यालय प्राच्य-विद्याओं का विशिष्ट केन्द्र है इसलिए अब सम्प्रसारक जैन एवं प्राच्य विद्या सम्प्रसारक के रूप में जाने जायेंगे। इससे पूर्व विश्वविद्यालय के कुलसचिव विनोदकुमार कक्कड़ ने स्वागत वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए कहा कि सम्प्रसारकों के सहयोग से ही यह विश्वविद्यालय जन-जन तक पहुंच सकता है।

जैन एवं प्राच्य विद्या प्रचार-प्रसार सम्मान

इस अवसर पर देश भर से समागत सम्प्रसारकों में श्रेष्ठ कार्य करने के लिए चार सम्प्रसारकों गच्छीपुरा के हनुमानराम, जोधपुर के कुशलराज समदड़िया, जायल के इन्द्रदेव जाखड़ व देवातु की दिव्या राठौड़ को कुलपति प्रो बच्छराज दूगड़ व अतिथियों द्वारा जैन एवं प्राच्य विद्या प्रचार-प्रसार सम्मान प्रदान किया गया। सम्मान स्वरूप शाॅल, श्रीफल एवं मोमेण्टों भेंट कर सम्मान किया गया।

पुस्तकों का हुआ विमोचन

कार्यक्रम में दूरस्थ शिक्षा के निदेशक प्रो आनन्दप्रकाश त्रिपाठी ‘रत्नेश’ की पुस्तक गीता-दर्शन एवं प्रो. त्रिपाठी व डाॅ. बिजेन्द्र प्रधान की पुस्तक सामाजिक चिन्तन एवं स्वरूप का विमोचन कुलपति एवं मुख्य-अतिथि डाॅ. ममता भाटिया द्वारा किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ मुमुक्षु बहिनों द्वारा प्रस्तुत मंगलसंगान से हुआ। कार्यक्रम का संचालन सहायक निदेशक श्रीमती नुपुर जैन एवं आभार ज्ञापन समन्वयक जे.पी. सिंह ने व्यक्त किया। इस कार्यशाला में सौ से अधिक दूरस्थ शिक्षा के सम्प्रसारकों ने भाग लिया। कार्यशाला का द्वितीय सत्र परिचय सत्र के रूप में प्रो. दामोदर शास्त्री की अध्यक्षता में आयोजित हुआ। सत्र का संयोजन श्री जे.पी. सिंह ने किया। तृतीय सत्र शोध-निदेशक प्रो. अनिलधर की अध्यक्षता में आयोजित हुआ, जिसमें सम्प्रसारकों को प्रवेश संबंधी प्रशिक्षण एवं समस्या समाधान प्रो. आनन्दप्रकाश त्रिपाठी, डाॅ समणी अमलप्रज्ञा एवं श्रीमती नुपुर जैन द्वारा दिया गया।

शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बी.एल. जैन की अध्यक्षता में चतुर्थ सत्र का आयोजन सम्पर्क कक्षा एवं सत्रीय कार्य संबंधी जानकारी का रखा गया। इस सत्र में योग एवं जीवन-विज्ञान विभाग के सहायक-आचार्य डाॅ. अशोक भास्कर ने एक माह की सम्पर्क कक्षाओं के संचालन की जानकारी दी। वहीं अहिंसा एवं शांति विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. जुगलकिशोर दाधीच ने दस दिवसीय सम्पर्क कक्षाओं के संचालन का प्रशिक्षण दिया। जैन विद्या एवं तुलनात्मक धर्म-दर्शन विभाग के सहायक आचार्य डाॅ. योगेश जैन ने जैन विद्या विषय की जानकारी दी। दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्दप्रकाश त्रिपाठी ने सत्रीय कार्य संबंधी जानकारी देते हुए सम्पर्क कक्षाओं की समस्याओं का समाधान किया। श्री जे.पी. सिंह ने सत्र का कुशल संयोजन किया।

इसी प्रकार सम्प्रसारक कार्यशाला के दूसरे दिन प्रथम सत्र योग एवं जीवन विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ प्रद्युम्नसिंह शेखावत की अध्यक्षता में परीक्षा एवं मूल्यांकन सम्बधी प्रशिक्षण का रखा गया। परीक्षा नियन्त्रक डाॅ युवराजसिंह ने परीक्षा एवं मूल्यांकन सम्बन्धी जानकारी दी। वित्ताधिकारी राकेश कुमार जैन ने शुल्क से संबंधित जानकारी देते हुए आॅनलाइन पेमेण्ट को समझाया। समाजकार्य विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. बिजेन्द्र प्रधान ने समाजकार्य से संबंधित जानकारी दी। प्राच्य-विद्या एवं भाषा विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. समणी संगीत प्रज्ञा ने प्राच्य विद्याओं के प्रचार-प्रसार पर बल दिया। इस अवसर पर दूरस्थ शिक्षा के निदेशक प्रो. आनन्दप्रकाश त्रिपाठी ने सम्प्रसारकों की विविध समस्याओं का समाधान किया। संयोजन श्री जे.पी. सिंह ने किया।

समापन-सत्र का आयोजन

सम्प्रसारक कार्यशाला के दूसरे दिन शैक्षणिक भवन में अवस्थित सेमीनार हाॅल में समापन-सत्र का आयोजन किया गया। सत्र की अध्यक्षता करते हुए शोध-विभाग के निदेशक प्रो. अनिल धर ने कहा कि दूरस्थ शिक्षा अब नियमित शिक्षा से किसी भी मुकाबले में कम नहीं है। प्रो. धर ने कहा कि दूरस्थ शिक्षा का देश में विशिष्ट योगदान है। आज दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से लाखों लोग शिक्षा अर्जित कर अपने कॅरियर को नया आयाम दे रहे हैं। प्रो. धर ने सम्प्रसारकों से विश्वविद्यालय को सुझाव व सहयोग देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कार्यक्षेत्र में सम्प्रसारकों को विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ता हं, उनके सुझाव व विचार ही विश्वविद्यालय को आगे बढ़ा सकते हैं। प्रो. धर ने दूरस्थ शिक्षा की परीक्षाएँ जिला स्तर या उपखण्ड स्तर पर आयोजित करवाने का सुझाव दिया। सान्निध्य प्रदान करते हुए समणी नियोजिका प्रो. समणी ऋजु प्रज्ञा ने कहा कि मानव व पशु में शिक्षा ही भेद-रेखा है, शिक्षा के माध्यम से ही श्रेष्ठ-मानव का निर्माण किया जा सकता है। शिक्षित मानव ही विकास को गति दे सकता है। उन्होंने इस दो दिवसीय कार्यशाला को उपयोगी बताते हुए क्वालिटी व क्वांटिटि दोनों को ही बढ़ाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में दूरस्थ शिक्षा के निदेशक प्रो आनन्दप्रकाश त्रिपाठी ने दो दिवसीय कार्यशाला का प्रगति-विवरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि सभी सम्प्रसारक अपने-अपने क्षेत्रों में और अधिक गति के साथ विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रमों का कार्य कर जैन एवं प्राच्य विद्याओें के विकास में अपना योगदान दें। इस अवसर पर अहमदाबाद के बसंत मालू, जयपुर की रीना गोयल, इंदौर के डाॅ दक्षदेव गौड़ आदि सम्प्रसारकों ने अपने अपने अनुभव सुनाये। संयोजन दूरस्थ शिक्षा निदेशालय की सहायक निदेशक नुपुर जैन एवं आभार ज्ञापन निदेशक प्रो. आनन्दप्रकाश त्रिपाठी ने व्यक्त किया।

जैन आचार्यों से भेंट के कार्यक्रम का बीकानेर से आगाज

जैन आचार्यों से भेंट के कार्यक्रम का बीकानेर से आगाज

जैन विद्याओं के विकास, अनुसंधान के लिये जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय कृत-संकल्प: प्रो. दूगड़

बीकानेर, 22 अक्टूबर, 2017। जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय द्वारा जैन-विद्या एवं प्राच्य विद्याओं के विकास, विस्तार, अध्ययन, अनुसंधान आदि के संबंध में विभिन्न जैनाचार्यों से मिलने की योजना बनाई गई है। इस योजना के तहत विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ व दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने बीकानेर में विराजित जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छाधिपति आचार्य मणिप्रभ सूरिश्वरजी से भेंट की। इस भेंट के अवसर पर वहाँ एक कार्यक्रम भी रखा गया, जिसमें कुलपति प्रो. दूगड़ ने उपस्थित जन-समुदाय को वर्तमान समय में मूल्यों के संकट एवं मूल्यों के विकास के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्कारों की जननी है। यह तभी संभव है जब शिक्षा में संस्कार के तत्त्व निहित हों अन्यथा शिक्षा कोरी बौद्धिक होकर रह जायेगी। उन्होंने बताया कि जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय प्रारम्भ से ही शिक्षा में मूल्यों को समाहित किये हुए है। यहाँ के सभी पाठ्यक्रमों के केन्द्र में मूल्य है। चरित्र-निर्माण यहाँ की शिक्षा का मुख्य उद्देश्य है। इस विश्वविद्यालय का उद्देश्य जीविकोपार्जन की शिक्षा के साथ जीवन-निर्माण की शिक्षा है। उन्होंने आचार्यश्री को जैन-विद्याओं के बारे में बताते हुये कहा कि विश्वविद्यालय में जैन-विद्या से सम्बन्धित त्रैमासिक उपयोगी प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम भी शुरू किये जा रहे हैं, जिसमें जैन-वास्तु, जैन-गणित, जैन-प्रबन्धन, जैन-ज्योतिष, जैन-शिक्षा, जैन-संस्कृति आदि प्रमुख हैं। इसके अलावा जैन-विद्याओं में शोध एवं उनके विस्तार के लिये अनेक कार्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि चूंकि इस क्षेत्र में कार्य करने वाला जैन विश्वभारती संस्थान दुनिया का ऐसा प्रथम जैन विश्वविद्यालय है, अतः इस संस्थान की योजना है कि सभी जैन सम्प्रदाय के आचार्यों के सान्निध्य में कार्यक्रम आयोजित कर उनके सुझावानुसार संस्थान के विकास को गति दी जाये। इसी उद्देश्य से इस उद्घाटन कार्यक्रम का आयोजन आज यहाँ किया गया है। उन्होंने इस अवसर पर विश्वविद्यालय की ओर से आचार्यश्री मणिभद्र सूरिश्वरजी को संस्थान द्वारा प्रकाशित साहित्य भेंट भी किया।

इस अवसर पर संस्थान के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने विश्वविद्यालय के विभिन्न कार्यक्रमों व पाठ्यक्रमों के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि महिला-शिक्षा के लिए यह संस्थान उत्कृष्ट है। उन्होंने पत्राचार द्वारा घर बैठे बी.ए., बी.कॉम एवं एम.ए. किये जाने वाले पाठ्यक्रमों पर प्रकाश डाला। जैन धर्म के मंदिरमार्गी समाज के वरिष्ठ लोगों से भी इस अवसर पर कुलपति प्रो. दूगड़ ने भेंट की। उन्होंने बताया कि अपनी योजना के तहत वे गुजरात, इंदौर एवं राजस्थान के अन्य जैन आचार्यों से भी भेंट करेंगे। इस अवसर पर आचार्यश्री मणिप्रभ सूरीश्वरजी ने अपने वक्तव्य में कहा कि यह जैन विश्वविद्यालय है। सभी जैन समाज को इसके संरक्षण, सम्पोषण एवं सम्वर्द्धन में आगे आना चाहिए। यहाँ के पाठ्यक्रम जैन मूल्यों को समाहित किये हुए हैं, इसलिए संस्कार-निर्माण में उपयोगी हैं। उन्होंने आगे कहा कि इस विश्वविद्यालय ने सभी सम्प्रदाय के साधु-साध्वियों के लिए जो अध्ययन की उत्तम व्यवस्था दी है, उसका लाभ हमारे साधु-साध्वियों ने खूब उठाया है, जिनमें से कई तो विश्वविद्यालय से पी-एच्.डी. डिग्री भी प्राप्त कर चुके हैं।

कोलकाता में जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के 10वें दीक्षान्त समारोह का आयोजन

कोलकाता में जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के 10वें दीक्षान्त समारोह का आयोजन

ज्ञान के साथ आचार-संस्कार का निर्माण भी जरूरी - अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी

कोलकाता, 13 अक्टूबर, 2017। जैन विश्वभारती मान्य विश्वविद्यालय के 10वें दीक्षान्त समारोह का भव्य आयोजन कोलकाता के राजरहाट में तेरापंथ धर्मसंघ के अधिशास्ता एवं विश्वविद्यालय के अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी के सान्निध्य में शुक्रवार को किया गया। दीक्षान्त समारोह के मुख्य अतिथि राजस्थान सरकार के देवस्थान मंत्री राजकुमार रिणवां ने राजस्थानी भाषा में बोलते हुये कहा कि जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय केवल किताबी शिक्षा ही नहीं बल्कि विद्यार्थी को उसका जीवन अच्छा बनाने और खुद को बेहतर बनाने की शिक्षा भी प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय में शिक्षा ग्रहण करने वाले विद्यार्थियों की सेवा-भावना देखकर मन गदगद हो जाता है। जैन विश्वभारती में मुनि व साधुगण जो सभी ग्रंथों के सार के रूप में जो परमार्थ की शिक्षा दे रहे हैं, वह सभी का कल्याण करने वाली है। देवस्थान मंत्री ने आचार्य महाश्रमणजी की सन्निधि को अभिभूत करने वाला बताया तथा कहा कि आदमी आचार्यश्री की शरण में आ जाए तो उसे वास्तविक सुख की प्राप्ति हो सकती है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पश्चिम बंगाल सरकार के उच्च शिक्षामंत्री पार्थ चटर्जी ने आचार्यश्री महाश्रमणजी के दर्शन कर उनसे आशीर्वाद प्राप्त करने के उपरान्त कहा कि वास्तव में यह विश्वविद्यालय विद्यार्थियों में अच्छे संस्कारों से युक्त शिक्षा प्रदान कर रहा है।

ज्ञान के साथ आचार-संस्कार का निर्माण भी जरूरी - अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी

विश्वविद्यालय के अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमण ने विद्यार्थियों को श्रुत प्राप्ति, एकाग्रचित्त होने, आत्मा को धर्म में स्थापित करने, असंयम को छोड़ संयमित होने, स्वाध्याय में रत रहने, प्रमाद से बचने, आवेश को नियंत्रित करने, सहिष्णुता का विकास करने का संकल्प प्रदान कर उन्हें आध्यात्मिक ऊर्जा के आशीर्वाद से अभिसिंचन प्रदान किया। उन्होंने कहा कि आदमी को विशिष्ट ज्ञान प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए। ज्ञान की आराधना एक प्रकार की तपस्या है। ज्ञानाराधना करने वाले विद्यार्थी को पूरी निष्ठा के साथ ज्ञान ग्रहण का प्रयास करना चाहिए। ज्ञान के साथ चरित्र, अहिंसा, नैतिकता के प्रति निष्ठा रखने का प्रयास करना चाहिए और नशामुक्त जीवन जीने का प्रयास करना चाहिए। अहिंसा को सभी ग्रन्थों का सार बताते हुए कहा कि सभी के साथ मैत्री का भाव रखने का प्रयास करना चाहिए। आचार्यश्री ने कहा कि विद्यार्थियों में अहिंसा की चेतना, नैतिकता के भाव सदाचार तथा ज्ञान एवं आचार का अच्छा विकास हो और भ्रष्टाचार को स्थान न मिले व सदाचार बना रहे। विद्यार्थी देश के भविष्य होते हैं। सभी संस्थानों द्वारा विद्या-संस्थान द्वारा कोरा ज्ञान की ही नहीं अच्छे आचार और संस्कार के निर्माण का प्रयास होना चाहिए। आचार्यश्री ने सभी में अच्छी निष्ठा, ज्ञान का विकास और विशिष्ट कार्य करने का प्रयास करते रहने की पावन-प्रेरणा भी प्रदान की।

अहिंसा व नैतिकता का जीवन जीएँ - कुलाधिपति

विश्वविद्यालय की कुलाधिपति माननीया श्रीमती सावित्री जिंदल ने कहा कि पूर्वाचार्यों के प्राप्त आशीर्वाद और वर्तमान आचार्यश्री महाश्रमणजी के अभिसिंचन से यह विश्वविद्यालय मानवता, अहिंसा, नैतिकता के साथ अनुशासनात्मक जीवन जीने की प्रेरणा भी विद्यार्थियों को प्रदान कर रहा है। हमें गर्व है कि जैन विश्वभारती मान्य विश्वविद्यालय सम्पूर्ण जैन समाज को एक विचारधारा की माला से गूंथ रहा है। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि लाडनूँ विधायक ठाकुर मनोहर सिंह ने कहा मेरे लिए यह गौरव की बात है कि आज जैन विश्वभारती के कारण लाडनूँ को पूरा विश्व जानने लगा है। जैन विश्व भारती विश्वविद्यालय में शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को आज उपाधि मिली है। यह विश्वविद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में अच्छा कार्य कर रहा है।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षण विश्वविद्यालय की प्राथमिकता - कुलपति

विश्वविद्यालय के कुलपति माननीय प्रो. बच्छराज दूगड़ ने अपने वक्तव्य में कहा कि यह विश्वविद्यालय देश के दूसरे विश्वविद्यालयों से इस कारण से अलग है क्योंकि इसकी संस्थापना इस युग के महान् आचार्य आचार्यश्री तुलसी ने की। यह संस्थान उनके जैन विद्या के विकास एवं चरित्र-निर्माण के स्वप्न को धरती पर उतारने का सफल मानवीय उपक्रम है।

इस विश्वविद्यालय को जैन विद्या के क्षेत्र में अध्ययन, अध्यापन एवं शोध हेतु अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान मिली है, जिसका प्रमाण है आयोजित हो रहे अन्तर्राष्ट्रीय समर स्कूल कार्यक्रम, जहाँ प्राच्य भारतीय भाषाओं का इतनी गहनता से अध्यापन कराया जाता है, जिससे मूल आगमिक ग्रन्थों के पारायण में अभिरुचि अभिवृद्ध होती है। इस विश्वविद्यालय ने देश की लब्धप्रतिष्ठ संस्थाओं, जैसे-भारतीय दार्शनिक परिषद्, भारतीय समाज-विज्ञान परिषद्, भारतीय इतिहास परिषद्, आदि के साथ गुणात्मक शोध को प्रवृत्त करने हेतु विभिन्न शोध-परियोजनाओं को स्फूर्त किया है तथा इसकी शोध-निष्पत्तियों के प्रतिवेदनों की चतुर्दिक सराहना हुई है।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षण विश्वविद्यालय की प्राथमिकता है। स्नातक एवं स्नातकोत्तर शिक्षण को समर्पित अधिकांश कक्षाओं को स्मार्ट क्लास में परिवर्तित कर दिया गया है तथा आधुनिक तकनीक का शिक्षण-प्रशिक्षण में भरपूर उपयोग हो रहा है। इस नवोन्मेषी शिक्षण अभिक्रम के सकारात्मक परिणाम भी मिल रहे हैं। गुणवत्तापूर्ण शिक्षण गुणात्मक शोध के बिना संभव नहीं है। इस दृष्टि से विश्वविद्यालय ने सभी शिक्षकों को वैयक्तिक शोध में सघनता के साथ प्रवृत्त करने हेतु स्टार्टअप अनुदान की एक महत्वाकांक्षी योजना प्रारम्भ की है, जिसके माध्यम से राष्ट्रीय स्तर के मानक शोध-प्रकाशनों की हमारी योजना मूत्र्त रूप ले सकेगी। सूचना-प्रौद्योगिकी की आधारभूत संरचना भी काफी सुदृढ़ है, जिसके माध्यम से हर समय इण्टरनेट की तेज गति शोधार्थियों तथा अध्येताओं को सहायता प्रदान कर रही है। संस्थान ने गुणवत्तापरक शिक्षण की कसौटी के लिए अन्तर्राष्ट्रीय मानकों पर आधारित परीक्षा-प्रणाली एवं परीक्षा-परिणाम प्रणाली को भी अंगीकृत किया है।

लाडनूँ स्थित विश्वविद्यालय परिसर में हरेक सप्ताह पूरे देश के विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों को आमंत्रित किया जा रहा है। राष्ट्रीय परिसंवाद, सेमिनार, कार्यशाला एवं व्याख्यानमालाओं के माध्यम से बौद्धिक प्रबोधनों को सतत् गति दी जा रही है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के विशेषज्ञ दल ने अपने भ्रमण के उपरान्त विश्वविद्यालय के प्रयासों की मुक्त कण्ठ से सराहना की है एवं उनकी अनुशंसा के सकारात्मक निर्णयों ने विश्वविद्यालय को संबलित किया है। आयोग के अतिरिक्त राष्ट्रीय अध्यापक परिषद् के निरीक्षण दलों ने भी शिक्षा क्षेत्र की गतिविधियों की सराहना की है एवं अपनी सकारात्मक टिप्पणियों से हमें शक्ति प्रदान की है।

छात्र-छात्राओं के चतुर्दिक विकास को भी संस्थाने अपने दृष्टि-पथ में सर्वोच्च स्थान दिया है। सिर्फ उनके अकादमिक शिक्षण के प्रति ही संस्थान जागरुक नहीं हैं, प्रत्युत् उनकी शिक्षणेत्तर गतिविधियों के प्रति भी पूरी तरह सचेष्ट हैं। युवा-महोत्सव, पूर्व-छात्र सम्मेलन, सांस्कृतिक-अभिविन्यास कार्यक्रमों का नियमित आयोजन इसके प्रमाण हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अतिरिक्त विश्वविद्यालय ने अपने आन्तरिक स्रोतों से खेल-कूद की सुविधाओं को व्यापक विस्तार दिया है। यह भी उल्लिखित करना समीचीन होगा कि राजस्थान के सुदूरवर्ती गाँवों में भी शिक्षा की अलख जगाने में विश्वविद्यालय संलग्न है तथा अपने दूरस्थ शिक्षा निदेशालय द्वारा समाज के वंचित छात्र-छात्राओं को शिक्षा द्वारा सशक्त बनाने के सामाजिक दायित्व को पूरा करते हुए पूरे देश में सकल प्रवेश अनुपात की अभिवृद्धि के शासकीय संकल्प को पूरा करने के लिए भी सशक्त प्रयत्न कर रहा है।

अहिंसा यात्रा के प्रवक्ता मुनि कुमारश्रमण और जैन विश्व भारती मान्य विश्वविद्यालय के प्रो. आनंदप्रकाश प्रकाश त्रिपाठी, कोलकाता चतुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष कमलकुमार दूगड़ ने भी विचाराभिव्यक्ति दी।

मातृ संस्थान द्वारा विश्वविद्यालय को एक करोड़ का चैक भेंट

दीक्षांत समारोह में नियमित स्नातक के 213, स्नातकोत्तर के 64, पी-एच.डी. के 35, डी.लिट्. के 2, दूरस्थ शिक्षा स्नातक के 1971 व स्नातकोत्तर के 2110 विद्यार्थियों सहित कुल 4427 विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की गईं। इस दौरान कुल 32 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक भी प्रदान किये गए। समस्त उपाधियां व पदक कुलाधिपति माननीय श्रीमती सावित्री जिंदल, कुलपति माननीय प्रो. बच्छराज दूगड़, जैन विश्वभारती के अध्यक्ष रमेशचंद बोहरा, राजस्थान के देवस्थान मंत्री राजकुमार रिणवा व लाडनूं विधायक ठाकुर मनोहर सिंह द्वारा प्रदान किये गए। समारोह के सभी अतिथियों को कुलाधिपति व कुलपति सहित अन्य गणमान्यों द्वारा स्मृति चिन्ह व साहित्य प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस दौरान जैन विश्व भारती के अध्यक्ष रमेशचंद बोहरा द्वारा जैन विश्व भारती मान्य विश्वविद्यालय को एक करोड़ का चेक भी प्रदान किया गया। समारोह का संयोजन कुलसचिव श्री विनोद कुमार कक्कड़ ने किया।

‘‘जैन विद्वत् संगोष्ठी’’ का आयोजन

‘‘जैन विद्वत् संगोष्ठी’’ का आयोजन

वैश्विक समस्याओं का समाधान: जैन जीवनशैली

कोलकाता, 14-15 सितम्बर, 2017। जैन विश्वभारती एवं जैन विश्वभारती संस्थान के संयुक्त तत्त्वाधान में संस्थान के वर्तमान अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी के सान्निध्य में चातुर्मास प्रवास स्थल राजरहाट कोलकाता में ‘‘जैन विद्वत् संगोष्ठी’’ का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का शुभारम्भ मुनिश्री कुमारश्रमणजी एवं संस्थान के कुलपति प्रो. बी.आर. दूगड़ के निर्देशन में आचार्यश्री के सान्निध्य में हुआ। उद्घाटन वक्तव्य में संस्थान के कुलपति बी.आर. दूगड़ ने विषय प्रवर्तन करते हुए संगोष्ठी के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला तथा वर्तमान परिप्रेक्ष्य में व्याप्त समसामयिक समस्याओं का स्वरूप एवं प्रभावों को बताते हुए जैनदर्शन के कौन-कौन से सिद्धान्त इन समस्याओं के समाधान में सहकारी हो सकते हैं, उन सिद्धान्तों पर अपने विचार रखे तथा समागत विद्वानों से आह्वान भी किया कि वे सभी विद्वान् जैनदर्शन के आलोक में ऐसा समाधान प्रस्तुत करें जो क्रियान्वित हो सके, जिसे जीवन में उतारा जा सके।

आचार्यश्री ने अपने वक्तव्य में सभी वक्ताओं के वक्तव्य का सार प्रस्तुत करते हुए कहा कि यदि आज का युवा सदाचारपूर्वक जीवन जीता है, हित-मित परिमित जीवनशैली को अपनाता है तो संसार में समस्याएँ स्वतः समाप्त हो जाएंगी। आचार्यश्री ने साधना पर बल दिया।

उद्घाटन सत्र में प्रो. के.सी. अग्निहोत्री ने जैन परम्परा के इतिहास एवं जीवनशैली के आधार पर वैश्विक समस्याओं के समाधान की बात की। प्रो. शुभचन्द्र जैन ने कहा कि जैन आगम विद्या के प्रचार-प्रसार के साथ जीवनशैली में परिवर्तन लाकर समस्त समस्याओं को दूर किया जा सकता है। प्रो. महावीरराज गेलड़ा ने वर्तमान वैश्विक समस्याओं पर प्रकाश डालते हुए जैनाचार से विशेषतः अहिंसा एवं अपरिग्रह से समस्त समस्याओं का समाधान बताया।

जैनविद्या मनीषी प्रो. दयानन्द भार्गव ने जैन सांस्कृतिक विरासत पर अपने विचार रखे तथा जैन संस्कृति को अमूल्य अक्षुण्ण बताते हुए उसे जीवन्त संस्कृति के रूप में प्रस्तुत किया तथा विश्व की सभी समस्याओं हेतु जैन जीवनशैली, अणुव्रत महाव्रत की पालना पर जोर दिया।

प्रथम सत्र का समापन आचार्यश्री के आशीर्वचन से हुआ। आचार्यश्री ने सभी वक्ताओं के उद्बोधन का सार अपनी वाणी में समाहित करते हुए कहा कि यदि प्रत्येक प्राणी अपने कर्तव्यों का निर्वाह पूरी ईमानदारी एवं निष्ठा से करें तथा साधन एवं साध्य दोनों की शुद्धि का ध्यान रखे तो विश्व में कोई समस्या उत्पन्न ही नहीं होगी।

संगोष्ठी के द्वितीय सत्र में कुलपति महोदय की अध्यक्षता में एक बैठक का आयोजन किया गया तथा जैनविद्या के पठन-पाठन, विद्यार्थियों की संख्या तथा जैनविद्या के इस क्षेत्र में रोजगार के सन्दर्भ में समागत सभी विद्वानों से विचार-विमर्श किया गया।

दोपहर के सत्र में समागत सभी विद्वानों को पुनः अनुशास्ता का सान्निध्य प्राप्त हुआ तथा प्रो. भागचन्द्र जैन भास्कर, समणी सुलभप्रज्ञा, समणी अमलप्रज्ञा आदि के पत्रों का वाचन हुआ तथा सभी ने क्षमा, दया, संयम की भावना से परस्पर के वैमनस्य को दूर करने की बात कही।

संगोष्ठी के तृतीय सत्र में प्रातः आचार्यश्री के सान्निध्य में प्रो. धर्मचन्द्र जैन जोधपुर ने अपने पत्र के माध्यम से प्राणी मात्र के प्रति दया एवं अहिंसा के भाव को जागृत करने की बात कही तथा समानता, सह-अस्तित्व पर जोर दिया। प्रो. जितेन्द्रभाई शाह ने अनेकानेक उद्धरणों के द्वारा समसामयिक समस्याओं का मूल स्वरूप सामने रखा तथा जैन जीवनशैली तथा आगम के आलोक में समाधान प्रस्तुत किया। प्रो. वीरसागर जैन ने जैन शिक्षा के प्रचार-प्रसार पर बल दिया। डाॅ. अनेकान्त जैन ने जैन विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने तथा उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने की बात कही, क्योंकि आज जैनविद्या के अध्येताओं के सामने रोजगार की समस्या भी बड़ी समस्या है।

अंत में समागत सभी विद्वानों को संस्थान का मोमेण्टो भेंट कर सम्मानित किया गया और आचार्यश्री के मंगलपाठ से संगोष्ठी सम्पन्न हुई।

इस संगोष्ठी में संस्थान के कुलपति प्रो. बी.आर. दूगड़, संस्थान के प्रथम पूर्व कुलपति प्रो. महावीरराज गेलड़ा, जयपुर, प्रो. के.सी. अग्निहोत्री, कुलपति केन्द्रीय वि.वि. धर्मशाला उपस्थित रहे। जैनविद्या मनीषी प्रो. दयानन्द भार्गव जयपुर, प्रो. रमाकान्त शुक्ल दिल्ली, प्रो. भागचन्द जैन भास्कर नागपुर, प्रो. जितेन्द्र बी. शाह अहमदाबाद, प्रो. धर्मचन्द जैन जोधपुर, प्रो. शुभचन्द्र जैन मैसूर, प्रो. वीरसागर जैन एवं डाॅ. अनेकान्त जैन दिल्ली तथा प्रो. समणी ऋजुप्रज्ञा, समणी अमलप्रज्ञा, समणी सुलभप्रज्ञा, डाॅ. योगेश कुमार जैन, डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत की उपस्थिति ने कार्यक्रम को सफल बनाया।

मैत्री-दिवस कार्यक्रम का आयोजन

मैत्री-दिवस कार्यक्रम का आयोजन

प्राणी मात्र के प्रति दया भाव ही उत्तम क्षमा है: प्रो. दूगड़

लाडनूँ, 29 अगस्त, 2017। आज के व्यस्ततम जीवन में जहां हम अपने पड़ोसी को भी नहीं जान पा रहे हैं वहाँ जैनधर्म के सिद्धान्त कह रहे हैं कि संसार के प्रत्येक प्राणियों में मैत्री भाव रखना ही यथार्थ में अहिंसा है तथा यही क्षमाभाव है। जैन विश्वभारती संस्थान के जैनविद्या विभाग द्वारा आयोजित संवत्सरी के उपलक्ष्य में मैत्री-दिवस कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुये संस्थान के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने बताया कि जैनधर्म सूक्ष्म से सूक्ष्म प्राणी के प्रति भी अपने समान व्यवहार करने की बात कहता है। आज के युग में जैनधर्म की अहिंसा मूलक शिक्षाओं को व्यवहारिक बनाने की आवश्यकता है। प्रो. आनन्दप्रकाश त्रिपाठी ने जैन परम्परा में संवत्सरी के महत्त्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि जैन धर्म की श्वेताम्बर परम्परा में आठ दिवसीय पर्यूषण महापर्व के उपरान्त संवत्सरी के दिन उपवास रखा जाता है तथा उसके अगले दिन क्षमापना पर्व मनाया जाता है। प्रो. बी.एल. जैन ने बताया कि कृत-कारित-अनुमोदना से ज्ञात-अज्ञात भूलों के लिए आज के दिन प्रत्येक जैन स्वयं क्षमा मांगता है तथा दूसरों को क्षमा भी करता है। इसी प्रकार संस्थान के वित्ताधिकारी राकेश जैन ने क्षमापर्व के महत्त्व को बताते हुए प्रतिदिन क्षमाभाव रखने का आह्वान किया। प्रो. अनिलधर ने उपस्थित सभी विद्यार्थियों एवं संस्थान परिवार के सदस्यों से इस पर्व के महत्त्व को समझकर जीवन में उतारने की बात कही। प्रो. दामोदर शास्त्री ने संवत्सरी पर्व की ऐतिहासिकता पर प्रकाश डाला तथा सूक्ष्मतम भूल को भी सुधारने का अनुरोध किया। कुलसचिव विनोद कक्कड़ ने जैनधर्म की दो विशेषताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मुझे जैनधर्म में पदयात्रा तथा क्षमापना ये बातें बहुत प्रभावित करती हैं। पदयात्रा सेे व्यक्ति प्रत्येक प्राणी से साक्षात् सम्पर्क में आता है तथा क्षमाभाव से वह सदा निर्दोष बना रहता है। कार्यक्रम में संस्थान के विद्यार्थियों ने भी अपने विचार रखे तथा कविता पाठ भी किया। कार्यक्रम का संयोजन कर रहे विभाग के सहायक आचार्य डाॅ. योगेश कुमार जैन ने भी संवत्सरी पर्व पर अपने विचार रखे तथा आज के परिप्रेक्ष्य में उसके महत्त्व को बताया। अंत में उपकुलसचिव डाॅ. प्रद्युम्नसिंह शेखावत ने सभी का आभार व्यक्त किया।

श्रेष्ठ व समृद्ध भारत बनाने के लिये संकल्प पूर्वक करें लक्ष्य सिद्धि - चा ैधरी

श्रेष्ठ व समृद्ध भारत बनाने के लिये संकल्प पूर्वक करें लक्ष्य सिद्धि - चा ैधरी

नया भारत-मंथन कार्यक्रम में केन्द्रीय मंत्री ने करवाया सामुहिक शपथ ग्रहण

लाडनूँ, 19 अगस्त, 2017। केन्द्रीय खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामलात मंत्री सीआर चा ैधरी ने आह्वान किया है कि सभी मिलकर भारत को एक श्रेष्ठ राष्ट्र, स्वच्छ, स्वस्थ, समृद्ध, शक्तिशाली और शांत व अच्छा भारत बनाने के लिये संकल्पपूर्वक आगामी पांच वर्षों में लक्ष्यसिद्धि करनी है। वे यहाँ जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के तत्वावधान में सुधर्मा सभा में नया भारत-संकल्प से सिद्धि अभियान के तहत आयोजित नया भारत-मंथन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। उन्होंने इस अवसर पर नया भारत-संकल्प से सिद्धि की सबको सामुहिक रूप से शपथ-ग्रहण करवाई। उन्होंने आजादी की लड़ाई से लेकर स्वतंत्रता प्राप्ति तक के पांच सालों और अब 2017 से 2022 तक के पांच सालों के संकल्प का विवरण प्रस्तुत किया तथा बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने शपथ-ग्रहण के साथ ही एसआईटी का गठन करके देश को कालाधन के खिलाफ संकल्प को व्यक्त किया था। इसी प्रकार केन्द्र सरकार ने स्वच्छता, बेरोजगारी, आतंकवाद व सीमा-सुरक्षा को लेकर विशेष कार्य किये हैं। पूरेे विश्व से आतंकवाद मिटे, इसके लिए प्रधानमंत्री ने विश्व पटल पर आवाज उठाई और सभी देशों से उन्हें समर्थन मिला है। उन्होंने कहा कि केवल नारे नहीं दिये जाते, बल्कि करके दिखाया जाता है। चैधरी ने मुद्रा योजना के बारे में बताते हुये कहा कि तीन सालों में 15 करोड़ लोगों को रोजगार उपलब्ध करवाया गया है। छोटे-छोटे दस्तकारों के रूप में करीब साढ़े पांच करोड़ लोग लगे हुये हैं। योजना के तहत 25 करोड़ लोगों को रोजगार देने की व्यवस्था है और इसमें 10 हजार रुपयों से लेकर 10 लाख रुपयों तक का ऋण बिना जमानत के उपलब्ध करवाये जा रहे हैं। इसी प्रकार कौशल योजना में हर हाथ को हुनर व हर हाथ को रोजगार देने की व्यवस्था है, जिसमें निःशुल्क प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की गई है। उन्होंने मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया, स्टेंडअप आदि का जिक्र करते हुये कहा कि आजादी के बाद से ही देश में बेरेाजगारी की समस्या बनी हुई है और यह हर साल बढ़ती ही जा रही है। हमारा इस बेरोजगारी की समस्या को रोकने का प्रयास है।

14 करोड़ लोगों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ

केन्द्रीय मंत्री चा ैधरी ने बताया कि रूस की आबादी के बराबर कुल 14 करोड़ लोगों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत बीमा उपलब्ध करवाया गया है। इसमें से 5 लाख 40 हजार लोगों का बीमा तो जन-धन खाता खोलने से हो गया। उन्होंने बताया कि खाते खोलने के बाद लोगों के खातों में बिना जमा करवाये पैसे आ रहे हैं। गैस, अनाज आदि पर जो सब्सिडी सरकार दे रही है, उसे सीधे खाते में जमा करवा दिया जाता है। कुल ऐसी 250 योजनाएँ हैं, जिनका पैसा सीधे खातों में जमा करवाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आजादी से लेकर आज तक 5 करोड़ 42 लाख गैस कनेक्शन थे और हमने तीन सालों में 7 करोड़ लोगों को गैस कनेक्शन से जोड़ा है, जिनमें से 2.50 लाख उज्ज्वला योजना में बीपीएल महिलाओं को निःशुल्क गैस कनेक्शन दिये गये हैं। उन्होंने बताया कि अशिक्षा को भारत से भगाने के लिये हर पंचायत मुख्यालय पर सैकेण्डरी स्कूल खोल दिया गया है और प्रदेश में 5 करोड़ स्कूलों को क्रमोन्नत किया गया है। उन्होंने तकनीकी शिक्षा और उच्च शिक्षा के लिये जीएआईएन (ज्ञान) योजना के तहत शिक्षकों की कमी को देखते हुए विदेशों से विद्वानों को बुलाया जा रहा है। केन्द्रीय मंत्री ने बताया कि केन्द्र सरकार ने हर वर्ग के लिये योजना तैयार की है और इस समय 105 योजनाएँ ऐसी हैं, जिनसे हर वर्ग कोई न कोई लाभ उठा रहा है।

लक्ष्य निर्धारित कर करें देश के लिये योगदान

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने समारेाह की अध्यक्षता करते हुये कहा कि देश का क्रमिक विकास हुआ है और स्वतंत्रता से लेकर आज तक हर क्षेत्र में विकास किये गये हैं, लेकिन आजादी के बाद से अब तक अनेक समस्याएँ और मुद्दे हैं, जिनका समाधान किया जाना आवश्यक है। इसे देखते हुये लगता है कि देश का यथार्थ विकास नहीं हुआ और इसी कारण नया भारत-मंथन का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने हर व्यक्ति से देश के लिये अपने दायित्व को पूरा करने की आवश्यकता बताई तथा कहा कि हमें देश के प्रति शपथ लेना है, नया भारत मंथन पर विचार करना है तथा किसी भी एक मुद्दा, चाहे वह भ्रष्टाचार हो, गरीबी हो, स्वच्छता हो, उनमें से एक के हल के लिए अपने स्तर पर प्रयास करना है। इसके बाद अपना जो भी लक्ष्य निर्धारित करें, उसके लिये पूरा प्रयत्न करें, चाहे वह सफाई हो, शिक्षा में गुणवता हो, गुड गवर्नेस आदि हो। नव इण्डिया की वेबसाईट से किसी भी एक स्वतंत्रता सेनानी को अपना आईडल बनावें और उसकी अपने आप से तुलना करते हुये अपना प्रोफाईल तैयार करके अपलोड करें। हम सब व्यक्तिगत रूप से इसमें सहयोग प्रदान करेंगे तो देश को श्रेष्ठ बनाया जा सकता है और आगे आने वाले पांच सालों में भारत दुनिया में सबसे अग्रणी होगा। जिन क्षेत्रों में देश आगे बढ़ रहा है, उनमें अपना योगदान भी अवश्य दें।

लाडनूँ तहसील के दो लाख लोगों का सामुहिक बीमा

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि भामाशाह सागरमल नाहटा ने देश को अपराध मुक्त, नशा मुक्त और स्वच्छ भारत बनाने की दिशा में सबके सहयोग की कामना करते हुए कहा कि लगता है कि अब रामराज्य की कल्पना साकार हो जायेगी। उन्होंने इस अवसर पर बताया कि केन्द्रीय मंत्री सी.आर. चा ैधरी व विधायक मनोहर सिंह के परामर्श पर उन्होंने लाडनूं तहसील क्षेत्र कर सम्पूर्ण दो लाख की आबादी का बीमा करवा रहे हैं। इसमें प्रति व्यक्ति 12 रुपये की प्रीमियम जमा करवानी होती है और वे दो लाख लोगों के लिये 25 लाख की राशि का भुगतान करने की घोषणा करते हैं। उन्होंने जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के दूरस्थ शिक्षा भवन के लिये एक करोड़ रुपये देने की घोषणा भी की। उन्होंने 90 प्रतिशत से अधिक अंक लाने वाले सभी छात्र-छात्राओं को फीस का 50 प्रतिशत हिस्सा अपने ट्रस्ट की ओर से देने की घोषणा भी की। इसके अलावा उन्होंने क्षेत्र केे अन्य शिक्षण संस्थानों व संस्थाओं के लिए भी अलग-अलग राशि की घोषणाएँ कीं।

अध्यात्म प्रेरित है मोदी की योजनाएँ

मुनि स्वस्तिक कुमार ने अपने उद्बोधन में मेहनत को जीवन की सफलता की चाबी बताते हुये कहा कि संकल्प से ही सिद्धि संभव है। उन्होंने चऱित्र-निर्माण पर बल देते हुये कहा कि चरित्र हमारे देश की सबसे बड़ी ताकत होगी, हमें कभी पीछे मुड़कर नहीं देखना होगा और देश आगे बढ़ेगा। उन्होंने अणुव्रत आंदोलन के बारे में बताया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की योजनाएँ हमें लगता है कि अध्यात्म से प्रेरित है। उन्होंने आतंकवाद को मिटाने के लिये जन-जन में शिक्षा को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। विधायक मनोहर सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी के आह्वान पर नये भारत के निर्माण के लिये सबके सहयोग की जरूरत बताई। कार्यक्रम के प्रारम्भ में अहिंसा एवं शांति विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. जुगल किशोर दाधीच ने अतिथियों का परिचय प्रस्तुत किया। दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्दप्रकाश त्रिपाठी ने अपने स्वागत भाषण में स्वच्छ भारत अभियान के उपलब्धि की ओर बढने पर हर्ष जताया और कहा कि इसकी सफलता इसमें दृष्टिगेाचर होती है कि हर व्यक्ति सड़क पर कोई भी कचरा फेंकने में झिझक महसूस करता है। छात्राओं ने प्रारम्भ में प्रार्थना व स्वागत-गीत प्रस्तुत किया। केन्द्रीय मंत्री सी.आर. चैधरी का स्वागत जैन विश्व भारती के ट्रस्टी भागचंद बरड़िया ने शाॅल ओढाकर एवं स्मृति चिह्न भेंट करके किया। इसी प्रकार प्रो. बीएल जैन, प्रो. दामोदर शास्त्री, वित्ताधिकारी राकेश जैन व डाॅ. बिजेन्द्र प्रधान ने भी अन्य अतिथियों का स्वागत शाॅल व स्मृति चिह्न प्रदान करके किया। समारोह में भाजपा जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश मोदी व भागचंद बरड़िया विशिष्ट अतिथि थे।

विजेताओं को पारितोषिक वितरण

‘‘नया भारत: संकल्प से सिद्धि’’ अभियान के तहत विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजेता रहे छात्रों को इस समारोह में केन्द्रीय मंत्री सी.आर. चा ैधरी के हाथों सम्मानित करवाया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रम समन्वयक डाॅ. अमिता जैन ने घोषणा की कि वाद-विवाद प्रतियोगिता में प्रथम सुमन मण्डा, द्वितीय करुणा शर्मा व सुनीता सहजवानी, तृतीय मुमुक्षु आरती रही। रंगोली प्रतियोगिता में प्रथम गुंजन जांगिड़ व ग्रुप, द्वितीय सरिता यादव व ग्रुप एवं करुणा शर्मा व ग्रुप रहे तथा तृतीय स्थान पर सरिता फड़ोद रही। पोस्टर पेण्टिंग प्रतियोगिता में प्रथम पारूल दाधीच व प्रवीण कंवर रही। द्वितीय स्थान पर योगिता शर्मा व तृतीय स्थान पर वत्सला रही। सभी विजेताओं का समारोह में सम्मान किया गया। डाॅ. जैन ने बताया कि परिचर्चा कार्यक्रम को स्थगित किया जाकर 21 अगस्त को किया जायेगा। समारेाह में भाजपा सहकारिता प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक जगदीश सिंह राठौड़, भाजपा जिला मंत्री नीतेश माथुर, भाजपा बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान की जिला संयोजक सुमित्रा आर्य, महावर ओझा, प्रेमाराम रेवाड़, सरपंच पदमसिंह रोडू, श्यामसुन्दर पंवार, हरदयाल रुलानिया, भाजपा मण्डल अध्यक्ष ओमप्रकाश बागड़ा, हनुमानमल जांगिड़, पार्षद मोहनसिंह चैहान, अदरीश खां, ताजू खां मोयल, जिला परिषद् सदस्य पन्नालाल भामू, सुशील पीपलवा, भाजपा मीडिया प्रभारी रमेश सिंह राठौड़, लूणकरण शर्मा, कैप्टेन असगर खां, ललित वर्मा, पूनमचंद मारोठिया, प्रधान प्रतिनिधि प्रतापसिंह कोयल, गोविन्द सिंह कसूम्बी, देवाराम पटेल, सीताराम गौतम आदि प्रमुख लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

आचार्य महाप्रज्ञ प्रज्ञा संवर्धिनी व्याख्यानमाला में जैन ज्योतिष पर व्याख्यान

आचार्य महाप्रज्ञ प्रज्ञा संवर्धिनी व्याख्यानमाला में जैन ज्योतिष पर व्याख्यान

जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय प्रारम्भ करेगा ज्योतिष विज्ञान पर अल्पावधि पाठ्यक्रम

ज्योतिष कर्महीन व भाग्यवादी नहीं बनाता, बल्कि भविष्य का मार्ग दिखाता है - प्रो. जैन

लाडनूँ, 10 अगस्त, 2017। जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के जैनविद्या एवं तुलनात्मक धर्म तथा दर्शन विभाग के अन्तर्गत संचालित महादेवलाल सरावगी अनेकांत शोधपीठ के तत्त्वावधान में आचार्य महाप्रज्ञ प्रज्ञा-संवर्द्धिनी व्याख्यानमाला-6 के अन्तर्गत गुरूवार को आचार्य महाप्रज्ञ-महाश्रमण आॅडिटोरियम में नई दिल्ली के एस्ट्रो साईंस एण्ड रिसर्च आॅर्गेनाईजेशन के उपाध्यक्ष प्रो. अनिल जैन ने जैन-ज्योतिष पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ की अध्यक्षता में आयोजित इस व्याख्यानमाला में प्रो. जैन ने अपने व्याख्यान में जैन धर्म के अनेक सिद्धान्तों को ज्योतिष के दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया तथा ज्योतिष-विज्ञान की वैज्ञानिकता को प्रतिपादित किया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में जैन विश्वभारती के ट्रस्टी व समाजसेवी भागचंद बरड़िया व अनेकांत शोधपीठ की निदेशक समणी ऋजुप्रज्ञा थीं।

समुद्र की तरह ही मानव मन पर चन्द्र का प्रभाव

ज्योतिष विज्ञान के विख्यात विद्वान् प्रो. अनिल जैन ने सूर्य व चन्द्रमा के प्रभाव को रेखांकित करते हुये समुद्र के ज्वार और व्यक्ति की मानसिकता में आने वाले बदलाव को बताते हुये कहा कि हमारे शरीर में 70 प्रतिशत तक पानी है और समुद्र के पानी में जो लवण होते हैं, वे ही हमारे शरीर में खून में पाये जाते हैं और उनका प्रतिशत भी उतना ही हमारे शरीर में है, जितना समुद्र के पानी में है। इसी कारण जिन लोगों का चन्द्र कमजोर होता है, वे जब पूर्णिमा आती है तो कमजोर पड़ जाते हैं। उनका मन विचलित हो जाता है। पूर्णिमा पर धरती पर हिंसात्मक घटनाएँ बढ़ जाती हैं। उन्होंने कहा कि जैन धर्म में अष्टमी व चतुर्दशी के दिन हरी सब्जियां व हरे फल नहीं खाये जाते हैं, क्योंकि इन दिनों में इनके सेवन से मन विचलित हो जाता है। हरे फल व सब्जियों से पानी की मात्रा शरीर मंे बढ़ जाती है। अष्टमी के दिन मन शांत रहता है, इसलिये इस दिन पूजा-पाठ, अध्ययन, दवा सेवन, इलाज का प्रारम्भ आदि प्रभावशाली परिणामदायी हो जाते हैं।

ग्रहों का मानव जीवन पर असर

प्रो. जैन का कहना है कि ज्योतिष कभी व्यक्ति को कर्महीन या भाग्यवादी नहीं बनाता, बल्कि वह भविष्य का मार्ग दिखाता और व्यक्ति को सचेत करता है कि उसे क्या करना चाहिये और क्या नहीं। उन्होंने राशियों में सूर्य के संक्रमण से बनने वाली संक्रांतियों के बारे में बताया कि वैसे 12 संक्रांतियां होती है, लेकिन मकर संक्रांति पर ही उत्सव मनाया जाता है, क्योंकि 6 संक्रांतियों में सूर्य दक्षिणायन में रहता है और 6 संक्रांतियों में उत्तरायण में। मकर संक्रांति के दिन सूर्य दक्षिण से उत्तरायण में प्रवेश करता है। इसे शुभ माना गया है, क्योंकि इस समय रचनात्मक ऊर्जा अधिक होती है। उन्होंनं जैन दर्शन के समयसार आदि ग्रंथों में विज्ञान व ज्योतिष का समावेश होने की जानकारी दी तथा न्यूटन के सिद्धान्तों में भी ज्योतिष होने की बात कही। प्रो. जैन ने विश्वभर में चिकित्सकों के हरे रंग का वस्त्र आॅपरेशन के समय पहनने, वकीलों व जजों के काला कोट या काला चोगा पहनने की व्याख्या करते हुये ग्रहों व उनके रंगों के बारे में बताया और कहा कि हरा रंग बुध ग्रह का होता है, जो हमारे नर्वस सिस्टम को नियंत्रित करता है। वकीलों का काला रंग शनि ग्रह का प्रतीक है, जो न्याय का ग्रह है और जल्दबाजी नहीं करता। अदालत में सोच-समझकर निर्णय लेने की शक्ति काले रंग से ही आती है। इसी प्रकार उन्होंने अन्य ग्रहों के प्रभाव बताये और कहा कि व्यक्ति अपने कपड़े, रंग, ज्वैलरी का प्रकार आदि में थोड़ा परिवर्तन करके अपने जीवन को बदल सकता है। उन्होंने रोगों और उनके ईलाज पर ग्रहों के असर को भी प्रकट किया तथा समस्याओं से निपटने के ज्योतिषीय उपाय भी बताये।

ज्योतिष पर प्रारम्भ होगा अल्पावधि पाठ्यक्रम

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुये जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने अपने सम्बोधन में ज्योतिष को सबकी जिज्ञासा का विषय बताया तथा कहा कि इसके बारे में सबकी अलग-अलग राय होने के बावजूद सब कभी न कभी इस पर विश्वास कर लेते हैं। इस विद्या को लेकर कभी आश्चर्य होता है, तो कभी यह नकारात्मक विद्या लगती है। समस्त जिज्ञासाओं का समाधान प्रो. अनिल जैन ने अपने व्याख्यान में किया है तथा विविध व्यावहारिक अनुभव भी बताये हैं। उन्होंने बताया कि कचरा रहने व साफ-सफाई नहीं होने से राहू की दशा रहती है और तनाव पैदा होता है। स्वच्छता रहने पर तनाव दूर हो जाता है। यह सही है। प्रो. दूगड़ ने घोषणा की कि अगले साल से विश्वविद्यालय में ज्योतिष विज्ञान पर एक अल्पकालीन पाठ्यक्रम प्रारम्भ कर दिया जायेगा। अभी यह पाठ्यक्रम विकसित किया जा रहा है। उन्होंने प्रो. जैन द्वारा इस पाठ्यक्रम के लिये अपनी सेवाएँ देने की इच्छा का स्वागत किया तथा कहा कि हम निश्चित रूप से उनका पूरा उपयोग लेंगे। वे निरन्तर इस संस्थान से जुड़े रहे, यह सौभाग्य की बात है। इससे पूर्व शोध-केन्द्र निदेशिका समणी ऋजुप्रज्ञा ने अतिथियों का परिचय प्रस्तुत किया व ज्ञानसंवर्द्धिनी व्याख्यानमाला के प्रारम्भ से लेकर अब तक की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के प्रारम्भ में दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने प्रो. अनिल जैन का शाॅल ओढाकर एवं भागचंद बरड़िया को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मान किया।

लाडनूँ में खुलेगा प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग का मेडिकल काॅलेज

लाडनूँ में खुलेगा प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग का मेडिकल काॅलेज

अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी ने दी विश्वविद्यालय को हरी झण्डी

लाडनूँ, 8 अगस्त, 2017। जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय में निकट भविष्य में प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग आधारित शिक्षा का मेडिकल काॅलेज खोला जायेगा। इस पर विश्वविद्यालय के अनुशास्ता आचार्य महाश्रमण ने अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है। उन्होंने अपने कोलकाता के राजारहाट महाश्रमण विहार में चातुर्मास प्रवास के दौरान जैन विश्वभारती संस्थान मान्य विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ द्वारा भंेट करने पर अपनी सहमति प्रदान की। गौरतलब है कि भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अन्तर्गत केन्द्रीय योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान परिषद् ने भी संस्थान को मेडिकल काॅलेज खोलने के लिये आंमत्रण दिया है। कुलपति प्रो. दूगड़ ने आचार्य महाश्रमण को अपनी भेंट के दौरान विश्वविद्यालय की करीब छः माह की अवधि के दौरान किये गये विकास कार्यों एवं गतिविधियों व कार्य-योजनाओं से अवगत करवाया तथा प्रगति की रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसके साथ ही उन्होंनं लाडनूँ में विश्वविद्यालय के अन्तर्गत प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग संबंधी उच्च शिक्षा के लिये मेडिकल काॅलेज खोले जाने की योजना की रूपरेखा प्रस्तुत की। इसके अलावा अनुशास्ता से चर्चा के दौरान तय किया गया कि जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के तत्त्वावधान में आगामी 14 व 15 सितम्बर को कोलकाता में आचार्यश्री महाश्रमणजी के सान्निध्य में जैन विद्या पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जावे। इसके अलावा विश्वविद्यालय के दीक्षान्त समारोह के आयोजन पर तय किया गया कि आगामी 13 अक्टूबर को कोलकाता में आचार्यश्री के सान्निध्य में 10वां दीक्षान्त समारोह आयेाजित किया जायेगा। इसके अलवा अनुशास्ता से विश्वविद्यालय में संसाधनों के विकास के संबंध में भी विचार-विमर्श किया गया। आचार्यश्री ने विश्वविद्यालय की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुये निरन्तर प्रगति करते रहने का आशीर्वचन दिया तथा कहा कि विश्वविद्यालय जैन विद्या, प्राकृत भाषा एवं प्राच्य विद्या के क्षेत्र में पूरा ध्यान दे। उन्होंने कहा कि ये इस संस्थान के मूल विषय हैं।

आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय में नवागन्तुक छात्राओं का स्वागत

आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय में नवागन्तुक छात्राओं का स्वागत

अपनी क्षमताओं को पहचानें विद्यार्थी - प्रो. दूगड़

लाडनूँ, 11 अगस्त, 2018। जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के महाप्रज्ञ-महाश्रमण आॅडिटोरियम में आयोजित आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय की नवागन्तुक छात्राओं के स्वागत समारोह को सम्बोधित करते हुये मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने कहा है कि सभी विद्यार्थियों में क्षमता एवं योग्यता है। सभी उन्मुक्त होकर अपना विकास कर सकें, इसके लिये इस विश्वविद्यालय में समस्त आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। उनका उपयोग करके अपनी क्षमताओं को बढावें। विद्यार्थियों की क्षमताओं को आगे बढ़ाने का दायित्व यहां के शिक्षकों का है। विद्यार्थियों को अपनी क्षमताओं को जानना जरूरी है और वे इन्हें कम करके भी आकलन नहीं करें, बल्कि यह आत्मविश्वास रखें कि आप सब कर सकते हैं। भय का सामना करने से भय दूर होता है। भय से कतरा कर निकलने से भय हावी हो जाता है। अपने जीवन को आप स्वयं परिभाषित करें और आगे बढें। अगर आपकी सोच अच्छी है तो परिणाम भी अच्छा आयेगा और अगर नकारात्मक सोच हुई तो परिणाम भी गलत निकलेगा। आपका भविष्य स्वयं आपके हाथ में है। विद्यार्थियों की क्षमताओं को पहचान कर उन्हें उभारने का काम इस संस्थान में किया जाता है। इसके लिये यहां के शिक्षक पूरा प्रयत्न करते हैं तथा विविध गतिविधियों द्वारा इसका प्रयास किया जाता है। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय में जो क्लब गठित किये गये हैं, वे विद्यार्थियों की क्षमताओं को बढाने के लिये ही हैं। इन क्लबों से अपनी रूचि के अनुसार जुड़कर इनके माध्यम से विविध आयोजन करें, जिनमें महाविद्यालय की छात्राओं के अतिरिक्त अन्य स्थानीय छात्राएँ भी भाग ले सकें। उन्होंने घोषणा की कि प्रत्येक क्लब को ऐसे आयोजन के लिये विश्वविद्यालय की ओर से 25-25 हजार रुपये की सहयोग राशि प्रदान की जायेगी। इसके लिए चार क्लबों को प्रारम्भिक स्वीकृति प्रदान की गई है। इसके अलावा क्लबों के लिये आवश्यक इंस्ट्रक्टर रखने के लिये भी पूरा प्रयास किया जा रहा है।

आराम के जीवन का त्याग करें

विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार श्री वी.के. कक्कड़ ने अपने सम्बोधन में छात्राओं को सफलता के लिये टिप्स दिये। उन्होंने कहा कि छात्र-जीवन में आराम के जीवन का त्याग करना आवश्यक है तथा अपने लक्ष्य को तय करके संकल्प पूर्वक उसकी पूर्ति में लगे रहें। अपने मित्रों की मण्डली ऐसी बनायें, जो आपके लिये प्रेरक व मार्गदर्शक सिद्ध हो सके। आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. आनन्दप्रकाश त्रिपाठी ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुये कहा कि विश्वविद्यालय के अनुशास्ताओं के सपने के अनुरूप यहां के विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए निरन्तर प्रयास किये जा रहे हैं। इसी के अन्तर्गत महाप्रज्ञ क्लब, महाश्रमण क्लब, अपर्णा सेन क्लब, सोनल मानसिंह क्लब आदि का गठन किया गया है। इनमें विद्यार्थी अपनी लेखन क्षमता, वक्तृत्व क्षमता, नृत्य क्षमता, खेल क्षमता आदि का विकास संभव हो पायेगा। उन्होंने कहा कि इसके लिये गुरूवार का पूरा दिन निर्धारित किया गया है। छात्राएँ क्लबों की गतिविधियों, पुस्तकालय आदि में अपना समय देकर अपनी क्षमताओं को बढा सकेंगी।

विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम व प्रतियोगिताएँ आयोजित

समारोह में स्नातक के द्वितीय वर्ष व तृतीय वर्ष की छात्राओं ने प्रथम वर्ष में प्रवेश लेने वाली छात्राओं का स्वागत किया। नवागन्तुक छात्राओं ने अपना परिचय प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में हेमलता एण्ड ग्रुप ने गणेश वंदना प्रस्तुत की। रेणु ने स्वागत गीत एवं करिश्मा ने स्वागत वक्तव्य प्रस्तु किये। अतिथियों का स्वागत छात्रा दिव्या प्रजापत, अंकिता प्रजापत, पुष्पा कंवर व ज्योति भोजक ने किया। कीमती शर्मा, अंकिता एंड ग्रुप, किरण व कुलसुम, आशा व कंचन आदि ने राजस्थानी, पंजाबी व अन्य नृत्य प्रस्तुत किये। आयोजित प्रतियोगिताओं में मिश फ्रेशर के रूप में खुशनुमा खान को चुना गया तथा मिस ब्यूटी के रूप में तसलीमा का चयन किया गया। बैलून डांस में महिमा प्रजापत व निष्ठा सोनी, जलेबी प्रतियोगिता में सानिया छींपा, फिल्मी बजर राउण्ड में खुशनुमा खान विजेता रही। मुमुक्षु बहिनों ने बैलून प्रतियोगिता व टोपी प्रतियोगिता रखी, जिसमें दीक्षा व मुमुक्षु रिया विजेता रही। कार्यक्रम का संचालन हेमलता शर्मा, दीपिका राजपुरोहित व दीप्ति दूगड़ ने किया।

स्वच्छता पखवाड़े का आगाज

स्वच्छता पखवाड़े का आगाज

लाडनूँ, 01 सितम्बर, 2017। यूजीसी के निर्देशानुसार पूरे भारत वर्ष में 01 से 15 सितम्बर तक सभी विश्वविद्यालयों में स्वच्छता पखवाड़े के रूप में मनाया जायेगा, जिसका शुभारम्भ जैन विश्व भारती संस्थान ने भी श्रमदान कर एवं स्वच्छता के प्रति जन-जागृति रैली के रूप में किया। संस्थान के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़, कुलसचिव विनोद कुमार कक्कड़ एवं दूरस्थ शिक्षा के निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी की अगुवाई में समस्त विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, कर्मचारीगण एवं संस्थान के समस्त छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए संस्थान में सफाई अभियान चलाया और देखते-देखते संस्थान के मैदानों को सम्पूर्ण स्वच्छता की कसौटी पर खरा उतारा। कार्यक्रम के आयोजन में डाॅ. बिजेन्द्र प्रधान, डाॅ. प्रगति भटनागर एवं डाॅ. रविन्द्र सिंह राठौड़ का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम के ठीक पहले डाॅ रविन्द्र सिंह राठौड़ ने अपने संबोधन में स्वच्छता से स्वस्थ जीवन की प्रेरणा को अभिव्यक्त किया।

जैन विश्व भारती विश्वविद्यालय में मनाया गया संकल्प दिवस

जैन विश्व भारती विश्वविद्यालय में मनाया गया संकल्प दिवस

नये भारत के निर्माण के संकल्प की सिद्धि के लिये मन व कर्म से जुट जायें - प्रो. दूगड़

लाडनूँ, 9 अगस्त, 2017। भारत छोड़ो आंदोलन की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर बुधवार को यहां जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय में संकल्प दिवस मनाया गया। इस अवसर पर कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने अपने संबोधन में बताया कि 9 अगस्त 1942 को लिये गये आजादी के संकल्प से ही स्वतंत्रता की नींव पड़ी थी और 15 अगस्त 1947 को देश की स्वतंत्रता के रूप में उसकी सिद्धि मिली थी। उन्होंने आजादी की लड़ाई के सेनानियों एवं उनके द्वारा दिये गये नारों को याद करते हुये कहा कि हमें उन सेनानियांे के बलिदान पर गर्व करना चाहिये। प्रो. दूगड़ ने नये भारत के निर्माण के संकल्प को सन 2022 तक सिद्ध करने के आह्वान के साथ कहा कि मन व शरीर से मजबूत बनकर ही सभी संकल्प की सिद्धि प्राप्त कर सकते हैं।

सभी ने लिया सामुहिक संकल्प इस अवसर पर विश्वविद्यालय के समस्त विद्यार्थियों, व्याख्याताओं, स्टाफ आदि ने नये भारत के निर्माण का संकल्प लिया। सबने सामुहिक रूप से संकल्प लिया कि वे स्वच्छ, गरीबी मुक्त, भ्रष्टाचार मुक्त, आतंकवाद मुक्त, सम्प्रदाय मुक्त व जातिवाद मुक्त भारत के निर्माण करने में अपने मन और कर्म से जुट जायेंगे। आचार्य कालु कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. आनन्दप्रकाश त्रिपाठी ने सबको एक साथ संकल्प ग्रहण करवाया। उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन की संक्षिप्त पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुये नये भारत के निर्माण के लिये मन व कर्म से जुट जाने का आह्वान किया। इस अवसर पर रजिस्ट्रार वी.के. कक्कड़, सहायक रजिस्ट्रार डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत, आईक्यूएसी के निदेशक प्रो. अनिल धर मंचस्थ थे।

इंटरनेशनल समर स्कूल आॅन जैनिज्म के 21 दिवसीय कोर्स का समापन

इंटरनेशनल समर स्कूल आॅन जैनिज्म के 21 दिवसीय कोर्स का समापन

जैन विद्या के सूत्रों से बदल सकता है जीवन - प्रो. दूगड़

लाडनूँ, 10 अक्टूबर, 2017। जैन विश्व भारती विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने कहा है कि जैन विद्या में अनेक ऐसे सूत्र हैं, जिनके माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन को पूरी तरह से बदल सकता है। विद्यार्थी सुदूर से चलकर यहां जैन विद्या सीखने के लिये निरन्तर आते रहते हैं और वे उन्हें न केवल अपने जीवन में उतारते हैं, बल्कि उनसे दूसरे लोग भी प्रभावित होते हैं। वे यहाँ महादेवलाल सरावगी अनेकांत शोधपीठ तथा जैनविद्या एवं तुलनात्मक धर्म तथा दर्शन विभाग के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित 21 दिवसीय इण्टरनेशनल समर स्कूल प्रोग्राम आॅन अंडरस्टेंडिंग जैनिज्म के कोर्स के समापन के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंनं प्रोग्राम में भाग लेने वाले विद्यार्थियों से कहा कि उन्होंने यहाँ पर जो कुछ सीखा है, उसे अपने जीवन में उतारें और अपने अनुभवों को देश में जाकर अन्य विद्यार्थियों को भी बतावें और उन्हें भी प्रेरित करें कि वे अगले इण्टरनेशनल समर स्कूल में यहाँ आकर अवश्य भाग लेवें। उन्होंने इस अवसर पर प्रोग्राम में भाग लेने वाले घेंट युनिवर्सिटी बेल्जियम की छात्राओं केटो फ्रेंकी व नैकी रिटा को प्रमाण-पत्र प्रदान किये। इस अवसर पर शोधपीठ की निदेशक समणी ऋजुप्रज्ञा ने कहा कि पिछले 11 सालों से अनेकांत शोधपीठ के तत्त्वावधान में इण्टरनेशनल समर स्कूल प्रोग्राम संचालित किया जा रहा है, जिसमें विश्व के अनेक विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों ने भाग लेकर जैन विद्या को सीखा है। उन्होंने जैन विद्या के अनेकांत व अहिंसा के सिद्धान्तों को विश्व की अमूल्य धरोहर बताते हुये कहा कि इनका व्यापक प्रसार दुनिया के मानव मात्र को बदलने की ताकत रखते हैं और ये हर समस्या का समाधान करने में सहायक हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से सीखने के बाद अपने देश मंे इसका प्रचार करने का आह्वान किया। कार्यक्रम का संयोजन पीठ के सहायक निदेशक डाॅ. योगेश जैन ने किया।

‘‘प्री-मेरिज काॅउन्सिल’’ विषयक व्याख्यान का आयोजन

‘‘प्री-मेरिज काॅउन्सिल’’ विषयक व्याख्यान का आयोजन

सहनशीलता सुखी दाम्पत्य जीवन का आधार - डाॅ. सुधा जैन

लाडनूँ, 31 जुलाई, 2017। आधुनिक जीवनशैली में निरन्तर विकसित हो रहे एकल परिवार में प्रतिपल असहनशीलता, अहं तथा एकाकी अस्तित्व वाले विचारों के कारण दाम्पत्य जीवन में सुख-शांति का अभाव परिलक्षित हो रहा है। ये विचार दिल्ली से पधारी डाॅ. सुधा जैन एडवोकेट ने जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के जैनविद्या एवं तुलनात्मक धर्म तथा दर्शन विभाग द्वारा आयोजित ‘‘प्री मेरिज काॅउन्सिल’’ विषयक व्याख्यान में प्रकट किये। उन्होंने कहा कि आज की एकाकी एवं व्यस्ततम दिनचर्या के कारण परस्पर में सहयोग एवं विचारों के आदान-प्रदान के अभाव में प्रत्येक मनुष्य बहुत प्रयास करने पर भी उस प्रतिफल को प्राप्त नहीं कर पा रहा है जो उसे प्राप्त होना चाहिए था। आप विवाह से पूर्व वैवाहिक जीवन के संदर्भ में क्या-क्या जानना आवश्यक है? इस सन्दर्भ में अपना व्याख्यान दे रहीं थीं। आपने अपने तीस वर्ष के वकालत के कार्यकाल में सैकड़ों दम्पत्तियों को परस्पर में हो रहे क्लेश एवं संघर्ष से होने वाले नुकसान को बताकर उन्हें पुनः वैवाहिक जीवन में प्रवेश कराया है। आपने बताया कि आज के युवाओं में चाहे वह लड़का हो या लड़की सभी में मानवीय जीवन-मूल्य, यथा-सहनशीलता, समन्वय, सामंजस्य का अभाव होने के कारण एकल परिवार की प्रवृत्ति बढ़ रही है। युवाओं में विलासितापूर्ण जीवन के प्रति आसक्ति एवं वृद्धों में असुरक्षा के कारण परिवार को घरेलू हिंसा का क्षेत्र बनाया जा रहा है। पति-पत्नी के आपसी झगड़ों के कारण बच्चों का जीवन अंधकारमय बन रहा है। सह-अस्तित्त्व, समन्वय, सहनशीलता, समानता, आवश्यकता का चयन, अधिकार और कत्र्तव्य में समन्वय, अपने स्वतंत्र अस्तित्व का ज्ञान तथा अच्छी आदतों के विकास से सभी प्रकार के पारिवारिक संघर्षों को दूर किया जा सकता है। आज यदि ‘मैं’ और ‘तुम’ मिलकर ‘हम’ बन जायें तो ही परिवार का विकास संभव है तथा यदि ‘मैं’ मैं ही रहूं तथा तुम ‘तुम’ रहो तो विकास के स्थान पर पतन ही होता है। प्राचीन काल में परिवार में मुखिया होता था तथा वह ही परिवार के नये सदस्य को चाहे वह बहू हो या अन्य सभी को परिवार, समाज, धर्म, जाति आदि अपनी संस्कृति की जानकारी देता था तथा यह परम्परा निरन्तर चलती थी। आज एकल परिवार में मुखिया के अभाव में सांस्कृतिक ह्रास भी देखा जा रहा है। आज व्यक्ति केवल अपनी तरक्की में दूसरे को नीचे गिराने का प्रयास कर रहा है परन्तु मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि अकेला व्यक्ति तेज तो चल सकता है परन्तु मंजिल तक नहीं पहुंच सकता है। मंजिल के लिए अन्य का साथ आवश्यक है तथा जब सबका साथ होगा तो विकास भी सभी का होगा। इन समस्त प्रयासों की शुरुआत सबसे पहले हमें स्वयं ही करनी होगी क्योंकि जब व्यक्ति स्वयं सुधरता है तो समाज एवं राष्ट्र स्वयं समृद्ध होता है। इससे पूर्व दूरस्थ शिक्षा विभाग के निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने समागत अतिथियों को साहित्य भेंट कर सम्मानित किया तथा विभाग की विभागाध्यक्षा प्रो. समणी ऋजुप्रज्ञा ने अतिथियों का स्वागत एवं परिचय प्रदान किया। कार्यक्रम का संचालन विभाग के सहायक आचार्य डाॅ. योगेश कुमार जैन ने किया।

अन्तर्राष्ट्रीय योग एवं ध्यान कार्यशाला के सम्भागियों के साथ बैठक

अन्तर्राष्ट्रीय योग एवं ध्यान कार्यशाला के सम्भागियों के साथ बैठक

अहिंसा व शांति का शिक्षण-प्रशिक्षण विश्वविद्यालय की विशेषता - प्रो. दूगड़

लाडनूँ, 21 जुलाई, 2017। जैन विश्वभारती संस्थान मान्य विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने कहा है कि वर्तमान में पूरे विश्व में हिंसा का बोलबाला है और ऐसे में अहिंसा व शांति को लेकर एक अलग विश्वविद्यालय का होना अपने आप में विश्व की एक अनोखी बात कही जा सकती है, लेकिन यहाँ जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय में अहिंसा व शांति का अलग विभाग बना हुआ है और अहिंसा का शिक्षण-प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है एवं उच्च स्तर की डिग्री प्रदान की जाती है। योग व जीवन विज्ञान भी इस विश्वविद्यालय की विशेषता है तथा इस पर यहाँ शोधकार्य भी निरन्तर चल रहा है। वे यहां योग एवं जीवन विज्ञान विभाग के तत्त्वावधान में अमेरिका के इण्टरनेशनल स्कूल फाॅर जैन स्टडीज के सम्भागियों के साथ आयोजित बैठक को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के गठन से लेकर मान्यता व विकास के संबंध में विस्तार से बताया और संभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया। अमेरिका की डाॅ. एना लूरा फनेस ने उनसे पाठ्यक्रमों की जानकारी ली और कहा कि यहाँ की विशेषताओं से वे बहुत प्रभावित हुई हैं। अन्य सम्भगियों ने भी विश्वविद्यालय के कैम्पस को मनभावन व सुहावना बताया तथा कहा कि वे अगली बार कई दिनों का कार्यक्रम बनाकर यहाँ आएँगे और पूरा लुत्फ उठायेंगे। इस अवसर पर कुलपति प्रो. दूगड़ ने सभी सम्भागियों को स्मृति चिह्न प्रदान किये तथा रजिस्ट्रार वी.के. कक्कड़ व योग एवं जीवन-विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. प्रद्युम्नसिंह शेखावत ने सभी को विश्वविद्यालय का साहित्य भेंट किया। बैठक में एल्बा, जूलिया कासजा, मेगान एलिजाबेथ, बेरिया माल्वे, जैकलीन, एलेजेंड्रा, मार्गे्रट मेरिन, कायोकिन, मेघा जैन, डाॅ. मुग्धा यावलेकर, सौरभ यावलेकर आदि उपस्थित थे।

विश्व योग दिवस पर उपखंड स्तरीय कार्यक्रम आयोजित

विश्व योग दिवस पर उपखंड स्तरीय कार्यक्रम आयोजित

शरीर व मन को स्वास्थ रखने के साधन हैं योग व प्राणायाम - मुनि स्वस्तिक कुमार

लाडनूं, 21 जून, 2017। अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर यहां जैन विश्वभारती स्थित आचार्य तुलसी अन्तर्राष्ट्रीय प्रेक्षाध्यान केन्द्र में योग अभ्यास का कार्यक्रम आयेाजित किया गया। जैन विश्वभारती संस्थान मान्य विश्वविद्यालय एवं जैन विश्वभारती के संयुक्त तत्वावधान में आयेाजित इस उपखंड स्तरीय कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुये मुनिश्री स्वस्तिक कुमार ने कहा कि विश्व में सभी प्राणी सुख की चाह रखते हैं। सुख शरीर व मन का दोनों का होता है। जहां स्वास्थ्य होता है, वहां सुख होता है और शरीर को स्वस्थ्य-सुखी बनाने के लिये योग और मन को स्वस्थ व सुखी रखने के लिये प्राणायाम व ध्यान के उपक्रम हैं। उन्होनें कहा कि योग, प्राणायाम व ध्यान एक ऐसी प्रक्रिया है, जिनसे स्वयं को जाना जा सकता है। जो व्यक्ति स्वयं को नहीं जान पाता, उसके लिये अन्य सारी जानकारियां व्यर्थ होती हैं। योग दिवस एक प्रेरणा के रूप में हैं, जिससे हम स्वयं को जानने का प्रयास शुरू कर सकते हैं। उन्होंने सभी को आशीर्वचन कहे। सर्वांगीण स्वास्थ्य के लिये योग आवश्यक कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने अपने सम्बोधन में कहा कि स्वस्थ शरीर में स्वस्थ चित्त व स्वस्थ बुद्धि का निवास होता है। योग से सर्वांगीण स्वास्थ्य प्राप्त किया जा सकता है। आधुनिक युग में योग से व्यक्ति तनावमुक्त जीवन जी सकता है, इसलिये सभी को योग अपनाना चाहिये। पंचायत समिति के विकास अधिकारी कैलाश अरड़ावतिया ने इस अवसर पर योग को जीवन का आवश्यक अंग बनाने की आवश्यकता बताते हुये उपखंड प्रशासन की ओर से सभी का आभार ज्ञापित किया तथा जैन विश्वभारती के निदेशक राजेन्द्र खटेड़ ने आयोजक संस्था की ओर से धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में में प्रार्थना, कायोत्सर्ग, विभिन्न योगासन, यौगिक क्रियाएँ, विभिन्न प्राणायाम, मुद्राएँ, ध्यान, शांतिपाठ आदि का अभ्यास डाॅ. युवराज सिंह खंगारोत ने करवाया। कार्यक्रम में एनसीसी की 3 राज गर्लस बटालियन की तीन युनिटों की छात्राओं विमल विद्या विहार स्कूल, सोना देवी सेठिया गर्लस काॅलेज व जैविभा विश्वविद्यालय की यूनिट्स ने एएनओ निकिता, दिव्या जांगिड़ व भूपेन्द्र सिंह के नेतृत्व में भाग लिया तथा राजकीय अधिकारी, समाजसेवक व गणमान्य नागरिकों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में प्रमुख लोगों में नगरपालिका के अधिशाषी अधिकारी भगवानसिंह राठौड़ जलदाय विभाग के सहायक अभियंता नोरतनमल रैगर, आयुष विभाग के डा. जेपी मिश्रा, थानाधिकारी भजन लाल, भाजपा अध्यक्ष हनुमानमल जांगिड़, भारत विकास परिषद के संरक्षक रमेश सिंह राठौड़, विश्वविद्यालय के कुलसचिव वीके कक्कड, दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी, डा. प्रद्युम्न सिंह शेखावत, डा. जुगल दाधीच, डा. वीरेन्द्र भाटी मंगल, सुशील पीपलवा, जीवन विज्ञान अकादमी के सहायक निदेशक हनुमान मल शर्मा, राजेन्द्र माथुर, लूणकरण शर्मा, नुपूर जैन, अंजना शर्मा, पार्षद मोहन सिंह चैहान, मोहन सिंह जोधा, नानक आडवाणी, ललित सोनी, भुवनेश जैन आदि उपस्थित थे।

जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय में खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन

जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय में खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन

भारतीय संस्कृति का हिस्सा है खेल भावना - प्रो. दूगड़

लाडनूँ, 17 दिसम्बर, 2016। जैन विश्वभारती संस्थान मान्य विश्वविद्यालय के क्रीड़ा अनुभाग द्वारा आयोजित वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिताओं का उद्घाटन करते हुए कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने कहा कि खेल भावना पर भारतीय संस्कृति में पूरा बल दिया गया और उसी की अनुपालना इस विश्वविद्यालय में की जाती है। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ बुद्धि का विकास संभव है। साथ ही यदि हमें विश्व-भावना व विश्व-नागरिकता का विकास करना है तो कक्षाओं के अतिरिक्त खेलकूद और सहशैक्षणिक गतिविधियों के निरन्तर संचालन की आवश्यकता है। उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों को खेलों के प्रति आकर्षित व प्रेरित करने का आह्वान करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में आवश्यक है कि वर्षभर खेल-भावना विकसित होती रहे। इसके लिए विद्यार्थियों के आन्तरिक मूल्यांकन पर पूरा ध्यान दिया जाना जरूरी है। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार विनोद कुमार कक्कड़ ने जानकारी दी कि आगामी सत्र से विश्वविद्यालय में शैक्षणिक कैलेण्डर के साथ एक्टीविटिज का कैलेण्डर भी जारी किया जायेगा। इसके लिए अभी से तैयारी की जानी चाहिए तथा खेलों के लिए नियमित अभ्यास पर गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए। इस अवसर पर कुलपति प्रो. दूगड़ व रजिस्ट्रार कक्कड़ ने गोला फेंककर प्रतियोगिताओं का शुभारम्भ किया। कार्यक्रम के अंत में क्रीड़ासमिति के सदस्य डाॅ रविन्द्र सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन डाॅ प्रद्युम्न सिंह शेखावत ने किया।

प्रतियोगिताओं के परिणाम

दिनांक 17 दिसम्बर, 2016 शनिवार को आयोजित एथलेटिक्स प्रतियोताओं के महिला वर्ग में गोला फेंक में प्रथम सुमन शर्मा, द्वितीय सुमन पूनियां व तृतीय मंजू रही। तस्करी फेंक में प्रथम मंजू, द्वितीय पिंकी व तृतीय सुमन पूनियां रही। 100 मीटर दौड़ में प्रथम पुष्पा घोटिया, द्वितीय सुमन जाट, तृतीय सुमन पूनियां रही। 200 मीटर दौड़ में प्रथम सुनिता कुमारी, द्वितीय पुष्पा घोटिया व तृतीय माया शर्मा रही। ऊंची कूद में प्रथम परवीना कंवर, द्वितीय पुष्पा घोटिया व तृतीय प्रियंका रिणवा रही। लंबी कूद में प्रथम प्रियंका रिणवा, द्वितीय पुष्पा भोजक व तृतीय परवीना कंवर रही। एथेलेटिस पुरुष वर्ग में गोला फेंक में प्रथम नरेन्द्र सिंह, द्वितीय इन्द्राराम, तृतीय महेन्द्र सिंह शेखावत रहे। 100 मीटर दौड़ में प्रथम इन्द्राराम, द्वितीय आनन्द पाल सिंह व तृतीय मनोज मण्डा रहे। 200 मीटर दौड़ में प्रथम इन्द्राराम, द्वितीय आनन्दपाल सिंह व तृतीय शिवराज सिंह रहे।

दिनांक 19 दिसम्बर, 2016 सोमवार को बेडमिण्टन, शतरंज, केरम व टेबिल टेनिस प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इन प्रतियोगिताओं में कुल 147 विद्यार्थियों ने भाग लिया। कोच भूपेन्दसिंह ने बताया कि टेबल-टेबिल में प्रथम स्थान कमला पारीक ने प्राप्त किया, दूसरे स्थान पर अदिति कंवर व तीसरे स्थान पर मंजू रही। इसमें कुल 16 छात्राओं ने भाग लिया। केरम प्रतियोगिता में छात्रा वर्ग के परिणामों में सुरैया बानो प्रथम रही, द्वितीय स्थान परवीना कंवर व तृतीय स्थान पर कृष्णा चैहान रही। छात्र वर्ग में प्रथम अजय राठौड़, द्वितीय सुमित शर्मा व तृतीय मनीष भाटी रहे। इस प्रतियोगिता में कुल 68 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। शतरंज प्रतियोगिता में छात्र वर्ग से 7 प्रतिभागी रहे, जिनमें प्रथम अभिनेष पंवार द्वितीय सुमित शर्मा व तृतीय कोशल मेहता रहे। छात्रा वर्ग में 70 प्रतिभागी रहे, जिनमें दमयंती जाट प्रथम, कृष्णा चैहान द्वितीय व दीप्ति अरोड़ा तृतीय स्थान पर रही। बेडमिण्टन प्रतियोगिता छात्रा वर्ग में 40 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिसमें दीप्ति अरोड़ा प्रथम, अलका गुर्जर द्वितीय तथा साक्षी शर्मा तृतीय स्थान पर रही। प्रतियोगिताओं के निर्णायक नरेन्द्र सैनी, डाॅ. विष्णु कुमार, डाॅ. प्रद्युम्नसिंह शेखावत, डाॅ. रविन्द्र सिंह व भूपेन्द्र सिंह थे।

लाडनूँ, 20 दिसम्बर, 2016। जैन विश्वभारती संस्थान मान्य विश्वविद्यालय के क्रीड़ा अनुभाग के द्वारा आयोजित वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता में मंगलवार को आयोजित प्रतियोगिताओं में कबड्डी में प्रथम स्थान पर एम.एड. की छात्राओं की मंजू यादव की टीम रही तथा द्वितीय स्थान पर आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय व योग विभाग की छात्राओं की संयुक्त दिव्या जांगिड़ की टीम रही। खो-खो प्रतियेागिता में पूर्णिमा चैधरी की टीम विजेता रही तथा उप-विजेता का स्थान सरिता राहड़ की टीम को मिला। क्रीड़ासचिव प्रद्युम्नसिंह शेखावत ने बताया कि इनके अलावा ऊंची-कूद छात्र वर्ग में नरेन्द्र जिलोया ने पहला स्थान प्राप्त किया। आनन्दपाल सिंह राठौड़ द्वितीय एवं मनोज स्वामी तृतीय स्थान पर रहे। डिस्क-थ्रो छात्र वर्ग में नरेन्द्र जिलोया प्रथम, इन्द्राराम पूनिया द्वितीय एवं जीवराज सिंह राठौड़ तृतीय स्थान पर रहे। लम्बी कूद में नरेन्द्र सिंह जिलोया प्रथम, कमल द्वितीय व करणी सिंह तृतीय रहे। बेडमिंटन छात्र वर्ग में मनोज कुमार मण्डा प्रथम, शुभम द्वितीय एवं संदीप खिलेरी तृतीय स्थान पर रहे। कोच भुपेन्द्र सिंह सभी प्रतियेागिताओं के निर्णायक एवं सरोज राय स्कॉरर थीं। क्रीड़ा-सचिव प्रद्युम्न सिंह, डाॅ. अमिता जैन, जगदीश प्रसाद, कमल मोदी, नरेन्द्र सैनी, डाॅ. आभा सिंह आदि की देखरेख में प्रतियोगिताएँ आयोजित की गईं।

क्षेत्रीय गणमान्य नागरिकों के साथ संगोष्ठी आयोजित

क्षेत्रीय गणमान्य नागरिकों के साथ संगोष्ठी आयोजित

जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय में स्मार्ट क्लासेज इसी माह से - प्रो. दूगड़

लाडनूँ, 23 दिसम्बर, 2016। जैन विश्वभारती संस्थान में लाडनूँ उपखण्ड क्षेत्र के प्रमुख गणमान्य नागरिकों के साथ संस्थान के माननीय कुलपति प्रो. बी.आर. दूगड़ की अध्यक्षता एवं मातृ संस्था जैन विश्वभारती के अध्यक्ष श्री रमेशचन्द बोहरा की उपस्थिति में कुलपति सम्मेलन-कक्ष में शुक्रवार को संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए माननीय कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने कहा कि इस विश्वविद्यालय में इसी दिसम्बर माह से स्मार्ट क्लासेज का प्रारम्भ किया जा रहा है। प्रारम्भ में ऐसी करीब एक दर्जन कक्षाएँ प्रारम्भ होंगी, जिनमें कम्प्यूटर के जरिये पढाई करवाई जायेगी। उन्होंने बताया कि ऐसी स्मार्ट कक्षाएँ पिलानी के बिट्स के अलावा राजस्थान में आस-पास कहीं भी नहीं हैं। उन्होंने संगोष्ठी में जानकारी दी कि विदेशों में परीक्षा का जो पैटर्न होता है, उसी पैटर्न को यहां आगामी सत्र से प्रारम्भ किया जायेगा, जिससे विद्यार्थियों पर भार कम हो जायेगा। प्रो. दूगड़ ने छोटे-छोटे कोर्सेज के माध्यम से कम अंक लाने वाले विद्यार्थियों को अपने अंक बढ़ाने एवं अपने रुचि के विषयों का अध्यापन करने का माध्यम भी प्रदान करने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि कम्प्यूटर कोचिंग के लिये तीन कोर्स लघु-अवधि के जनवरी माह से शुरू किये जा रहे हैं। हम यहां एक ऐसा स्टुडियो भी विकसित करने जा रहे हैं, जिसमें सभी विषयों के व्याख्यानों की संबंधित विषय विशेषज्ञें के द्वारा रिकाॅर्डिंग करवाकर उनका डिजिटलाईजेश किया जाएगा, जिन्हें भविष्य में इण्टरनेट पर अपलोड किया जायेगा तथा ऐसे तैयार लैक्चरों को अन्य विश्वविद्यालयों को भी प्रोवाईड करवाया जायेगा।

लाईब्रेरी को एनसाईक्लोपीडिया से किया जायेगा सम्पन्न

माननीय कुलपति महोदय ने बताया कि विश्वविद्यालय की विशाल लायबे्ररी का भी डिजीटलाईजेशन किये जाने की योजना पर काम हो रहा है। इसके अलावा लाईब्रेरी के लिये 400 एनसाईक्लोपीडिया भी खरीदे जा रहे हैं, जो विश्व स्तर की हर प्रकार की जानकारी के लिये उपयोगी होंगे तथा शोधकार्यों में उनका प्रयोग हो सकेगा। इसके बाद यह लाईब्रेरी अद्वितीय हो जायेगी। प्रो. दूगड़ ने आयुर्वेद, हौमयोपैथिक व नैचुरोपैथिक चिकित्सा पद्धतियों के शिक्षण के लिये मेडिकल कॉलेज खोले जाने की इस क्षेत्र में आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि इसके लिये कार्य-योजना तैयार की जाकर इस पर प्राथमिकता से काम किया जायेगा। उन्होंने पर्सनैलिटी डेवलपमेंट, लीडरशिप डवलपमेंट, खेलकूद व अन्य सह-शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की योजनाओं की जानकारी भी दी। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के नागरिकगण विश्वविद्यालय के विकास के बारे में सुझाव देंगे तो उन पर अमल किया जायेगा। उन्होंने कहा कि यूजीसी को उनके माध्यम से लिखे गये पत्रों से इस विश्वविद्यालय में अनेक नये कार्यक्रम शुरू किये जा सकते हैं। प्रो. दूगड़ ने बताया कि आगामी 19 से 21 जनवरी तक यूजीसी की टीम यहां आयेगी, उस समय आपको उनसे मिलकर इस क्षेत्र की आवश्यकताओं से अवगत करवायें।

विद्यार्थियों की क्षमता बढ़ाने के प्रयास

इस संगोष्ठी में जैन विश्व भारती के अध्यक्ष रमेशचंद बोहरा ने विश्वविद्यालय के विकास के लिये कामना व्यक्त की। विश्वविद्यालय के कुलसचिव विनोद कुमार कक्कड़ ने कैरियर कौंसलिंग, पर्सनैलिटी डेवलपमेंट, इंटरव्यू की तैयारी, इंग्लिश स्पोकन कोर्स, शोर्ट टर्म एडवांस कम्प्यूटर कोर्स, म्यूजिक कोर्स, होबीज के कोर्सेज आदि क्षमता बढ़ाने एवं सर्वांगीण विकास के कार्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं। दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के निदेशक प्रो. आनन्दप्रकाश त्रिपाठी ने प्रारम्भ में सभी नागरिकों का स्वागत करते हुये उन्हें विश्वविद्यालय की जानकारी दी तथा बताया कि पूरे कैम्पस के वाई-फाई होने, छात्रावास की पृथक्-पृथक् व्यवस्था, लाईब्रेरी, बी.एस-सी.-बी.एड. व बी.ए.-बी.एड. के चारवर्षीय कार्यक्रमों, विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास के लिये संचालित विभिन्न गतिविधियों आदि की जानकारी दी। डाॅ. वीरेन्द्र भाटी मंगल ने सभी का परिचय करवाया।

इन्होंने भी रखे विचार

संगोष्ठी में नगरपालिका के उपाध्यक्ष भाणूं खां टाक, एडवोकेट ओमप्रकाश प्रजापत, देवाराम पटेल, पार्षद् विजय कुमार भोजक, ललित वर्मा, रामनिवास शर्मा, चांद कपूर सेठी, लक्ष्मीपत बैंगानी, भाजपा के जिला मंत्री नितेश कुमार माथुर, खींवाराम घिंटाला, किरण बरमेचा, रामनारायण सोनी, शहर काजी सैयद मो. अयूब अशरफी आदि ने अपने विचार व्यक्त करते हुये अनेक सुझाव प्रस्तुत किये। संगोष्ठी में वित्ताधिकारी आरके जैन, उप कुल सचिव नेपाल चंद गंग, भाजपा शहर अध्यक्ष हनुमानमल जांगिड़, जिला स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की सदस्य सुमित्रा आर्य, नगर पालिका के पूर्व उपाध्यक्ष याकूब शेख, सुशील पीपलवा, राजेश खटेड़, अनिल पहाडिया, जौहरीमल दूगड़, शांतिलाल बैद, चैथमल किल्ला, प्रधान प्रतिनिधि प्रताप सिंह कोयल, निम्बी जोधां के सरपंच श्याम सुन्दर पंवार, तेजसिंह जोधा, सुनीता बैद आदि उपस्थित थे।

जैन विश्वभारती संस्थान में रोजगार परिदृश्य एवं अन्य मुद्दों पर व्याख्यान का आयोजन

जैन विश्वभारती संस्थान में रोजगार परिदृश्य एवं अन्य मुद्दों पर व्याख्यान का आयोजन

लाडनूँ, 27 अक्टूबर। जैन विश्वभारती संस्थान के एससी/एसटी/ओबीसी प्रकोष्ठ द्वारा ‘‘रोजगार परिदृश्य एवं अन्य मुद्दों’’ पर एक व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य वक्ता मगध विश्वविद्यालय बिहार के प्रो. नलिन शास्त्री थे। कार्यक्रम की शुरुआत डाॅ. बिजेन्द्र प्रधान विभागाध्यक्ष समाज कार्य विभाग एवं समन्वयक एससी/एसटी/अन्य पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ ने की। उन्होंने अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान करते हुए कार्यक्रम के बारे में विस्तार से प्रस्तुति दी। मुख्य वक्ता प्रो. नलिन शास्त्री ने व्यावहारिक कुशलता में वृद्धि को विभिन्न पहलुओं - अर्थ, महत्त्व, मुख्य बिन्दु, सीख, नेतृत्व, सम्प्रेषण एवं समस्या-समाधान आदि पर प्रकाश डाला। तत्पश्चात् कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रो. शास्त्री द्वारा सहभागियों के प्रश्नों एवं जिज्ञासाओं का समाधान अन्तःक्रिया के माध्यम से किया गया। अन्त में एससी/एसटी/अन्य पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के सदस्य डाॅ. विष्णु कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

जैन साधुवृन्द ने जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय का किया अवलोकन

जैन साधुवृन्द ने जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय का किया अवलोकन

अच्छे संस्कारों को जीवनभर बनाये रखना आवश्यक - मुनि विमल कुमार

लाडनूँ, 16 दिसम्बर, 2016। शासनश्री मुनिश्री विमल कुमार ने कहा है कि जैन विश्वभारती संस्थान अन्य सभी विश्वविद्यालयों से विलक्षण है। इस संस्थान की अपनी गरिमा है। संस्थान के विकास में गुरुदेव तुलसी, आचार्यश्री महाप्रज्ञ एवं आचार्यश्री महाश्रमण के साथ अब तक रहे कुलपतियों का भी महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है। इस संस्थान को आगे बढ़ाने में विद्यार्थियों की भूमिका भी सबसे महत्त्वपूर्ण होती है। आप जो संस्कार यहां से ग्रहण करते हैं, उन अच्छे संस्कारों को अपने जीवन में भी बनाये रखें। यहाँ के विद्यार्थी जहाँ भी जाएँ, उनके संस्कार बोलने चाहिए। संस्कारों को जीवनभर सुरक्षित बनाये रखना विद्यार्थियों की जिम्मेवारी है। मुनिश्री ने शुक्रवार को जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय का अवलोकन किया तथा उसके बाद एस.डी. घोड़ावत आॅडिटोरियम में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं को सराहा तथा कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ के कार्यकाल व अब तक सम्पन्न कार्यों की प्रशंसा की। इस अवसर पर कुलपति प्रो. दूगड़ ने अपने संबोधन में कहा कि ईंट और पत्थरों से हुआ विकास सब कुछ नहीं होता। यहाँ तपस्वी संतो के निरन्तर जुड़े रहने से यहाँ का परिसर गरिमामय बन गया है। मुनिश्री विमलकुमार का परिचय देते हुए बताया कि वे विभिन्न भाषाओं के जानकार व मर्मज्ञ हैं। प्राचीन भाषा व साहित्य पर उन्होंने बहुत कार्य किया है और अनेक वृहद् ग्रन्थ लिखे हैं।

ध्यान परिणामों के लिए प्रयुक्त मशीनों की सराहना

शासनश्री मुनिश्री विमलकुमार अपने सहयोगी साधुवृंद मुनि मधुर, मुनि अक्षय, मुनि धन्य, मुनि अजय प्रकाश व प्रेक्षाध्यान शिविर संचालक श्रेयांस बैगवानी के साथ जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के जैनविद्या विभाग, प्राच्यविद्या एवं भाषा विभाग, योग एवं जीवन विज्ञान विभाग, योग संबंधी प्रयोगशालाओं, अहिंसा एवं शांति विभाग, समाज कार्य विभाग, महाप्रज्ञ सभागार, प्राकृतिक चिकित्सा-कक्षों, प्रशासनिक खण्ड, दूरस्थ शिक्षा निदेशालय, कम्प्यूटर लैब, महिला सिलाई प्रशिक्षण केन्द्र, शिक्षा विभाग, आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय, केन्द्रीय शैक्षणिक भवन आदि का अवलोकन किया। उन्हें विभिन्न विभागाध्यक्षों आदि ने संबंधित विभागों की गतिविधियों व व्यवस्थाओं की जानकारी दी। मुनिश्री ने यहाँ की व्यवस्थाओं की सराहना की। वे ध्यान एवं योग के परिणामों की जाँच व विश्लेषण के लिए स्थापित की गई प्रयोगशालाओं को देखकर अभिभूत हुए। उन्होंने ब्रेन मेपिंग, लाईव डिटेक्टर, स्पाइरो मीटर, रक्त जांच, मल्टी पेरामोनिटर, एनसीवी आदि की कार्यप्रणाली को देखा व समझा तथा उन्हें उपयोगी बताया। उनके साथ अवलोकन के द्वौरान कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़, रजिस्ट्रार विनोद कुमार कक्कड़, दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी, उप कुलसचिव नेपालचंद गंग आदि मौजूद थे।

विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं का आयोजन

विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं का आयोजन

विद्यार्थियों की क्षमताओं को उजागर करें - प्रो. दूगड़

लाडनूँ, 14 दिसम्बर, 2016। जैन विश्वभारती संस्थान मान्य विश्वविद्यालय के अन्तर्गत बुधवार को तीन दिवसीय सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं का शुभारम्भ एसडी घोड़ावत आॅडिटोरियम में किया गया। संस्थान के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता करते हुए कहा कि विद्यार्थियों में विभिन्न क्षमताएँ मौजूद रहती हैं, उन्हें पहचानने और बाहर निकालने का काम शिक्षकों को शिक्षण कार्य के साथ करना चाहिए। कलाओं का विकास करने के लिए शिक्षकों को अपने विद्यार्थियों की क्षमताओं को परखकर उनकी प्रवीणता में वृद्धि लाकर उन्हें जीवन में सफल बनाना चाहिए। कुलपति दूगड़ ने प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करते हुए घोषणा की कि राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम व द्वितीय आने वाले विद्यार्थियों को 5100 रुपये तथा ग्रुप को 7100 रुपये विश्वविद्यालय की ओर से दिये जायेंगे। इसके अलावा राज्य स्तर पर प्रथम व द्वितीय रहने वाले विद्यार्थी व ग्रुप को क्रमशः 2100 रुपये एवं 3100 रुपये का नकद पुरस्कार दिया जायेगा। उन्होंने छात्राओं से आह्वान किया कि वे इन प्रतियोगिताओं के जरिये अपनी रचनात्मकता को बाहर निकालें तथा विश्वविद्यालय को अद्वितीय बनाने में अपनी भूमिका निभाएँ। इस अवसर पर उन्होंने अगले सत्र से विश्वविद्यालय की परीक्षा-पद्धति को बदलने की घोषणा की तथा बताया कि अब केवल सेमेस्टर के अंत में वार्षिक परीक्षाएं ही नहीं बल्कि हर यूनिट के समाप्त होने पर इंटरनल परीक्षाएं भी होंगी तथा विद्यार्थियों के कम अंक होने पर उन्हें छोटे-छोटे कोर्स के माध्यम से जोड़ने का समुचित अवसर दिया जायेगा।

झिझक मिटायें विद्यार्थी

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलसचिव वी.के. कक्कड़ ने अपने संबोधन में कहा कि नैतिक शिक्षण के साथ हाॅबीज का शिक्षण भी आवश्यक है। आजकल हाॅबी आमदनी का जरिया भी बन चुकी है तथा शोहरत व स्टेटस का माध्यम भी है। शिक्षकों को अपने विद्यार्थियों को इसके लिए मोटिवेट करना चाहिए। साथ ही विद्यार्थियों को अपनी झिझक को समाप्त करना चाहिए। उन्होंने एकेडमिक कैलेण्डर की तर्ज पर स्पोर्ट्स एक्टीविटिज का कैलेण्डर भी तैयार करना जरूरी बताया, जिससे संस्थान में खेल व कला संबंधी गतिविधियां सुचारू हो सकेंगी।

झिझक मिटायें विद्यार्थी

समारोह का आरम्भ रागिनी शर्मा द्वारा नृत्य प्रस्तुति के साथ सरस्वती-वंदना द्वारा किया गया। सांस्कृतिक प्रभारी डाॅ. अमिता जैन ने सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं की जानकारी दी। प्रो. आर.बी.एस. वर्मा व प्रो. बी.एल. जैन ने अतिथियों का स्वागत किया। अन्त में धन्यवाद-ज्ञापन डाॅ. विवेक माहेश्वरी ने किया। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. अदिति गौतम ने किया। बुधवार को नाटक प्रतियोगिता, मेहंदी प्रतियोगिता एवं पोस्टर पेंटिग प्रतियोगिता आयोजित की गई। इन प्रतियोगिताओं में निर्णायक के रूप में प्रो. दामोदर शास्त्री, उपकुलसचिव नेपालचंद गंग, डाॅ. प्रद्युम्नसिंह शेखावत, डाॅ. प्रगति भटनागर, डाॅ. सरोज राय व डाॅ. ज्योति स्वामी मौजूद थे। तीन दिन चलने वाले इस प्रतियोगिता में गुरुवार को भाषण, एकल गायन, रंगोली, विचित्र वेशभूषा के साथ मूकाभिनय प्रतियोगिताएँ आयोजित की गईं।

लाडनूँ, 15 दिसम्बर, 2016। दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने लोहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा भारत को एक बनाने से लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा भारत को श्रेष्ठ बनाने तक यात्रा का वर्णन करते हुए कहा कि महान् कार्य के लिए निर्णय लेने पड़ते हैं और मजबूत निर्णय से ही देश को श्रेष्ठता की ओर ले जाया जा सकता है। किसी भी कठोर निर्णय से नागरिकों को थोड़ी परेशानी तो अवश्य हो सकती है लेकिन राष्ट्र के उत्थान के लिए ऐसे निर्णय मददगार होते हैं। उन्होंने सरदार पटेल द्वारा 101 छोटी-बड़ी रियासतों को एक सूत्र में बांधने से लेकर स्वच्छ भारत अभियान, हर घर में शौचालय, उज्ज्वला योजना, कानूनों व नियमों को कम करने, नोटबंदी आदि कदमों को भारत को श्रेष्ठ बनाने के प्रयासों में मील का पत्थर बताया। वे विश्वविद्यालय के एस.डी. घोड़ावत आॅडिटोरियम में सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के अन्तर्गत आयोजित भाषण प्रतियोगिता में संबोधित कर रहे थे। शिक्षा-विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बी.एल. जैन ने शिक्षा, ज्ञान और जागरुकता को हर व्यक्ति और समूचे देश को अच्छा बनाने के लिए आवश्यक बताया। उन्होंने नदी, समुद्र, लेखक, कवि आदि को श्रेष्ठ-भारत की पहचान बताया।

भाषण प्रतियोगिता में ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ विषय पर सात प्रतिभागियों-कोमल चैधरी, प्रीति स्वामी, सुमन सोमड़वाल, शिवानी गहलोत, रागिनी शर्मा, सुनिता सारण, चंचल गौड़ व मुमुक्षु आरती ने अपने विचार व्यक्त किये। डाॅ. अंकिता जांगिड़ व डाॅ. बी. प्रधान ने निर्णायकों का स्वागत किया। प्रतियोगिता के निर्णाक प्रो. आनन्दप्रकाश त्रिपाठी, प्रो. बी.एल. जैन व डाॅ. गिरधारीलाल शर्मा थे। कार्यक्रम के अन्त में सांस्कृतिक समन्वयक डाॅ. अमिता जैन ने आभार ज्ञापित किया। प्रतियोगिता का संचालन डाॅ. गिरिराज भोजक ने किया।

रंगोली प्रतियोगिता में सजाई मनमोहक रंगोलियाँ

विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के अन्तर्गत गुरुवार को रंगोली प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। संस्थान के शिक्षा-विभाग परिसर में छात्राओं के 17 समूहों द्वारा विभिन्न आकर्षण रंगोलियाँ सजाई गईं। डाॅ. बी. प्रधान, डाॅ. सुनिता इन्दौरिया, अंकिता जांगिड़ व सोनिका जैन ने निर्णायक के तौर पर इन रंगोलियों का अवलोकन किया। रंगोली प्रतियोगिता में अंकिता मारू, सायर स्वामी, लक्ष्मी, चन्दा कुमारी, चंचल गौड़, कैलाश देवी, सपना, सरिता राहड़, नौरंगी, रश्मि, सुरक्षा जैन, पूजा वैष्णव, सुनिता गौड़, मोनिका, मैना सियाक, सुमन लटियाल व चम्पा प्रजापत के समूहों ने भाग लिया।

विचित्र वेशभूषा व एकल गायन प्रतियोगिताएँ आयोजित

विश्वविद्यालय के एसडी घोड़ावत आॅडिटोरियम में आयोजित विचित्र वेशभूषा एवं मूकाभिनय में राधा मूण्ड, अंकिता मारू, चंचल गौड़, पुष्पा घोटिया व सुमन लटियाल ने विभिन्न प्रकार की वेशभूषा धारण करके हास्यास्पद मौन अभिनय किया। इस प्रतियोगिता के निर्णायक अनूप तिवाड़ी, हेमलता, डाॅ. पुष्पा मिश्रा थी। एकल लोक-गायन में प्रियंका नागपुरिया, सुरक्षा जैन, राधा मूण्ड, रागिनी शर्मा, प्रीति स्वामी, आकांक्षा व मुमुक्षु शिक्षा ने राजस्थानी गीतों की मनभावन प्रस्तुति दी। एकल फिल्मी-गायन में छात्रा प्रियंका नागपुरिया, ज्योति चिण्डालिया, सुरक्षा जैन, प्रीति स्वामी, निलोफर बानो, सुमन नैण, ममता घांची, अंकिता मारू, चंचल गौड़, पुष्पा घोटिया, रागिनी शर्मा, सुनिता सहारण, सरिता शर्मा, चेतना व नम्रता ने प्रस्तुतियाँ दीं। पूजा वशिष्ठ व सुनिता सारण ने मंच का संचालन किया। इस अवसर पर विवेक माहेश्वरी, अंकिता जांगिड़, डाॅ गिरिराज भोजक, डाॅ अमिता जैन आदि उपस्थित थे।

लाडनूँ, 16 दिसम्बर, 2016। सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के समापन-समारोह को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने कहा कि अपनी प्रस्तुति में संभागी जब तक पूरी तरह तल्लीन नहीं हो जाता और उसे स्वयं आनन्द नहीं आता तब तक वह प्रस्तुति श्रेष्ठ नहीं हो सकती। उन्होंने विद्यार्थियों को सांस्कृतिक कार्यक्रम में दी जाने वाली प्रस्तुति में खुद एन्जोय करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अनुशासन और शिक्षकों के सम्मान पर पूरा ध्यान जाना चाहिए तथा मर्यादाओं का पालन करना चाहिए। दूगड़ ने कहा कि हमारा जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय अन्य विश्वविद्यालयों से कुछ अलग होना आवश्यक है। इस तरफ विद्यार्थियों को पूरा ध्यान देना चाहिए। उन्होंने घोषणा की कि अगले सत्र में कुछ व्यवस्थाओं को ओर बढ़ायेंगे लेकिन उनका पूरा उपयोग होना आवश्यक है। इस अवसर पर रजिस्ट्रार विनोदकुमार कक्कड़ ने अपने संबोधन में कहा कि इन सांस्कृतिक कार्यक्रमों को देखने के बाद प्रतीत होता है कि विद्यार्थियों में भरपूर ऊर्जा है, लेकिन यह ऊर्जा निरन्तर बरकरार रहनी चाहिए तथा प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली प्रतियोगिताओं में इस जोश व ऊर्जा के कारण यह साबित हो सके कि यह विश्वविद्यालय किसी से कम नहीं है। समाजकार्य विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. आर.बी.एस. वर्मा ने इस अवसर पर कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी को हर क्षेत्र में शिक्षित व प्रशिक्षित किया जाये तभी उसकी शिक्षा पूर्ण होती है। उच्च शिक्षा में सर्वांगीण शिक्षा के सारे आयाम होने आवश्यक है। प्रारम्भ में अंकिता जांगिड़ ने सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। अन्त में सांस्कृतिक समन्वयक डाॅ. अमिता जैन ने आभार ज्ञापित किया। शुक्रवार को सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के तहत एकल लोक नृत्य, एकल फिल्मी नृत्य एवं सामूहिक नृत्य प्रतियोगिताओं का आयोजित किया गया। इस अवसर पर डाॅ. बी. प्रधान, डाॅ. सुनिता इन्दोरिया, डाॅ. अंकिता जांगिड़, सोनिका जैन, डाॅ. विवेक माहेश्वरी, डाॅ. अदिति गौतम, सुश्री नुपुर जैन, सुश्री पूजा जैन आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. गिरिराज भोजक ने किया।

प्रतियोगिता के परिणामों की घोषणा

जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार विनोद कुमार कक्कड़ ने सांस्कृतिक प्रतियोगिता के परिणामों की घोषणा करते हुए बताया कि नाटक प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर विजयश्री रांकावत व समूह रहा, द्वितीय स्थान पर पार्वती एवं समूह तथा तृतीय स्थान पर चंचल गौड़ व समूह रहे। मेहंदी प्रतियोगिता में तब्बसुम ने पहला स्थान प्राप्त किया, अलका चैधरी दूसरे और अंकिता मारू तीसरे स्थान पर रही। पोस्टर पेंटिंग प्रतियोगिता में पहले स्थान पर सुमन लटियाल, द्वितीय स्थान पर प्रीति स्वामी व तृतीय स्थान राधा मूण्ड रही। रंगोली प्रतियोगिता में अंकिता मारू एवं समूह प्रथम स्थान पर, कैलाश देवी व समूह द्वितीय स्थान पर और सरीता राहड़ व समूह तृतीय स्थान पर रहे। भाषण प्रतियोगिता में कोमल चैधरी व मुमुक्षु आरती प्रथम स्थान पर रही। द्वितीय स्थान पर रागिनी शर्मा व तृतीय स्थान पर सुनिता सहारण रही। विचित्र वेशभूषामय मूकाभिनय प्रतियोगिता में प्रथम अंकिता मारू, द्वितीय राधा मूण्ड और तृतीय चंचल गौड़ रही। एकल लोक-गायन में सुरक्षा जैन प्रथम, आकांक्षा द्वितीय व रागिनी तृतीय रही। फिल्मी एकल गायन में सुरक्षा जैन प्रथम, आकांक्षा द्वितीय व मुमुक्षु शिक्षा तृतीय रही। फिल्मी एकल नृत्य में पहले स्थान में आनन्दपाल सिंह जोधा, द्वितीय स्थान पर रागिनी शर्मा व विजयश्री रांकावत और तृतीय स्थान पर अंकिता मारू रही। एकल लोकनृत्य में सुमन सिम्मल प्रथम, आरती द्वितीय व साक्षी शर्मा तृतीय रही। सामूहिक लोकनृत्य में प्रथम स्थान पर अंकिता मारू व समूह, द्वितीय स्थान पर दिव्या सैनी व समूह तथा तृतीय स्थान पर चंचल गौड़ व समूह रहे।

सड़क सुरक्षा पर व्याख्यान का आयोजन

सड़क सुरक्षा पर व्याख्यान का आयोजन

सड़क-सुरक्षा बोझ नहीं कर्तव्य है - डाॅ. चोयल

लाडनूँ, 12 दिसम्बर, 2016। जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के एस.डी. घोड़ावत आॅडिटोरियम में सोमवार को कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ की अध्यक्षता में सड़क-सुरक्षा विषयक व्याख्यान का आयोजन किया गया। क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी, भरतपुर डाॅ. नानूराम चोयल ने सड़क सुरक्षा की जानकारी देते हुए कहा कि सड़क की सुरक्षा बोझ नहीं बल्कि कत्र्तव्य है। सुरक्षा से ही मानव जीवन की रक्षा की जा सकती है। उन्होंने बताया कि देश में प्रतिवर्ष लाखों दुर्घटनाएँ होती हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो जाती है। डाॅ. चोयल ने परिवहन नियमों की जानकारी देते हुए रोड़ पर सुरक्षा के साथ कैसे वाहन संचालित करंे कि जानकारी दी। इस अवसर पर डाॅ. चोयल ने छात्र-छात्राओं को सड़क-सुरक्षा की शपथ भी दिलायी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने कहा कि आज सड़क-सुरक्षा के प्रति सबको जागरूक होना होगा। सड़क पर हो रही दुर्घटनाओं पर चिन्ता व्यक्त करते हुए कुलपति प्रो. दूगड़ ने संभागियों को जागरूक रहने के लिए कहा। स्वागत-भाषण कुलसचिव विनोद कुमार कक्कड़ ने एवं आभार-ज्ञापन प्रो. आनन्दप्रकाश त्रिपाठी ने व्यक्त किया। कार्यक्रम में मदनदास स्वामी, एडवोकेट इन्द्रचन्द घोटिया, संतोष स्वामी सहित विश्वविद्यालय के सभी शिक्षक, अधिकारी एवं विद्यार्थी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. विवेक माहेश्वरी ने किया।

भारतीय संस्कृति के संवाहक प्राकृत भाषा एवं साहित्य - प्रो. दूगड़

भारतीय संस्कृति के संवाहक प्राकृत भाषा एवं साहित्य - प्रो. दूगड़

लाडनूं 21 नवम्बर, 2016। संस्कृत एवं प्राकृत दोनों ही भाषाएँ भारतीय संस्कृति को प्रकट करने वाली हैं। इन दोनों ही भाषाओं का अपना-अपना महत्त्व है। प्राकृत सुकुमार भाषा है। अतः इसको केवल शास्त्राध्ययन तक ही सीमित नहीं रखा जाना चाहिये अपितु इसको जन सामान्य तक पहुंचाने के लिए विशेष प्रयत्न किये जाने चाहिए। उपरोक्त विचार जैन विश्वभारती संस्थान के प्राच्यविद्या एवं भाषा विभाग एवं राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान, नई दिल्ली द्वारा आयोजित प्राकृत साहित्य की विभिन्न विधाएँ एवं भाषात्मक वैशिष्ट्य विषयक त्रिदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में अध्यक्षीय वक्तव्य के रूप में संस्थान के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने प्रकट किये। उन्होंने प्राकृत के महत्व पर प्रकाश डालते हुये कहा कि प्राकृत इस भाषा के साहित्य में निहित तत्त्वों को छोटे-छोटे विषयों के माध्यम से शोधार्थियों को शोध करना चाहिये। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रो. सुषमा सिंघवी ने प्राकृत के सैद्धान्तिक पक्ष को प्रकट करते हुये उनकी सरलता एवं भावगम्यता पर बल दिया। उन्होंने वर्तमान समय में प्राकृत की उपयोगिता पर भी बल दिया। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डाॅ. रविन्द्रकुमार वशिष्ट ने प्राकृत साहित्य में निहित वैज्ञानिक तथ्यों को उजागर करते हुये वर्तमान समय में हो रहे अनुसंधानों एवं तकनिकी विशेषताओं के लिए भी प्राकृत साहित्य को बहुत ही उपयोगी एवं महत्त्वपूर्ण विषय माना। प्रो. दामोदर शास्त्री ने प्राकृत की सरलता को प्रतिपादित संस्कृत और प्राकृत की तुलना की तथा उसमें प्राकृत की विशेषताओं को प्रतिपादित किया।

अतिथियों का स्वागत एवं संगोष्ठी के उद्देश्यों को प्रतिपादित करते हुये विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. समणी संगीत प्रज्ञा ने प्राकृत भाषा को अतिप्राचीन बताते हुये अशोक एवं खारवेल के अभिलेखों का उल्लेख किया एवं अनेक उद्धरणों के माध्यम से प्राकृत के महत्त्व को प्रतिपादित किया।

इस संगोष्ठी में देश के विभिन्न क्षेत्रों से लगभग 30 विद्वान् भाग ले रहे हैं। उद्घाटन सत्र में संस्थान के कुलसचिव विनोद कुमार कक्कड़, प्रो. अनिल धर, दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी, वित्ताधिकारी राकेश कुमार जैन सहित संस्थान के गणमान्य प्राध्यापक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।

कार्यक्रम का शुभारम्भ संस्थान-गीत से हुआ। मुमुक्षु बहनों ने मंगलाचरण किया। अतिथि विद्वानों का शाॅल साहित्य एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया गया। कार्यक्रम का संयोजन डाॅ. सत्यनारायण भारद्वाज ने किया।

जैन न्याय विषयक दस दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित

जैन न्याय विषयक दस दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित

अनेकान्त में सभी दर्शनों का समन्वय: प्रो. दूगड़

लाडनूँ, 11 नवम्बर, 2016। जैन विश्वभारती संस्थान के जैन विद्या एवं तुलनात्मक धर्म तथा दर्शन विभाग द्वारा ‘‘शास्त्रवार्तासमुच्चय’’ नामक दार्शनिक ग्रन्थ पर आयोजित एवं भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित दस दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला (दिनांक 11 नवम्बर से 20 नवम्बर, 2016) का उद्घाटन संस्थान के कुलपति प्रो. बी.आर. दूगड़ की अध्यक्षता में हुआ। कुलपति प्रो. बी.आर. दूगड़ ने कार्यशाला की सफलता की कामना करते हुए कहा कि विभिन्न भारतीय दर्शनों का समन्वय यदि कहीं है तो वह केवल अनेकान्त दर्शन में ही सम्भव है। उन्होंने कहा कि दार्शनिक समन्वय का उल्लेख करते हुए जैनाचार्यों के योगदान की सराहना की तथा जैन दर्शन के सर्वमान्य सिद्धान्त अनेकान्त दृष्टि में सभी दार्शनिक परम्पराओं के समन्वय का उल्लेख किया। विश्व के सभी दर्शनों का मूल लक्ष्य पूर्ण सुख की प्राप्ति करना रहा है तथा जिस प्रकार विश्व की समस्त नदियाँ विभिन्न रास्तों से बहती हुई अंत में सागर में ही मिलती हैं, उसी प्रकार विविध मत अनेकान्त सिद्धान्त में समाविष्ट हो जाते हैं।

कार्यशाला के विशिष्ट अतिथि प्रो. दामोदर शास्त्री ने कार्यशाला के प्रतिपाद्य विषय का परिचय ऐतिहासिक दृष्टि से दिया तथा श्रमण एवं वैदिक परम्परा का तुलनात्मक परिचय दिया। प्रो. समणी ऋजु प्रज्ञा ने सम्पूर्ण दार्शनिक धाराओं का उल्लेख करते हुए श्रमण परम्परा का इतिहास बताया तथा आगम् एवं दर्शन में जैन न्याय परम्परा के योगदान पर भी प्रकाश डाला। प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने अपने विशिष्ट वक्तव्य में जैन दृष्टि की समतामूलक एवं समन्वयमूलक प्रवृत्ति पर प्रकाश डाला। उन्होंने आचार्य हरिभद्र को दर्शन के क्षेत्र में सबसे बड़े समन्वयवादी विचारक बताया। कार्यशाला में सम्मिलित विभिन्न प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए विभागाध्यक्ष समणी चैतन्य प्रज्ञा ने कार्यशाला के पीछे भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद् के प्रमुख उद्देश्य पर प्रकाश डाला और कहा कि भारतीय सभ्यता, संस्कृति, ज्ञान और विज्ञान के आधार विभिन्न परम्पराओं में उपलब्ध धार्मिक और दार्शनिक ग्रंथ है। उनका अध्ययन और अध्यापन न केवल प्राचीन ज्ञान और विज्ञान को जानने के लिए आवश्यक है अपितु जीवन और जगत् से जुड़ी हुई मूलभूत समस्याओं के समाधान में भी सहायक है। यही कारण है कि भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली वर्तमान पीढ़ी में इन ग्रंथों के अध्ययन और अध्यापन की रुची पैदा हो, इसके लिए इस प्रकार की कार्यशालाओं का आयोजन अनेक विश्वविद्यालयों में कर रही है। आचार्य हरिभद्र द्वारा रचित जैन न्याय विषयक ग्रंथ ‘‘शास्त्रवार्तासमुच्चय’’ है। इस ग्रन्थ में आत्मा, तत्त्व, पुण्य-पाप, काल, स्वभाव, ईश्वर, विज्ञानवाद, शून्यवाद, ब्रह्मवाद एवं मोक्ष आदि से जुड़े हुए प्रश्नों पर तुलनात्मक और समन्वय की दृष्टि से विचार किया गया है, जिस पर विभिन्न विद्वानों के द्वारा 10 दिवसों में चर्चा-परिचर्चा की जायेगी। कार्यक्रम का संयोजन विभाग के सहायक आचार्य डाॅ. योगेश कुमार जैन ने किया। ज्ञातव्य है कि इस कार्यशाला में राजस्थान, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, बिहार, झारखण्ड एवं मध्यप्रदेश से लगभग 35 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं।

20 नवम्बर, 2016। कार्यक्रम के समापन समारोह की अध्यक्षता संस्थान के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने की। समापन समारोह के मुख्य अतिथि प्रो. वीरसागर जैन, लालबहादुर शास्त्री संस्कृत विद्यापीठ, नई दिल्ली और विशिष्ट अतिथि प्रो. श्रेयांस कुमार सिंघई, राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान, जयपुर थे। समारोह में अतिथियों का स्वागत एवं कार्यशाला प्रतिवेदन प्रस्तुति विभाग की अध्यक्षा प्रो. समणी चैतन्य प्रज्ञा ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संयोजन विभाग के सहायक आचार्य डाॅ. योगेश कुमार जैन ने किया।

कार्यशाला के समापन सत्र में अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में संस्थान के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने कहा कि वैश्विक चिन्तन दो दिशाओं में प्रवाहित होता रहा है-श्रेय और प्रेय। श्रेयोन्मुखी विचारधाराओं में जीवन और जगत से जुड़े हुए शाश्वत प्रश्नों पर विचार किया गया है। जैनदर्शन, बौद्धदर्शन और वैदिकदर्शन श्रेयोन्मुखी विचारधारा के अंग हैं। प्रेयोन्मुखी विचारधारा में भौतिक सुख और समृद्धि जीवन का लक्ष्य माना गया है और उसकी प्राप्ति के लिए किसी भी साधन को अपनाना अनुचित नहीं माना गया है। चार्वाक दर्शन और पाश्चात्य संस्कृति प्रेयोन्मुखी विचारधारा के अंग हैं।

प्रो. वीरसागर जैन ने अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि आज भारत की अस्मिता का पुनरुद्धार करने के अनेक तरीके हैं उसमें भारतीय मनीषियों के द्वारा लिखित उदारवादी और सत्यशोधपरक दार्शनिक ग्रंथों पर आयोजित होने वाली इस प्रकार की कार्यशालाएँ मुख्य भूमिका निभा सकती हैं।

भारत की आध्यात्मिक एवं समन्वयवादी संस्कृति का कारण शास्त्रवार्तासमुच्चय जैसे दार्शनिक ग्रंथों के अध्ययन और अध्यापन की सुदीर्घ परम्परा रही है। भारत वह भूमि है जहाँ किसी समय लकड़हारा भी व्याकरणशास्त्र का जानकार होता था। जहाँ भोज जैसे राजा ने आदेश निकाला था कि यदि कोई चाण्डल भी हो किन्तु यदि वह ज्ञानानुरागी है तो वह मेरे देश में रह सकता है। तब जातिवाद नहीं बल्कि स्याद्वाद ही मुख्य रहे थे। ऐसे विषयों के चिन्तन-मनन से देश की अनेक समस्याओं का समाधान संभव है। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्यशालाओं हेतु मेरा सदा योगदान रहा है।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि प्रो. श्रेयांस कुमार जैन ने कहा कि यदि जैन विश्वभारती संस्थान जैसी 50-100 संस्थान भी हो जाएँ तो वर्तमान की अनेक समस्याओं का समाधान हो जायेगा। दर्शनशास्त्र सत्य का ज्ञान है। अच्छा विचारक बनने के लिए ऐसे ग्रंथों का अध्ययन-अध्यापन आवश्यक है। दर्शनशास्त्र में कल्पना, अंधविश्वास नहीं अपितु तात्विक ज्ञान दिया जाता है और विवेक-चेतना को जागृत करने पर बल दिया जाता है। कल्पना का सहारा लिया जा सकता है किन्तु उसका उद्देश्य सत्य को जानना होना चाहिए। दस दिवसीय कार्यशाला के सफल आयोजन पर विभाग की अध्यक्षा और प्राध्यापकों को धन्यवाद देते हुए उन्होंने जैन विद्या के व्यापक एवं सामाजिक अध्ययन हेतु कार्यशाला में समागत विद्वानों को नये अल्पकालिक पाठ्यक्रमों के निर्माण के लिए आह्वान किया। समागत शोधार्थियों को जैन विद्या के गहन अध्ययन हेतु सम्पूर्ण सुविधा तथा उन्हें भविष्य में रोजगार प्रदान करने का आश्वासन दिया।

संस्थान के कुलसचिव प्रो. विनोद कुमार कक्कड़ ने आगन्तुक विद्वानों और प्रतिभागियों को धन्यवाद देते हुए उन्हें संस्थान से जुड़े रहे के लिए कहा। कार्यशाला में मध्यप्रदेश, बिहार, प. बंगाल, गुजरात, उत्तरप्रदेश और राजस्थान से 35 शोधार्थियों और शिक्षकों ने भाग लिया। समापन कार्यक्रम मे संस्थान के सभी विभागों के विभागाध्यक्ष, संकाय सदस्य, शोधार्थी, समणीवृंद एवं मुमुक्षुवर्ग उपस्थित रहे। कार्यशाला की निदेशिका विभाग की अध्यक्षा प्रो. समणी चैतन्य प्रज्ञा एवं समन्वय डाॅ. योगेश जैन थे।

दूरस्थ शिक्षा निदेशालय द्वारा द्विदिवसीय क्षेत्रीय समन्वयक कार्यशाला का आयोजन

दूरस्थ शिक्षा निदेशालय द्वारा द्विदिवसीय क्षेत्रीय समन्वयक कार्यशाला का आयोजन

दूरस्थ शिक्षा में गुणवत्ता आवश्यक - प्रो. के.एन. व्यास

लाडनूं, 24 अक्टूबर, 2016। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) लाडनूं के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय द्वारा 24-25 अक्टूबर को क्षेत्रीय समन्वयक कार्यशाला का आयोजन संस्थान परिसर में किया गया। कार्यशाला के मुख्य अतिथि जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के निवर्तमान प्रोफेसर के.एन. व्यास ने कहा कि यह विश्वविद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में जो कार्य कर रहा है वह अद्वितीय है। शिक्षा अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाती है। महिला शिक्षा विकास की दृष्टि से यह संस्थान जो कार्य कर रहा है, वह प्रशंसनीय है। आचार्य तुलसी महिला शिक्षाा के विशेष हिमायती थे। उन्होंने शिक्षा में गुणवत्ता लाने के लिए अत्यधिक बल दिया था। आगे श्री व्यास ने दूरस्थ शिक्षा में गुणवत्ता पर विशेष बल दिया और कहा कि यह संस्थान इस प्रकार की शिक्षा के लिए याद किया जाता है।

कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रो. बच्छराज दूगड़ ने संस्थान के दूरस्थ शिक्षा पाठ्यक्रम में प्रामाणिकता पर बल दिया। उन्होंने समन्वयकों को प्रेरित करते हुए कहा कि सभी अपने-अपने क्षेत्रों में कार्य करें। महिला शिक्षा को केन्द्र में रखें। उन्होंने कहा कि दूरस्थ शिक्षा में आधुनिक तकनीकी का उपयोग जरूरी है। दूरस्थ शिक्षा के निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने कार्यक्रम की रूपरेखा एवं स्वरूप को प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम का शुभारम्भ समणी मृदुप्रज्ञा के मंगल संगान के साथ हुआ। कुलसचिव विनोद कक्कड़ ने स्वागत वक्तव्य दिया। इस अवसर पर अच्छे कार्य के लिए देवातु के समन्वयक दिव्या राठौड़, सीकर के समन्वयक दुर्गालाल पारीक, सांचैर के समन्वयक युधिष्ठिर श्रीमाली, गच्छीपुरा के समन्वयक हनुमानाराम तथा जोधपुर के समन्वयक कुशलराज समदड़िया को कुलपति एवं मुख्य अतिथि के करकमलों से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संयोजन नूपुर जैन एवं आभार ज्ञापन जे. पी. सिंह ने किया।

25 अक्टूबर 2016। दिनांक 25 अक्टूबर को समणी नियोजिका प्रो. समणी ऋजुप्रज्ञा के सान्निध्य में कार्यशाला का समापन सत्र आयोजित किया गया। दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि विविध क्षेत्रों में दूरस्थ शिक्षा के लिये कार्य कर रहे लगभग 82 क्षेत्रीय समन्वयकों ने कार्यशाला का लाभ उठाया। इस कार्यशाला में संस्थान की समस्त प्रवृत्तियों एवं गतिविधियों एवं दूरस्थ शिक्षा पाठ्यक्रम के अन्तर्गत प्रवेश कार्य, सत्रीय कार्य, सम्पर्क कक्षा एवं परीक्षा तथा मूल्यांकन के संदर्भ में जानकारी प्रदान की गई। दूरस्थ शिक्षा के क्षेत्र में अच्छे काम कर रहे समन्वयकों को सम्मानित भी किया गया।

कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रो. अनिल धर ने अपने वक्तव्य में कहा कि दूरस्थ शिक्षा उन सभी लोगों के लिए अत्यन्त उपयोगी है जो निजी कारणों से अपने अध्ययन को आगे नहीं बढ़ा पाते। संस्थान के लिए समन्वयकगण जो कार्य कर रहे हैं वह एक अनूठी सेवा है। प्रो. समणी ऋजुप्रज्ञा ने कहा कि सेवा सबसे बड़ा धर्म है। विभिन्न क्षेत्रीय समन्वयकों की जो निः स्वार्थ सेवा है वह प्रशंसनीय है। उन्होंने कहा कि शिक्षा से बढ़कर कुछ नहीं है। शिक्षा से समस्त समस्याओं का समाधान संभव है। समापन कार्यक्रम का शुभारम्भ समणी मृदुप्रज्ञा के मंगलसंगान के साथ हुआ। इस सत्र का संयोजन समणी डाॅ. शुभप्रज्ञा ने एवं आभार ज्ञापन प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने किया।

जैन विश्वभारती संस्थान में चार वर्षीय बी.ए.-बी.एड. एवं बी.एस-सी.-बी.एड. कोर्स का शुभारम्भ

जैन विश्वभारती संस्थान में चार वर्षीय बी.ए.-बी.एड. एवं बी.एस-सी.-बी.एड. कोर्स का शुभारम्भ

लाडनूं, 10 नवम्बर 2016। शिक्षा विभाग, जैन विश्वभारती संस्थान के अन्तर्गत चार वर्षीय बी.ए.-बी.एड., बी.एस-सी.-बी.एड. कोर्स का शुभारम्भ हुआ, जिसका उद्घाटन घोड़ावत ऑडिटोरियम में कुलपति प्रो. बी. आर. दूगड़ की अध्यक्षता में किया गया। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. दूगड़ ने नवागन्तुक विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि विद्यार्थी खुली सोच विकसित करने का प्रयास करें। अपने रास्ते का स्वयं चुनाव करते हुए उस पर आत्मविश्वास के साथ आगे बढं़े। ज्ञानार्जन के साथ-साथ खेल-कूद में भी बढ़-चढ़ कर भागीदारी निभाएँ। इस अवसर पर कार्यक्रम को सान्निध्य प्रदान कर रही समणी डॉ. ऋजुप्रज्ञा ने कहा कि विद्यार्थी जीवन में सही दिशा व सही चिन्तन के बिना विकास संभव नहीं है और सही दिशा शिक्षा से ही मिलती है। शिक्षा कामधेनु गाय के समान है, जो हमारी सभी इच्छाओं को पूरा कर सकती है। उन्होंने कहा कि हमारा प्रमुख ध्येय ज्ञान प्राप्ति होना चाहिए न कि केवल डिग्री प्राप्ति।

कुलसचिव विनोद कुमार कक्कड़ ने विद्यार्थियों को संस्थान का परिचय देते हुए संस्थान के नियम-कायदों से अवगत करवाया। शिक्षा विभाग के अध्यक्ष प्रो. बी.एल. जैन ने विद्यार्थियों को अतिथियों का परिचय प्रदान करते हुए चार वर्षीय पाठ्यक्रम के सम्बन्ध में बताया। कार्यक्रम में उपस्थित नवागन्तुक विद्यार्थियों में से सुरक्षा जैन, रागिनी शर्मा तथा अल्का चौधरी ने अपनी प्रस्तुतियां दी। कार्यक्रम में समस्त शिक्षा संकाय सदस्य, अन्य विभागों के आचार्यगण तथा शिक्षा विभाग के समस्त विद्यार्थी उपस्थित रहे। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. गिरधारी लाल शर्मा ने तथा मंच संचालन डॉ. आभा सिंह ने किया।

जैन विश्वभारती संस्थान में यूथ कॅरियर फेयर समारोह आयोजित

जैन विश्वभारती संस्थान में यूथ कॅरियर फेयर समारोह आयोजित

शिक्षा एवं आत्मविश्वास का कॅरियर निर्माण में अतिमहत्त्व: श्री जसबीर सिंह

लाडनूँ, 19-10-2016। जैन विश्व भारती संस्थान के आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय द्वारा बुधवार को जैन विश्वभारती परिसर स्थित सुधर्मा सभा में प्रातः 10.00 बजे ‘यूथ फेस्टिवल एवं कॅरियर फेयर’ का उद्घाटन किया गया। उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि डाॅ. जसबीर सिंह अध्यक्ष-अल्पसंख्यक आयोग, राजस्थान सरकार, जयपुर ने कहा कि आत्मविश्वास एवं शिक्षा से कॅरियर का उन्नत निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने छात्राओं को शिक्षित करने को सबसे बड़ा धर्म बताया। शिक्षा को जीवन का आधार बताते हुए कहा कि शिक्षा, शोध तथा तकनीक के आधार पर देश को उन्नति के शिखर पर पहुंचा सकते हैं। भारत विश्वगुरू तो था ही, अब विश्वशक्ति बन सकता है। शिक्षा के द्वारा ही हम समाज में बदलाव ला सकते हैं। हमें समाज की बुराइयों से लड़ना हैं। प्रो. बच्छराज दूगड़, कुलपति, जैन विश्वभारती संस्थान, लाडनूँ ने कार्यक्रम के अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा कि देश सेवा व सम्मान सर्वप्रथम है। उन्होंने अरूणिमा सिन्हा द्वारा प्रथम विकलांग महिला के रूप में माऊण्ट एवरेस्ट फतह की प्रेरणादायक घटना तथा स्टीफन हाॅकिन्स के शारीरिक अक्षमता के बावजूद भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण योगदान जैसे प्रेरणादायक प्रसंग प्रस्तुत कर छात्राओं को लक्ष्य प्राप्ति हेतु आत्मविश्वास एवं साहस के विकास हेतु प्रेरित किया।

समणी मृदुप्रज्ञा ने मंगलसंज्ञान से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। जैन विश्वभारती के ट्रस्टी श्री भागचन्द बरडिया़ एवं संस्थान के कुलपति प्रो. बी.आर. दूगड़ ने अतिथियों का मोमेण्टो एवं शाॅल भेंट कर अभिनन्दन किया। महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. जुगल दाधीच ने अतिथियों का स्वागत एवं परिचय देते हुए यूथ फेस्टिवल के उद्देश्य एवं प्रारूप की विस्तृत जानकारी दी। प्रो. समणी ऋजुप्रज्ञा ने विद्यार्थियों से लक्ष्य प्राप्ति के लिए आत्मविश्वास तथा सकारात्मक सोच को अतिआवश्यक बताया। संस्थान के कुलसचिव डाॅ. विनोद कुमार कक्कड़ ने विद्यार्थियों को सर्वप्रथम अपना लक्ष्य तय कर ईमानदारी से मेहनत करने को कहा। उन्होंने अभिरूचि को भी जाॅब में बदलने के बारे में समझाया। प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी, निदेशक, दूरस्थ शिक्षा निदेशालय ने सभी आगुन्तकों का आभार एवं धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संयोजन सुश्री अंकिता जांगिड ने किया तथा संचालन महाविद्यालय की छात्राएँ दिव्या जांगिड़ तथा प्रभा डागा ने किया। कार्यक्रम में श्री भागचन्द बरडिया, प्रो. आर.बी.एस. वर्मा, प्रो. बी.एल. जैन, प्रो. अनिल धर, उपखण्ड अधिकारी मुरारीलाल शर्मा, नागौर प्रोग्राम आॅफिसर बसीर खान एवं लाडनूं के गणमान्य नागरिक, पत्रकार एवं विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थियों ने भाग लिया।

यूथ कॅरियर फेयर में छात्राओं की ओर से विभिन्न खाद्य सामग्री सहित कॅरियर से जुड़ी कुल 16 स्टाॅलें लगाई गईं। मुख्य अतिथि जसबीर सिंह, अध्यक्ष अल्पसंख्यक आयोग, राजस्थान सरकार ने बच्चों की ओर से लगाई गई स्टाॅल का उद्घाटन किया एवं छात्राओं के इस कार्य की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया। स्टाॅलों की प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान के लिए निर्णायक का दायित्व विशेषाधिकारी नेपालचन्द गंग, सहायक आचार्य सरोज राय एवं सहायक निदेशक नुपूर जैन ने निभाया। प्रातः 10 बजे से शाम 5 बजे तक चले इस फेयर में अनेक लोगों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया।

जैन विश्व भारती संस्थान में डांडिया नृत्य प्रतियोगिता का भव्य आयोजन

जैन विश्व भारती संस्थान में डांडिया नृत्य प्रतियोगिता का भव्य आयोजन

श्रद्धा भक्ति का रास डांडिया - प्रो. दूगड़

लाडनूं, 16 अक्टूबर, 2016। जैन विश्व भारती संस्थान के प्रांगण में डांडिया नृत्य प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया। प्रतियोगिता आयोजन के उद्घाटन के अवसर पर संस्थान के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने संभागियों एवं उपस्थितजनों को संबोधित करते हुए कहा कि शारदीय नवरात्रा महोत्सव में डांडिया नृत्य भारतीय संस्कृति की प्राचीन पहचान को उजागर करती है। प्रो. दूगड़ ने कहा कि भारत में माँ दूर्गा-शक्ति की प्रतीक है और शक्ति को यदि आस्था में समर्पित कर दिया जाता है तो वह अहिंसा की प्रतीक बन जाती है। संस्थान के कुलसचिव विनोद कुमार कक्कड़ ने कहा कि छात्राएँ स्वयं देवी का रूप होती हैं और ये छात्राएँ देवी के प्रति जो आराधना प्रतियोगिता के रूप में कर रही हैं, वे वास्तव में भारत-माता की प्रतीक लगती हैं। आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. जुगल दाधीच ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि गरबा प्रतियोगिता केवल श्रद्धा एवं भक्ति का प्रतीक ही नहीं है बल्कि इस प्रतियोगिता से विद्यार्थियों में आत्म-विकास की जागृति भी होती है। शारदीय नवरात्रा-महोत्सव में आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय की 7 गु्रप में 50 विद्यार्थियों ने विभिन्न पारम्परिक वेशभुषाओं में डांडिया (गरबा) नृत्य किया। इस प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर तमन्ना फुलफगर, मिलन भोजक, हिमानी राठौड़, निकिता शर्मा, ज्योति राजपुरोहित, दिप्ती दूगड़, पुष्पा भाटी, द्वितीय स्थान पर मुस्कान नवलखा, निकिता दाधीच, धन्नी चोयल, मिनाक्षी जैन, मुस्कान शर्मा, पिंकी पारीक, सलौनी जैन, वृंदा दाधीच, दिव्या कंवर, सुमित्रा घासल, तृतीय स्थान पर सीमा शेखावत, पूजा पंवार, हेमलता शर्मा, मीनू रोड़ा, आरती सोलंकी, कोमल चैधरी, वंदना प्रजापत, वंदना रही। इससे पूर्व कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए नगरपालिका की चैयरमेन श्रीमती संगीता पारीक ने कहा कि विद्यार्थियों की बहुमुखी प्रतिभाओं को निखारने का सुअवसर डांडिया प्रतियोगिता है। कार्यक्रम का शुभारम्भ माँ सरस्वती का दीप प्रज्वलित कर किया गया। कार्यक्रम में प्रो. बी.एल. जैन, डाॅ. बिजेन्द्र प्रधान, डाॅ. प्रगति भटनागर, कमल मोदी, सुरेन्द्र कुमार, मधुकर दाधीच, नरेन्द्र कुमार आदि उपस्थित थे। अध्यक्ष नगरपालिका चेयरमैन संगीता पारीक का स्वागत कार्यक्रम की समन्वयक सुश्री अंकिता जांगिड ने शाॅल एवं मोमेन्टो भेंट कर किया। प्रतियोगिता में निर्णायक डाॅ. पुष्पा मिश्रा, डाॅ. मनीषा चैधरी एवं श्रीमती नुपूर जैन थी। धन्यवाद ज्ञापन उपप्राचार्या पूजा जैन ने किया। कार्यक्रम का संचालन प्रभा डागा एवं दिव्या जांगिड़ ने किया।

नैतिक दर्शन विषय पर व्याख्यानमाला आयोजित

नैतिक दर्शन विषय पर व्याख्यानमाला आयोजित

लाडनूंँ, 15 अक्टूबर 2016। जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय द्वारा नैतिक दर्शन विषय पर आयोजित व्याख्यानमाला की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने भारतीय दर्शन एवं काण्ट के दर्शन की तुलना करते हुए आत्मशुद्धि एवं कर्तव्य को प्रमुख बताया। प्रो. दूगड़ ने कहा कि भारतीय दर्शन श्रेयोन्मुख रहा है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के निदेशक प्रो. आनन्दप्रकाश त्रिपाठी ने नैतिक मूल्यों का वैशिष्ट्य प्रस्तुत करते हुए जर्मनी के दार्शनिक काण्ट के नैतिक दर्शन को प्रस्तुत किया। उन्होंने सद्इच्छा, कर्तव्य व नैतिकता के निरपेक्ष आदेश की मीमांसा करते हुए नैतिक मूल्यों के प्रति समर्पण को जरूरी बताया। प्रो. त्रिपाठी ने बताया कि काण्ट का जीवन कर्तव्य के प्रति पूरी तरह समर्पित था, इसलिये उन्होंने सम्पूर्ण मानव जाति के लिये कर्तव्य के लिये कर्तव्य का सिद्धान्त प्रतिपादित किया, जिसके अनुसार प्रत्येक व्यक्ति का लक्ष्य कर्तव्य की पूर्ति होना चाहिए, न कि फलासक्ति। व्याख्यानमाला के संयोजक डाॅ. मनीष भटनागर ने स्वागत एवं डाॅ. सत्यनारायण भारद्वाज ने आभार ज्ञापित किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के सभी विभागाध्यक्ष एवं शिक्षक उपस्थित थे।

कॅरियर निर्माण कार्यशाला का आयोजन

कॅरियर निर्माण कार्यशाला का आयोजन

लाडनूँ, 14 अक्टूबर, 2016। जैन विश्वभारती संस्थान, लाडनूँ के कॅरियर काउन्सलिंग सैल द्वारा आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के आॅडिटोरियम में ‘‘कॅरियर 12वीं के बाद’’ विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला में लाड मनोहर उच्च माध्यमिक विद्यालय, भुतोड़िया बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय एवं केसरदेवी बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय की 12वीं कक्षा की छात्राओं एवं शिक्षकों ने भाग लिया। आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. जुगलकिशोर दाधीच ने विद्यार्थियों एवं शिक्षकों का स्वागत करते हुए शिक्षक और विद्यार्थी के बीच अच्छे संबंधों पर जोर देते हुए अपनी बात रखी। महाविद्यालय की उप-प्राचार्या पूजा जैन ने प्रजेण्टेशन से 12वीं के बाद कॅरियर के लिए विभिन्न विकल्पों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। संस्थान के कुलसचिव विनोद कुमार कक्कड़ ने कॅरियर गाइडेंस में जैन विश्वभारती संस्थान के योगदान का जिक्र किया और संस्थान द्वारा प्रारम्भ किये जा रहे नये काॅर्सेज बी.ए.-बी.एड. एव ंबी.एससी.-बी.एड. तथा सूचना प्रौद्योगिकी के रोजगारोन्मुखी अल्पकालिक पाठ्यक्रमों की जानकारी दी। छात्राओं द्वारा विभिन्न व्यावसायिक पाठ्यक्रमों और अन्य प्रतियाोगिता परीक्षाओं से संबंधित पूछे गये प्रश्नों का कुलसचिव विनोद कुमार कक्कड़, उप-प्राचार्या पूजा जैन व सहायक आचार्य कमल कुमार मोदी ने संतोषजनक उत्तर दिया एवं विद्यार्थियों को भविष्य के लिए मार्गदर्शन दिया। विद्यालयों के शिक्षकों ने भी अपने विचार व्यक्त किये। सहायक आचार्य मधुकर दाधीच ने आभार ज्ञापन किया। स्कूल के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने जैन विश्वभारती संस्थान का भ्रमण किया एवं यहां की व्यवस्था एवं संसाधनों की प्रशंसा की।

जैन विश्वभारती के अध्यक्ष श्री धरमचन्द लूंकड़ का अभिनंदन समारोह आयोजित

जैन विश्वभारती के अध्यक्ष श्री धरमचन्द लूंकड़ का अभिनंदन समारोह आयोजित

जीवन जीने की कला सिखाता है जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय - श्री राजकुमार रिणवां

लाडनूंँ, 17 सितम्बर, 2016। जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के तत्वावधान में सुधर्मा-सभा प्रांगण में आयोजित जैन विश्वभारती के कुलपति श्री के.एल. पटावरी एवं अध्यक्ष श्री धर्मचन्द लूंकड़ के सम्मान में आयोजित सम्मान-समारोह ‘गौरव’ को संबोधित करते हुए समारोह के मुख्य अतिथि राजस्थान सरकार के खान, वन एवं पर्यावरण मंत्री श्री राजकुमार रिणवां ने कहा कि जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय अपनी शिक्षा के माध्यम से विश्व-स्तर पर व्यापक पहचान रखता है। उन्होंने कहा कि आज शिक्षा-मन्दिरों का माहौल दूषित हो रहा है, ऐसे में जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय भावी भविष्य को जीवन जीने की कला का प्रशिक्षण दे रहा है। उन्होंने कहा कि इस संस्थान में सेवा का महत्त्वपूर्ण कार्य हो रहा है, यह विशिष्ट बात है।

मुख्य अतिथि श्री रिणवां ने अपने जीवन से जुडे़ प्रसंग प्रस्तुत करते हुए संस्थान के द्वारा दी जा रही नैतिक व मानवीय मूल्यों से प्रेरित शिक्षा को उपयोगी बताया। उन्होंने कहा कि यहां लौकिक शिक्षा के साथ-साथ संस्कारपरक शिक्षा भी दी जा रही है। यही कारण है कि यह संस्थान देश ही नहीं बल्कि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर यूनिक संस्थान के रूप में पहचान रखता है। इससे पूर्व मुख्य अतिथि श्री राज्यमंत्री राजकुमार रिणवां, रैवासा पीठाधीश्वर जगद्गुरु डाॅ. स्वामी श्री राघवाचार्यजी महाराज, विशिष्ट अतिथि विधायक श्री मनोहरसिंह आदि अतिथियों द्वारा जैन विश्वभारती के अध्यक्ष श्री धर्मचन्द लूंकड़ एवं सभी पदाधिकारियों का भव्य अभिनंदन किया गया। स्वास्थ्य कारणों से जैन विश्वभारती के कुलपति के.एल. पटावरी समारोह में नहीं पहुंच सके।

अध्यक्षता करते हुए संस्थान के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने सम्मान-समारोह की पृष्ठभूमि को रेखांकित करते हुए विश्वविद्यालय की प्रगति में सहयोगी रहे सभी अध्यक्ष एवं कुलपतियों के योगदान की सराहना की। प्रो. दूगड़ ने कहा कि विश्वविद्यालय का यह संकल्प है कि अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी की दृष्टि को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय बुनियादी उद्देश्यों के साथ प्रगति की ओेर बढ़े। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर किये जा रहे कार्यों का उल्लेख करते हुए नैतिक मूल्यों के प्रति आस्था व्यक्त की। प्रो. दूगड़ ने अध्यक्ष श्री धर्मचन्द लूंकड़ को बधाई देते हुए उनके अध्यक्षीय कार्यकाल को उत्कृष्ट बताया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता मगध विश्वविद्यालय के प्रो. नलिन के. शास्त्री ने कहा कि व्यक्ति के कर्म एवं पुरुषार्थ से ही जीवन में महानता के क्षण आते हैं। प्रो. शास्त्री ने मानवीय मूल्य, साधना, आध्यात्मिक जीवन एवं इन्सानियत की चर्चा करते हुए जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय को महत्त्वपूर्ण संस्थान बताया। प्रमुख वक्ता समणी नियोजिका प्रो. समणी ऋजुप्रज्ञा ने जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय का परिचय देते हुए विश्वविद्यालय द्वारा किये जा रहे कार्यों को मानव हितकारी बताया। विशिष्ट अतिथि विधायक मनोहर सिंह ने विश्वविद्यालय को लाडनूँ का गौरव बताया। कार्यक्रम को सान्निध्य प्रदान करते हुए रैवासा पीठाधीश्वर स्वामी श्री राघवाचार्यजी ने कहा कि यह संस्थान वर्तमान युग की जरूरत है, नैतिक शिक्षा के प्रसार से ही देश एवं संस्कृति का विकास संभव है। इस अवसर पर वरिष्ठ समाजसेवी श्री हीरालाल मालू, जैन विश्वभारती के मंत्री श्री अरविन्द गोठी ने भी समारोह को संबोधित किया।

इस अवसर पर राजस्थानी लोकनृत्य एवं लोकगीतों की प्रस्तुतियां राजस्थान के चुनिन्दा कलाकारों द्वारा दी गई। बीकानेर की मानसीसिंह पंवार का भवाई नृत्य ने दर्शकों को रोमांचित किया। विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने भी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी। कार्यक्रम में श्री नेपाल गंग ने संवाहिनी पत्रिका अतिथियों को भेंट की। कार्यक्रम का शुभारम्भ राजस्थानी थीम सांग केशरिया बालम आओ नी पधारो म्हारे देश... के साथ हुआ। विश्वविद्यालय की छात्राओं ने मंगल-संगान प्रस्तुत किया। अतिथियों का स्वागत प्रो. दामोदर शास्त्री, श्री प्रमोद बैद, प्रो. अनिल धर, प्रो. आर.बी.एस. वर्मा, श्री विनोद कक्कड, श्री आर.के. जैन आदि ने किया। कार्यक्रम में जैन विश्वभारती के ट्रस्टी श्री भागचन्द बरड़िया, श्री प्रकाश बैद, श्री जीवनमल मालू, श्री राजकुमार चैरडिया, श्री हनुमानमल जांगिड़, एसडीएम श्री मुरारीलाल शर्मा, श्री प्रतापसिंह कोयल, श्री रमेशसिंह राठौड़, श्री राजेन्द्र माथुर, श्री सुशील पीपलवा, श्रीमती अंजना शर्मा, श्रीमती सुमित्रा आर्य, श्री नीतेश माथुर आदि नगर के अनेक गणमान्यजन उपस्थित थे। कार्यक्रम का संयोजन प्रो. आनन्दप्रकाश त्रिपाठी ने किया एवं कुलसचिव प्रो. अनिलधर ने आभार व्यक्त किया।

जीर्णोद्धार कार्य का उद्घाटन - इससे पूर्व आचार्य तुलसी महिला छात्रावास के जीर्णोद्धार कार्यक्रम का उद्घाटन जैन विश्वभारती के अध्यक्ष श्री धर्मचन्द लूंकड़ ने किया। इस अवसर पर कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ सहित अनेक विशिष्टजन उपस्थित थे।

पर्युषण पर्व के अवसर पर क्षमापना समारोह का आयोजन

पर्युषण पर्व के अवसर पर क्षमापना समारोह का आयोजन

राग-द्वेष-मुक्ति का मार्ग है पर्युषण पर्व: मुनि विमल कुमार

लाडनूंँ, 9 सितम्बर, 2016। जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के तत्त्वावधान में भिक्षु विहार में मुनि विमल कुमार के सान्निध्य में पर्युषण पर्व का आयोजन समारोह पूर्वक किया गया। मुनिश्री ने उपस्थित विश्वविद्यालय परिवार को संबोधित करते हुए कहा कि पर्युषण पर्व राग-द्वेष से मुक्त होकर शांति का मार्ग है। उन्होंने कहा कि एक साथ काम करने से बहुत बार व्यक्ति को अनुकूल-प्रतिकूल व्यवहार का सामना करना पड़ता है लेकिन परस्पर क्षमा का भाव ही उसके विकास में सहायक बनता है। मुनिश्री ने कहा कि क्षमा करने वाला व्यक्ति ही जीवन में मन, वचन व कर्म से शुद्ध रह सकता है।

जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने कहा कि भारतीय संस्कृति में विविध पर्व एवं त्यौहार मनाये जाते हैं लेकिन जैन धर्म का पर्युषण पर्व विशिष्ट पर्व है। इस पर्व के माध्यम से शुद्ध मन, भाव से क्षमायाचना की जाती है, जो व्यक्ति को शांति की ओर ले जाती है। मुनि धन्यकुमार ने गीतिका के माध्यम से अपने विचार रखे। मुनि मधुर कुमार ने पर्व की विशेषता पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. अनिलधर, विशेषाधिकारी विनोद कुमार कक्कड़, नेपालचन्द गंग सहित सभी सदस्य उपस्थित थे।

इससे पूर्व कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ की अध्यक्षता में महाप्रज्ञ सभागार में क्षमापना पर्व का आयोजन किया गया, जिसमें कुलसचिव प्रो. अनिलधर, डाॅ. विजेन्द्र प्रधान, डाॅ प्रद्युम्नसिंह शेखावत, डाॅ. योगेश जैन, डाॅ. युवराजसिंह, डाॅ. जसवीर सिंह, श्री नेपालचंद गंग, डाॅ. रविन्द्र सिंह, डाॅ. नुपुर जैन, डाॅ. सत्यनारायण भारद्वाज सहित अनेक लोगों ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संयोजन डाॅ. विवेक माहेश्वरी ने किया।

इसी प्रकार आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय एवं शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्त्वावधान में संवत्सरी पर्व का आयोजन कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ की अध्यक्षता में मनाया गया। प्रो. दूगड़ ने कहा कि क्षमा वीरों का आभूषण है। संवत्सरी को जैन पर्वों का पर्वाधिराज बताते हुए आपसी राग-द्वेष भूलकर मैत्री-भाव अपनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में डाॅ. मनीष भटनागर, डाॅ. जुगल दाधीच, सुश्री पूजा जैन, सुश्री नुपुर जैन, एवं छात्राएँ विमला, निकिता दाधीच, रश्मि बोकड़िया आदि ने अपने विचार रखे। संचालन डाॅ. गिरिराज भोजक ने किया।

आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय में मनाया गया शिक्षक दिवस

आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय में मनाया गया शिक्षक दिवस

लाडनूँ, 2 सितम्बर। आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय में आज शिक्षक दिवस का आयोजन कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ की अध्यक्षता में हुआ। इस अवसर पर महाविद्यालय के कार्यवाहक प्राचार्य डाॅ. जुगल किशोर दाधीच ने सभी अतिथियों का हार्दिक स्वागत किया। कुलपति प्रो. दूगड़ ने अपने उद्बोधन में विद्यार्थियों को जीवन में प्रतिपल कुछ नया करने, नया सोचने पर बल दिया तथा अपने शिक्षकों, महापुरुषों एवं अपने माता-पिता के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। प्रो. दूगड़ ने कहा कि अगले वर्ष के शिक्षक दिवस पर विद्यार्थी शिक्षक की भूमिका अदा करें और शिक्षक विद्यार्थी बनकर इस दिन को अनूठे रूप में मनाएं। विश्वविद्यालय के विशेषाधिकारी श्री विनोद कुमार कक्कड़ ने भी छात्राओं को ज्ञान के लिए लालायित रहने की प्रेरणा दी और कहा कि प्रत्येक छात्रा अपने जीवन में बहुत आगे बढ़ सकती है बशर्ते कि वह निरन्तर प्रयासरत रहे। सांस्कृतिक कार्यक्रम में छात्रा किरण सिंधी, आरजू खान, माया शर्मा, पलक सोनी, लिछमा डारा, श्वेता चैहान ने शिक्षाप्रद नाटक प्रस्तुत किया। पूजा शर्मा, आरती सोलंकी, किरण बानो, निकिता दाधीच, रिया जैन आदि ने गीत एवं नृत्य के माध्यम से आकर्षक प्रस्तुतियां दी। इस अवसर पर छात्राओं ने कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़, श्री विनोद कुमार कक्कड़, डाॅ. जुगल किशोर दाधीच, सुश्री पूजा जैन, डाॅ. प्रगति भटनागर, श्री मधुकर दाधीच, श्री कमल कुमार मोदी, श्री सुरेन्द्र कुमार, श्री नरेन्द्र कुमार सैनी, श्री प्रमोद कुमार सैनी, सुश्री अंकिता जांगिड़, डाॅ. विवेक माहेश्वरी, डाॅ. जितेन्द्र वर्मा, डाॅ. विकास शर्मा आदि प्राध्यापकों को उपहार देकर सम्मानित किया। अन्त में उप-प्राचार्या सुश्री पूजा जैन ने कहा कि छात्राओं को सिर्फ किताबी ज्ञान पर निर्भर नहीं रहना चाहिए बल्कि व्यवहारिक ज्ञान भी प्राप्त करना चाहिए। सुश्री जैन ने सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संयोजन छात्रा मुस्कान एवं रश्मि ने किया। समन्वयक हिमानी राठौड़ एवं मिलन भोजक द्वारा सफलता पूर्वक किया गया।

प्रसार भाषण माला में व्याख्यान का आयोजन

प्रसार भाषण माला में व्याख्यान का आयोजन

राष्ट्र निर्माण में शिक्षक की अहम भूमिका: प्रो. वशिष्ठ

लाडनूँ, 30 अगस्त। जैन विश्व भारती विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग के तत्वावधान में आयोजित प्रसार भाषण माला के अन्तर्गत आयोजित व्याख्यान में लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत शिक्षा संस्थान, नई दिल्ली के पूर्व कुलपति प्रो. श्रीधर वशिष्ठ ने कहा कि शिक्षा किसी भी राष्ट्र की वह सम्पत्ति है, जिसके माध्यम से युवा पीढ़ी के समुचित विकास का महतीय कार्य संभव है। हर युग में शिक्षा एवं शिक्षक राष्ट्र निर्माण का महत्त्वपूर्ण दायित्त्व पूर्ण करते रहे हैं। प्रो. वशिष्ठ ने सामाजिक, शैक्षिक, राष्ट्रीय एवं सांस्कृतिक परिदृश्य से जुड़ी समस्याओं के विविध कारणों एवं समाधानों पर प्रकाश डाला। वर्तमान शिक्षा प्रणाली में व्याप्त दोषों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि आजकल शिक्षा को केवल रोजगार प्राप्ति का साधन माना जाता है। शिक्षा सेवा के स्थान पर व्यवसाय बनती जा रही है, जिससे अनेक समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं। शिक्षक राष्ट्र-निर्माण की महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करता है अतः उसका चरित्र आदर्श, प्रेरक एवं मार्गदर्शन प्रदान करने वाला होना चाहिये। समाज में व्याप्त विसंगतियों, जैसे जातिप्रथा, लैंगिक विषमता, दहेज प्रथा, महिला उत्पीड़न आदि का समाधान तभी संभव है जब एक शिक्षक, विद्यार्थी में सुनागरिकता, सद्भावना एवं परस्परता के मूल्यों का सींचन करे। भारतीय संस्कृति में निहित मूल्यों एवं उदात्त परम्पराओं को आत्मसात करने की प्रेरणा देते हुए उन्होंने कहा कि धैर्य, क्षमा, अहिंसा, सर्वधर्म समभाव, परोपकार आदि को अपनाकर वर्तमान समाज को आज भी नई दिशा प्रदान की जा सकती है। विभागाध्यक्ष प्रो. बी.एल. जैन ने आभार ज्ञापित करते हुए कहा कि हम सभी के लिए यह सौभाग्य है कि आप जैसे मूर्धन्य विद्वानों के ज्ञान से सभी मार्गदर्शन प्राप्त करते रहते हैं।

शिक्षा विभाग में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन

शिक्षा विभाग में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन

शिक्षा में भारतीय मूल्यों का समावेश जरूरी: प्रो. दूगड़

लाडनूँ, 29 अगस्त। जैन विश्व भारती विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग के अन्तर्गत ‘‘मुख्य शैक्षिक एवं सामाजिक समस्याएँ: निदान एवं उपचार’’ विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन समारोह के विविध सत्रों में लैंगिक असमानता, अध्यापक शिक्षा में गुणवत्ता, समावेशी शिक्षा, सांस्कृतिक प्रदूषण एवं विभिन्न सामाजिक समस्याओं से सम्बन्धित पत्रों का प्रस्तुतीकरण किया गया।

अध्यक्षता करते हुए संस्थान के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने शिक्षा में मूल्यों के समावेश पर बल देते हुए कहा कि केवल तकनीकी विकास के स्थान पर विद्यार्थियों में अहिंसा, परस्पर सद्भाव, वैश्विक व उदात्त चिन्तन जैसे चारित्रिक मूल्यों का विकास अवश्यम्भावी है। यूनेस्को एवं विविध भारतीय एजेन्सियों के शैक्षिक क्षेत्र में दिये गये सूत्रों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति के उदात्त मूल्य, संपूर्ण विश्व के समक्ष समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करते हैं। वर्तमान परिदृश्य में आवश्यकता है कि सभी अध्यापक शिक्षक, शिक्षा में भारतीय मूल्यों की पुनस्र्थापना हेतु कटिबद्ध हो।

प्रो. श्रीधर वशिष्ठ ने शिक्षा एवं समाज के परस्पर संबंधों एवं संबंधित समस्याओं पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान युग की आवश्यकता है कि समाज, शिक्षा से जुड़े संसाधनों एवं व्यवस्थाओं का प्रबंधन करे तथा शिक्षा, समाज के संतुलित विकास हेतु कार्य करे। भारतीय शिक्षा के सांस्कृतिक पक्षों को अपनाकर हम भारतीय समाज को नवीन दिशा प्रदान कर सकते हैं। लैंगिक विषमता, बालश्रम, नारी अशिक्षा, जातिगत व आर्थिक भेदभाव जैसी समस्याओं का समाधान अध्यापक शिक्षा के माध्यम से करने की दिशा में कार्य करना चाहिये।

दो दिवसीय सेमीनार के दौरान प्रस्तुत पत्रों का सार प्रस्तुत करते हुए डाॅ. सरोज राय ने बताया कि शिक्षा केवल आजीविका का साधन होना, गुरू-शिष्य के मध्य स्तर असमानता, प्रजातांत्रिक एवं चारित्रिक मूल्य पतन, बढ़ती आर्थिक व सामाजिक असमानता, विशिष्ट बालकों का मुख्यधारा से विलग होना वर्तमान शैक्षिक व सामाजिक परिवेश की व्यापक समस्याएं हैं। इन सभी समस्याओं के समाधान हेतु समस्त अध्यापक शिक्षकों, समाज-सेवकों एवं प्रशासकों को सम्मिलित प्रयास करने की आवश्यकता है।

सेमीनार के सत्रों में विविध राज्यों से पधारे प्रतिभागी एवं विषय विशेषज्ञों ने शैक्षिक एवं सामाजिक समस्याओं पर विचार-मंथन किया, जिनमें प्रो. जे.पी.एन. मिश्रा, प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी, प्रो. आशुतोष प्रधान, प्रो. विजयलक्ष्मी शर्मा, डाॅ. शकुन्तला शर्मा, प्रो. श्रीधर वशिष्ठ, प्रो. दामोदर शास्त्री, श्री विनोद कुमार कक्कड़, कानपुर से डाॅ. शिवनारायण, गुड़गांव से डाॅ. युधिष्ठिर, उत्तराखण्ड से एन.बी. सिंह, डाॅ. दोबाकी सिरोला, फरीदाबाद से वरुण शर्मा, विलासपुर से डाॅ. अनिता रानी, डाॅ. शिवदयाल, रविन्द्र मारू, मौसम पारीक, विनोद जैन, उर्मिला शर्मा, डाॅ. सुरभि शर्मा आदि प्रमुख रहे। विभागाध्यक्ष प्रो. बी.एल. जैन ने सभी अतिथियों, विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों का आभार ज्ञापित किया।

संगोष्ठी के समापन समारोह का शुभारम्भ बी.एड. छात्राध्यापिकाओं द्वारा मंगलाचरण प्रस्तुति के साथ हुआ। मंचस्थ अतिथितियों का परिचय संगोष्ठी के समन्वयक डाॅ. बी. प्रधान ने दिया। स्वागत की परम्परा का निर्वहन करते हुए डाॅ. मनीष भटनागर एवं डाॅ. गिरधारीलाल शर्मा ने संस्थान के कुलपति महोदय एवं मुख्य अतिथि का स्वागत किया। संगोष्ठी में कुल 125 प्रतिभागियों ने पत्र वाचन किया। कार्यक्रम का संचालन वत्सला शर्मा ने किया।

प्राच्य विद्या एवं भाषा विभाग द्वारा संस्कृत दिवस का आयोजन

प्राच्य विद्या एवं भाषा विभाग द्वारा संस्कृत दिवस का आयोजन

संस्कृत भाषा के विकास से संस्कृति का उत्थान संभव: प्रो. दूगड़

लाडनूं, 22 अगस्त। आज सम्पूर्ण विष्व में लगभग 1200 भाषाएं प्रचलित हैं लेकिन इन सब भाषाओं की जननी संस्कृत भाषा को ही माना जाता है। यदि हमें भारतीय संस्कृति का विकास करना है तो संस्कृत भाषा का विकास करना ही होगा। उक्त विचार जैन विष्वभारती विष्वविद्यालय के प्राच्य विद्या एवं भाषा विभाग की ओर से आयोजित संस्कृत दिवस समारोह अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने व्यक्त किये। उन्होंने संस्कृत भाषा के उत्थान के लिए इसके विकास पर बल दिय एवं कहा कि संस्कृत भाषा तो सार्वकालिक है, वह कभी मर नहीं सकती। उन्होंने संस्कृत भाषा के विकास हेतु संस्थान द्वारा पूर्ण रूप से सहयोग का आष्वासन देते हुए संस्कृत भाषा को और अधिक उपयोगी बनाने पर बल दिया।

कार्यक्रम के विषिष्ट अतिथि तापड़िया संस्कृत महाविद्यालय, जसवंतगढ़ के प्राचार्य डाॅ. हेमन्त मिश्रा ने संस्कृत के प्रचार-प्रसार हेतु कार्य कर रही अनेक संस्थाओं का उल्लेख करते हुए जैन विष्वभारती संस्थान द्वारा प्राच्य विद्या और भाषा के क्षेत्र में दिये गये योगदान का महत्त्व प्रतिपादित किया एवं अपने विचार व्यक्त किये। समारोह के मुख्य अतिथि अजमेर से पधारे डाॅ. राकेष कुमार शर्मा ने भी संस्कृत को भारतीय संस्कृति का मूल बताते हुए उसके विकास पर बल दिया। प्रो. दामोदर शास्त्री ने संस्कृत दिवस के महत्त्व पर प्रकाष डालते हुए वर्तमान में उसकी प्रासंगिकता के बारे में बताया। विभागाध्यक्ष डाॅ. समणी संगीतप्रज्ञा ने संस्कृत को आम बोल-चाल की भाषा बनाने पर जोर देते हुए उसे ‘देववाणी’ के साथ-साथ जनवाणी के नाम से अभिहित किया। साथ ही इस बात पर भी जोर दिया कि विभाग प्राच्यविद्याओं एवं भाषाओं के विकास एवं प्रचार-प्रसार के लिए कटिबद्ध है। कार्यक्रम का शुभारम्भ मुमुक्षु बहिनों के मंगलाचरण से हुआ। अतिथियों को शाॅल एवं साहित्य भेंट किया गया तथा डाॅ. समणी भास्करप्रज्ञा द्वारा स्वागत भाषण दिया गया। कार्यक्रम में तन्मय जैन द्वारा संस्कृत गीत तथा विभाग की मुमुक्षु बहिनों द्वारा एक संस्कृत लघु नाटिका प्रस्तुत की गई। धन्यवाद ज्ञापन डाॅ. सत्यनारायण भारद्वाज ने किया तथा कार्यक्रम का संचालन मुमुक्षु धरती एवं मुमुक्षु रोनक ने किया।

प्रो. शास्त्री व डाॅ. जैन को राष्ट्रपति सम्मान की घोषणा

प्रो. शास्त्री व डाॅ. जैन को राष्ट्रपति सम्मान की घोषणा

लाडनूं, 19 अगस्त। जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के संस्कृत-प्राकृत भाषा विभाग के प्रो. दामोदर शास्त्री एवं जैन विद्या विभाग के सहायक आचार्य डाॅ. योगेश कुमार जैन को राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने राष्ट्रपति सम्मान (सर्टिफिकेट ऑफ़ ऑनर एवं महर्षि बादरायण सम्मान) देने की घोषणा की। भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय भारत सरकार द्वारा प्रतिवर्ष प्राकृत, संस्कृत व पाली भाषा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दिये जाने वाले इस विशिष्ट सम्मान की घोषणा से विद्वत जगत् में हर्ष की लहर है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने दोनों विद्वानों को बधाई देते हुए शुभकामनाएँ दी। इस सम्मान के लिए कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ की अनुशंषा पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने राष्ट्रपति कार्यालय को दोनों विद्वानों की अनुशंषा भेजी थी। यह सम्मान देश के राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रपति भवन में आयोजित सम्मान समारोह में प्रदान किया जायेगा। यह अत्यधिक गौरव का विषय है कि पूर्व में भी संस्थान के दो प्राध्यापकों, पंडित विश्वनाथ मिश्र एवं डाॅ. समणी संगीत प्रज्ञा, को इस सम्मान (सर्टिफिकेट ऑफ़ ऑनर एवं महर्षि बादरायण सम्मान) से सम्मानित किया जा चुका है। ज्ञात रहे इन चारों प्राध्यापकों में से दो प्राध्यापकों, डाॅ. समणी संगीत प्रज्ञा एवं डाॅ. योगेश कुमार जैन, ने अपनी उच्च शिक्षा भी इसी विश्वविद्यालय से ही पूर्ण की है।

युवा पीढ़ी राष्ट्र निर्माण का प्रमुख आधार- प्रो. दूगड़

युवा पीढ़ी राष्ट्र निर्माण का प्रमुख आधार- प्रो. दूगड़

लाडनूं 16 अगस्त। जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय में स्वतन्त्रता दिवस के अवसर पर समारोह को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने कहा कि स्वतन्त्रता दिवस का यह गौरवमयी पर्व देशवासियों के लिए देशसेवा, राष्ट्रीयता एवं संपोषित विकास हेतु संकल्पबद्ध होने की प्रेरणा प्रदान करता है। उन्होंने आगे कहा कि पं. जवाहरलाल नेहरू ने आजादी के नाम संदेश में गरीबी हटाने, शिक्षा के अधिकतम प्रसार एवं नागरिकों के आरोग्यपूर्ण जीवन के प्रमुख लक्ष्य देश के सामने रखे। भारत देश पिछले कई दशकों से विकास के पथ पर निरन्तर गतिशील है और संपूर्ण विश्व पटल पर एक सशक्त अर्थव्यवस्था के रूप में उभर रहा है। हम सभी को देश की उपलब्धि पर गर्व होना चाहिए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जैन विश्वभारती के न्यासी भागचन्द बरडिया ने सभी को शुभकामनाएँ दीं। मंच पर समणी नियोजिका प्रो समणी ऋजुप्रज्ञा भी मंच पर उपस्थित थे। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गई जिसमें छात्रा सुरेश कंवर ने धरती हिन्दुस्तान री, खुशबू योगी ने कविता, रिया जैन ने ए मेरे वतन के लोगों, मुमुक्षु बहिनों ने संस्कृत भाषा में देशभक्ति गीत प्रस्तुत किये। कार्यक्रम का संयोजन डाॅ गिरिराज भोजक ने किया। अंत में राष्ट्रगीत से कार्यक्रम का समापन हुआ।

प्रथम वर्ष विद्यार्थियों का स्वागत समारोह

प्रथम वर्ष विद्यार्थियों का स्वागत समारोह

लाडनूँ, 04 अगस्त, 2016। जैन विश्व भारती संस्थान के आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय में दिनांक 04 अगस्त 2016 को प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों का स्वागत समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने बच्चों को मनोरंजन के साथ कर्तव्य निर्वहन की शिक्षा दी। प्राचार्य डाॅ. जुगलकिशोर दाधीच ने विद्यार्थियों को अपने शब्दों से प्रोत्साहित किया। उप प्राचार्य पूजा जैन ने आभार ज्ञापित किया। इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों द्वारा अनेक सांस्कृतिक गतिविधियों, यथा-नृत्य, गायन, माईम, नाटक, फनी एक्ट आदि का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संयोजन विद्यार्थी प्रभा डागा एवं दिव्या जांगिड़ ने किया। समारोह के संयोजक श्री कमल मोदी, सुश्री अंकिता जांगिड़ व श्री प्रमोद कुमार सैनी थे। विभाग के अन्य सहायक आचार्यों का योगदान भी सराहनीय रहा।

दो दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय योग कार्यशाला का आयोजन

दो दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय योग कार्यशाला का आयोजन

लाडनूं, 12 जुलाई। जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के योग, प्रेक्षाध्यान एवं जीवन विज्ञान विभाग के तत्वावधान में दो दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय योग कार्यशाला का शुभारम्भ मंगलवार को विश्वविद्यालय के सेमीनार हॉल में समारोह पूर्वक हुआ। समारोह के मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध न्यूरोलोजिस्ट प्रो. प्रताप संचेती ने चिकित्सा सेवा में योग की महत्ता को उजागर करते हुए कहा कि योग से ही शरीर को स्वस्थ रखा जा सकता है। प्रो. संचेती ने कहा कि व्यक्ति का मस्तिष्क स्वस्थ रहने से ही शरीर का संतुलन प्रभावी रह सकता है। उन्होंने इस अवसर पर योग के माध्यम से चिकित्सा विज्ञान में हुए शोध का उल्लेख करते हुए जीवन-निर्माण एवं विकास के लिए योग को जरूरी बताया। ध्यान के द्वारा मस्तिष्क के प्रभाव को भी उन्होंने वैज्ञानिक तरीके से समझाया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. आरबीएस वर्मा ने योग, जीवन विज्ञान एवं प्रेक्षाध्यान विभाग द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर किये जा रहे प्रयासों की सराहना की।

विशिष्ट अतिथि अमेरिका के प्रो. चैपल ने कहा कि योग आज अंतररास्ट्रीय जरूरत बन गया है। उन्होंने जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय द्वारा योग क्षेत्र में किये जा रहे शोध को उपयोगी बताया। इस अवसर पर प्रो. आनन्दप्रकाश त्रिपाठी ने भी अपने विचार रखे। स्वागत भाषण विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. युवराजसिंह ने किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ प्रद्युम्रसिंह शेखावत ने एवं आभार ज्ञापन डॉ विवेक माहेश्वरी ने किया। इस दो दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय कार्यशाला में विश्व के अनेक देशों के प्रतिनिधि सहभागी रहे।

तीन दिवसीय व्यक्तित्व विकास शिविर का आयोजन

तीन दिवसीय व्यक्तित्व विकास शिविर का आयोजन

लाडनूँ, 23 जुलाई। जैन विश्वभारती संस्थान के आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय में 21-23 जुलाई, 2016 के दौरान त्री-दिवसीय व्यक्तित्व विकास शिविर का आयोजन किया गया। 21 जुलाई प्रातः 8 बजे प्रेक्षाध्यान सभागार में समणी नियोजिका ऋजुप्रज्ञाजी की अध्यक्षता में उद्घाटन सत्र का आयोजन किया गया। प्राचार्य डॉ. जुगल किशोर दाधीच ने स्वागत भाषण तथा उप-प्राचार्य सुश्री पूजा जैन ने त्री-दिवसीय शिविर की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। सुश्री पारूल दाधीच ने छात्राओं को प्रेक्षाध्यान आदि का अभ्यास करवाया। उसी दिन छात्राओं को मार्शल आर्ट में ब्लैक बेल्ट धारी विकास कुमार ने आत्मरक्षा के गुर सिखाए।

22 जुलाई, 2016 को जीवन-विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. प्रद्युम्नसिंह शेखावत ने प्रेक्षाध्यान तथा उप-प्राचार्य सुश्री पूजा जैन] सहायक आचार्य श्री प्रमोद कुमार ने व्यक्तित्व विकास पर प्रेरणादायक व्याख्यान प्रस्तुत किया। 23 जुलाई, 2016 को प्रेक्षाध्यान एवं लाफिंग थैरेपी का अभ्यास डॉ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत ने करवाया। छात्राओं के द्वारा क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया तथा संस्थान की प्रेरणादायक फिल्म भी दिखाई गई।

समापन समारोह संस्थान के ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया] जिसमें दिव्या जांगिड़, ज्योति राजपुरोहित, सुष्मिता आदि ने शिविर के अपने अनुभव बताए। कार्यक्रम की अध्यक्षता दूरस्थ विभाग के निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने की। उन्होंने छात्राओं को व्यक्तित्व विकास के बारे में बहुत से सारगर्भित सुझाव प्रदान करते हुए इसकी महत्ता बताई। उप-प्राचार्य पूजा जैन ने भी व्याख्यान में बताया कि किस प्रकार से शिक्षा के साथ संस्कार होने पर व्यक्ति ऊँचाई को छू सकता है। कार्यक्रम के अंत में सहायक आचार्य डॉ. प्रगति भटनागर ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

उपखण्ड स्तरीय विशाल योग कार्यक्रम आयोजित

उपखण्ड स्तरीय विशाल योग कार्यक्रम आयोजित

लाडनूं, 21 जून। अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर उपखण्ड स्तरीय विशाल योग कार्यक्रम जैन विश्वभारती के सुधर्मा सभा में उपखण्ड प्रशासन, जैन विश्वभारती एवं जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के तत्वावधान में लाडनूं नगर की विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से समारोह पूर्वक आयोजित हुआ। समारोह में बोलते हुए मुनि विमलकुमार ने योग की मीमांसा करते हुए कहा कि योग भारतीय संस्कृति रही है। स्वस्थ जीवन शैली के लिए योग बहुत जरूरी है। योग के नियमित प्रशिक्षण को जरूरी बताते हुए मुनि श्री ने कहा कि इससे क्रोध निवारण सहित अनेक लाभ संभव है। कार्यक्रम में उपखण्ड अधिकारी मुरारीलाल शर्मा ने कहा कि योग से जीवन शैली में बदलाव होने के साथ साथ शारीरिक, मानसिक व भावनात्मक विकास में भी वृद्वि की जा सकती है। जैन विश्वभारती के न्यासी रमेशचन्द बोहरा ने कहा कि योग के अन्तर्राष्ट्रीय स्वरूप से देश की पहचान को व्यापक रूप मिला है। उन्होनें कहा कि योग से ही जीवन में व्याप्त समस्याओं का समाधान खोजा जा सकता है। जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो बच्छराज दूगड ने कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने से विश्वस्तर पर योग की महत्ता उजागर हुई है। उन्होनें कहा कि योग से जीवन को संतुलित बनाया जा सकता है। प्रो दूगड ने संस्कृति के अनुरूप योग की महत्ता को उजागर करते हुए प्रत्येक नागरिक से योग से जुडने का आह्वान किया।

समारोह में उपस्थित नगरपालिकाध्यक्ष श्रीमती संगीता पारीक व मुनि जम्बुकुमार ने भी इस अवसर पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में सामूहिक योग प्रदर्शन प्रोटोकॉल के अन्तर्गत 45 मिनट का रखा गया। विश्वविद्यालय के योग विभाग के प्रभारी डॉ प्रद्युम्नसिंह शेखावत ने योग का प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विद्यार्थी पारूल दाधीच, निकिता उत्तम, सुनिता, मंजू, पूजा सैनी आदि ने योग क्रियाओं का शानदार प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम में लाडनूं नगर की अनेक संस्थाओं के सह आयोजन में सामूहिक योग प्रदर्शन में सैकडों लोगों एवं स्कूली विद्यार्थियो ने भाग लेकर प्रदर्शन किया। सह-आयोजक संस्थाओं पंतजलि योग समिति, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, भारत विकास परिषद, आर्ट ऑफ लिविंग, राजस्थान ब्राह्मण महासभा, विश्व हिन्दू परिषद, सेवा भारती, विद्या भारती, आदर्श विद्या मन्दिर, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, बजरंग दल, दशहरा मेला समिति, दुर्गादल, ओसवाल सभा, गौपुत्र सेना, लाडनूं चैम्बर ऑफ कॉमर्श, दरगाह उमराव शहीद गाजी कमेटी, अंजुमन फैज ए आम, जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, तेरापंथ महिला मण्डल, तेरापंथ युवक परिषद, तेरापंथ कन्या मण्डल, युवक परिषद, अणुव्रत समिति, सेवाभावी आयुर्वेदिक रसायन शाला, नेशनल कैडेट कौर, एवं सभी अधिकारी एवं कर्मचारी आदि का सराहनीय सहयोग रहा। इस अवसर पर हनुमानमल जागीड, अब्दुल हमीद मोयल, रणजीत खां सहित उपखण्ड के सभी अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे। संयोजन डा विवेक माहेश्वरी ने किया। आभार ज्ञापन जैन विश्वभारती के निदेशक राजेन्द्र खटेड ने व्यक्त किया।

Vice-Chancellor Prof. B.R. Dugar awarded with the '100 Most Influential Vice-Chancellors'

Vice-Chancellor Prof. B.R. Dugar awarded with the '100 Most Influential Vice-Chancellors'

Mumbai, 24 June, 2016. It is proud moment for the JVB University that Hon'ble Vice-Chancellor Prof. B.R. Dugar is awarded with the '100 Most Influential Vice-Chancellors' by World Education Congress, held on 23rd June, 2016 at Taj Lands End, Mumbai.

The selection process was purely based on the criteria of strategic perspective, support infrastructure, future orientation, research citations, track record, integrity and ethics, ability for sustainable education and evaluation approach.

The jury consisted of prominent personalities around the globe like Harish Mehta, Emeritus Chairman, World MHRD Congress & Founder Member, NASSCOM, Professor Tom Hilton, Global Chairman, Asia Pacific, HRM Congress, Prof. Indira Parikh, President, Antardisha & India's Iconic HR leader, Dr. R.L. Bhatia, Founder, World CSR Day and World CSR Congress were among the jury. The theme for the Congress was "Quality Education for Sustainable & Inclusive Growth". The prominent speakers for the occasion were H.E. Bouapao, Deputy Minister, Ministry of Education & Sports Lao PDR, Prof. Lazarus Hangula, Vice Chancellor, University Namibia, Chris Howarth, Founder, United World Schools, Lt. Gen. Zameer-ud-din-Shah, Vice Chancellor, Aligarh Muslim University, Prof. R.C. Sobti, Vice Chancellor, BabaSaheb Ambedkar University.

नवनियुक्त कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड का अभिनंदन समारोह

नवनियुक्त कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड का अभिनंदन समारोह

प्रो. दूगड़ विद्या के सच्चे आराधक - सांसद सी.आर. चौधरी

लाडनूं 29 मई। जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के नवनियुक्त कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ का रविवार को स्थानीय भैया बगीची में लाडनूँ नगर की विभिन्न 13 संस्थाओं द्वारा अभिनंदन किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि नागौर सांसद सी.आर. चौधरी ने संबोधित करते हुये कहा कि जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट कार्य कर रहा है। इस विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में प्रो. दूगड का चयन महत्वपूर्ण है। प्रो दूगड को विद्या का सच्चा आराधक बताते हुये उनके कार्यकाल में विशिष्ट कार्य होने की आशा व्यक्त की। सांसद ने इस विश्वविद्यालय को नैतिक मूल्यों का उत्कृष्ट संस्थान बताते हुए शिक्षा क्षेत्र में विशिष्ट कार्य करने का आह्वान किया। समारोह की अध्यक्षता करते हुए विधायक मनोहरसिंह ने जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के प्रयासों की सराहना की।

इस अवसर पर प्रो. बच्छराज दूगड ने स्वागत के प्रत्युत्तर में सभा को संबोधित करते हुये कहा कि यह विश्वविद्यालय सबका है। लाडनूं नगर एवं आस-पास के क्षेत्र में इस विश्वविद्यालय द्वारा विशिष्ट कार्य किया जायेगा। प्रो. दूगड़ ने रचनात्मक कार्यों के प्रति सजग रहने का आह्वान करते हुए नगर के सभी महानुभावों से इस विश्वविद्यालय के साथ जुड़कर कार्य को गति देने की कामना की।

इससे पूर्व प्रो. दूगड़ का सभी संस्थाओं द्वारा अभिनन्दन किया गया। मुख्य अतिथि सांसद सी.आर. चौधरी व विधायक मनोहरसिंह ने साफा शॉल व मोमेण्टो भेंट कर अभिनन्दन किया। अभिनन्दन-पत्र का वाचन चैम्बर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष हनुमानमल जांगिड़ ने किया। कार्यक्रम में पाबोलाब धाम के महन्त कमलेश्वर भारती व शहरकाजी मोहम्मद अयुब अशरफी ने सान्निध्य प्रदान किया। मंच पर अतिथि के रूप में डॉ. बहादुरसिंह टण्डन, एसडीएम मुरारीलाल शर्मा, भाजपा ग्रामीण मण्डल अध्यक्ष ओमप्रकाश बागड़ा सहित अनेक महानुभाव उपस्थित थे। जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा के अध्यक्ष मन्नालाल बैद ने स्वागत भाषण दिया। इस अवसर पर राजेश विद्रोही, जगदीश सिंह राठौड़, जगदीश यायावर, श्रीमति अंजना शर्मा सहित अनेक लोगों ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम में जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के सहायक आचार्य डॉ. रविन्द्रसिह राठौड़ की पुस्तक ‘साम्प्रदायिक एवं जातिय तनाव’ का विमोचन अतिथियों द्वारा किया गया। इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारम्भ महिला मण्डल की बहिनों द्वारा प्रस्तुत मंगल-संगान से हुआ। कार्यक्रम का संयोजन आलोक खटेड़ व आभार दीपचन्द सुराणा ने व्यक्त किया।

‘जैन दर्शन एवं विज्ञान’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन सम्पन्न

‘जैन दर्शन एवं विज्ञान’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन सम्पन्न

लाडनूं 09 मई। जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के भगवान महावीर इण्टरनेशनल रिसर्च सेंटर, होलिस्टिक हेल्थ आॅन लाइन थेरेपी कैंपस मुबंई, तुलसी महाप्रज्ञ प्रज्ञाभारती ट्रस्ट एवं अहिंसा सेन्टर, मुंबई एवं भारत जैन महामण्डल मुम्बई के संयुक्त तत्वावधान में मुम्बई में आयोजित भगवती सूत्र के सन्दर्भ में ‘जैन दर्शन एवं विज्ञान’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन का समापन सोमवार को समारोह पूर्वक हुआ। समारोह के मुख्य अतिथि महाराष्ट्र के राज्यपाल सी. विद्यासागर राव ने अध्यात्म विज्ञान के समन्वय की बात कही। उन्होंने कहा कि भारत अध्यात्म के बल पर ही दुनिया का नेतृत्व कर सकता है। समारोह की अध्यक्षता करते हुए मुम्बई हाइकोर्ट के न्यायाधीश के.के. तातेड ने कहा कि जैन दर्शन मानवता को ‘जिओ ओर जीने दो’ का संदेश देता है। यही मूल सिद्धान्त है, जिस पर अमल कर हम शांति और सौहार्द्ध के साथ समाज एवं देश के विकास में योगदान दे सकते हैं।

जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मुनि महेन्द्र कुमार ने कहा कि भगवान महावीर का दर्शन आज के विज्ञान से भी आगे है। हमारे पास जो तत्त्व ज्ञान है, वह बेजोड़ है, जिसका मुकाबला दुनिया का कोई भी देश नहीं कर सकता। हमें इसका सही दिशा में इस्तेमाल करना चाहिए, जिसके लिए विज्ञान और जैन अध्यात्म के बीच सहयोग बढ़ना चाहिये। मुनिश्री ने तत्त्व-ज्ञान पर शोध की आवश्यकता बताई। मुनि अभिजीत कुमार ने बताया कि परमाणु के सूक्ष्म कणों में परिवर्तन की बात विज्ञान मानता है। जैन दर्शन में भी यही बात कही गई है, जिसे हम ‘परिवर्तन प्रकृति का नियम’ के रूप में मानते हैं।

सुप्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक डाॅ. प्रताप संचेती ने अध्यात्म अपने आपमें विज्ञान है। चिकित्सा विज्ञान में भी साबित हो गया है कि जैन अध्यात्म के उपवास स शरीर को लाभ होता है। उपवास के जरिये न सिर्फ रक्तचाप नियंत्रित किया जा सकता है बल्कि कई बीमारियों से भी बचा जा सकता है। प्रेक्षाध्यान के प्रशिक्षक अरूण भाई झवेरी ने कहा कि हम अपनी शक्ति का सही दिशा में किस तरह उपयोग करे इसकी राह भगवान महावीर ने दिखाई है।

वैज्ञानिक संत आचार्य विजयानंदीघोषसूरि ने फिजिक्स के क्वाण्टम सिद्धान्त और जैन अध्यात्म के बीच संबंधों पर विस्तृत प्रकाश डाला। आचार्यश्री ने बताया कि जैन धर्म में भी मैटेरियल इफेक्ट के बारे में बहुत-सी बातें कही गई हैं, जिसका लाभ आधुनिक विज्ञान को उठाना चाहिए। वरिष्ठ वैज्ञानिक डाॅ. नरेन्द्र भण्डारी ने कहा कि जैनिज्म सही अर्थों में एक वैज्ञानिक धर्म है। दुनिया के प्रख्यात वैज्ञानिकों में शुमार भारत में जे.सी. बोस ने 1926 में सिद्ध किया कि पेड़-पौधे भी जीव हैं लेकिन इससे काफी पहले यही बात जैन अध्यात्म में कही गई है। भगवती सूत्र की चर्चा करते हुए डाॅ. सुधीर जैन ने कहा कि इस ग्रंथ से विज्ञान लाभ उठा सकता है। इस अवसर पर कार्यक्रम में उपस्थित महाराष्ट्र के राज्यपाल सी. विद्यासागर राव ने प्रोफेसर मुनि महेन्द्र कुमार द्वारा संपादित ’भगवती सूत्र’ के पांचवे खण्ड का विमोचन किया। इस अवसर पर जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. एम.आर. गेलडा, भगवान महावीर सेण्टर की निदेशक प्रोफेसर समणी चैतन्यप्रज्ञा सहित अनेक लोग उपस्थित थे।

अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी का 55वां जन्म दिवस आयोजित

अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी का 55वां जन्म दिवस आयोजित

मूल्यों के विकास के प्रति समर्पित हैं आचार्यश्री महाश्रमण - प्रो. दूगड़

लाडनूं, 14 मई। जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के कूलपति कॉन्फ्रेंस हॉल में शनिवार को विश्वविद्यालय के अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी का 55वां जन्म दिवस समारोह पूर्वक मनाया गया। समारोह की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने कहा कि आचार्यश्री महाश्रमणजी मूल्यों के विकास के प्रति समर्पित आचार्य हैं। विश्वविद्यालय आचार्यश्री के आध्यात्मिक नेतृत्व में मूल्यों से प्रेरित शिक्षा प्रदान करने का विशिष्ट कार्य कर रहा है। आचार्यश्री महाश्रमणजी के जीवन दर्शन को प्रस्तुत करते हुए प्रो. दूगड़ ने कहा कि आचार्यश्री महाश्रमणजी का जीवन व दर्शन दोनों शिक्षा देने वाले हैं। आचार्यश्री को मानवता का मसीहा संत बताते हुए उन्होंने आचार्यश्री के नेतृत्व में संचालित विविध गतिविधियों की चर्चा की। प्रो. दूगड़ ने कहा कि आचार्यश्री महाश्रमण अणुव्रत आंदोलन के माध्यम से गांव-गांव पहुंचकर लोगों को नशामुक्त जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं।

प्रो. दूगड़ ने आचार्यश्री महाश्रमण के व्यक्तित्व को रेखांकित करते हुए उनको महान् आचार्य बताया। प्रो. दूगड़ ने आचार्यश्री महाश्रमण की अहिंसा-यात्रा को प्रस्तुत करते हुए उनके द्वारा किये जा रहे मानव कल्याण के कार्यों को बताया। कार्यक्रम में प्रो. आनन्दप्रकाश त्रिपाठी ने आचार्यश्री महाश्रमण के बचपन से लेकर अब तक की आध्यात्मिक यात्रा को प्रस्तुत किया। इस अवसर पर नेपालचन्द गंग, राकेश कुमार जैन, विकास शर्मा, दीपक माथुर आदि ने अपने विचार रखे। इस अवसर पर दीपाराम खोजा, डॉ. जसवीरसिंह, मोहन सियोल सहित विश्वविद्यालय के सभी अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. वीरेन्द्र भाटी मंगल ने किया।

जैन विद्या का उत्कृष्ट संस्थान है जैविभा विश्वविद्यालय - मुनि प्रमाण सागर

जैन विद्या का उत्कृष्ट संस्थान है जैविभा विश्वविद्यालय - मुनि प्रमाण सागर

लाडनूं 6 मई। दिगम्बर जैन आचार्य विद्यासागर के शिष्य मुनि प्रमाण सागर एवं मुनि विराट सागर ने शुक्रवार को जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय का अवलोकन किया। विश्वविद्यालय परिसर में शिक्षकों एवं कर्मचारियों को संबोधित करते हुए मुनि प्रमाण सागर ने कहा कि इस विश्वविद्यालय में जैन विद्या एवं प्राच्य विद्या का उत्कृष्ट कार्य हो रहा है। मुनि ने संस्थान द्वारा किये जा रहे कार्यो को मानव हितकारी बताया। उन्होनें संस्थान को जैन जगत का विशिष्ट संस्थान बताते हुए इसके ओर अधिक विकास की कामना की। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो बच्छराज दूगड ने मुनि श्री को विश्वविद्यालय द्वारा किये जा रहे विविध कार्यो की जानकारी दी। प्रो दूगड ने विश्वविद्यालय के अनुशास्ता आचार्य महाश्रमण के आध्यात्मिक नेतृत्व में संचालित इस विश्वविद्यालय द्वारा शिक्षा जगत में किये जा रहे कार्यो की जानकारी दी। कुलपति प्रो दूगड ने मुनिद्वय को संस्थान द्वारा प्रकाशित साहित्य भी भेंट किया। इस अवसर पर मुनिद्वय ने विश्वविद्यालय के कुलपति कार्यालय, कॉन्फ्रेंस हॉल एवं पुस्तकालय आदि स्थलों का अवलोकन किया।

मुनिद्वय के जैन विश्वभारती प्रांगण में पधारने पर ट्रस्टी भागचन्द बरडिया ने स्वागत किया एवं सचिवालय में जैन विश्वभारती द्वारा संचालित विविध गतिविधियों की जानकारी दी। इस अवसर पर मुनि प्रमाण सागर ने आचार्य तुलसी, आचार्य महाप्रज्ञ और आचार्य महाश्रमण द्वारा रचित साहित्य प्रदर्शनि का अवलोकन किया। बरडिया ने आचार्यो द्वारा रचित साहित्य मुनि को भेंट किया। मुनि श्री ने भिक्षु विहार में विराजित तेरापंथ धर्मसंध के मुनि विमल कुमार एवं अन्य संतो के साथ भेंट वार्ता की। मुनि श्री विमलकुमार ने आचार्य महाश्रमण के निर्देशन में संचालित विविध गतिविधियों व सेवाकेन्द्र के बारे विस्तार से जानकारी दी।

इस अवसर पर प्रो आनन्दप्रकाश त्रिपाठी, प्रो बीएल जैन, राजेन्द्र खटेड, नेपालचन्द गंग, दीपाराम खोजा, महेन्द्र पाटनी, डॉ योगेश जैन, अनिल बैद, राकेश कुमार जैन, भागचन्द काशलीवाल, विनोद पाटनी, सुश्री वीणा जैन, डॉ शांता जैन, डॉ जसवीर सिंह, डॉ वीरेन्द्र भाटी सहित अनेक लोग उपस्थित थे।